तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डारे द मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डारे द है सुनील लोधी आंखों में रोशनी नहीं है लेकिन आवाज ऐसी कि सुनने वाला बस सुनता रह जाए बुंदेलखंड के 25 साल के सुनील की आवाज आज देश भर में गूंज रही है वजह है फिल्म हनुमान हनुमान अंश में गाया उनका बुंदेली भजन। मैंने तुम्हारे भरोसे हनुमान सागर में नया डाल दई सुनील की आवाज में गाया। यह भजन सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।
लोग इस पर रील्स बना रहे हैं। लेकिन सवाल यह कि स्कूल और भजन मंडलियों में गाने वाले सुनील को फिल्म में गाने का मौका आखिर मिला कैसे? यह कहानी खुद सुनील ने एमपी तक से खास बातचीत में बताई। दरअसल, सुनील लोधी ने बचपन से ही इस दुनिया को नहीं देख सके।
उन्होंने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा। लेकिन मुश्किलों के बीच उनकी आवाज ही उनका सहारा बनी। कभी भजन मंडलियों में तो कभी छोटी-छोटी महफिलों में गातेगाते उनकी आवाज लोगों तक पहुंचने लगी। और एक दिन इसी आवाज से दम पर उन्हें मुंबई से बुलावा आ गया। भैया बहुत-बहुत मेरे दर्शकों का स्वागत है और मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मैंने पूरे परिवार सहित मूवी मतलब पारदी का बहुत-बहुत स्वागत करते हैं पहले तो के उनकी टाकी जिससे आज पिक्चर हम लोग देख रहे हैं और पूरा माता-पिता के साथ पूरे परिवार पूरे जो हमारे मौसा मौसी बुगा तो मेरे साथ सब मेरे परिवार मौजूद है और गुरु जी हैं अंकित पांडे जी रोहित मामा हैं और सब दर्शकों का मैं दिल से बिल्कुल धन्यवाद देना चाहता हूं बिल्कुल परिवार के साथ जो लोगों का सपना होता है।
फिल्म देखने का तो आपका आज वो सपना पूरा हुआ और खासकर इसमें जब आपका गाना भी है तो इसको कैसे देखते हैं? बहुत-बहुत मेरे दर्शकों ही का स्वागत है और मामा जी थोड़ा सा भैया को बताओ आके यहां पे और गुरु जी आप बात करो। बात हम कर लेंगे उनसे थोड़ा। जी ये थोड़ा सा गाना आप सुनाएंगे। जी मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डारे द मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डारे द अरे काहे की बनाओ बनाई काहे की पतवार रामा काहे की लगा द जंजीर सागर में नैया डारे द दरअसल सागर के जैसी नगर तहसील के अगरा गांव से है। सुनील की जिंदगी आसान नहीं रही। बचपन से दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी कमजोरी को अपनी मंजिल के रास्ते में नहीं आने दिया। सुनील बताते हैं कि जिंदगी में एक दौर ऐसा भी आया जब वह बेहद निराश हो गए थे।
दोस्तों के साथ नदी किनारे गए एक घटनाक्रम के बाद वह उनसे बिछड़ गए। इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान कर दिया। लेकिन उस मुश्किल वक्त में दोस्त रोहित ने उनका हाथ थामा और यही दोस्ती आगे चलकर सुनील की जिंदगी बदलने वाली थी। जो आपका संघर्ष रहा जैसे बताया परिवार में छह लोग थे। एक एकड़ जमीन थी तो उस समय कैसी परिस्थितियां थी और कैसे इस संघर्ष से निकल के आप यहां तक पहुंचे हैं? भैया संगीत थोड़ा सा संगीत ऐसा था कि पहले हम मतलब कराऊ के म्यूजिक पर गाते थे मेरी वो जो गुरु के आशीर्वाद के गुरु मिला है मतलब संगीत के क्षेत्र पे तो सबसे पहली सीख मुझे लता जी से मिली है क्योंकि उनको दरअसल वहां पे पहुंचना तो नामुमकिन है बट उनके जो कुछ-कछ गाने हैं वो मेरे दिल में बस गए और बस संगीत का सफर यहीं से शुरू हो गया फिर उसके बाद में बुंदेली दुनिया पेज है उस पे मैंने कई सारे वीडियो डाले दूला वायरल हुआ तो हमारे अंकित भैया हैं गुरु जी उन्होंने मुझे एक गाना गवाया उसी तर्ज पे एक रैप वर्जन आया था मेरा मैं जो भी गाना चाहता हूं ठीक है अरे दूल्हा बनके आ गए जीजा है जीजी को ब्याह मोरे रैया ने भोरा ए दूल्हा बनके आ गए जीजा है जीजी को ब्याह मोरे रैया ने भोरा अरे फुआ आई बन ठन के ऐसी लग रही है कट ना जैसी मौसी देखो कहर मचा रही भौजी देखो ठुमका लगा रही माई ने देखो सबको दीवानो बनाए मन रैया ने मोरा तो इस गाने को भी दर्शकों ने बहुत सारा प्यार दिया और उसके बाद में फिर मैंने बुंदेली दुनिया पे जो हमारे रोहित मामा है ताजली थे उनके पेज पे फिर मैंने कुछ गाने डाले तो मोरे संकट के कटैया हनुमान तो एक गाजी सलैया नाम है अपना गांव वहां से मैंने उसको शूट किया तो वह अच्छा खासा कंटेंट है मेरे दर्शकों ने पसंद किया तो जब संकट के कटैया हनुमान चलाया तो पंकज वीआर के इंदौर से उन्होंने जैसे ही गाना रिकॉर्ड किया और फिर डाला तो मेरे दर्शकों का काफी सारा मुझे प्यार मिला वहां से फिर यहीं से मुंबई का सफर हुआ फिर फिल्म हनुमान अंश से कैसे जुड़े वो कहानी संक्षेप में बता सकता हूं।
मैं थोड़ी सी वो साईं बाबा स्टूडियो से कॉल आए मुझे मुंबई से तो साईं बाबा स्टूडियो में मेरे चारप गाने रिकॉर्ड हुए। उसके बाद में रिकॉर्ड करने के बाद हम बार सुबह घूमने गए तो वहां पे हमने कुछ पोस्ट डाली रोहित मामा ने तो वहां से वो पोस्ट देख के और विशाल चतुर्वेदी सर हैं डायरेक्टर जी। उन्होंने कांटेक्ट किया कि क्या आप मुंबई में हैं अभी? तो हम लोगों ने बोला कि हां ठीक है मुंबई में हैं सर। तो दरअसल उन्होंने बोला कि मुझे आपसे कुछ पर्सनली चर्चा करनी है। तो वहां से हम उन्होंने मतलब सहयोग की बात ये रही कि जहां पे मेरा रूम था वहीं पे थोड़ी 1 कि.मी. अंगारे उनका ही रूम है ओसी कॉलोनी में। तो 12:00 बजे के समथिंग हम रात में गए रिकॉर्डिंग करने के बाद। तो फिर उन्होंने बोला कि हनुमान पिक्चर आई है और मैं यह चाहता हूं कि कोई आपका हनुमान जी का मुझे सॉन्ग चाहिए। तो मैंने दरअसल तीन चार गाने उनको बताए। उनमें से ये गाना सेलेक्ट हुआ है। ये पारंपरिक सॉन्ग है। तो फिर इसको हनुमान अंश में लिया गया। आगे और इस गाने के वायरल होने के बाद आप देश भर में धूम मचाए।
कुछ और ऑफर आए हैं क्या? हां, ऑफर तो बहुत सारे आए हैं। जैसे कुछ मुंबई से भी कॉल आए हैं। कुछ शो के लिए कॉल आए हैं। मेरी बस दर्शकों से यही सपना है और मेरा यही रिक्वेस्ट है कि शायद मैं जुबिन नोटियाल के साथ में एक सॉन्ग करना चाहता हूं। तो वो मेरी शायद आवाज तो नहीं है उन जैसी। बट कोशिश यही करना है कि उन तक पहुंच तो जाए वीडियो शायद वो कवर कर सकती हैं।
सुनील की कामयाबी से उनका परिवार बेहद खुश है। कभी जिन हालात में बेटे के भविष्य को लेकर चिंता होती थी आज उसी बेटे की आवाज देश भर में सुनी जा रही है। माता-पिता को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उनके बेटे का गाया भजन इतनी बड़ी पहचान बन चुका है। आपका जो बेटा है सुनील आज पूरे देश भर में उसका नाम हो रहा है। क्या कहेंगी? अच्छा है। बचपन से काफी परेशानियों में रहा।
लेकिन अचानक से जो है अब उसप हनुमान जी की भी कृपा बताई जा रही है। बड़ा है। क्या कहेंगे? सबकी आशीर्वाद। क्या नाम है आपका? अब ठीक लग रहा है। नाम हो रहा है सुनील का। क्या कुछ कहना चाहेंगे लोगों से? सुनील को इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके गुरु अंकित पांडे का भी बड़ा योगदान है। उन्होंने सुनील की आवाज को तराशने में मदद की और उनके हुनर को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। सुनील की इस कामयाबी पर उनके गुरु भी बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सुनील को बहुत कुछ सिखाया। लेकिन सुनील से उन्होंने खुद भी बहुत कुछ सीखा। वीडियो था दूल्हा बन के आ गए ठेला। इसके पहले हमने गौरा सांची गवाओ एक जो वासुदेव हैं उनको गवाया था। बहुत ज्यादा वायरल हुआ था। फिर हमने सुनील की वीडियो देखी। फिर हम सुनील को गांव लेने के लिए गए। वो ब्लॉग डला हुआ है सुनील का। प्रॉपर ब्लॉग बना हुआ है। घर पे गए सुनील के पास गए और सुनील की आवाज बहुत सुरीली है। आप वो दूल्हा बन के आ गए। ठेला एक बार सुनना। उसमें ना इतना सुरीला गाया है सुनील ने। एकदम जो तानसेन बेजू बाबरा लोग गाते ना एकदम सुरीला है। तो हम गए उसको लगाया दूल्हा बन के आ गया जीजा। फिर धीरे-धीरे और से बात होती रही इंदौर में जिस जिनज से बात हुई हमें गवाना है तो बात करते-करते सुनील को पहुंचाते गए। सुनील का सबसे ज्यादा गाना वायरल हुआ है मोरे संकट के कटैया हनुमान वह बहुत ज्यादा वायरल हुआ और सुनील को थोड़ा सा बताते भी रहते हैं कि क्या कैसे करना है क्योंकि शास्त्री संगीत में हमने खैरागढ़ से पढ़ाई की है जितना बनता है सुनील को सिखाते रहते हैं और सुनील पे जितना आता है वो मुझे सिखाता रहता है तो दोनों एक दूसरे से सीखते रहते हैं और बस यह है कि सुनील बहुत आगे बढ़े बहुत ज्यादा नाम हो उसके जो घर वाले हैं उसको दिखता नहीं है हम लोग दिल्ली गए थे तो साथ में ले गए थे उसको दिखता नहीं है तो उसको बहुत समस्या होती है एक जन को उसकी क्या है दिमाग में ना उसकी नस में प्रॉब्लम है अगर नस में प्रॉब्लम नहीं होती ना तो वो देख सकता था अपन आंख उसकी चेंज करवा सकते थे ये आंख सही है उसकी नस में प्रॉब्लम है ।
उसकी तो अपन उसको ठीक नहीं करवा पा रहे हैं कहीं चेकअप वगैरह करवाया हां चेकअप हुआ है उसका नस में प्रॉब्लम है इसलिए नहीं करवा पा रहा उसके लिए और धीरे-धीरे हालांकि उसकी बचपन से है तो उसको को एहसास नहीं उस चीज का। उसको दुख भी नहीं है इस चीज का। खुश रहता है, बढ़िया रहता है। उसको कोई चीज का दुख नहीं है। क्योंकि बचपन से अगर कुछ बीच में अगर कुछ घटना घटे और हो जाना तो थोड़ा सा समस्या होती है बचपन से। वो खुश रहता, बढ़िया रहता। सरस्वती माता की कृपा है और सुनी लोगों का भड़कपन है।
सबका प्यार है। उसमें एक चीज हमने देखी है। अभी इतना नाम हो गया लेकिन उसमें घमंड नहीं आया क्योंकि यही होना चाहिए क्योंकि लोग थोड़ा सा ही आगे बढ़ जाते हैं। थोड़ा सा ही ये तो बहुत आगे पहुंच गया है। थोड़ा सा ही आगे बढ़ जाते हैं। इतना घमंड आने लगता है ना कि अपने क्षेत्र के लोग, अपनी जो संस्कृति है, अपने जो लोग सपोर्ट करने वाले हैं उनसे भी पीछे हट जाते हैं कि अरे हम तो अब स्टार बन गए। ऐसा सुनील में ऐसा कुछ भी नहीं है। फिलहाल कभी जिंदगी की मुश्किलों से जूझ रहे सुनील के लिए आज वही आवाज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।
शुरुआत में फिल्म को खास प्रतिक्रिया नहीं मिली लेकिन सुनील का गाया भजन वायरल होने के बाद फिल्म को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी। मिली जानकारी के मुताबिक करीब ₹2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म की कमाई ₹30 करोड़ से ज्यादा पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि इन आंकड़ों से कहीं बड़ी कामयाबी सुनील के लिए वह पहचान है जो उन्हें उनकी आवाज ने दिलाई है। जिस सुनील की आंखों ने कभी दुनिया की रोशनी नहीं देखी। आज उनकी आवाज हजारों लाखों लोगों तक पहुंच रही है। साधारण परिवार से निकलकर फिल्म तक का यह सफर बताता है कि हुनर को अगर मौका मिल जाए तो मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी मंजिल तक पहुंचा सकता है और अब सुनील की आवाज सिर्फ सागर और बुंदेलखंड की पहचान नहीं बल्कि देश भर में उनकी नई पहचान बन चुकी है।