अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन के नतीजों के बाद ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि अमेरिकी जनता ने युद्ध के खिलाफ वोट दिया है। अगर डॉनल्ड ट्रंप की सरकार ने जनता की आवाज को अनसुना किया और ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्यवाही की तो इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। ईरान ने अमेरिकी चुनाव के नतीजों को ट्रंप की युद्ध नीति के खिलाफ जनता का फैसला बताया है।
अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा चाहे अंतरात्मा की आवाज हो या महंगाई का असर अमेरिकियों ने युद्ध को ना कहा है। हम इस संदेश का समर्थन करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर अमेरिकी सरकार अपने लोगों के जनादेश को नजरअंदाज करती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने आकाओं और ब्लैकमेल करने वाले वालों की सेवा करती रहती है तो उसे ईरान की ना कि गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
दरअसल 3 नवंबर को हुए मिडम इलेक्शन में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल किया है। ट्रंप ने भी माना है कि ईरान के साथ युद्ध और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें उनकी पार्टी के खराब प्रदर्शन की वजहों में शामिल थी।
न्यूज़ से बातचीत में ट्रंप ने कहा मुझे लगता है कि इसकी एक वजह ईरान भी था। उनके मुताबिक अमेरिकी लोग ईरान के खिलाफ उनकी कारवाई का समर्थन करते थे। लेकिन शायद वह पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का बोझ उठाने के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि ट्रंप ने फरवरी में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए हमले के फैसले पर पछतावा नहीं जताया। सीबीएस न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि यह संघर्ष तब खत्म होगा जब मैं कहूंगा कि यह खत्म होगा। चुनाव से पहले भी ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्यवाही जारी रखने के लिए संकेत दिए थे। फाइनेंसियल टाइम से बातचीत में उन्होंने कहा था कि वह युद्ध की मौजूदा स्थिति से संतुष्ट हैं और इसे असली युद्ध नहीं मानते।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेत्रियाू की ओर से ईरान पर दोबारा हमले की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर पूरी तरह से तैयार है। हालांकि शायद इसकी जरूरत ना पड़े। दूसरी तरफ ईरान ने भी अपने रुख में नरमी के संकेत नहीं दिए हैं। ईरान की सुप्रीम लीडर मुस्तफा खामनई ने कहा है कि अमेरिका की ईरान के प्रति दुश्मनी में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद करना गलत होगा। उन्होंने कहा कि जो लोग मानते हैं कि अमेरिकी राजनीति में बदलाव के बाद वाशिंगटन का यानी अमेरिका का रवैया बदल जाएगा वो गंभीर रूप से गलतफहमी में है। खामनी ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध दोबारा शुरू हुआ तो इस बार उसका दायरा पहले से कहीं ज्यादा बड़ा होगा। इस बीच दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव भी बढ़ा है। 2 नवंबर को अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप और होरमुज स्टेट के पास कुछ ठिकानों पर सीमित हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान की ओर से अमेरिकी विमान पर हमला किए जाने के बाद यह कारवाई की गई। हालांकि तनाव के बावजूद बातचीत का रास्ता बंद नहीं हुआ है।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डिवेंस ने कहा है कि बातचीत के जरिए समझौता होने की उम्मीद है। वहीं राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई है। लेकिन उन्होंने ईरान के कुछ और ठिकानों पर कार्यवाही की संभावना से इंकार नहीं किया है। ईरान की संसद के स्पीकर और अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान की मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा है कि युद्ध रोकने के लिए अब गेंद अमेरिका के पाले में है। ईरान की सेना पूरी तरह अलर्ट है। अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो पहले से ज्यादा कड़ा जवाब मिलेगा। और मजिस्ट्रेट में तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों ने भी चिंता बढ़ा दी है।
ईरान की रिवोलशनरी गार्ड कॉब्स यानी आईआरजीसी ने यह दावा किया है कि समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों से टकराने के बाद कई टैंकरों में आग लगी है। उसने कुछ जहाजों को रोकने का दावा भी किया है। फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों बातचीत का रास्ता खुले रखने की बात कर रहे हैं। लेकिन एक तरफ अमेरिकी हमले और दूसरी तरफ ईरान की जवाबी कार्यवाही की चेतावनी बता रही है कि तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। अब बड़ा सवाल है कि क्या मिड टर्म इलेक्शन में झटका लगने के बाद डोन्ड ट्रंप ईरान के साथ समझौते का रास्ता चुनेंगे या सैन्य कार्यवाही और तेज होगी।