कहीं से सोना लूटा, कहीं से तेल, मासूम लोगों को मारकर दादागिरी करने वाले अमेरिका की क्लास लगाने वाला चैप्टर। ईरान पर ट्रंप ने हमला क्यों किया? 10 दिन बाद इसका सबसे बड़ा राज आज खुला। और यह राज खोलने वाला कोई और नहीं है। ट्रंप का अपना एक करीबी है। वैसे तो ईरान पर हमला क्यों किया गया? इसके पीछे ट्रंप और उनके लोगों ने खूब कहानियां बनाई। अलग-अलग वजह गिनाते रहे। गोल पोस्ट चेंज करते रहे। कभी कुछ, कभी कुछ। लेकिन अब ट्रंप का असली मकसद दुनिया के सामने खुल गया है और इसके साथ ही यह साफ हो गया कि ट्रंप अब तक ईरान को लेकर जो जो बात कर रहे हैं वो दरअसल असली प्लान छुपाने के लिए था। आप देखिए कि ट्रंप ने ईरान युद्ध पर अपना असली प्लान छुपाने के लिए क्या-क्या कहा। पहले कहे कि ईरान एक आतंकी देश है।
ईरान में रिजीम चेंज करना चाहते। तुम हो कौन चेंज करने वाले भाई?
लेकिन कह दिया कि नहीं हम करना चाहते। कह रहे हैं कि हमला नहीं करते तो ईरान हमला कर देता। ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को नष्ट करना चाहता हूं। ईरान को दुनिया के लिए खतरा बता रहे हैं। इजराइल को बचाने के लिए हमला किया है। ये सारी बातें ट्रंप लगातार बोलते रहे। मतलब तय नहीं है कि इजराइल को बचाने के लिए किए, रिजीम चेंज के लिए किए, परमाणु बम के लिए किए, किए, काहे के लिए किए, कुछ नहीं। जब जो मनमाया बोल दिए। लेकिन इस दौरान ट्रंप ने कभी अपना सीक्रेट प्लान नहीं बताया जो अब पूरी दुनिया के सामने आया है। ट्रंप के बेहद करीबी सेनेटर ने ट्रंप का गहरा राज खोल दिया। ट्रंप के ईरान अटैक का एक बड़ा कनेक्शन वेनेजुएला से भी है।
ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर कब्जा किया और उसके तुरंत बाद ईरान के खिलाफ युद्ध में उतर गए। इसी में ट्रंप का बहुत बड़ा सीक्रेट छुपा है। आज इसके बारे में आपको बताऊंगा लेकिन पहले एक झलक देखिए। द मिलिट्री ऑलमोस्ट एक्सिस्ट वी मिलिट्री हार्डला एंड हैव 31% ऑफ़ द वर्ल्ड दुनिया में दो चीजें ऐसी हैं जो सबको चाहिए और सब उस पर कब्जा करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। एक तेल दूसरा सोना। और यही दो चीजें ऐसी हैं जो दुनिया चला रही है। जिसके पास तेल है, जिसके पास गोल्ड है वो दुनिया का राजा है। और इसी के लिए युद्ध होते रहे। इसी के लिए बम बरसते रहे हैं। सरकारें गिराई जाती रही है। देश तबाह किए जाते रहे। तख्तापलट होता रहा है। वेनेजुएला से लेकर ईरान तक यही हो रहा है। और अमेरिका का तो पूरा इतिहास ही ऐसा है। अब ईरान के मामले में यही खुलासा हुआ है।
अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के एक सेनेटर हैं लिंडसे ग्राहम जिनको ट्रंप का बहुत करीबी और खास माना जाता है। लिंडसे ग्राहम ने ईरान पर हमले के पीछे का असली राज खोल दिया है। रिपब्लिकन सेनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक टीवी प्रोग्राम में खुलेआम कहा बॉस कि ईरान के तेल पर अमेरिका की नजर है। वेनेजुएला की तरह ईरान पर कंट्रोल चाहते हैं। ईरान और वेनेजुएला के पास दुनिया का 31% तेल भंडार है। इतने बड़े तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण होगा। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। सबसे बड़ी बात कि इससे चीन को बड़ा झटका लगेगा। चीन इन दोनों देशों से तेल खरीदता रहा है। ईरान पर अमेरिका का कंट्रोल चीन के लिए बुरे सपने जैसा होगा। यानी सीधा हिसाब वही है बॉस जो हम आपको पाठशाला में बोलते रहे। ना तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम से इनको कोई खतरा था।
ना ही ईरान किसी पर हमला करने जा रहा था। ना ही इस ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना इनका असली मकसद था। पूरा खेल तमाशा तेल का है बॉस। इनको पूरे दुनिया में तेल जहांजहां है वहां घुसना है और लूटना है। अमेरिका एक गुंडागर्दी करता हुआ देश दिख रहा है। एक लुटेरा देश दिख रहा है कि जहां तेल है लाओ मुझे दो मैं उसका इस्तेमाल करूंगा। सुनिए लिंट से ग्राहम डोनल्ड ट्रंप के करीबी खुद अपने मुंह से बता रहे हैं। एंड 31% ऑफ़ द वर्ल्ड ऑल रिजर्व हैव पार्टनरशिप 31% ऑफ़ द नोन रिजर्व्स। दिस इज़ चाइना मेयर दिस इज अ गुड इन्वेस्टमेंट एंड वी शुड प्लॉट मेन एंड वुमेन मिलिट्री डूइंग समथिंग आई एम नेवर सीन डन बिफोर आपको क्या लगता है डॉन्ड ट्रंप अकेले सनकी है उनके साथ का हर आदमी सनक में डूबा हुआ है वो कह रहा है मुझे प्राउड है
कि हम ऐसा कर रहे हैं ये तो पूरी दुनिया को पता है कि जहां कहीं भी तेल दिखता है अमेरिका उस तेल पर कब्जा करने के लिए कूद जाता है फिर आगे पीछे कुछ नहीं देखता बॉस लोग तो इस बात का मजाक उड़ाते रहे मीम बनाते रहे कि अगर खाने के तेल में ज्यादा तेल दिख जाए खाने के खाने में तेल ज्यादा दिख गया तो कढ़ाई में अमेरिका कूद जाएगा। यह इन लोगों का हाल है। उत्तर कोरिया पर ट्रंप हमला क्यों नहीं करते? लोग पूछते हैं। किम जोंग भी तो धमकी देता रहता है। परमाणु हथियार होने का दावा खुलेआम करता है। ईरान में परमाणु बम तो कभी परमाणु बम तो अभी तक दिखा नहीं। उत्तर के कोरिया तो खुले कहता है कि उसके पास है।
वहां क्यों नहीं जाते डॉनल्ड ट्रंप अमेरिका? क्योंकि उत्तर कोरिया के पास ना तो तेल है ना सोना है। ऊपर से वो ऐसा सन की है कि परमाणु बम भी फोड़ देगा। उनको पता है। वेनेजुएला पर भी तेल के लिए अमेरिका ने हमला किया। वहां के राष्ट्रपति को उठा के ले आए। किडनैपिंग कर लिए बॉस। वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है। अब इसीलिए ईरान पर हमला किया। ईरान के तेल पर कब्जा करने के लिए युद्ध छेड़ दिया। और दुनिया को बता रहे हैं कि देखो हम तो तुम्हारे लिए कर रहे हैं। अरे मत करो जाओ। वेनेजुएला का मामला ट्रंप ने क्लोज कर दिया। अब ईरान की बारी है। ये सोचे थे कि खामनाई को मार देंगे। वहां जैसे माधुरों को उठा लिया। खामनाई को मारेंगे। ईरान घुटनों पे गिरेगा। अपना कोई वहां पपेट पे बैठा देंगे कठपुतली। अब पूरा तेल उठा लेंगे। क्योंकि ईरान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है।
ऊपर से उस तेल की क्वालिटी बहुत अच्छी। ईरान के अलावा अन्य खाड़ी देशों के साथ अमेरिका के संबंध अच्छे हैं। ईरान ही वो देश है जो अमेरिका को आंख दिखाता रहता है। इसलिए ईरान पर हमला ही कर दिया। ईरान में करीब 209 बिलियन बैरल तेल का भंडार है। ग्लोबल सप्लाई का 4.5% तेल ईरान प्रोड्यूस करता है। प्रतिदिन करीब 3.3 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन। ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार चीन है। 2025 में चीन ने ईरान के तेल निर्यात का 90% से ज्यादा खरीदा था। क्योंकि बाकी देश उस तरह से खरीद ही नहीं सकते। अमेरिका ने सेंशन लगा रखा था।
ईरान के तेल भंडार पर अगर अमेरिका का कंट्रोल हो गया तो चीन की परेशानी बढ़ जाएगी। और यही ट्रंप का प्लान भी है कि एक तो तेल ले लो ऊपर से चीन के साथ खेल कर दो। ट्रंप ने पहले ही वेनेजुला पर कब्जा कर लिया है। वहां के राष्ट्रपति माधुर अरेस्ट है। अमेरिका की कैद में है। वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है जो अब अमेरिका के कंट्रोल में है। अगर ईरान के ऑयल रिजर्व पर अमेरिका का कंट्रोल हो जाता है तो ट्रंप के हाथ वो खजाना लग जाएगा जिससे अमेरिका ऑयल किंग हो जाएगा। भैया अगर आप देखेंगे इस वक्त हालत क्या है?
वेनेजुएला उसको अगर आप देखेंगे वेनेजुएला वहां पर 303 बिलियन कह रहा हूं मिलियन नहीं बिलियन बैरल तेल मौजूद है 303 बिलियन बैरल तेल का भंडार है और दुनिया का 17 से 19% 17 से 19% कच्चा तेल। यह कहां पे है बॉस?
यह है। आपको बता रहा हूं वेनेजुएला में। दुनिया का 17 से 19% वो तो ऑलरेडी ट्रंप ने ले लिया मदुरों को किडनैप करके। अब उसकी नजर है प्लस ईरान पर। ईरान में कितना है बॉस? ईरान में है 209 बिलियन। बिलियन बैरल। ठीक है? इसके पास 303, इसके पास 209। और यह दुनिया का कितना है बॉस?
दुनिया का कहा जाता है कि ऑलमोस्ट 11% से ले 13% स्टोर है। रिजर्व है। दोनों देशों के पास कुल मिला दीजिए अगर आप इन दोनों को जोड़ दीजिए तो ये 30% दुनिया का तेल हो जाता है। बॉस 30% कच्चा तेल। अब आप खुद सोचिए कि अगर दुनिया के 30% कच्चे तेल के भंडार पर अमेरिका का कंट्रोल हो गया तो वो क्या नहीं कर सकता और उसके पास खुद का तेल तो है ही है। कच्चे तेल के मामले में अमेरिका की मोनोपोली हो जाएगी। यानी सारी लड़ाई इस बात की है कि कौन कच्चा तेल बेचेगा, किसे बेचेगा, अमेरिका को इस पर कंट्रोल चाहिए। अमेरिका यह सब तय करना चाहता है जिसके लिए ट्रंप जगह-जगह कूद रहे हैं। ट्रंप किसी भी कीमत पर ईरान के तेल पर कब्जा चाहते हैं
इसके लिए ट्रंप ने इजराइल को भी हड़का दिया क्योंकि ट्रंप का मकसद तेल भंडार पर हमला करना नहीं तेल पर कब्जा करना है। इजराइल ने ईरान के तेल भंडार पर भयंकर हमले कर दिए। इजराइल के हमले के बाद तेल भंडार जलने लगे और धुएं का गुबार छा गया। ट्रंप भड़क गए। इजराइल ने ईरान के 30 से ज्यादा ऑयल डिपो पर हमला किया। युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका इजराइल में यह पहला बड़ा मतभेद है। इजराइल के हमलों पर अमेरिका ने कहा कि क्या बकवास है? जी ट्रंप के एक सलाहकार ने कहा कि राष्ट्रपति को यह पसंद नहीं आया है। राष्ट्रपति ट्रंप तेल बेचना चाहते हैं। उसे जलाना नहीं चाहते। अमेरिका ने कहा कि तेल भंडार पर हमला अच्छा विचार नहीं था। भाई अमेरिका को ईरान से तेल चाहिए। इजराइल को ईरान को खत्म कर देना है। क्योंकि उसके हिसाब से जो उसके मिडिल ईस्ट में दुश्मन है उसमें से एक को तो निपटाओ इसी बहाने। तो दोनों का मकसद यहां मिसमैच हो गया। तो ट्रंप नाराज हो गए कि अरे क्या कर रहे हो?
तेल में आग काहे लगा रहे हो? वही लूटने तो निकले हैं हम। इजराइल के हमलों से ट्रंप की नाराजगी इसलिए है क्योंकि ट्रंप का प्लान इसी तेल पर कब्जे का है। जबकि इजराइल ईरान को बर्बाद करना चाहता है। ट्रंप के करीबी लिट ग्राहम के बयान के बाद कुछ बातें बिल्कुल क्लियर हो गई। ईरान युद्ध एक रिसोर्स वॉर है जिसका मकसद तेल के संसाधनों पर कंट्रोल करना है। दूसरा इस युद्ध के जरिए चीन की इकोनमिक ग्रोथ को अमेरिका रोकना चाहता है। चीन अपनी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए वेनेजुएला और ईरान पर निर्भर है। कच्चे तेल की चाबी अपने पास रखकर अमेरिका अपना ग्लोबल डोमिनेंस बढ़ाना चाहता है। यानी पूरा खेल अमेरिका को दुनिया का बाप बनाने का है।
यानी पर्दे पर भले ही ईरान के खिलाफ अमेरिका युद्ध लड़ता दिख रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे का असली खेल तेल से जुड़ा हुआ है। क्रूड ऑयल ईरान की लाइफ लाइन है। इसी के दम पर ईरान की इकॉनमी चलती है। ईरान के कच्चे तेल का हब खार्ग आइलैंड है। अगर यहां हमला हो गया तो ईरान आर्थिक तौर पर तबाह हो जाएगा। खार्ग आइलैंड पर ईरान की स्टोरेज फैसिलिटी और टैंक है। यहीं पर टैंकर लोडिंग टर्मिनल और पाइपलाइन भी है। ईरान का 90% तेल खार्ग आइलैंड से निर्यात होता है। खारग आइलैंड फारस की खाड़ी में है। यह भी चर्चा है कि ट्रंप ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा करने की प्लानिंग कर रहे हैं। वहीं ईरान का कहना है कि अगर ऐसी कोई कोशिश हुई तो बहुत खतरनाक अंजाम होगा। एक तरफ ट्रंप ईरान के तेल पर कंट्रोल चाहते हैं।
दूसरी तरफ वेनेजुएला के गोल्ड रिजर्व पर भी ट्रंप की नजर है। वेनेजुएला का तेल तो अमेरिका के कंट्रोल में आ ही चुका है। अब वेनेजुएला के सोने के रिसोर्स को भी अमेरिका जो है अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है। वेनेजुएला से 100 मिलियन डॉलर यानी ₹922 करोड़ से ज्यादा का सोना अमेरिका पहुंच चुका ऑलरेडी। शुक्रवार को वेनेजुएला से सोने की ये खेप अमेरिका पहुंची। यानी एक तरह से वेनेजुला के गोल्ड की लूट हुई और गोल्ड उठाकर अमेरिका ले गया। अमेरिका के होम मिनिस्टर डक बर्गम ने इसकी पुष्टि की है। बर्गम ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप वेनेजुला में जो कर रहे हैं उससे वेनेजुएला से लोग उनका धन्यवाद करेंगे। वहां का तेल लूट ले रहे हो। वहां का सोना लूट ले रहे हो और पब्लिक धन्यवाद देगी। गजब है भाई। यह तो डॉनल्ड ट्रंप ना हुए। यह तो गब्बर सिंह हो गए शोले वाले कि गो गब्बर के ताप से तुम्हें सिर्फ एक ही आदमी बचा सकता है खुद गब्बर और इसलिए तुम गब्बर को अनाज देते रहो। अमेरिका के ताप से तुम्हें सिर्फ अमेरिका बचा सकता है। इसलिए तुम ट्रंप को जो है सोना लूटने दो, तेल लूटने दो नहीं तो हम तुमको मार के चले जाएंगे। यह अमेरिका का आतंकवाद नहीं है। टेररिज्म और क्या होता है बॉस?
आप वेनेजुला से तेल और सोना एक तरह से लूट रहे हो और कह रहे हो कि वहां के लोग तुमको थैंक यू बोलेंगे। दरअसल ट्रंप वेनेजुला को अमेरिकी कॉलोनी की तरह इस्तेमाल कर रहा है। वेनेजुला में अकूत खनिज संपदा है। अनुमान है कि वेनेजुला में 500 बिलियन डॉलर यानी ₹46 लाख करोड़ का सोने का अंडरग्राउंड भंडार है। वेनेजुला में बॉक्साइट और एलुमिनियम जैसे मिनरल्स का भी भंडार है। वेनेजुला में करीब 4 अरब टन आयरन ओवर का भंडार है जिसकी कीमत करीब 400 बिलियन है। इसके अलावा करीब 200 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस है जिसकी अनुमानित कीमत 800 बिलियन है। यानी वेनेजुएला ट्रंप के लिए कुबेर के खजाने से कम नहीं है।
वहां का लाखों करोड़ का संसाधन वो अब अमेरिका अपने लिए इस्तेमाल करेगा। और अमेरिका का ये जो इतिहास है वो ऐसा ही है लूटने का, कसोटने का, लोगों को मारने का आतंक फैलाने का। जहां तेल दिख जाए, जहां दूसरे का खजाना दिख जाए, वहां घुस जाओ, अपना दबदबा बनाओ। जहां कहीं भी लीडरशिप मन मुताबिक नहीं हो अमेरिकी सेना घुसा दो या फिर सीक्रेट तरीके से ऑपरेशन चलाओ और वहां पर लोगों को बर्बाद कर दो सत्ता परिवर्तन कर दो। ये अमेरिके की हिस्ट्री है बॉस। 2019 की एक स्टडी के मुताबिक कोल्ड वॉर के दौरान यानी 1947 से 1989 तक अमेरिका ने 72 बार विदेशों में तख्तापलट करने की कोशिश की। 64 बार सीक्रेट ऑपरेशन चलाए।
जिनमें अमेरिका का सक्सेस रेट 40% था। जहां सीक्रेट ऑपरेशन काम नहीं आया वहां पर सेना लेकर घुस गए और पूरा बर्बाद कर दिया। 2011 में लीबिया पर बम गिराकर तहसनहस कर दिया। वहां गद्दाफी को मार दिया। तख्तापलट कर दिया। आज तक लीबिया तहसनहस है। और उसको उसके हाल पर छोड़कर निकल लिया अमेरिका। आज भी लीबिया बर्बाद है। वहां पर सिविल वॉर है। वहां पर कोई स्थिरता नहीं है। लेकिन अमेरिका लीबिया को नहीं पूछता कि वहां क्या हो रहा है। तुम्हें तो बड़ी चिंता है ना दुनिया भर में कि लोगों को अमन शांति मिले तो जाओ लीबिया में ठीक करो। इसी तरह 2003 में इराक में घुसा अमेरिका। बहाना बनाया कि सद्दाम हुसैन के पास डब्ल्यूएमडी है। वेपन ऑफ मास डिस्ट्रक्शन। एंथ्रेक्स नर्व गैस जैसे हथियार हैं। यूरोप के साथ मिलकर अमेरिका इराक में घुस गया।
सद्दाम हुसैन को पकड़ लिया। तख्ता पलट कर दिया। सद्दाम हुसैन को फांसी पर लटकवा दिया। कुछ सालों बाद इराक को उसके हाल पर छोड़कर भाग गया और वहां का तेल लपेट लिया। सो अलग। अफगानिस्तान में भी यही किया। तालिबान को हटाने के लिए 2001 में अफगानिस्तान में घुसा। 20 साल तक उसको तहस-नहस करता रहा। फिर सब कुछ छोड़कर भाग गया। आज की डेट में अफगानिस्तान में तालिबान का फिर से राज है और अमेरिका को अब अफगानिस्तान में क्या है उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि उसका अपना काम निकल गया। ईरान के साथ तो अमेरिका पहले भी यही कर चुका है। 1953 में अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एमआई सिक्स के साथ मिलकर ईरान के तब के प्रधानमंत्री मोहम्मद मुसादेक का तख्ता पलट कर दिया था।
और ईरान में शाह मोहम्मद रजा पहलवी को सत्ता से के को सत्ता देकर मजबूत किया। 19 89 में जब 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई तो ईरान के शाह अमेरिका भाग गए और वहां पर इस्लामिक शासन आ गया। तब से अमेरिका ईरान में तख्तापलट में ही लगा हुआ है। और अब वहां तख्ता पलट करके फिर से ईरान के शाह जैसा कोई बैठाना चाहता है। यानी अमेरिका का यह हिसाब किताब है बॉस। दुनिया में लूटखसोट करने का। पूरी दुनिया को लूटने का, अपने यहां पैसा भरने का, खजाना भरने का। यह अमेरिका का हिसाब है बॉस। और जो वो करता है वो किसी आतंकवाद से कम नहीं है। वो टेररिज्म से कम नहीं है। क्योंकि जब वो यह करता है
लूटखसोट तो उसमें मासूम लोग मरते हैं और वो उसको अमली जामा पहनाता है कि मैं दुनिया की भलाई के लिए कर रहा हूं। अरे जाओ दुनिया की भलाई। और इसलिए जो लोग यह सोचते हैं कि ईरान जो कर रहा है वो सिर्फ ईरान की लड़ाई है। वो ईरान की लड़ाई नहीं है बॉस। कल वेनेजुएला था, आज ईरान है। कभी इराक था। दूसरे देश थे। जहांजहां अमेरिका को फायदा दिखेगा वो घुसेगा और जहां वो घुस नहीं सकता वहां पर तख्ता पलट के लिए कभी कोई आंदोलन कराएगा कभी कुछ करेगा। यह मत सोचिए कि कोई देश बच सकता है।
अमेरिका वो देश है जिसे युद्ध पसंद है। बिना युद्ध के अमेरिका रह नहीं पाता। अपनी ताकत का इस्तेमाल देशों पर कब्जा करने के लिए करता है। अब तो लोग कह रहे हैं कि अमेरिका ने करोड़ों लोगों को मौत के घाट उतारा है। अमेरिकी पॉलिटिकल साइंटिस्ट और शिकागो यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशन के प्रोफेसर जॉन मिरर शाइमर ने बड़ा आरोप लगाया है। प्रोफेसर मिरर शाइमर ने कहा है कि 1971 से लेकर 2021 तक अमेरिका ने दुनिया में 3 करोड़ 80 लाख लोगों को मारा है। यह वो खुद कह रहे हैं बॉस। लेकिन यह अमेरिका का आतंकवाद नहीं है क्योंकि वो देश बड़ा है बॉस अपने हिसाब में। वो दुनिया का नंबर वन देश मानता है खुद को। और जब आप ताकतवर होते हैं तो किसी को मारते हैं तो दुनिया की भलाई का अमली जामा पहनाकर मार सकते हैं