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खमेनेई के बदले के लिए तेल अवीव को गाजा बना देंगे!

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नमस्कार, बहुत स्वागत है आप सभी का लाइव हिंदुस्तान पर। मिडिल ईस्ट महायुद्ध की कवरेज लगातार जारी है और हम हाज़िर हुए हैं आपको यह बताने के लिए कि 22वीं मौज 22वीं मिसाइल्स का बराज 22वीं लहर ईरान ईरान की तरफ से लॉन्च कर दी गई है। इजराइल के अलग-अलग शहरों को खासतौर पे राजधानी तेल अवी को टारगेट करते हुए। यह लहर पिछली लहरों से कैसे अलग है? इस वीडियो में आपको बताएंगे। लेकिन शुरुआत हम करना चाहते हैं एक खास तस्वीर के साथ। वो तस्वीर जो सबको इमोशनल कर रही है, संजीदा कर रही है। पहले वो तस्वीर देखिए और उस पे फारसी में क्या लिखा है यह मेरे सहयोगी इमरान आपको बताएंगे। बिल्कुल ये तस्वीर आप देखिए। यह मिसाइल है जो बिल्कुल दागे जाने के लिए तैयार है। तस्वीर में नजर आती है। और इस मिसाइल पर लिखा हुआ है फारसी में मिनाब के स्कूल की बच्चियों की याद में। जी हां, इस मिसाइल पर लिख दिया गया है। आपको याद होगा जंग जब शुरू हुई थी तो पहले ही दिन मिनाब करके एक जगह है जहां पर बच्चियों का एक स्कूल था और वहां पर अटैक किया गया था इसराइल के जरिए और इसमें कई बच्चियों की शहादत हुई थी जिसके बाद लोगों में और पूरी दुनिया में बहुत गुस्सा है। लोग स्कूल बैग्स लेकर के प्रदर्शन कर रहे हैं जगह-जगह और ये बताने की कोशिश करें कि उनकी क्या गलती थी। ये जंग फौज और जो है सैनिकों के दरमियान हो रही है। तो इसमें उन मासूम बच्चियों को उन उन नौजवान बच्चियों को क्यों निशाना बनाया गया? ये बड़ा सवाल है। तो उन्हीं बच्चियों को खिराजे अकीदत पेश करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए इसराइल की तरफ रवाना की गई है ये मिसाइल। अब आप समझ सकते हैं कि कितनी तबाहकुन आंधी आने जा रही है।

बिल्कुल। और अब लौटते हैं उस बात पर जिससे हमने इस वीडियो को शुरू किया। यानी कि यह जो 22वीं लहर है, यह पिछली लहरों से कैसे अलग है? इसमें कौन-कौन सी मिसाइलें शामिल की गई हैं? और अब ये क्यों कहा जा रहा है कि तेल अवीब का गाजा बना देंगे। ये गाजा वाली बात कैसे आई? उसको थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। जी इमरान। बिल्कुल संदीप जी ये तस्वीरें आप देखिए। ये मिसाइल ये वीडियोस आप देखिए। ये वो मिसाइलें हैं जो आज 22वीं लहर में छोड़ी गई है। इनमें खुर्रम शहर फोर है, खैबर है और फतेह इनके एडवांस वर्जन जो है एक साथ छोड़ दिए गए हैं। बिल्कुल और ये सब इजराइल की तरफ है। जैसा कि हमने पहले भी बताया था कि बड़ी मिसाइलें, हैवी मिसाइलें का निशाना जो मिसाइलों का निशाना जो है वो है इसराइल और इसराइल को अब गजा बनाने की तैयारी है। वजह ये है कि जिस तरह की तबाही गजा पर हुई थी। बहुत से लोगों को याद है वो मंजर। ये कोई ज्यादा वक्त नहीं बीता है। सिर्फ पिछला ही रमजान था। एक साल बीता है और गजा में बीच रमजान में जो मारा था उसे दुनिया ने देखा था और किस तरह इबादतों के बीच में लोगों की जान ली गई थी। बच्चों की जान ली गई थी और धूल धुसरित कर दिया गया था। बस वही तेल अवीब का हाल करने की तैयारी है और वो शुरू हो गई है। हो सकता है संदीप जी आपके पास तस्वीरें ना आ रही हो। हमारे दर्शकों को हम नहीं दिखा पा रहे हो। हो सकता है ये तस्वीरें बाद में आए या छुपा ली जाए लेकिन तेल अवीब का हाल ये जो मिसाइलें दागी गई है कहा जा रहा है कि वही करने जा रही है क्योंकि इसमें जो एक खुर्रम शहर फोर मिसाइल है इसके हवाले से ईरान के एक आईआरजीसी के एक पूर्व कमांडर थे जो अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं हाजीजादे हाजीजादे उन्होंने बताया था कि खुर्रम शहर फोर में वो सलाहियत है कि ये टारगेट तो एक मिसाइल करती है अपने हदफ की तरफ जाती है लेकिन हदफ की तरफ पहुंचने से पहले लक्ष्य की तरफ पहुंचने से पहले ये 80 80 मिसाइलों में बदल जाती है और 80 जो हदफ है 80 लक्ष्य को हिट करती है। 80 जगह पर मारती है। अब आप सोचिए अगर ये 100 मिसाइल मार रहे हैं। ये अगर 100 मिसाइल मार रहे क्योंकि ईरान एक-ए बार में कई कई मिसाइल मारने की क्षमता रखता है। 80 मिसाइल 8000 जगह तेल अवीब में हिट करेंगी। रोक लो इंटरसेप्टर से। कितना रोकेंगे? गजा बनना तय है। गजा बनना तय है। तो जिन लोगों को गजा का रंज था। जिनके दिलों में आज भी गजा बसा हुआ है वो तेल अवीब की वो तस्वीर देखने के लिए तैयार हो जाए ऐसा एक्सपर्ट कहते हैं। बिल्कुल और दरअसल कुछ एक्सपर्ट्स तो ये दावा अभी से कर रहे हैं। मसलन एक ब्रिटेन के एक पॉलिटिशियन हैं। वो एकिकि वो एक चैनल को दिया गया इंटरव्यू था तो वो हम आपको दिखा नहीं सकते। लेकिन आप सोशल मीडिया पे Google पे सर्च करेंगे तो आपको मिल जाएगा। जॉर्ज समथिंग उनका नाम है। बोल रहा हूं हम पट्टी में जरूर उनका पूरा नाम लिखवा देंगे। तो आप सर्च कीजिएगा। वो ये दावा अभी भी कर रहे हैं कि दरअसल गाजा बनने की शुरुआत हो चुकी है। तस्वीरें निकल कर नहीं आ रही है क्योंकि इजराइल के बारे में हर कोई जानता है कि वो सेंसर कर देता है तस्वीरों को बाहर आने नहीं देता है। यहां तक कि अगर आम नागरिक भी बना के डालते हैं तो उसके लिए सजा का प्रावधान है। तो इस वजह से जितना जो कुछ आ रहा है वो बहुत कम आ रहा है।

जो मेन स्ट्रीम मीडिया भी है वहां का वेस्ट का जो मीडिया है वह कवर जरूर कर रहा है लेकिन अंदर की तस्वीरें नहीं दिखाई जा रही हैं जो जो इंटरनेशनल एजेंसीज हैं वो भी ऊपर की तस्वीरें तो दिखाते हैं कि जो मिसाइल से हमला हुआ या जो इंटरसेप्ट किया लेकिन उनका ग्राउंड पे क्या इफेक्ट हुआ उससे जुड़ी बहुत ही सीमित तस्वीरें आपको देखने को मिलेंगी वो आमतौर पे वही तस्वीरें होती हैं जो किसी ने अपने घर से बना लिया अपने बालकनी से अपने किसी रिलेटिव को शेयर किया और उसके जरिए होते-होते वो सोशल मीडिया पे आ गई। उतनी भर तस्वीरें सामने आ रही हैं। लेकिन अ गाज़ा जैसा मंजर अभी भी तिलवी में मौजूद है। वो और बढ़ने वाला है। वो 22वीं लहर ईरान की जो 22वीं लहर है वो यह सुनिश्चित करने वाली है कि गाजा का मिनाब की बच्चियों का और साथ ही खामने साहब का बदला लेने के लिए इंतकाम लेने के लिए ईरान ने कमर कस ली है और पूरी ताकत इजराइल के खिलाफ अपने दुश्मनों के खिलाफ झोंक दी है। बिल्कुल ईरान में मौजूद आकिब ज़दी साहब हैं जो अल मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं। वेस्ट एशिया के एक्सपर्ट हैं। उन्होंने एक वीडियो भेजा जिसमें वो बताते हैं कि आमतौर पर ईरान में ये है कि जुमे की नमाज मस्जिदों के अंदर ही अदा की जाती है। क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर वहां पर है जगह सब चीजें हैं कि हमारे भारत में की तरह जो है लोग बाहर मस्जिदों के बाहर या कई बार होता है ना कि सड़क पर भी पढ़ी जाती है। वैसा नहीं है सिस्टम वहां पर क्योंकि वहां सफिशिएंट जगह है। लेकिन आज वो देखने के लिए मिला। आज जुम्मा है रमजान का जुम्मा और उस पर से खामले साहब की शहादत के बाद पहला जुमा। तो आज मस्जिदों के बाहर भी बड़ी तादाद में लोग नमाज अदा कर रहे थे और ये बताता है और बिल्कुल धैर्य धीरज के साथ किसी तरह का कोई पैनिकिक नहीं है। कोई आक्रोश दिखाने की भी कोशिश नहीं की। इतने बड़े पैमाने पर लोग निकले हैं सामने ऊपर बम मंडरा रहे हैं। ऊपर फाइटर जेट मंडरा रहे हैं। कहीं से भी इसराइल मार सकता है। किसी भी शहर में मार सकता है। और अगर मारे तो हजारों लोग एक साथ मारे जाएंगे। लेकिन कोई पैनिकिक नहीं और ना ही आक्रोशित करने की लोगों को कोशिश थी। जैसे होता है ना जोश दिलाने की कोशिश की जा रही है। उनको गुस्सा कुछ नहीं। सब लोग आए बाकायदा नमाज पढ़ी और लगातार जो है यह कह करके गए हैं नमाज के बाद जगह-जगह जुलूस निकले हैं जिसमें कि ये कहा गया है कि हम अपने हुसैन को अपने इमाम हुसैन को इस बार अकेला नहीं छोड़ेंगे। वो कर्बला की याद कर रहे हैं जब इमाम हुसैन को तन्हा छोड़ दिया गया था।

कोई नहीं था रसूल अल्लाह के नवासे के साथ में कोई भी नहीं था जिसने इस्लाम दिया दुनिया को जिसने जिसने लोगों को ताकत दी कोई भी उनके नवासे के साथ खड़ा नहीं था प्यासे शहीद हो गए तो इस बार ये नारे लगे हैं जब लोग घरों को लौट रहे थे जुलूस की शक्ल में नमाज के बाद तो उन्होंने कहा कि हम अपने हुसैन को नहीं छोड़ेंगे कुछ लोगों ने अकेला छोड़ दिया था लेकिन हम नहीं छोड़ेंगे और जंग में मैदान खाली नहीं होगा लोग इसलिए निकल रहे हैं ईरान में कि मैदान खाली नहीं होगा। दुश्मन को यह ना लगे कि लोग डर गए, लोग छिप गए, लोग घबरा गए। रिजीम चेंज करने का मौका आ गया। ये कतई नहीं होगा। ये ईरान की आवाम और यहां यहां ये बताना जरूरी हो जाता है कि सीएनएन जैसे जो अंतरराष्ट्रीय जो चैनल हैं वो उनकी टीम भी अब तेहरान पहुंची है। ईरान में जाके रिपोर्ट कर रही है और उनके रिपोर्टर्स भी ये दावा कर रहे हैं जो कि हम सोशल मीडिया पर भी होते देखते हैं। लेकिन जाहिर सी बात है जब आप इस तरह का कोई वीडियो देखते हैं। आपको वो हैरान करता है। आप सोचते हैं यार कहीं ये कोई एजेंडा तो नहीं है। कहीं ये इसमें कोई झूठ तो नहीं बोल रहा है। लेकिन बकायदा सीएनएन की टीम भी इस बात को अब रिपोर्ट कर रही है कि कोई पैनिकिक उनको नहीं दिखता। लाइफ नॉर्मल है। जाहिर सी बात है युद्ध है। हमले चल रहे हैं। लोगों में एक डर तो होगा लेकिन जो जिंदगी जो है खासतौर पे अभीकि रमजान के दिन चल रहे हैं। उसमें लोगों ने रोजे रखे हुए हैं। इफ्तार होता है। वो सारी चीजें और जैसे आज खासतौर पे जो जुम्मे का दिन था तो उस पे लोग वैसे ही थे नॉर्मल जैसा इमरान ने बताया कि लोग अशांति से अपने घर से निकले। ने अपनी इबादत की

, अपने रहबर को याद किया और वहां पे किसी तरह का कोई पैनिकिक नहीं था या किसी तरह की कोई हम कहें कि एक एक जो कुलबुलाहट होती है वो नहीं थी और शायद ये अपने तरीके से ये इमाम खामई को श्रद्धांजलि देने का एक तरीका था। बिल्कुल ये था। और आखिर ज़दी साहब ने एक चीज और बताई है ईरान से कि वहां पर लोग किसी भी तरह का कलेक्शन नहीं कर रहे हैं। मतलब पेट्रोल इकट्ठा करना। जैसे होता है ना कि भ पेट्रोल इकट्ठा कर लो, डीजल इकट्ठा कर लो, सामान इकट्ठा कर लो कि कल को क्या दिन आए, क्या मौका आए। ऐसा कुछ भी नहीं है। रोजमर्रा के हिसाब से जिंदगी चल रही है और लोग इस बात को अच्छे से समझ रहे हैं कि अगर हमने ऐसा किया तो दूसरों को तकलीफ हो जाएगी और एक गलत मैसेज चला जाएगा। जितना ये काम ना करो उतना अच्छा है ताकि जनजीवन सामान्य तौर पर चलता रहे। और दुश्मन इसमें भी मुंह की खाए कि ईरान में वो कोई पैनिकिक ही नहीं क्रिएट करवा पाए। इतना बम मारा, इतने फाइटर जेट उड़ाए, इतना हमले बोले, लेकिन कोई पैनिकिक ही नहीं हुआ। कमाल का जज्बा है। यही जज्बा हुसैनी है जिसका हम एक्सपर्ट के हवाले से बार-बार जिक्र करते हैं।

इसके लिए आपको उसको समझने के लिए थोड़ा पढ़ना पड़ेगा। इसको पढ़ना पढ़ ये अध्ययन की चीज है और हम लोगों के लिए भी अध्ययन की चीज है कि वाकई क्या लाखों लोग, करोड़ों लोग इस तरह से सोच सकते हैं। इस तरह से रिएक्ट कर सकते हैं? क्या एक सा ऐसा व्यवहार कर सकते हैं? बिना किसी जोर जबरदस्ती के ये बड़ी बात है। बिल्कुल ये बहुत बड़ी बात है और शायद यहीं पर अमेरिका और इजराइल मार खा गए कि जो वो रिजीम चेंज करना चाहते थे जिसके लिए जरूरी था कि वो पैनिकिक हो जिसके लिए जरूरी था कि लोग गुस्से में आ जाए, भड़क जाए, रिएक्ट करें तो वो बिल्कुल नहीं हो पाया। और अभी से कुछ दिन पहले जो लोग सड़कों पर उतरे हुए थे वो भी अब बाहर नहीं आ रहे हैं या अगर आ रहे होंगे तो बहुत इतने सीमित होंगे कि उनको कोई नोटिस नहीं कर रहा या वो लाइमलाइट में नहीं आ पा रहे हैं यूं कह लें और जिन लोगों के बारे में आप ये बता रहे थे कि सब लोग नॉर्मल बिहेव कर रहे हैं हो सकता है

कि जिस दिन ये युद्ध शुरू हुआ था जिनको निकलना होगा वो निकल गए होंगे अब जो बचे हैं वो वही वाले हैं कि भाई हम यही हैं हम कहीं नहीं जा रहे अपनी सरकार के साथ अपने प्रशासन के साथ और अपने देश के साथ हम अंत तक खड़े रहेंगे। तो यह 22वीं लहर में क्या कुछ था खास यह हमने आपको बताया। इस तरह के और वीडियोस आप तक लाते रहेंगे। हर वीडियो में आपसे यही अपील कर रहे हैं कि इसको प्लीज शेयर कीजिएगा। बहुत अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पे, अपने घर पे, रिश्तेदारों में सब जगह इसको शेयर कीजिएगा। ज्यादा से ज्यादा इसको बढ़ाइएगा ताकि लोगों तक पहुंचे। सही जानकारी पहुंचे और हमें भी एक प्रोत्साहन मिले कि इस तरह की और चीजें, इस तरह के और वीडियोस, कंटेंट आपके लिए हम बनाते रहें। इस वीडियो में फिलहाल इतना ही। हमें इजाजत दें। बहुत शुक्रिया। शुक्रिया।

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