इजराइल और ईरान के युद्ध के बीच इस समय सोशल मीडिया पर इजराइल के पत्रकार का एक लेख एक आर्टिकल काफी ज्यादा वायरल है जिसमें उन्होंने इजराइल की सरकार पर कई सवाल उठाए हैं और सिर्फ इजराइल की सरकार पर ही सवाल नहीं उठाए हैं। उन्होंने अमेरिका पर भी सवाल उठाए हैं। इजराइली पत्रकार अलोन मिजहारी ने लिखा है कि हम इतिहास को अपनी आंखों के सामने घटते हुए देख रहे हैं।
सबकी उम्मीदों के खिलाफ ईरान इस वक्त अमेरिकी ठिकानों को इतनी गहराई और इतने निर्णायक तरीके से तबाह कर रहा है कि दुनिया अभी उसे समझने के लिए तैयार नहीं है। सिर्फ 4 दिनों में ईरान ने इस पूरे इलाके में अपनी फौजी पकड़ का दायरा बढ़ा लिया है। ईरान ने दुनिया के सबसे कीमती और सबसे महंगे फौजी ठिकानों, साधनों और उपकरणों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया है। बहरीन, कुवैत, कतर और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकाने दुनिया के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में गिने जाते हैं। इन्हें बनाने में कई दशकों के खरबों डॉलर खर्च हुए हैं।
यानी 30 साल से ज्यादा के सैन्य खर्च का बड़ा हिस्सा अब धुएं में उड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। हम देख रहे हैं कि करोड़ों डॉलर की कीमत वाले रडार एक ही पल में नष्ट हो रहे हैं। पूरी की पूरी सैन्य अड्डा खाली कर लिया गया है या फिर कुछ जला दिए गए हैं और कई पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। मेरे ज्ञान के मुताबिक अमेरिका को अपने पूरे इतिहास में ऐसी तबाही कभी नहीं झेलनी पड़ी। शायद पर्ल हावर के हमले को छोड़ दें मगर वह भी एक ही हमला था।
किसी भी सामान्य युद्ध में किसी दुश्मन ने अमेरिकी सेना के साथ वह नहीं किया जो ईरान इस समय अमेरिका के साथ कर रहा है। यह बात यकीन से परे लगती है। हालात इतने खराब हैं कि इस युद्ध से जुड़ी नई जानकारी लगभग पूरी तरह से सेंसरशिप के पीछे छिपा दी गई है। आपने गौर किया होगा कि हर दिन हमें कम से कम जानकारी दिखाई जा रही है। 35 साल पहले इराक युद्ध के दौरान हमें लगातार वीडियो फुटेज दिखाए जाते थे। उस समय स्मार्ट बम और कैमरे नई चीज थे। फिर भी हर रात युद्ध के दृश्य टीवी पर दिखते थे और दिखाए जाते थे।
आज हालात यह है कि हमें लगभग कोई वीडियो दिखाई नहीं देती है और ना ही दिखाई दी जाती है। जरा समझिए। दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत जिसकी वायु शक्ति भी दुनिया में सबसे बड़ी मानी जाती है। 4 दिनों से हमले की स्थिति में है। दावा किया जा रहा है कि वह ईरानी रक्षापंक्तियों को तोड़ रही है। लेकिन हमें कहीं भी ईरान के आसमान पर अमेरिकी वर्चस्व का कोई सबूत नहीं दिखता। तेहरान या ईरान के किसी भी हिस्से के ऊपर उड़ते अमेरिकी विमानों की फुटेज कहां है?
अमेरिकी सैनिक ईरान की जमीन पर कदम रखने का ख्वाब भी नहीं देख सकते। इस युद्ध की बेबसी का अंदाजा इस बात से लगाइए कि चौथे ही दिन ट्रंप प्रशासन की ओर से अजीबोगरीब सुझाव सामने आने लगे। वे कह रहे हैं कि फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल के जहाजों को सैन्य सुरक्षा दी जाए। आप सोच भी क्या रहे हैं? आप अमेरिकी जहाजों को हजारों ईरानी मिसाइलों की मारक सीमा में भेजना चाहते हैं। इस वक्त कोई भी जहाज स्टेट ऑफ होमस से सुरक्षित नहीं गुजर सकता। ईरान ने दर्शकों तक इसकी तैयारी की है।
अब कुछ लोग यह बात कह रहे हैं कि कुर्द मिलिशिया को हथियार देकर ईरान पर हमला कराया जाए। यह कैसी बात है? क्या आपने ईरान का नक्शा देखा है? लगता है ट्रंप प्रशासन ने कभी ईरान का नक्शा देखा ही नहीं है। आपको पता है कि वह कितना विशाल देश है। आप कहते हैं ईरान पर हमला कर दो। क्या 10,000 लड़ाकों की मिलीिया ईरान पर कब्जा कर लेगी? 500 या 1 लाख ईरान उन्हें निगल जाएगा।
अमेरिका और इजराइल यह युद्ध पहले ही हार चुके हैं। वे बम गिराकर लाखों आम लोगों को मार सकते हैं। इमारतों को उड़ा सकते हैं। लेकिन वे यह युद्ध नहीं जीतेंगे। ईरान का सैन्य ढांचा और हथियार पूरे देश में जमीन के बहुत गहरे नीचे बने हुए हैं। अमेरिकियों के लिए और निश्चित ही इजराइलियों के लिए वहां तक पहुंचना लगभग नामुमकिन है। उन्होंने ऐसा सिलसिला शुरू कर दिया है जिसे वे खत्म करने की ताकत नहीं रखते। जब यह सब खत्म होगा तो अमेरिका फिर किसी पश्चिम एशिया में उसी तरह वापस नहीं कर पाएगा। मध्यपूर्व में अमेरिकी मौजूदगी नहीं बचेगी।
मैं यह बात पूरे यकीन के साथ कह रहा हूं। ये सारी बातें इजराइली पत्रकार ने अपने लेख में लिखी है। अपने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट की गई है। और ये अब जो लेख है ये जो स्टेटमेंट है वो अब इस समय सोशल मीडिया पे काफी तेजी से वायरल है। वहीं इस लेख पर या इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पत्रकार राजू पारुलेकर कहते हैं कि स्टोरी का पूरा सारांश यह है कि ईरान यह युद्ध जीत रहा है। यानी यह कि इस युद्ध में जीत ईरान की होती हुई दिखाई दे रही है। फिलहाल इस खबर पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं।