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150 डॉलर जाएगा कच्चा तेल? भारत से पाक तक खलबली!..

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जो मिडिल ईस्ट में जंग चल रहा है उससे जो है भारत सहित दुनिया के कई देश बड़े तेल संकट का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान, फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी, पोलैंड, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया गंभीर ईंधन संकट का सामना करते हुए दिख रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला है, वह अब बाधित हो गई है। तो अब यह सवाल है कि क्या दुनिया पर अब एक बड़ा खतरा मंडराता हुआ नजर आ रहा है? इसकी ज्यादा जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े हैं आकाश जिंदल साहब। उनसे जानेंगे। सर अब यह कहा जा रहा है कि दुनिया में एक बड़ा तेल संकट यहां पर देखने को मिल सकता है।

क्योंकि लगातार जो स्थिति बन रही है वो इसे ओर इशारा कर रही है। इसमें कोई शक नहीं है। मैं आपके क्वेश्चन को फुल्ली एंडोर्स करता हूं। बिल्कुल सही कह रही है। ग्लोबल इकॉनमी के लिए बहुत बड़ा एनर्जी क्राइसिस हमारे सामने दिख रहा है और ये ग्लोबल इकॉनमी की इनफ्लेशन बढ़ा देगा, ग्रोथ स्लो डाउन कर देगा और रिसेशन में ले जाएगा और हर व्यक्ति को इंपैक्ट करेगा। ओवरऑल दुनिया की पर कैपिटा इनकम कम कर देगा। ना सिर्फ ये एक ऑयल या एनर्जी संकट है जो आप पूछ रही है। मेरे हिसाब से हर चीज के एक्सपोर्ट कम हो जाएंगी क्योंकि सप्लाई लाइंस चौक हो जाएंगी। हर चीज के एक्सपोर्ट आप देखिए एयरलाइंस का कितना नुकसान हो रहा है।

फ्लाइट्स नहीं उड़ रही है। बहुत सी चीजों के एक्सपोर्ट रुक गए हैं। बहुत सी ऐसी कंट्रीज दो कंट्री जो व्यापार करती थी जिनका मिडिल ईस्ट से कनेक्शन भी नहीं था वो भी जो है वो वेस्ट एशिया से कनेक्शन भी नहीं था। वहां भी जो है सप्लाई चेन चौक हो गई है। कई जगह पेमेंट मैकेनिज्म भी चौक होने की संभावना है। अब आप सिंपल सी बात लगा लीजिए। आपने खुद बात की कि कमर्शियल एलपीजी हिंदुस्तान में कम हो गई है। अब अगर रेस्टोरेंट्स को सप्लाई कम होगी तो जाहिर सी बात है लोगों को जो है जो आउटडोर ईटिंग है वो कम होगी तो रेस्टोरेंट्स का बिज़नेस कम होगा तो कितने लोगों के रोजगार पे डायरेक्ट इंपैक्ट पड़ जाएगा। कितना जीडीपी में इंपैक्ट पड़ जाएगा। ये तो सीधा-सीधा इंपैक्ट है।

तो बहुत-ब लोगों का इंपैक्ट होगा। एनर्जी क्राइसिस, ऑयल क्राइसिस तो है ही है। इसका कैस्केडिंग इंपैक्ट बहुत से और इकोनमिक क्राइसिस ला देगा। इसमें हिंदुस्तान के लिए चाहे करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ना हो, चाहे फिसिकल डेफिसिट बढ़ना हो, चाहे जीडीपी ग्रोथ कम होना हो या टैक्स कलेक्शन कम होना हो, हर तरह की दिक्कतें हिंदुस्तान के लिए भी आ सकती हैं। ये कड़वी सच्चाई है। देयर इज़ नो रनिंग अवे फ्रॉम दिस। बिल्कुल। तो यहां पर ऐसे कई भी देश हैं जैसे पाकिस्तान की बात करें,

बांग्लादेश की बात करें तो बांग्लादेश में तो यहां पर भारत ने जो है बांग्लादेश का यहां पर मदद करते हुए भारत ने अब जो डीजल की पहली खेप है वो भेजता हुआ नजर आया है। इसी बीच अगर हम श्रीलंका की बात करें तो श्रीलंका में जो कीमतें हैं उसकी 8% की यहां पर बढ़ोतरी देखने को मिली है। वहीं जर्मनी में भी ऐसा ही हाल है। और यूएसए में तो गैस पंप पर जो कीमतें हैं वो बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। सर यहां पर जो स्टेट ऑफ हॉर्मोस है आपको क्या लगता है कि अब जो ये युद्ध है आखिर कितना लंबा खींच सकता है और अगर ये ज्यादा बढ़ता है तो फिर क्या पेट्रोल की कीमतें होंगी और क्या देखने को मिल सकता है?


जी हां अगर ज्यादा बढ़ता है तो मेरी ऑर्गेनाइजेशन आकाशin का मानना है क्रूड ऑयल $50 पर बैरल जी हां मैं सोच समझ के बता रहा हूं $50 पर बैरल जा सकता हां जी 150 150 $50 पर बैरल तक पहुंचने की संभावना है और दूसरा खतरा हमारे लिए ये है बात सिर्फ इतनी है इतनी नहीं है हम जो क्रूड का मेजर हिस्सा है डॉलर्स के जो है थ्रू पे करते हैं तो डॉलर भी 9697 तक पहुंच सकता है तो ऐसे में पेट्रोल और डीजल हिंदुस्तान में मार्केट लिंक है तो वो बढ़ेंगे तो बढ़ेंगे तो दिक्कतें आएंगी और हिंदुस्तान की इकॉनमी के लिए हिंदुस्तान के आम आदमी के लिए हिंदुस्तान की इंडस्ट्री के लिए हिंदुस्तान की मार्केट्स के लिए सबके लिए दिक्कतें आएंगी जहां तक आपने दूसरे देशों की बात की यूएस यूएस तो बहुत बुरी तरह इंपैक्ट हो ही रहा है

क्योंकि यूएस ने वॉर पे उतना खर्चा कर दिया और यूएस दर्शकों को बता दूं आज लोगों को लगता होगा बहुत पावरफुल इकॉनमी है लेकिन ये इकॉनमी दर्शकों आज कामयाब इकॉनमी नहीं है ये डेफिसिट इकॉनमी है डेफिसिट इकॉनमी का मतलब समझा दूं जहां खर्चे ज्यादा है, कमाई कम है। और यूएस ने आज से डेढ़ दो साल पहले ही टेट सीलिंग का लॉ पास किया था। यानी जितना कर्जा यूएस ले सकता था उसको अमेंड करके उनकी कांग्रेस द्वारा और ज्यादा कर्जा लेने की परमिशन ली गई थी ताकि सरकार का कामकाज चल सके। तो यूएस भी अच्छे हालात में नहीं है। तो यूएस की इकॉनमी की हालत तो और कहीं ज्यादा खराब हो जाएगी। बात की आपने बांग्लादेश और श्रीलंका।

बांग्लादेश और श्रीलंका दोनों ऐसे मुल्क हैं जो क्राइसिस से जूझते रहे हैं। श्रीलंका में आज से दो साल पहले क्या हुआ था? तमाम चैनल्स पे हमने देखा था। मैं खुद शोध में इन्वॉल्व था। किस तरीके से राष्ट्रपति साहब के भवन में लोग घुस गए थे। अफरातफरी हुई थी। बांग्लादेश में जो कुछ हुआ है डेढ़ साल में हमने देखा है। तो वहां भी दिक्कतें हैं। अब आ जाती है बात पाकिस्तान की। ठीक है? आपने इतने शोज़ के बाद एक हंसी मुस्कुराहट का मौका तो दिया। पाकिस्तान को तो बहाना चाहिए। अपनी बर्बादी का कोई रीज़न बताने का। एक एक किलो आटे के लिए तो दो साल से सड़कों पे खूनी जंग हो रही है।

वहां पर भी किल्लत [हंसी] मिल रही है एलपीजी को लेकर हो या उनको उनको तो बहाना मिल जाएगा कि जनाब एक एक्सटर्नल रीज़ है। तो उनका [हंसी] गलों के मुल्क के पास है क्या जो है मैं एक वो मुहावरा है वो शब्द इस्तेमाल नहीं करना चाहता आपका एक बहुत ही जिम्मेवार और रिसोंसिबल चैनल है तो पाकिस्तान के पास है ही क्या तो उनको तो एक बहाना मिल गया जनाब इस वजह से क्राइसिस है अरे आपके पास है ही क्या पहले ही जो आप कंगलों का मुल्क है एक एक किलो आटे के लिए तो सड़कों पे खूनी संघर्ष हो रहा है

तो उनके पास था ही क्या जो उनका छीन जाएगा तो पाकिस्तान को मुझे लगता है मैं यहां कहना चाहता हूं पाकिस्तान को डरना नहीं चाहिए पाकिस्तान का कोई नुकसान हो ही नहीं सकता नुकसान उसका होता है जिसके पास कुछ होता है तो पाकिस्तान को चिंता चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। पाकिस्तान को निश्चिंत हो जाना चाहिए। बिल्कुल। तो यहां पर अब भारत समेत कई देश हैं जिन पर ये ईरान युद्ध का जो संकट है वो देखने को मिल रहा है और यहां पर कई चीजों पर तेल की बात करें या एलपीजी की बात करें तो इस पर जो अब

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