कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जिन्हें देखते ही उनका नाम याद नहीं आता। लेकिन उनकी शक्ल स्क्रीन पर आते ही कोई पुराना किरदार, कोई पुरानी फिल्म और कोई पुराना दौर अचानक आंखों के सामने लौट आता है। 90 के दशक की वह फिल्में याद कीजिए। हीरो कोई और था, हीरोइन कोई और। लेकिन कहानी के बीच अचानक एक ऐसा किरदार आता था जो कुछ ही मिनटों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा देता था। कभी सख्त पिता, कभी मजेदार रिश्तेदार, कभी पुलिस वाला, कभी परिवार का ऐसा सदस्य जिसकी मौजूदगी से पूरा सीन जीवंत हो जाता था। और कई बार तो ऐसा भी होता था कि फिल्म खत्म होने के बाद हीरो हीरोइन के साथ-साथ वही सहायक कलाकार भी याद रह जाता था। अजीत वाछानी भी उन्हीं कलाकारों में से एक थे। उन्होंने कभी पर्दे पर सुपरस्टार बनने की दौड़ नहीं लगाई। उन्होंने अपनी पहचान किसी बड़े पोस्टर के बीच नहीं बनाई। उनका असली हुनर था। छोटे से किरदार को भी ऐसा बना देना कि दर्शक उसे भूल ना पाए। टेलीविजन के उस दौर से जब घर-घर में दूरदर्शन का राज था। हिंदी सिनेमा के उस दौर तक जब मैंने प्यार किया हम आपके हैं कौन? हम साथ-साथ हैं और कभी हां, कभी ना जैसी फिल्में दर्शकों की जिंदगी का हिस्सा बन रही थी। अजीत वाछानी लगातार दिखाई देते रहे। लेकिन जिस कलाकार को लाखों लोगों ने स्क्रीन पर देखा, उसके निजी जीवन के बारे में कितने लोग जानते हैं? उनका परिवार आज कहां है? उनकी पत्नी कौन थी? उनकी दोनों बेटियों ने जिंदगी में क्या रास्ता चुना और सबसे बड़ा सवाल जिस अभिनेता ने करीब दो दशक तक फिल्मों और टेलीविजन में अपनी जगह बनाए रखी वो महज 52 साल की उम्र में इस दुनिया से क्यों चला गया। उनके निधन के बाद उनकी चमकती हुई स्क्रीन लाइफ तो यादों में रह गई। लेकिन उनकी असली जिंदगी के कई पन्ने धीरे-धीरे लोगों की नजरों से ओझल हो गए। आज उन्हीं पन्नों को पलटेंगे। बिना किसी सुपरस्टार वाली कहानी के बल्कि उस कलाकार की कहानी जिसने साबित किया कि सिनेमा में बड़ा बनने के लिए हमेशा मुख्य किरदार में होना जरूरी नहीं। कभी-कभी किसी फिल्म का सबसे यादगार चेहरा वही होता है जो पोस्टर पर सबसे छोटा दिखाई देता है। हिंदी सिनेमा और टेलीविजन की दुनिया में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने मुख्य अभिनेता के रूप में नहीं बल्कि अपने दमदार अभिनय और यादगार किरदारों के जरिए दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। ऐसे ही प्रतिभाशाली कलाकारों में अजीत वाचानी का नाम भी शामिल है। उन्होंने हिंदी फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन, गुजराती और मराठी रंगमंच में भी उल्लेखनीय काम किया। अपने सहज अभिनय, संवाद बोलने की खास शैली और अलग-अलग तरह के किरदारों को जीवन करने की क्षमता के कारण वे दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुए। लेकिन आज की हमारी इस वीडियो में हम बात करेंगे इस दमदार अभिनेता के बारे में जिन्हें अपने सहायक कलाकार के तौर पर कई बेहतरीन फिल्मों में अपने अभिनय द्वारा जान डालते हुए देखा होगा। तो चलिए जानते हैं कि आखिर आज यह कहां है और इनके परिवार में कौन-कौन है। अजीत वाचानी का जन्म 10 अगस्त 1951 को हुआ था।
अभिनय में उनकी रुचि शुरू से थी और आगे चलकर उन्होंने रंगमंच तथा टेलीविजन के माध्यम से मनोरंजन की दुनिया में एक अपनी अलग पहचान बनाई। बाद में उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी कदम रखा और चरित्र अभिनेता के तौर पर लगातार काम करते हुए फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक अलग जगह बनाई। अजीत वाचानी के अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से हुई। वर्ष 1985 में बुनियाद और बनते बिगड़ते जैसे शुरुआती टेलीविजन कार्यक्रमों से उनका नाम दर्शकों तक पहुंचा। उस दौर में टेलीविजन का विस्तार तेजी से हो रहा था और दूरदर्शन के धारावाहिक घर-घर में देखे जाते थे। अजीत वाचानी ने इसी दौर में छोटे पर्दे पर अपने अभिनय की छाप छोड़ी। टेलीविजन पर उनकी सहज और स्वाभाविक अभिनय शैली दर्शकों को पसंद आई और यही वजह थी कि बहुत जल्द वे छोटे पर्दे का जाना पहचाना चेहरा बन गए। इसके बाद उन्हें फिल्मों में भी काम करने के अवसर मिलने लगे। उन्होंने दूरदर्शन के कई लोकप्रिय कार्यक्रमों और धारावाहिकों में काम किया। इनमें चुनौती, मुजरिम हाजिर, मिट्टी के रंग, दाने अनार के, जुनून और हम हिंदुस्तानी जैसे कार्यक्रम शामिल है। बाद के वर्षों में उन्होंने निजी चैनलों के धारावाहिकों में भी काम किया। हसरतें, जंजीरें और गुड़गुड़ी जैसे कार्यक्रमों में उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया। उनके करियर का एक महत्वपूर्ण धारावाहिक एक महलों सपनों का रहा। यह धारावाहिक गुजराती, हिंदी और मराठी भाषाओं में लंबे समय तक प्रसारित हुआ और इसके 1000 से अधिक एपिसोड बनाए जाते थे। इस धारावाहिक ने अजीत वाछानी को टेलीविजन के लोकप्रिय चरित्र कलाकारों में शामिल कर दिया। फिल्मों में रखा कदम। टेलीविजन पर पहचान बनाने के बाद अजीत वाछानी ने फिल्मों की ओर रुख किया। उन्होंने मुख्य अभिनेता के बजाय चरित्र भूमिकाओं को प्राथमिकता दी और धीरे-धीरे अपनी एक अलग पहचान बना ली।
वर्ष 1987 में आई फिल्म मिस्टर इंडिया में उन्होंने अभिनय किया। यह फिल्म हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में गिनी जाती है और इसमें कई कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई। अजीत वाछानी भी फिल्म का हिस्सा रहे। इसके बाद उन्होंने कयामत से कयामत तक कमांडो और मैं आजाद हूं जैसी फिल्मों में काम किया। वर्ष 1989 में उनकी चर्चित फिल्मों में त्रिदेव और मैंने प्यार किया शामिल रही। सूरज बजाता की फिल्म मैंने प्यार किया ने हिंदी सिनेमा में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की और इसके बाद अजीत वाछानी को लगातार फिल्मों में काम मिलता रहा। कभी हां, कभी ना और अन्य फिल्में। वर्ष 1993 में अजीत वाचानी फिल्म कभी हां, कभी ना में नजर आए। शाहरुख खान अभिनेत्री इस फिल्म को आज भी हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय फिल्मों में याद किया जाता है। उन्होंने 1990 के दशक में लगातार कई फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं निभाई। उनकी फिल्मों में 100 दिन आग लगा दो। सावन को खूनी पंजा जो जीता वही सिकंदर, दीदार, सूर्यवंशी, लुटेरा और हम आपके हैं कौन जैसी फिल्में शामिल हैं। हम आपके हैं कौन? सूरज बजाता की बेहद सफल फिल्मों में से एक थी। अजीत वाचान्य ने इस फिल्म में अपनी भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने पुलिसवाला, गुंडा, अहंकार, यश, नसीब और अन्य फिल्मों में काम किया। वर्ष 1999 में एक बार फिर सूरज बजाता की फिल्म हम साथ-साथ हैं में दिखाई दिए। इसके बाद हर दिल जो प्यार करेगा क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता जोड़ी नंबर एक और आंखें जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अभिनय किया। कुल मिलाकर अजीत वाचान्य 50 से अधिक हिंदी फिल्मों में काम किया। इसके अलावा उन्होंने तीन सिंधी फिल्मों में भी अभिनय किया। गुजराती और मराठी रंगमंच से भी उनका जुड़ाव रहा और वे वहां नियमित रूप से अभिनय करते रहे। अजीत वाचान्या की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे छोटी से छोटी भूमिका में भी अपनी एक छाप छोड़ देते थे। उन्होंने फिल्मों में अलग-अलग तरह के चरित्र निभाए। कभी वे गंभीर भूमिका में दिखाई दिए तो कभी हास्य और पारिवारिक किरदारों में नजर आए। उनकी अभिनय शैली बहुत स्वाभाविक मानी जाती थी। वे अपने किरदार को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाने के बजाय सहज तरीके से प्रस्तुत करते थे और यही वजह थी कि दर्शक उनके किरदारों को आसानी से याद रखते थे। फिल्मों में भले ही उन्हें हमेशा मुख्य भूमिका नहीं मिली लेकिन चरित्र अभिनेता के रूप में उन्होंने अपनी एक मजबूत पहचान बनाई।
उस दौर के कई लोकप्रिय कलाकारों और निर्देशकों के साथ काम करने का उन्हें अवसर मिला। फिल्मों के साथ-साथ अजीत वाछानी का टेलीविजन करियर भी काफी लंबा रहा। वे उस दौर के कलाकार थे जिन्होंने दूरदर्शन के शुरुआती लोकप्रिय दौर से लेकर निजी टेलीविजन चैनलों के विस्तार तक काम किया। उनके प्रमुख टेलीविजन कार्यक्रमों में चुनौती मुजरिम हाजिर मिट्टी के रंग दाने अनारके जुनून हम हिंदुस्तानी हसरतें जंजीरें गुड़गुड़ी एक महल वो सपनों का और बाबुल की दुआएं लेती जा जैसे धारावाहिक शामिल रहे। विशेष रूप से एक महल हो सपनों का उनके टेलीविजन करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में माना जाता है। लंबे समय तक चलने वाले इस धारावाहिक ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। अजीत वाछानी की प्रमुख फिल्में 1992 जो जीता वही सिकंदर दीदार और सूर्यवंशी 1993 कभी हां कभी ना और लुटेरा 1994 हम आपके हैं कौन 1995 पुलिस वाला गुंडा अहंकार 1996 यश 1997 नसीब 1999 हम साथ-साथ हैं 2000 हल दिल जो प्यार करेगा 2001 क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता और जोड़ी नंबर एक, 2002, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में शामिल हैं। जिनमें उनके अभिनय को दर्शकों ने काफी पसंद किया और सराहा भी। इन फिल्मों के अलावा भी उन्होंने कई अन्य फिल्मों में अलग-अलग चरित्र भूमिकाएं निभाई। निजी जीवन अजीत वाछानी के निजी जीवन के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनका विवाह चारू शिला से हुआ था और उनके परिवार में उनकी पत्नी तथा दो बेटियां हैं। उन्होंने अपने अभिनय करियर के साथ-साथ अपने पारिवारिक जीवन को भी महत्व दिया। फिल्मों और टेलीविजन में लगातार व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने अपने परिवार के साथ जीवन बिताया।
चारुशिला साबड़े एक प्रसिद्ध मराठी अभिनेत्री और लोक कलाकार है। वह प्रसिद्ध मराठी शाहिर गायक अभिनेता कृष्णराव साबड़े की पुत्री है। अजीत और चारुशिला की दो बेटियां हैं। त्रिशाला वचानी और योहाना वचानी। त्रिशाला वचानी इन्होंने अभिनय की दुनिया से दूर रहने का फैसला किया। योहाना वचानी इन्होंने अपने माता-पिता के कला क्षेत्र के वारसा को आगे बढ़ाया और मराठी सिनेमा, थिएटर व निर्देशन में काम किया। अजीत वाछानी का निधन 25 अगस्त 2003 को मुंबई में हुआ। उस समय उनकी उम्र लगभग 52 वर्ष की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन से फिल्म और टेलीविजन जगत में एक ऐसे कलाकार को खो दिया जिसने दशकों तक अलग-अलग माध्यमों में काम किया था। वे मुख्य अभिनेता के रूप में भले ही बहुत अधिक चर्चित ना रहे हो, लेकिन चरित्र अभिनेता के रूप में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। आज भी जब 1980 और 1990 के दशक की फिल्मों और उस दौर के टेलीविजन धारावाहिकों की बात होती है तो अजीत वाचानी जैसे कलाकारों का उल्लेख जरूर होता है। उन्होंने अपने अभिनय से यह साबित किया कि किसी कलाकार की पहचान केवल मुख्य भूमिका से नहीं होती बल्कि एक छोटी भूमिका को भी यादगार बनाने की कला ही उसे लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में जीवित रखती है। अजीत वाचाय का फिल्मी और टेलीविजन सफर लगभग दो दशकों तक फैला रहा। उन्होंने 50 से अधिक हिंदी फिल्मों, सिंधी फिल्मों तथा गुजराती और मराठी रंगमंच के साथ-साथ अनेक टेलीविजन धारावाहिकों में काम किया। उनका अभिनय आज भी पुराने सिनेमा और टेलीविजन को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यादों का हिस्सा है।
25 अगस्त 2003 को उनके निधन के साथ अभिनय की दुनिया ने एक प्रतिभाशाली चरित्र अभिनेता को खो दिया। लेकिन फिल्मों और धारावाहिकों में निभाए उनके किरदार उन्हें हमेशा दर्शकों की यादों में बनाए रखेंगे। कुछ कलाकार चले जाते हैं लेकिन उनके निभाए किरदार नहीं जाते। अजीत वाछानी भी आज हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनकी फिल्में और उनके निभाए छोटे बड़े किरदार आज भी उस दौर की याद दिलाते हैं जब कलाकार की पहचान सिर्फ उसके नाम से नहीं उसके अभिनय से होती थी। उन्होंने पर्दे पर शायद कभी सबसे बड़ा किरदार नहीं निभाया। लेकिन जिन फिल्मों का वह हिस्सा बने उनमें अपनी मौजूदगी जरूर छोड़ गए। दूरदर्शन से शुरू हुआ उनका सफर हिंदी फिल्मों तक पहुंचा। फिर गुजराती और मराठी रंगमंच से उनका रिश्ता बना रहा और देखते ही देखते करीब दो दशक का यह सफर ऐसी यादों में बदल गया जिन्हें आज भी पुरानी फिल्मों के दर्शक पहचान लेते हैं। 25 अगस्त 2003 को जब अजीत वाछानी इस दुनिया से चले गए तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि इतने साल बाद भी उनके किरदारों की चर्चा होती रहेगी। यही तो एक कलाकार की सबसे बड़ी जीत होती है। उसका नाम भले वक्त के साथ थोड़ा धुंधला पड़ जाए लेकिन पर्दे पर छोड़ी हुई उसकी छाप धुंधली नहीं होती। आज अगर आपने भी अजीत वाछानी को फिल्मों या पुराने धारावाहिकों में देखा है तो कमेंट में जरूर बताइए कि आपको उनका कौन सा किरदार सबसे ज्यादा याद है। वीडियो पसंद आया हो तो लाइक जरूर कीजिए। इसे अपने उन दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर कीजिए जिन्हें पुराने हिंदी सिनेमा और टीवी का दौर आज भी याद है। और ऐसी ही भूली बिसरी फिल्मी हस्तियों की जिंदगी, उनके परिवार और उनके सफर से जुड़ी कहानियां देखने के लिए चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए और बेल आइकन दबाना मत भूलिए क्योंकि सिनेमा का इतिहास सिर्फ बड़े सितारों से नहीं बना। उसमें अजीत वाछानी जैसे अनगिनत कलाकारों की भी उतनी ही बड़ी हिस्सेदारी रही है। और शायद अगली बार जब उनकी कोई पुरानी फिल्म आपकी स्क्रीन पर आएगी तो आप उन्हें सिर्फ एक सहायक कलाकार की तरह नहीं देखेंगे। आपको उस चेहरे के पीछे छिपी पूरी जिंदगी भी दिखाई देगी।