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ट्रम्प के बयान से बवाल, 25वें संशोधन की चर्चा तेज..

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सीज फायर किंग कहे जाने वाले डोनाल्ड ट्रंप को आप सभी जानते होंगे। उनका मिजाज ऐसा है कि वह शायद ही कभी अपनी गलती [संगीत] मानने को तैयार होते हैं। सत्ता की भूख इतनी ज्यादा है कि उसे हासिल करने के [संगीत] वो किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। लेकिन इस बार हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं। दरअसल ईरान इजराइल [संगीत] युद्ध का आज 38वां दिन है और यह संघर्ष इतना भीषण हो चुका है कि इसकी कीमत अब ट्रंप की जेब पर भी पड़ती दिख रही है। लगातार हो रही मिसाइलों की बारिश और बढ़ते सैन्य खर्च ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कहा जा रहा है कि इस दबाव के बीच ट्रंप ने जल्दबाजी में एक अहम मीटिंग बुला ली है।

हालांकि उस मीटिंग में किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। लेकिन इसी बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सनकी ट्रंप की सारी [संगीत] सनक निकाल दी। आखिर उस पोस्ट में ऐसा क्या था जिसने ट्रंप को भी सहज कर दिया? आइए आपको बताते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने ईस्टर जैसे पवित्र [संगीत] मौके पर सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट किया जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। इस पोस्ट में उन्होंने ईरान को सीधी धमकी दी। लेकिन उसमें इस्तेमाल की गई भाषा बेहद अश्लील और गाली गलौज से भरी थी।

आलोचकों का कहना है कि किसी देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल [संगीत] करना अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। विपक्षी नेताओं ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि ऐसा व्यवहार किसी जिम्मेदार और संतुलित नेतृत्व से मेल नहीं खाता। [संगीत] इसीलिए अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या उन्हें इस पद पर बने रहना चाहिए कि नहीं।

एक और बात जो सामने आ रही है वो यह है कि क्या है अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन? दरअसल मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच यह पोस्ट और भी संवेदनशील माना जा रहा है। अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन राष्ट्रपति पद से जुड़ी [संगीत] असाधारण परिस्थितियों से निपटने के लिए बनाया गया था। 1963 [संगीत] में राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी की हत्या के बाद सत्ता के हस्तारण को लेकर स्पष्ट नियमों की जरूरत महसूस हुई

जिसके चलते 1967 में यह संशोधन लागू किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि अगर राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाए, वह [संगीत] इस्तीफा दे दे या किसी कारणवश अपने कर्तव्यों को निभा नहीं पाए, असमर्थ हो [संगीत] जाए तो सत्ता का हस्तारण किस तरह होगा। इस संशोधन में कुल चार प्रावधान हैं जो अलग-अलग परिस्थितियों में लागू किए जाते हैं। राष्ट्रपति [संगीत] को हटाने के लिए कौन-कौन सी धाराएं लगती हैं उस पर भी चर्चा करते हैं।

दरअसल अगर धारा चार के तहत राष्ट्रपति को पद से हटाने [संगीत] की प्रक्रिया शुरू होती है और राष्ट्रपति यह दावा करता है कि वह पूरी तरह सक्षम है तो मामला सीधे अमेरिकी पार्लियामेंट के पास पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति और कैबिनेट को 4 दिनों के भीतर अपना पक्ष पेश करना होता है। इसके बाद अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों में 2/3 बहुमत से यह साबित करना जरूरी होता है कि राष्ट्रपति वास्तव में अपने कर्तव्यों को निभाने में सक्षम है कि नहीं है।

अगर दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत [संगीत] नहीं मिल पाता तो राष्ट्रपति अपनी सभी शक्तियां फिर से वापस हासिल कर सकते हैं। ट्रंप को हटाने की मांग केवल एक पोस्ट की वजह से ही नहीं हो रही है बल्कि उनके लगातार बदलते फैसलों और युद्ध की रणनीति में अस्थिरता को लेकर भी है। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण [संगीत] युद्ध के बीच ट्रंप का कभी ईरान को धमकाना और कभी पूरी तरह हवाई नियंत्रण का झूठा दावा करना उनकी भरोसेमंद छवि को खत्म कर रहा है। सिनेटर क्रिस मर्फी जैसे नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि वे कैबिनेट में होते तो अब तक संवैधानिक वकीलों के साथ इस मुद्दे पर बैठ चुके होते। [संगीत] 25वें संशोधन को लागू करना आसान नहीं है।

इसकी सबसे बड़ी शर्त यह है कि इसकी शुरुआत उपराष्ट्रपति के हाथों होती है। यानी अगर उपराष्ट्रपति की सहमति और हस्ताक्षर नहीं हो तो धारा [संगीत] चार को लागू ही नहीं किया जा सकता। फिलहाल उपराष्ट्रपति की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक [संगीत] बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। खबरें यह भी है कि रिपब्लिकन पार्टी के अंदर ही कुछ नेताओं में असंतोष के स्वर सुनाई देने लगे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर राष्ट्रपति का व्यवहार इसी तरह विवादों में घिरा रहा तो दबाव बढ़ सकता है और कैबिनेट के लिए भी लंबे समय तक चुप रहना मुश्किल हो जाएगा। ऐसी स्थिति में 25वें संशोधन को लेकर बहस और तेज हो सकती है। सोर्सेस के मुताबिक अब यह भी माना जा रहा है कि शायद ट्रंप की सत्ता की चाबी अब उपराष्ट्रपति के हाथों में भी आ सकती है। कुछ दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने जेडी वेंस को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

ट्रंप ने उन्हें अमेरिका में फ्रॉड का इंचार्ज बना दिया। उन्होंने बताया कि वेंस अमेरिका में बड़े स्तर पर फैले करप्शन और धांधली को खत्म करने के लिए ट्रंप प्रशासन के महान लोगों के साथ मिलकर काम करेंगे। यूएस प्रेसिडेंट ने आगे कहा कि हम जेडीवेंस को फ्रॉड का सरगना कहेंगे और उनका फोकस हर जगह होगा। लेकिन मुख्य रूप से उन डेमोक्रेटिक राज्यों पर होगा जिनमें कैलिफोर्निया, इलनोएस, मिनेसोटा, न्यूयॉर्क और कई अन्य राज्यों के भ्रष्ट डेमोक्रेटिक राजनेताओं ने करदाताओं के पैसे की अभूर्ति पूर्व चोरी की है।

कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट की जंग अब [संगीत] ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां हालात को संभालना दिन पर दिन मुश्किल होता जा रहा है। बढ़ता तनाव सिर्फ क्षेत्र नहीं बल्कि वैश्विक [संगीत] राजनीतिक पर भी असर डाल रहा है। ऐसे माहौल में अगर भविष्य में जेडी वेंस अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं तो यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके नेतृत्व में अमेरिका [संगीत] की सत्ता और नीतियां किस दिशा में जाती है।

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