एक ऐसे रिश्ते की जो कभी कामयाब नहीं हो पाई। एक कोट मैं आपको पहले पढ़ के सुनाता हूं। यह कोट है नूतन का। आई वास अ बिजी एक्ट्रेस एंड हैप्पी विथ माय करियर एंड माय फैमिली। नूतन ने संजीव कुमार को थप्पड़ क्यों मारा? यह एक बहुत बड़ा सवाल था। बहुत लोगों को आज के आज के जमाने के बहुत लोगों को तो पता भी नहीं होगा कि नूतन कौन है? संजीव कुमार कौन है? लेकिन ये एक बहुत बड़ी स्टोरी थी उस वक्त लेट 60ज में। ये क्यों हुआ था?
क्यों नूतन ने संजीव कुमार को थप्पड़ मारा? दोनों के बीच में रिश्ते क्या थे? उसे आज मैं थोड़ा समझाने की कोशिश करूंगा। नूतन देखिए बहुत ही खूबसूरत और बहुत ही कामयाब एक्ट्रेस थी अपने टाइम की। उनकी जो स्टार्टिंग की जो पढ़ाई थी कॉलेज वगैरह वो स्विट्जरलैंड में हुई थी। वहां पे उन्होंने एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट भी जीता था। उसके बाद फिर वो इंडिया आई थी और यहां पे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम किया और सारे दिग्गज उस वक्त के जितने भी एक्टर्स थे किशोर कुमार, देवानंद, राज कपूर सबके साथ उन्होंने काम किया। दिलीप कुमार के साथ उस दौर में काम नहीं किया था।
लेकिन बाद में उन्होंने कर्मा वगैरह में उनके साथ वो नजर आई। तो उनका करियर बहुत ही अच्छे मोड़ पर चल रहा था। अच्छे स्ट्रांग नोट पर चल रहा था। तभी उस वक्त क्या हुआ कि 1959 में ही अपने एकदम करियर के पीक पे ही उन्होंने शादी करने का फैसला किया क्योंकि उन्हें एक शख्स से प्यार था और वो शख्स थे।
लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल। तो यह शादी हुई 11 अक्टूबर 1959 को। शुरुआत में काफी अच्छा क्योंकि रजनीश से नूतन प्यार भी करती थी और इसीलिए बहुत जल्दी अपने करियर को एक तरह से सैक्रिफाइस करके उन्होंने शादी कर ली। शादीशुदा हीरोइन का डिमांड मार्केट में नहीं होता।
ये हमने कई बार सुना है कि इंडस्ट्री जो है वो शादीशुदा हीरोइनों को पसंद नहीं करती। लेकिन नूतन के साथ ऐसा नहीं हुआ था। शादी के बाद भी उनका करियर ठीक-ठाक ही चल रहा था। और पहले का तो आपको पता ही है बंदिनी, सुजाता कितनी अच्छी थी फिल्में नूतन ने की थी। तो शादी हुई और शुरू के कुछ दिन जो थे दोनों के बीच काफी अच्छे थे। फिर बहुत जल्द मोनीश बैल पैदा हो गए। मोनीश बैल को आप जानते ही हैं। सबसे हैंडसम विलेन मैंने प्यार किया में वो दिखे थे। उसके बाद सलमान खान के भाई बने। हम आपके कौन में हम साथ-साथ है।
मैं उसके अलावा बहुत सारे फिल्मों में छोटे-मोटे वो रोल करते थे। हालांकि उनका करियर कभी उतना स्ट्रांग नहीं बना जितना कि नूतन का था। तो रजनीश बहल से शादी हुई। मोनीश बैल पैदा हो गए। लेकिन कुछ ही दिनों के बाद एक दो साल के बाद जो रजनीश बहल थे क्योंकि वह आर्मी के थे और तो थोड़ा वो डोमिनेट करना चाहते थे हमेशा अपने घर में और उनके फैमिली में जो है वो उन्हीं का सिक्का चलता था।
एक तरीके से जो वो कह दे वही लॉ है उनके घर का ऐसा माहौल था उनके घर का तो धीरे-धीरे नूतन के साथ उनका जो रिलेशनशिप था वो टॉक्सिक होने लगा आजकल बहुत ज्यादा टॉक्सिक रिलेशनशिप की बात होती है और बहुत ज्यादा तुरंत डिवोर्स भी हो जाता है लेकिन ये वो टाइम था जब डिवोर्स वाज़ नॉट एन इजी ऑप्शन फॉर एनीवन बीट द बीट फिल्म एक्ट्रेस और समबडी हु इज़ बीन अ पब्लिक सेलिब्रिटी।
तो नूतन जो है वो रिश्ते से बाहर नहीं आ पा रही थी। ऐसा कर दिया था रजनीश बहल ने कि नूतन को उनकी मां से भी एक तरह से अलग कर दिया था। नूतन जो भी कमाई करती थी जो भी उनकी अर्निंग थी एज अ फिल्म एक्ट्रेस वो सब कुछ हैंडल करती थी उनकी मां शोभना शाम। इनफैक्ट सोबना शर्मा थी डायरेक्टर थी उस फिल्म की जो नूतन की पहली फिल्म थी। हमारी बेटी जो फिल्म आई थी 1950 में जिसमें पहली बार नूतन ने काम किया था उस फिल्म को उनकी मां ने ही डायरेक्ट किया था और उनके पूरे बिजनेस को उनकी मां ही संभालती थी। लेकिन पूरी कमाई का 30% इनकम जो है वो नूतन को जाता था। बाकी जो अमाउंट था वो उनकी मदर जो है वो बाकी बहनों में उनके खर्चे वगैरह में वो डिस्ट्रीब्यूट कर देती थी। तो यह बात रजनीश बहल को पसंद नहीं आती थी। उनका कहना था कि नूतन की कमाई सिर्फ नूतन की होनी चाहिए और इस वजह से उन्होंने नूतन को प्रेशराइज किया कि अपनी मां के अगेंस्ट एक लीगल केस फाइल करो कि मेरा पैसा है उस पर मेरा हक है। बाकियों का हक नहीं है। और फिर जब शोभना सामर्थ ने बोला कि नहीं ऐसा नहीं ये फैमिली है।
तुम्हारी रिस्पांसिबिलिटी है। तो फिर वो उनको कोर्ट में भी ले चली गई। इस वजह से नूतन और नूतन की मां के रिश्ते इतने बिटर हो गए कि उनकी अपनी सारी सिबलिंग्स जो है तनुजा जिनको आप जानते हैं वो सब इनसे दूर हो गए और नूतन एक तरह से अलूफ हो गई अपने परिवार से भी कट गई। इसके अलावा हस्बैंड का डोमिनेंस बहुत ज्यादा था। सवाल जवाब बहुत करते थे। एक तरह का अब्यूसिव रिलेशनशिप भी था। जैसा हमने सुना है नीतू सिंह और ऋषि कपूर का था।
तो उसी तरह का इनका नूतन का अपने हस्बैंड के साथ हो गया था। तो इस दौरान उन्हें एक सपोर्ट की तलाश थी। एक एक ऐसे इंसान की तलाश थी जो कि उनकी बातों को समझे, उन्हें रेस्पेक्ट करे, उन्हें प्यार करे और उनका जो भी उनके लाइफ में चल रहा है उसको उस सिचुएशन से बाहर निकाल सके। उन्हीं दिनों इनकी मुलाकात हुई संजीव कुमार से। दोनों एक फिल्म कर रहे थे। उस फिल्म का नाम था गौरी जो कि 1968 में रिलीज़ हुई थी। तो उस फिल्म में दोनों साथ काम कर रहे थे और जो संजीव कुमार का डिमिनर था बिहेवियर उनके बात करने का तरीका यह सब से नूतन बहुत इंप्रेस थी और दोनों धीरे-धीरे काफी गहरे दोस्त हो गए और दोनों में एक तरीके से आप कह सकते हो प्यार भी हो गया और ये बात मैं नहीं कह रहा हूं बहुत सारे लोग जो कि संजीव कुमार के करीबी थे उन्होंने भी कहा है और जो मैंने स्टार्टिंग में जो कोड भी पढ़ा था ।
वो संजीव कुमार की जो किताब है उसी में उनके बहुत सारे दोस्तों ने यह बात बताई है। उनके एक दोस्त थे प्रोड्यूसर डायरेक्टर गोविंद सराया। गोविंद सराया नूतन और संजीव कुमार से दोनों की उनकी दोस्ती थी। अबकि ये लोग पब्लिक फिगर थे तो ये लोग बाहर तो मिल नहीं सकते थे। संजीव कुमार और नूतन दोनों में जैसा मैंने कहा कि प्यार भी हो गया था। लेकिन अब बाहर क्योंकि वो लोग पब्लिक में हाथ पकड़ के तो घूम नहीं सकते हैं। और ज्यादा पब्लिक अपीयरेंस करेंगे तो फिर वो फिल्मी मैगजीन का गसिप कॉलम बन जाएगा।
तो इनके जो एक दोस्त थे गोविंद सरैया जो प्रोड्यूसर डायरेक्टर भी थे वो इन लोग के लिए एक रूम बुक किया करते थे एक होटल में मिलने के लिए और फिर ये दोनों शूटिंग के बाद वहां जाकर मिलते थे लेकिन होटल में रूम बुक करना साउंड बहुत अजीब कर रहा होगा कि ये होटल के कमरे में दोनों मिलते होंगे लेकिन दोनों का रिश्ता इतना पवित्र था इतना साफ सुथरा था कि उस रूम का होटल का दरवाजा ये लोग खोल के रखते थे कोई भी आ जा सकता है बस ये दोनों एकांत समय एक अकेला मतलब एक जो होता है ना कि प्राइवेट मोमेंट बस दोनों साथ में बातचीत करना चाहते हैं। एक दूसरे को अपनीप दुख भरी कहानी सुनाना चाहते हैं।
बस एक सपोर्ट सिस्टम की तरीके से ये नहीं था कि कोई बहुत ज्यादा इंटिमेट रिलेशनशिप था इन लोग का। तो बहुत ही गहरी दोस्ती और प्यार था और होटल में मुलाकात होती थी। फिर जब इन लोग की बातचीत खत्म हो जाती थी तो फिर जो प्रोड्यूसर थे गोविंद साहब वो नूतन को उनके घर भी छोड़ देते थे। जो रजनीश बैल थे इनके हस्बैंड नूतन के उनको कभी भी गोविंद पर डाउट नहीं हुआ कि ऐसा कुछ ये करते हैं कि एक होटल रूम बुक करते हैं जहां पर संजीव कुमार और नूतन मिलते हैं लेकिन धीरे-धीरे क्या है ना कि सेलिब्रिटी है तो बातें तो पता चल ही जाती है फैल ही जाती है सेट से बाहर ये बातें निकल गई और फिर कैसे-कैसे रजनीश बहल को ये बात पता चल गई कि नूतन के रिश्ते जो है वो संजीव कुमार के साथ हैं।
इस चीज को लेकर के बहुत बवाल हुआ। रजनीश बहल जो है वो बहुत नाराज हुए। इस बात का ऑब्जेक्शन हुआ और फिर उस दिन के बाद से नूतन को ज्यादा टॉर्चर करने लगे। जब भी वह फिल्म सेट से आती थी तो हमेशा उन्हें ताने देते थे कि तुम संजीव से मिलके आ रही हो। ऐसीऐसी बातें होती थी। एक बार क्या हुआ कि उन्होंने कहा कि मैं संजीव कुमार को दूंगा। और उन्होंने पूरा डिटेल बताया कि देखो तुम्हें पता ही है अभी नानावती केस चल रहा है कोर्ट में। और नानावती केस अगर आपको नहीं पता होगा तो 1959 की बात है कि एक आर्मी ऑफिसर थे कवास मानिकशा और नानावती उन्होंने अपने फ्रेंड प्रेम आूजा को दिया था। क्यों? क्योंकि प्रेम आूजा जो थे जब भी नानावती बॉर्डर पर रहते थे अपने आर्मी के जंग पे रहते थे। तो प्रेम आहूजा की दोस्ती हो गई नानावती की बीवी से और फिर दोनों में इंटिमेट रिलेशनशिप हो गया।
यह बात जब नानावती को पता चली तो नानावती साहब ने प्रेम को गोली मार दी। यह बहुत ही बड़ा केस था और इस पे कई फिल्में ही बनी है। इस पे सबसे पहला जो फिल्म बना था वो सुनील दत्त ने बनाया था। ये रास्ते हैं प्यार के और बाद में अचानक एक फिल्म आई थी जिसमें विनोद खन्ना थे उसे गुलजार ने बनाया था। फिर रुस्तम एक फिल्म बनी अक्षय कुमार ने वो पार्ट जो प्ले किया था नानावती का। तो उस वो केस इतना बड़ा था। वो हमेशा उस जमाने में अखबार की सुर्खियों में छाया रहता था।
तो रजनीश बहल ने नूतन को बोल दिया कि जैसे नानावती का केस है ना मैं संजीव कुमार को गोली मार दूंगा। तो ये सुनके नूतन बहुत घबरा गई और उन्हें लगा कि मुझे अब इस रिश्ते को शायद तोड़ देना चाहिए क्योंकि मैं संजीव को मरते हुए नहीं देखना चाहती। और जो इनके हस्बैंड थे रजनीश बहल वो इतने वायलेंट हो जाते थे कई बार कि इस किताब में जिक्र है कि एक बार उन्होंने मोनीश बहल जो वो छोटे थे तो उनको गर्दन से पकड़ के खिड़की के बाहर ऐसे लटका दिया था कि इसे मैं फेंक दूंगा।
तो इस तरीके का इस तरीके की मेंटालिटी थी रजनीश बहल की। तो जब यह हुआ जब उन्होंने कहा कि मैं संजीव कुमार को मार दूंगा तो नूतन को लगा कि अब मुझे इस रिश्ते को तोड़ देना चाहिए। उन्होंने बहुत सारी दोस्तों को बताया भी कि रजनीश की आंखों में मैंने वो सनक देख लिया है कि यह संजीव को मार देगा। तो मुझे इस रिश्ते को खत्म कर देना चाहिए। अच्छा संजीव कुमार चाहते थे हमेशा से कि नूतन जो है वो इस खराब शादी से बाहर आ जाए। उन्होंने ऑफर भी किया कि तुम उसे छोड़ दो। मैं शादी करूंगा तुमसे और लेकिन जैसा मैंने कहा ना उस वक्त उस वक्त का जो समाज था वो उस समय डिवोर्स इतना प्रिवेलेंट नहीं था।
तो लोग अब्यूज रिलेशनशिप में रह जाते थे, कंटिन्यू कर जाते थे। जैसे आपने देखा होगा जीनत अमान का की भी जो कहानी है उनके हस्बैंड उन्हें बहुत टॉर्चर करते थे। लेकिन उस समय लड़कियां जो थी या वो लोग उन लोग के लिए डिवोर्स बहुत इजी ऑप्शन होता नहीं था। तो ये नूतन के साथ भी था। एक बार की बात है एक फिल्म के सेट पे नूतन और संजीव कुमार थे। उनकी शूटिंग चल रही थी और इनके दोस्त थे एक महेश देसाई।
तो वो गए थे संजीव के साथ। संजीव कुमार से उन्हें कुछ काम था तो वो सेट पे गए तो उन्हें देखा कि उन्हें कोई टैक्स परमिट के लिए लेटर लिखवाना था। फ्री टैक्स वो कोई फिल्म बना रहे थे जिसे टैक्स फ्री करवाना था। उसके लिए गवर्नमेंट को लेटर लिखना था। तो वो लेटर लिखवाने संजीव कुमार से आए थे। तो संजीव कुमार जब लिख रहे थे तो उनके पास पेन नहीं था। तो नूतन ने कहा कि आप क्या खोज रहे हैं? बताइए मैं दे देती हूं। तो संजीव कुमार ने कहा कि जो मुझे चाहिए वो तुम नहीं दे सकती मुझे। बेसिकली उनका वही इशारा था कि मुझे चाहिए कि तुम अपने हस्बैंड को तलाक दे दो और मेरे साथ आ जाओ। तो और यह बात महेश देसाई के सामने ही हुई थी। तो महेश देसाई ने इस बात का जिक्र किया इस किताब में कि संजीव इस बात से अपसेट थे कि नूतन जो है वो शादी को तोड़ के बाहर क्यों नहीं निकल पा रही है और मेरे साथ क्यों नहीं आ रही है?
क्यों उस जो रंजीत बहल है उनका इतना अब्यूज और इतना टॉर्चर वो सह रही है। तो ये सारी चीजें थी तो नूतन वो छोड़ना नहीं चाहती थी अपने हस्बैंड को। बाद में उन्होंने डिसाइड किया जब उन्होंने नानावती केस का जिक्र किया और बोला कि मैं संजीव को मार दूंगा तो उन्होंने डिसाइड किया कि अब मुझे संजीव से रिश्ते खत्म कर देने हैं और बेबसी में आकर के फिर दूसरे दिन क्या हुआ कि वो उस फिल्म सेट पे गई जहां पे वो लोग वो और संजीव कुमार साथी काम कर रहे थे और वो सेट पे गई और शूटिंग चल रही थी और शूटिंग मतलब अभी उनका कैमरा उनका शॉट नहीं था संजीव कुमार संजीव कुमार बैठे हुए थे चेयर पे और उनके गोद में छोटी सी सारिका िका थी सारिका जो फिल्म एक्ट्रेस थी कमल हसन की फॉर्मर वाइफ तो वो उस फिल्म में चाइल्ड आर्टिस्ट का काम कर रही थी तो उनके संजीव कुमार के गोद में उनके वो बैठी हुई थी सारिका और उनके साथ संजीव कुमार खेल रहे थे और तभी सेट पे नूतन आई और उन्होंने संजीव कुमार को थप्पड़ थप्पड़ थप्पड़ मारना चालू किया वो आउट ऑफ लव ही था ऐसा नहीं था कि कोई दुश्मनी थी बस यह कि थप्पड़ मार के वो कह देना कि अब तुम मेरे जिंदगी से चले जाओ और यह जब थप्पड़ पड़ा तो नूतन के हाथ में जितनी चूड़ियां थी वो टूट गई और उसमें से कुछ कांच जो थे वो सारिका के गले में लग गए थे और यह हुआ सेट पे सबके सामने हुआ और फिर यह बात जो है यह मीडिया में हाईलाइट हो गई और सबको पता चल गया कि नूतन ने संजीव कुमार को थप्पड़ मारा है और नूतन जैसा मैंने स्टार्टिंग में जो कोर्ट बोला था ना कि वो अपनी लाइफ को गसिप कॉलम से बिल्कुल दूर रखना चाहती थी।
लेकिन दो इंसिडेंट जो हुए एक तो उनकी मदर को वो कोर्ट में ले चली गई अपने फादर अपने हस्बैंड के कहने पे क्योंकि उन्होंने बहुत फोर्स किया कि नहीं तुम्हारा जो अर्निंग है वो सब तुम्हारा ही होना चाहिए तो जब मामला कोर्ट में चला गया तो कोर्ट में गया तो फिर उसकी तो रिपोर्टिंग भी होगी तो मीडिया ने उसे भी रिपोर्ट किया औरकि ये इंसिडेंट सेट पे हुआ था संजीव कुमार को थप्पड़ मारने वाला तो ये सेट पे हुआ तो सब ने देखा कि नूतन ने संजीव कुमार को थप्पड़ मारा और जब वो मार रही थी तो वहां पे पहुंचे हुए लोग नूतन को रोकने आए लेकिन संजीव कुमार ने सबको को रोक दिया कि नहीं इट इज बिटवीन मी एंड हर और उनका संजीव कुमार का बिल्कुल गाल लाल हो गया। फिर बाद में वो कह करके चली गई कि ये रिश्ता जो है यहां पे खत्म होता है।
हालांकि जब नूतन और संजीव कुमार के रिश्ते की चर्चा हो रही थी तो संजीव कुमार के घर वाले भी नहीं चाहते थे कि संजीव कुमार और नूतन की शादी हो। क्योंकि जैसा मैंने बताया कि उस वक्त उस वक्त का समाज समाज अलग था। कोई भी दूसरी औरत के साथ कोई भी क्योंकि संजीव कुमार की जो मां थी वो बिल्कुल नहीं चाहती थी कि संजीव जो है वो नूतन के साथ कोई रिश्ता बनाए क्योंकि वो ऑलरेडी शादीशुदा थे। लेकिन संजीव कुमार का जैसा नेचर था ये उनके घर वाले भी कहते थे कि जब भी आप उनको किसी चीज को करने से रोकते हो और वो अगर कन्विंस्ड है कि मैं सही हूं तो फिर वो वही करते हैं। फिर वो अपने परिवार की बात नहीं सुनते। लेकिन जब यह इंसिडेंट हुआ और नूतन ने उन्हें थप्पड़ मारा और फिर वो रिश्ता खत्म हो गया। तो इनके घर वाले इस बात से खुश थे कि चलो यह रिश्ता टूट गया। जब नूतन से इनकी दोस्ती खत्म हो गई। इनफैक्ट बहुत लोगों को नहीं पता है कि नूतन के कहने पे ही ताराचंद बजातिया को नूरतन ने ही कहा था कि ताराचंद बजातिया को कि जो फिल्म सौदागर आप बना रहे हो जो आपने देखी है अमिताभ बच्चन की फिल्म है। तो वो रोल पहले संजीव कुमार को मिला था।
संजीव कुमार को नूतन के कहने पे ही उस फिल्म में लिया गया था। लेकिन क्योंकि अब इनके रिश्ते खत्म हो गए और दोनों ने फिर डिसाइड किया कि अब हम साथ में काम भी नहीं करेंगे। तो बरजातिया साहब ने सोचा कि अब इस तरह के खटास वाले माहौल में एक फिल्म बनाना जिसमें इन दोनों को साथ ले लिया जाए वो सही निर्णय नहीं होगा। तो फिर उन्होंने उस फिल्म से अमिताभ बच्चन संजीव कुमार को ड्रॉप कर दिया और अमिताभ बच्चन को ले लिया। इसके बाद जब इनके रिश्ते अलग हो गए। फिर संजीव कुमार की एक तरह से दोस्ती नूतन तनुजा के साथ बहुत हो गई। तनुजा जो नूतन की ही बहन थी उनके साथ हुई और मीडिया गसिप कॉलम जो मैगजीन थे फिल्म मैगजीन उसमें यह सारी बातें छपने लगी कि संजीव कुमार का रिश्ता जो है वो तनुजा के साथ हो गया लेकिन संजीव कुमार ने बाद में क्लेरिफिकेशन दिया कि मेरा उनके साथ कोई बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड वाला रिश्ता नहीं था। मैं उसे एक छोटी बहन एक बेटी की तरह देखता था क्योंकि वो बहुत यंग थी मेरे से और हमेशा मुझसे एडवाइस मांगने आती थी। लेकिन एक इंसिडेंट जो हुआ ये कि जो जिस प्रोड्यूसर का मैंने जिक्र किया था गोविंद साहब जब ये इंसिडेंट हुआ थप्पड़ वाला तो फिर हर दिन संजीव कुमार के बारे में कुछ कुछ बातें मैगजीन में छपती थी तो फिर एक दिन उन्होंने एक पार्टी रखी गोविंद साहब ने जो कि इन दोनों की मीटिंग किसी होटल में कराते थे।
फिर गोविंद साहब ने एक पार्टी रखी और संजीव कुमार को उसमें बुलाया और बहुत सारी शहर की जानीमानी पॉपुलर हीरोइन लड़कियां और जो भी अलग-अलग फील्ड से थी उनको बुलाया। फिर संजीव कुमार जैसे ही उस पार्टी में पहुंचे तो गोविंद साहब ने उन्हें उस पार्टी में जिस फ्लोर पे वो पार्टी में थे उनके सेंटर पर खड़ा कर दिया और सबको बोला कि देखो यह वो गाल है जहां पर नूतन ने थप्पड़ मारा है। तो मैं चाहता हूं कि यहां जितनी लड़कियां है सब आकर के इसी गाल पर संजय कुमार के किस करें ताकि उन्हें उस पेन से वो बाहर निकल जाए। वो मजाक मजाक की बात थी।
फिर बाकी सभी लड़कियों ने आकर के मतलब सब दोस्त ही थे एक दूसरे के। तो सब ने आकर के संजीव कुमार के गाल पर फिर किस किया कि चलो ठीक है अब इस बात को भूल जाओ। ये एक एपिसोड था तुम्हारी लाइफ का और जस्ट मूव ऑन फ्रॉम दिस थिंग। और फिर यहां से जब ये एक जो सैड चैप्टर था संजीव कुमार का। इसके बाद से संजीव कुमार ने सोचा कि अब मुझे सारा फोकस जो है वो अपने करियर पर लगाना है और फिर उन्हीं दिनों फिर क्या हुआ कि उन्हें उनके करियर का बहुत बड़ा ब्रेक मिला और वो जो फिल्म मिली उन्हें वो थी खिलौना और खिलौना करने के बाद पहले हालांकि संघर्ष एक मूवी जिसका जिसका वीडियो मैंने बनाया था उससे लोग जान गए थे संजीव कुमार को लेकिन एज अ सोलो हीरो उनकी कोई फिल्म बड़ी हिट नहीं हुई थी तो जब खिलौना रिलीज हुई और उसमें उन्होंने एक मेंटली चैलेंज बंदे का रोल किया था और उसमें परफॉर्मेंस देख के रातोंरात संजीव कुमार एक बड़े स्टार बन गए और मैगजीनस में फ्रंट पेज उनका फोटो छपता था और संजीव कुमार की एक्टिंग कैपेबिलिटी के बारे में लोगों को पता चला कि ये एक्टर जो है वो क्या रेंज है इसका तो ये बड़ी एक ट्रैजिक स्टोरी थी।
संजीव कुमार और नूतन के रिश्ते जो है वो कैसे नहीं आगे बढ़ पाए और बहुत ही सैड एंड हुआ इस रिलेशनशिप का तो मैंने सोचा ये स्टोरी मैं आज आपको सुनाता हूं तो ये थी स्टोरी कैसी लगी आपको स्टोरी और अगर इससे जुड़ी हुई कुछ और भी इंटरेस्टिंग किस्से आपके पास है तो जरूर हमें कमेंट बॉक्स में बताइएगा। अब आते हैं क्विज पे। पिछले वीडियो में एक डायलॉग मैंने बोला था और वो जो डायलॉग था वो सिलसिला मूवी का ही है और उसे शशि कपूर ने कहा था।
काफी लोगों ने सही जवाब दिया। अब आते हैं आज के क्विज पे और आज का जो डायलॉग है वो ये है। मैं तुम्हें ऐसी जगह मारूंगा जहां तुम्हें सबसे ज्यादा लगे।