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टाइगर पर ह;म;ला करने के लिए लाए गए ह;थय;र की कीमत जानकर दंग हो जाएंगे।

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टाइगर श्रॉफ केस में एक बहुत बड़ा अलर्ट सामने आया है। बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। आपको बताते हैं कि पूरी कांस्परेसी किस तरीके से रची गई की गर्लफ्रेंड राधा से किस तरह से सप्लाई कराई गई थी यह हथियार और गर्लफ्रेंड राधा से कराई सप्लाई बबीता ने दिया साथ ₹12,000 में मुंबई पहुंचाई गई है पिस्टल जिस पिस्तल से धुआंधार पांच टाउन फायरिंग हुई थी तो बॉलीवुड स्टार टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के मामले में हथियार सप्लाई करने वाले नेटवर्क की एक अहम कड़ी सामने आ गई है।

जांच के मुताबिक इस पूरे केस में केवल हथियार लाने और पहुंचाने वाले पुरुष ही नहीं बल्कि दो महिलाओं की भूमिका तक सामने आ चुकी है। पुलिस के मुताबिक हरियाणा के सोनीपत में रहने वाले कुणाल ने अपनी गर्लफ्रेंड राधा को हथियार मुंबई पहुंचाने के लिए तैयार किया। राधा के साथ बबीता भी इस काम में शामिल बताई जा रही है। दोनों को इस काम के लिए 10 से ₹12,000 दिए गए थे। हथियार कहां से लेने हैं? किसके निर्देश पर लेकर चलना है? मुंबई पहुंचने के बाद बैग किसे सौंपना है? इस पूरी कड़ी में इंक्रिप्टेड ऐप और पहले से तय ठिकानों का इस्तेमाल किया गया था। तो वहीं देखिए क्या होता है डेड लेटर बॉक्स जहां रखे मिले हैं हथियार यह समझिए इस मामले में हथियार की सप्लाई का तरीका भी जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस के मुताबिक कुणाल और सुमित को करीब दो सप्ताह पहले अमृतसर से हथियार लाने का काम सौंपा गया था। उन्हें हथियार किसी व्यक्ति से सीधे नहीं लेने थे बल्कि एक तय लोकेशन से उठाने थे। इस तरह के तरीके को डेड लेटर बॉक्स कहा जाता है। इसमें किसी सामान या संदेश को पहले से तय स्थान पर रख दिया जाता है और दूसरा व्यक्ति वहां पहुंचकर उसे उठा लेता है। दोनों के बीच मौके पर सीधे मुलाकात होना जरूरी नहीं होता है। जांच के मुताबिक अमृतसर में जिस जगह हथियार रखे गए थे। उसकी लोकेशन अनिल पंडित ने कुणाल को पहले ही भेज दी थी। कुणाल और सुमित को कथित तौर पर यह जानकारी नहीं दी थी कि वो हथियार किसने रखे थे। यानी हथियारों की सप्लाई करने वाले व्यक्ति और उन्हें उठाने वाले के बीच में सीधा संपर्क सामने नहीं आया है। पुलिस की जांच में यह तरीका महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे हथियार रखने वाले और उन्हें आगे पहुंचाने वाले लोगों के बीच दूरी बनाए रखने की व्यवस्था दिखाई देती है। जेल से बाहर आने के बाद अनिल पंडित से जुड़ा कुणाल पुलिस सूत्र बताते हैं कि कुणाल इसी साल जुलाई में सोनीपत जेल से बाहर आया था। बाहर आने के बाद हरसाना गांव के एक दोस्त के माध्यम से उसकी मुलाकात अनिल पंडित से कराई गई। इसके बाद दोनों के बीच अनक्रिप्टेड ऐप के जरिए बातचीत होने लगी। जांच के मुताबिक करीब 2 सप्ताह पहले अनिल पंडित ने कुणाल को अमृतसर से हथियार लाने और फिर उन्हें मुंबई तक पहुंचाने का टास्क दिया गया था। इस काम के लिए कुणाल और सुमित को 70 से ₹80,000 दिए गए थे। इसी रकम में से 10 से ₹12,000 राधा और बबीता को दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक दोनों महिलाओं को हथियारों से भरा बैग मुंबई ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी और 2 महीने पहले ही मुलाकात हुई। फिर हथियार पहुंचाने का टास्क दिया गया। तो यह पूरी आप तरीका समझिए किस तरीके का इस्तेमाल किया गया। कैसे प्लानिंग हुई। तो पुलिस बताती है कि कुणाल की मुलाकात दादा से करीब 2 महीने पहले हुई थी। दोनों के बीच जान पहचान बढ़ने के बाद कुणाल ने कथित तौर पर उसे अपनी गतिविधियों के बारे में बताया। बाद में उसे हथियार लेकर मुंबई जाने की तैयारी की गई और राधा और बबीता सोनीपत की एक फैक्ट्री में काम करती थी। जांच के मुताबिक कुणाल ने राधा को हथियार पहुंचाने की जिम्मेदारी दी और वह बबीता के साथ मुंबई रवाना हुई। इस मामले में दोनों महिलाओं की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि पुलिस के मुताबिक हथियारों को एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाने के लिए उनका इस्तेमाल किया गया। 15 अक्टूबर को दिल्ली से मुंबई के लिए राधा और बबीता निकली। तो जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई खुलासे हो रहे हैं। 15 अक्टूबर को कुणाल, राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक लेकर पहुंचा। बताया गया है कि पिस्तल राधा के बैग में रखी गई थी और इसके बाद दोनों महिलाएं मुंबई के लिए रवाना हो गई। कुणाल एनक्रिप्टेड ऐप के जरिए संपर्क में रहा। पुलिस के मुताबिक अनिल पंडित से मिलने वाले निर्देश कुणाल के माध्यम से आगे पहुंचाए जा रहे थे। इस तरह हथियार लेकर जा रही महिलाएं और कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बीच संपर्क बनाए रखा गया। एक तरफ अमृतसर से हथियार उठाने की व्यवस्था थी तो दूसरी तरफ दिल्ली से मुंबई तक उन्हें पहुंचाने की जिम्मेदारी। अलग-अलग लोगों को अलग-अलग काम सौंपे जाने की यह कड़ी पुलिस जांच का अहम हिस्सा है। दादर स्टेशन पर उतरी और होटल में ठहरी और फिर बैग लेकर नाबालिक चला गया। तो पुलिस के मुताबिक 17 अक्टूबर को राधा और बबीता मुंबई के दादर स्टेशन पर उतरी। इसके बाद दोनों एक होटल में ठहरी और उसी दिन सुबह करीब 11:00 बजे एक नाबालिक लड़का होटल के पास आया और राधा से बैग लेकर चला गया। जांच में इस बैग में रखे हथियार को फायरिंग की घटना से जोड़कर देखा जा रहा है। जांच के मुताबिक 18 अक्टूबर को शाम करीब 7:00 बजे टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की फायरिंग हुई और इसके बाद अनिल पंडित ने कथित तौर पर कुणाल को बताया कि शूटर मुंबई में फंस गए हैं और उन्हें वहां से निकालने की व्यवस्था करने के लिए कहा गया। इसी दौरान 18 अक्टूबर को राधा और बबीता दादर से हरिद्वार जाने वाले एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हो गई। पुलिस के मुताबिक 20 अक्टूबर को दोनों महिलाओं को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया। तो वहीं कुणाल और सुमित को हरियाणा के सोनीपत से हिरासत में लिया गया। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस की सीआईडी मुंबई की टीम ने अदालत की अनुमति लेकर चारों आरोपियों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। पुलिस को चोरों की तीन दिन की ट्रांजिट डिमांड भी मिली हुई है। ये जो चार लोग हैं यानी कि चार आरोपी इनकी तीन दिन की ट्रांजिट डिमांड मिली हुई है और जैसे-जैसे यह जांच आगे बढ़ रही है बड़े-बड़े खुलासे हो रहे हैं। हर एक अपडेट सबसे पहले न्यूज़ 18 आप तक पहुंचाता रहेगा। तो बने रहिए हमारे साथ।

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