मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच ही ईरान के एक युद्धपोत पर हमले और उसके बाद आई प्रतिक्रिया ने इस संघर्ष को और जटिल बना दिया है। इस पूरे घटनाक्रम में एक छोटा सा देश अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। जिसने मुश्किल वक्त में ईरान की मदद करके अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया संदेश दे दिया है। घटना उस समय हुई जब ईरान का आधुनिक युथप्पोत आईआरआईएस देना हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में गश्त कर रहा था। इसी दौरान अमेरिकी सेना की कारवाही में जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचा और वह डूबने लगा। यह हमला श्रीलंका के तट से लगभग नौ समुद्री मील दूर हुआ जिससे आसपास के समुद्री क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
जहाज पर मौजूद कई ईरानी सैनिकों की जान खतरे में पड़ गई और स्थिति बेहद गंभीर हो गई। ऐसे नाजुक समय में ईरान को अप्रत्यक्षित मदद मिली भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका से। श्रीलंका तटरक्षक और नौसेना की रेस्क्यू टीम ने तुरंत कारवाई करते हुए समुद्र में उतर कर डूबते जहाज के क्रू मेंबर्स को बचाने का अभियान शुरू किया। तेज लहरों और तनावपूर्ण हालात के बावजूद कई ईरानी सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस मानवीय सहायता ने ईरान के लिए एक बड़ी राहत का काम किया है। इस घटना के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सार्वजनिक रूप से श्रीलंका का अभाव व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में श्रीलंका ने जिस तरह मदद का हाथ बढ़ाया वह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवीय मूल्यों का उदाहरण है। ईरान ने इससे केवल रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं बल्कि एक दोस्ताना समर्थन के रूप में देखा है। इसी बीच ईरानी विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी फोन पर लंबी बातचीत की। इस बातचीत में ईरान ने अमेरिका की कारवाही पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में किसी युद्धपोत पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
ईरान अब इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है और कानूनी कारवाई की संभावना भी जता रहा है। ईरान ने अमेरिका की इस कारवाही को समुद्री डकैती जैसा बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में उसके जहाजों को निशाना बनाया जाएगा तो वह अपने सैनिकों और नौसेना की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम से अमेरिका और इजराइल की चिंता बढ़ सकती है। वजह यह है कि ईरान अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के सवाल से जोड़कर वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही श्रीलंका जैसे देश का मानवीय हस्तक्षेप यह संकेत देता है कि यह संघर्ष अब सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसका असर हिंद महासागर तक पहुंचने लगा है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के 7 दिन बाद सामने आई यह घटना बताती है कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं बल्कि कूटनीति, मानवीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सवालों से भी लड़ा जाता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं। इसी बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने अपने सर्वोच्च नेता अली खामन
की मौत का बदला लेना ताबड़तोड़ तरीके से शुरू कर दिया है। ईरान के इस्लामिक रिवॉशनरी गार्ड कॉर्ड्स यानी कि आईआईजीसी ने अमेरिका और इजराइल के ठिकानों के साथ-साथ समुंदर में मौजूद अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी सैन्य कमान खतम अल अंबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता के मुताबिक आया जीसी नेवी ने ओमान की खाली से होमो जलडमरू मध्य की ओर बढ़ रहे अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया है। ईरान का दावा है कि यह हमला उस समय किया गया जब अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ईरान की समुद्री सीमा से करीब 340 कि.मी. दूर ऑपरेशन कर रहा था। ईरानी मीडिया के मुताबिक विमान वाहक पोत की ओर कम से कम चार बैलस्टिक मिसाइलें दागी गई। प्रवक्ता ने दावा किया है कि हमले के बाद अमेरिकी कैरियर और उसके साथ मौजूद युद्ध पोतों को तुरंत क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा। ईरान का साफ-साफ कहना है कि अमेरिकी जहाज तेज गति से पीछे हटे और अब घटना स्थल से करीब 1000 कि.मी. से ज्यादा दूर जा चुके हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्की अभी तक नहीं हो पाई है। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने पहले भी ऐसे दावों को खारिज करते हुए कहा था कि ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलें और ड्रोन अमेरिकी जहाजों के करीब तक नहीं पहुंच पाए थे और कैरियर समूह क्षेत्र में अपना ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। तनाव की यह नई लहर तब शुरू हुई थी जब 28 फरवरी को संयुक्त हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ देश के सर्वोच्च नेता अली खामन के मारे जाने का दावा किया गया था। इसके बाद ईरान ने पूरे क्षेत्र में जवाबी कारवाई करते हुए सैकड़ों मिसाइलें दागने का दावा किया है। इन अमलों में अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
इसी बीच संघर्ष और गहरा तब हो गया जब बुधवार को श्रीलंका के पास एक अमेरिकी पनडुबी द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोने की खबर सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक इस घटना में कम से कम 80 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने अमेरिका और इजराइल को कड़ी कीमत चुकाने की चेतावनी दी थी। ईरानी रिवोशनरी गार्ड्स ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने उत्तरी फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर को मिसाइल से निशाना बनाया। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक खुर्मू जलडमरू मध्य के आसपास सैन्यिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर जनवरी के अंत में यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्वाइ ग्रुप को खाली क्षेत्र में तैनात किया गया था। वाइट हाउस ने इसे क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच जरूरी सैन्य तैयारी बताया था। मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालात ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। जिसका असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। ओ आजा मिडिल ईस्ट में शुरू हुई जंग का अंत अब कब होगा यह किसी को नहीं पता। इसकी मुख्य वजह है ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामिनाई का माना जाना। दरअसल इजराइल की ओर से किए गए अटैक में अली खामिनाई की मौत हो गई।
जिसके बाद अब ईरान भड़का हुआ है। बल्कि ईरान ने खामनाई की मौत का बदला लेने का ऐलान भी कर दिया। इजराइल के हमले के बाद ईरान खाली देशों पर टूट पड़ा है। एक-एक करके ईरान खाली देशों को निशाना भी बना रहा है। यहां तक कि ईरान ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी बेसों को अपना निशाना बनाते हुए उस पर हमला किया। इजराइल और अमेरिकी हमलों का ईरान ने बदला लेने का दरअसल ऐलान भी किया था और अब उसका दावा करना शुरू कर दिया है।
ईरान ने करीब आठ देशों में मौजूद अमेरिकी बेस पर हमला किया जिसमें बहरीन के नेवल बेस, क़तर, यूएई, सऊदी अरब, इजराइल, कुवैत, दुबई शामिल है। हमलों के बाद बहरीन ने कहा कि अमेरिकी नेवी के पांचवें फ्लिट के हेड क्वार्टर को मिसाइल हमलों से निशाना बनाया गया है। खबर है कि बहरीन में ईरानी शाहिद 136 क्रोन ने अमेरिकन फैसिलिटी को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया। सबसे खास बात तो यह है कि इस हमले के बाद बहरीनी लोग खुशी मनाते नजर आए।