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Samsung की वो लड़ाई जिसमें राष्ट्रपति की तक कुर्सी चली गई!

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साउथ कोरिया के एक छोटे से शहर गुमी में मार्च 1995 के एक सुबह एक फैक्ट्री के बाहर खुले मैदान में करीब 2000 लोग कतारों में खड़े थे। इनमें इंजीनियर्स थे, फैक्ट्री के मजदूर थे, बड़े-बड़े अफसर भी थे। हर एक के सिर पर एक सफेद पट्टी बंधी थी। जिस पर लिखा था क्वालिटी फर्स्ट यानी सबसे पहले गुणवत्ता क्वालिटी। और इन लोगों के ठीक सामने मैदान के बीचों-बीच एक पहाड़ सा बना हुआ था। लेकिन यह पहाड़ मिट्टी या पत्थर का नहीं था। यह पहाड़ बना था फोन से, फैक्स मशीनंस से। ₹1,400 से ज्यादा बिल्कुल नए ब्रांड न्यू डिवाइस थे। जिनकी कीमत उस वक्त करीब $5 करोड़ थी। यानी आज के रुपयों में ₹400 करोड़ से भी ज्यादा। फिर एक इशारा हुआ। कुछ कर्मचारी आगे बढ़े। उन्होंने हथौड़े उठाए और एक-एक करके इन फोंस को इन फैक्ट्स मशीनंस को तोड़ना शुरू कर दिया। जब ढेर सारा मलबा इकट्ठा हो गया तो उस पूरे ढेर पर एक जाल डाला गया। ऊपर से पेट्रोल छिड़का गया और आग लगा दी गई। प्लास्टिक और धातु धीरे-धीरे पिघलते रहे और जब आग ठंडी पड़ी तो एक बुलडोजर आया और बचा कुचा मलबा भी जमीन में मिला दिया गया। जिन इंजीनियर्स ने यह फोन अपने ही हाथों से बनाए थे। उनमें से कई की आंखों में आंसू थे। कंपनी के एक पुराने अफसर ने बाद में बताया कि उन लोगों को ऐसा लगता था जैसे उनकी अपनी औलाद मार दी गई हो। और उस जलते हुए ढेर के सामने थोड़ी दूरी पर एक कुर्सी पर बैठा आदमी यह सारा मंजर चुपचाप देख रहा था। यही वो आदमी था जिसने ही आग लगवाई थी। यह थे उस कंपनी के चेयरमैन। उन्होंने वहां खड़े अपने कर्मचारियों से सिर्फ इतना कहा कि अगर तुमने आगे भी ऐसे घटिया प्रोडक्ट बनाए तो मैं फिर वापस आऊंगा और दोबारा यही करूंगा। जिस कंपनी के फोन उस दिन जलाए जा रहे थे उसका नाम था Samsung। वही Samsung जिसका फोन शायद इस वक्त आपकी जेब में होगा या जिसका टीवी आपके घर में लगा होगा। नहीं होगा घर में तो आपने देखा तो होगा Samsung का टीवी या फ्रिज या वाशिंग मशीन। आज यह दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनीज में से एक है। लेकिन यह कंपनी सिर्फ एक फोन या टीवी बनाने वाली कंपनी नहीं है। साउथ कोरिया में तो हालात ऐसे हैं कि आप चाहकर भी Samsung से बच नहीं सकते। वहां एक आम इंसान अक्सर Samsung के बनाए अस्पताल में पैदा होता है। Samsung की इंश्योरेंस पॉलिसी से उसका इलाज होता है। वो Samsung की बनाई इमारतों में काम करता है और Samsung के थीम पार्क में घूमने भी जाता है। पूरे देश का जितना एक्सपोर्ट होता है कोरिया एक्सपोर्ट बहुत करता है साउथ कोरिया। उसका करीब 20% अकेले Samsung का होता है। जैसे यूएस में बोइंग है वैसे साउथ कोरिया में Samsung है और यही वजह है कि कई लोग साउथ कोरिया को मजाक में रिपब्लिक ऑफ Samsung भी कहते हैं।

यही Samsung इन दिनों एक संकट से गुजर रही है। पैसों की दिक्कत तो नहीं है। कंपनी अपने कर्मचारियों को 4-4 करोड़ का बोनस बांट रही है। Samsung के लिए दिक्कत है या संकट जिसे कहना चाहिए वो उत्तराधिकार का है। एक ऐसी लड़ाई जिसमें एक पिता ने अपने ही बेटे को गोल्फ स्टिक लेकर दौड़ाया जिसमें एक बेटे ने अपने ही बाप के खिलाफ चुपके से सरकार को चिट्ठी लिख दी और जिसमें राजगद्दी पाने का हकदार समझा जाने वाला एक बेटा आखिर में मछुआरों के एक गांव में गुमनाम मौत मर गया। वो कौन सा बेटा था जिसे यह पूरा साम्राज्य मिलना था लेकिन उसके अपने पिता ने उसे ठुकराया। वो चिट्ठी क्या थी जिसने एक बाप और बेटे को हमेशा के लिए दुश्मन बनाया और एक कंपनी अपने ही ₹400 करोड़ के फोन को आग में क्यों झोंक देती है और आखिर में वो कौन सा सौदा था जिसकी कीमत एक पोते को जेल जाकर और एक राष्ट्रपति को अपनी कुर्सी गवाकर चुकानी पड़ी। नमस्ते मैं हूं निखिल और आप देख रहे हैं अलिफ फैला जिसमें आज कहानी Samsung के अंदर चल रही सक्सेशन वॉर की। ये कहानी शुरू होती है उस गद्दी से जिसके लिए यह पूरी जंग छिड़ी और यह गद्दी बनी थी एक बहुत ही मामूली दुकान से साल था 1938 कोरिया उन दिनों जापान का गुलाम था सेकंड वर्ल्ड वॉर का टाइम चल रहा है उपनिवेश बना लिया था जापान ने उसी दौर में कोरिया के एक शहर देगू में एक नौजवान ने एक छोटी सी दुकान खोली थी उतनी भी छोटी नहीं थी नौजवान का नाम था लीबंग चूल इस दुकान में 19 लोग काम करते थे और यहां ताजी सब्जियां और सूखी मछली बेची जाती थी। लीबंगचुल ने इस दुकान का नाम खूब सोच समझ कर रखा था Samsung। कोरियाई भाषा में इसका मतलब होता है तीन सितारे। उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा कि तीन का अंग कोरिया में बड़े मजबूत और ताकतवर होने का प्रतीक है और सितारे का मतलब है हमेशा ऊपर चमकते रहना। तो Samsung एक मछली बेचने वाली दुकान के लिए यह नाम कुछ ज्यादा ही बड़ा था। ग्रैंड था। लेकिन ली बंगचुल के इरादे शुरू से ही उतने बड़े थे। यह दुकान बड़ी होती गई। मछली और सब्जी से आगे चलकर यह चीनी बनाने लगी। कपड़ा बुनने लगी। इंश्योरेंस बेचने लगी और फिर इसने वो दांव खेला जिसने इसकी किस्मत बदल दी। लीबंगचुल ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर्स यानी कंप्यूटर चिप्स बनाने के कारोबार में उतरने का फैसला किया। बड़ा महंगा और जोखिम भरा काम था। लेकिन यही चिप आगे चलकर Samsung को दुनिया के शिखर पर ले जाने वाली थी। Samsung आज दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी कंपनी है। पत्रकार जेफरी केन जिन्होंने इस कंपनी पर एक बहुत चर्चित किताब लिखी है Samsung राइजिंग। वो बताते हैं कि साउथ कोरिया में ली परिवार की हैसियत किसी राजघराने की तरह है। और जैसा हर राजघराने के साथ होता ही है। यहां पे भी पावर को लेकर संघर्ष हुआ। सवाल यह था कि इतने बड़े साम्राज्य का अगला राजा कौन बनेगा? विवाद शुरू हुआ साल 1976 में Samsung तब एक चबल बन चुका था। चबल माने क्या? कोरिया में किसी बहुत बड़ी फैमिली रन एंटप्राइज को इस नाम से पुकारा जाता है चेबल। तो जैसे हिंदुस्तान की आप बात करेंगे तो गोदरेज टाटा या बिरला समूह जो है भारतीय चेबल कहलाएंगी। Samsung कोरिया का सबसे मशहूर और ताकतवर चेबल है। 1976 में भी Samsung इतनी कामयाब थी कि शिप बिल्डिंग जैसे हैवी इंडस्ट्रियल सेक्टर में एंट्री कर चुकी थी। इसी साल Samsung के फाउंडर लीबंगचुल ने अपने सबसे छोटे बेटे को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। अब नाम तो आया एक छोटे बेटे का लेकिन लीबंगचुल के तीन बेटे थे।

कोरियन ट्रेडिशन के हिसाब से सबसे बड़े बेटे को पिता की गद्दी मिलनी चाहिए थी और इस बेटे का नाम था लीग ही। उन्हें कंपनी का असली मालिक माना भी जाता था और कुछ वक्त के लिए कंपनी की कमान उन्हें सौंपी भी गई थी। इसके बाद क्या हुआ? इस बारे में अलग-अलग वर्जन है। लीगही खुद कहते थे कि उन्होंने 7 साल तक कंपनी को चलाया लेकिन उनके पिता को उनके काम करने का तरीका रास नहीं आया। कहा जाता है कि लीगही का स्वभाव बहुत सख्त और गुस्सैल था। एक किस्सा है कि उन्होंने अपने पिता के एक बड़े सम्मानित सलाहकार को एडवाइजर को अपने ऑफिस में बुलाकर अपने सामने घुटनों पर बैठने को मजबूर किया था। आखिरकार लीबंगचुल ने खुद वापस कंपनी की कमान संभाली और बड़े बेटे को किनारे किया। इस बीच एक और घटना ने इस परिवार में दरार को गहरा किया। लीबंगचुल के मझले बेटे दूसरा बेटा जो था ली चाचांग ही अपने पिता से नाराज थे। जोफरी केन अपनी किताब में लिखते हैं कि इस बेटे ने चुप देश के तब के राष्ट्रपति को एक गुमनाम चिट्ठी भेजी जिसमें उन्होंने अपने ही बाप की उस जमीन जायदाद और संपत्ति का ब्यौरा दे दिया जो वह अपने पास रखे हुए थे। तो यहां एक बेटे ने अपने ही पिता के खिलाफ सरकार को मुखबिरी की थी। तो ऑब्वियसली बाप और बेटे के बीच ऐसी खाए फिर खुदी जो कभी नहीं पटी। यही बेटा बाद में गुमनामी में खो भी गया। अब बचा सबसे छोटा बेटा। साल 1976 में ली बंगचुल ने अपने परिवार के सामने ऐलान किया कि भविष्य में Samsung की कमान उनका सबसे छोटा बेटा संभालेगा ली कुन ही। सबसे बड़े बेटे लीगही के लिए सदमे की तरह था। ठुकराया हुआ यह सबसे बड़ा बेटा यह राजकुमार जो कभी राजा बनने वाला था। आखिरकार एक मछुआरों के गांव में जाकर गुमनामी की जिंदगी जीने लगा। वहां के मछुआरे उन्हें तंज में चेयरमैन करके बुलाते थे। एक बीमारी की वजह से वह हल्का लंगड़ाकर भी चलते थे। लोगों को बताते थे कि उनके पिता ने उनका पैसा बंद कर दिया जो वजीफा कुछ मिलता होगा। यहां तक कि एक वक्त ऐसा भी आया जब उनके पास बस का किराया तक नहीं होता था। धीरे-धीरे शक की मिजाज के होते गए। उन्हें लगता था कि हर कोई उनका पीछा करता है और Samsung के अंदर के लोग उन्हें पागलखाने में डलवाने या अगवा करवाने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने एक बार एक पत्रकार से यह भी कहा था कि उन्हें एक बार घर से भागना पड़ा था क्योंकि उनके अपने पिता उन्हें गोल्फ स्टिक घुमाते हुए पागलों की तरह दौड़ा रहे थे। साउथ कोरिया के एक लेखक ने उन्हें Samsung का प्रिंस साधो कहा था। ऐतिहासिक संदर्भ है इसका। 18वीं सदी में कोरिया में प्रिंस साधो नाम का एक राजकुमार था। 27 साल का था और मानसिक रूप से बीमार हो गया। ऐसा इल्जाम लगा और फिर उसके अपने पिता ने सजा के तौर पर उसे चावल रखने की एक बड़ी पेटी में बंद कर दिया जहां भूख से तड़प कर वो मर गया। यानी एक ऐसा राजकुमार जिसे उसके अपने पिता ने राजा ने खत्म कर दिया। खैर नवंबर 1987 में लीबंग चुके कैंसर से मौत हो गई। केन लिखते हैं कि उनकी मौत के ठीक 25 मिनट बाद Samsung ग्रुप की कंपनियों के मुखिया एक जगह इकट्ठा हुए और उन्होंने सर्वस्मति से सबसे छोटे बेटे 45 साल के लीक ही को कंपनी का नया चेयरमैन चुन लिया। गॉड सेव द किंग। पिता का बनाया पूरा साम्राज्य उनके पांच बच्चों में बांटा गया। लेकिन सबसे कीमती हिस्सा यानी Samsung इलेक्ट्रॉनिक्स सबसे छोटे बेटे लीक उन्हीं के ही पास आई। और जैसे ही नया चेयरमैन गद्दी पर बैठा परिवार के अंदर पुराने हिसाब फिर चुगते किए जाने लगे। छोटे बच्चे को वैसे भी बहुत सुनना पड़ता है सबकी। उसके हाथ में पावर आती है तो फिर वो बदला लेता है। कैन अपनी किताब में एक किस्सा बताते हैं। नए चेयरमैन के एक बेहद करीबी रिश्तेदार जो उनके साथ जापान में पढ़ाई के दिनों में रहते भी थे। Samsung के गोलफ कोर्स पर अपने साथियों के साथ खेल रहे थे। कंपनी का जो अपना गोल्फ कोर्स वहां पे है। तभी क्लब का मैनेजर आया और उनसे बोला कि सर अब आप लोग इस क्लब के मेंबर नहीं हैं। आप प्लीज चले जाइए। सोचिए चेयरमैन से गहरी दोस्ती के बावजूद उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया और इस तरह उन्हें समझ में आया कि अब वो Samsung के लिए बाहरी हो चुके हैं। तब साम्राज्य की गद्दी पर वो बेटा बैठा था जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी लेकिन यह एक अजीब किस्म का इंसान था। एकदम चुप रहने वाला अकेलेपन में डूबा रहने वाला। Samsung के पुराने और जो अनुभवी ऑफिशियल्स थे ज्यादा इनको भाव नहीं देते थे।

आपस में ये कहते थे कि इस लड़के को तो किस्मत से Samsung मिली है। लेकिन यही चुप रहने वाला मामूली समझे जाने वाला बेटा आगे चलकर Samsung को वहां पहुंचाने वाला था जहां वो आज है। और इसके लिए वो एक दिन अपने ही $5 करोड़ डॉलर के फोंस को आग के हवाले भी करने वाला था। वहीं दूसरी तरफ ठुकराया हुआ सबसे बड़ा भाई 40 साल बाद एक आखिरी बार की तैयारी में था। एक ऐसा वार जो पूरे साम्राज्य को बिखेर भी सकता था। गद्दी पर बैठते ही लीक उन्हीं के सामने एक बहुत बड़ी मुश्किल आई। Samsung भले ही साउथ कोरिया की नंबर वन कंपनी थी, लेकिन दुनिया के बाजार में इसकी पहचान सस्ते और घटिया सामान बनाने वाली कंपनी की ही थी। Sony जैसे तगड़े इलेक्ट्रॉनिक ब्रांड्स के सामने Samsung की टीवी को कोई सीरियसली नहीं लेता था और नए चेयरमैन को यह बात रात-रात भर सोने भी नहीं देती थी। ऐसा कम से कम उन्होंने लिखवाया है अपने बारे में। उन्होंने खुद भी लिखा है कि 1992 की गर्मियों से लेकर सर्दियों तक उन्हें यही डर सताता रहा कि कहीं Samsung पूरी तरह खत्म ना हो जाए। उन दिनों वो 4 घंटे से ज्यादा नहीं सो पाते थे और उन कुछ महीनों में उनका वजन 10 किलो से ज्यादा गिर भी गया। फरवरी 1993 में उन्होंने अपने सबसे बड़े अफसरों को जो Samsung के टॉप बॉसेस और एग्जीक्यूटिव्स थे उन्हें अमेरिका के लॉस एंजेलिस में बुलाया और वहां से सबको एक वो स्टोर पर ले गए दुकान में इलेक्ट्रॉनिक्स की। उस दुकान में जापान और अमेरिका के टीवी आंखों के सामने वाली शेलफ पर सजे हुए थे। सब देख रहे हैं। और जो Samsung के प्रोडक्ट थे वो सबसे नीचे धूल खाते हुए पड़े थे। अमेरिका और जापान का सामान शेलफ में ऊपर और Samsung का प्रोडक्ट नीचे। लेकिन जैसा उन्होंने बाद में लिखा उनके अफसरों को उनके एग्जीक्यूटिव्स को यह बात बहुत सीरियस नहीं लगी। चिल में थे। तब उन्होंने वो किया जो आगे चलकर Samsung के इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनता है। जून 1993 में जर्मनी के शेरफ फ्रैंकफोर्ड के एक होटल में उन्होंने अपने एग्जीक्यूटिव्स को इकट्ठा किया और बिना किसी लिखे हुए भाषण के बिना किसी भूमिका के लगातार 8 घंटे तक बोलते रहे। उन्होंने कहा कि Samsung बर्बादी से एक कदम दूर रह गई है और फिर उन्होंने वो लाइन कही जो उनका जीवन मंत्र बनी। उन्होंने कहा कि अपनी बीवी और अपने बच्चों को छोड़कर बाकी सब कुछ बदल डालो। यह भाषण एक दिन नहीं चला। अगले तीन दिनों तक वह रोज 8 से 10 घंटे बोलते रहे और इसके बाद के 3 महीनों में उन्होंने अलग-अलग शहरों में कुल मिलाकर 350 घंटे से ज्यादा के लेक्चर दिए। लेकिन सिर्फ भाषणों से सब कुछ नहीं बदल जाता है। साल 1995 में चेयरमैन ने नए साल पर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को तोहफे में Samsung का एक नया फोन भिजवाया और उन्हें जानकर बड़ी शर्मिंदगीगी हुई कि कई फोन खराब निकले और वापस लौटा दिए गए। सोचिए Samsung के मालिक ने जो तोहफा दिया वह आपका लौट आ रहा है और क्यों फोन खराब है उस साल हालत यह थी Samsung की कि Samsung का हर आठवां फोन खराब निकलता था। जबन समझ गए कि उनका भाषण जमीन तक नहीं पहुंचा है और फिर मार्च 1995 की वो सुबह आई

जिसका जिक्र हमने शुरू में किया था। गुमी शहर की एक फैक्ट्री के बाहर खुले मैदान में $400 से ज्यादा बिल्कुल नए डिवाइस ब्रांड न्यू डिवाइस जला दिए गए। जैसा हमने पहले भी बताया उस वक्त कीमत इनकी $5 करोड़ के करीब थी। आज के रुपए में 400 करोड़ से भी ज्यादा की इन्वेंटरी फूंक दी गई। तो यह था कर्मचारियों को एक मैसेज। इसके बाद Samsung के लिए एक बड़ा मोड़ आया साल 1997 में जब एशिया में फाइनेंसियल क्राइसिस शुरू हुआ। कोरिया को इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड यानी आईएमएफ से इतिहास का सबसे बड़ा कर्ज लेना पड़ा और आम लोगों ने अपने मुल्क को बचाने के लिए अपने सोने के जेवर तक दान किए। Samsung ने संकट में अपने 1/3 कर्मचारियों को यानी करीब 300 लोगों को नौकरी से निकाला और अपना बहुत सारा बिजनेस लिक्विडेट भी किया। बेचा अपना कारोबार। लेकिन इस संकट के बाद ही Samsung पहले से ज्यादा फुर्तीली होकर निकली और अब उसका पूरा ध्यान उन्हीं कारोबारों पर था जो असल में मायने रखते थे। खासतौर पर वो मेमोरी चिप जिस पर बरसों पहले उन्होंने दांव लगाया था। यहां इस कहानी में एंट्री होती है Apple की। दरअसल Apple ने जब अपना पहला iPhone बनाया तो उसकी जो चिप थी Samsung की बनाई थी और इसके बाद Samsung और Apple के बीच एक होल्ड भी शुरू हुई। कैसे? Samsung ने खुद का ही स्मार्टफोन बना लिया। गैलेक्सी और मार्केट में उतार दिया। अब देखने में iPhone जैसा लगता था। बहुत सारे फीचर्स थे। तो स्टीव जॉब्स को इस बात का बहुत बुरा लगा। उन्हें लगा कि Samsung ने उनके iPhone को कॉपी किया है। साल 2011 में Apple ने Samsung पर दुनिया भर की अदालतों में मुकदमे ठोके और $.5 अरब डॉलर का हर्जाना मांगा। Samsung ने भी पलट कर मुकदमा किया। पैसा इनके पास भी था। 2012 में अमेरिका की अदालत ने मान लिया कि Samsung ने Apple की नकल की है और उस पर भारी हर्जाना लगाया। हालांकि Samsung ब्रिटेन, जापान और खुद साउथ कोरिया में कई मुकदमे जीती भी। कानूनी जंग बहुत लंबी चली। बहुत ट्विस्टेड डिबेट चली और आखिरकार 2018 में Apple और Samsung ने आउट ऑफ कोर्ट एक सेटलमेंट किया। Samsung का बिज़नेस जहां दिनरा तरक्की कर रहा था, वहीं एक लड़ाई इस साम्राज्य के भीतर चल रही थी। बड़े भाई और छोटे भाई की लड़ाई के बारे में हमने पहले बता दिया था। आगे भी चली और किस हद तक चली उसको आप एक किस्से से समझिए। जोफरी केन अपनी किताब में बताते हैं कि 1995 में चेयरमैन लीक उन्हीं के घर की छत पर एक वीडियो कैमरा लगाया गया था और माना जाता है सोचिए चेयरमैन के घर पर कैमरा लगाया तो उसका ऑब्जेक्टिव कैसा रहा होगा? माना जाता है कि इसका मकसद पास ही रहने वाले उनके उसी ठुकराए हुए बड़े भाई के परिवार पर नजर रखना था। अब यह कहानी यहां खत्म भी नहीं हुई। करीब 17 साल बाद 2012 में बड़े भाई की कंपनी ने पुलिस में शिकायत की कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि Samsung का एक एंप्लोई हमारी फैमिली के मेंबर्स का पीछा करता है। इस मामले में Samsung के चार कर्मचारियों पर आरोप लगे और उन पर जुर्माना भी लगा। हालांकि उन्हें दोषी करार नहीं दिया गया और Samsung ने इन आरोपों से फिर इंकार ही किया। फिर 2008 में एक और हंगामा हुआ। कंपनी के ही एक फॉर्मर अटॉर्नी ने वकील था। उसने इल्जाम लगाया कि Samsung एक सीक्रेट फंड चलाती है जिसका इस्तेमाल रिश्वत और राजनीतिक भुगतान के लिए किया जाता है। इस वकील का कहना था कि कंपनी में इतना भ्रष्टाचार फैला हुआ था कि उसका दम घुटता था। इस आरोप के बाद खुद चेयरमैन लीक ही और उनके बेटे जे लाई दोनों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा था। कोरिया में आग की शर्म है। वहां यह नहीं है

कि इल्जाम लगाया तो बैठे हुए हैं। देते हैं रेिग्नेशन। बाद में चेयरमैन रिश्वत के आरोपों से बरी भी हुए लेकिन उन्हें टैक्स चोरी का दोषी पाया गया और सजा भी हुई। वैसे यह सब बता रहे हैं तो यह भी सुन लीजिए कि बाद में उन्हें माफी मिली और वह फिर से चेयरमैन बने। परिवार के बीच संघर्ष का अगला चैप्टर शुरू हुआ 2012 में। सबसे बड़े भाई लीगही जो अब 80 साल के हो चुके थे। उन्होंने अपने छोटे भाई यानी चेयरमैन के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया। अदालत से उनकी मांग थी कि उन्हें Samsung के साम्राज्य में उनका वो हिस्सा वापस दिया जाए जो उनका हक था। अदालत ने माना कि बड़े भाई के कुछ दावों में तो दम था लेकिन तब तक इतना वक्त गुजर चुका था कि अब कानूनी तौर पर कुछ नहीं किया जा सकता था। नतीजा यह हुआ कि बड़े भाई जो थे लीग ही मुकदमा हार गए और 2015 में उनकी मौत भी हो गई। पूरे झगड़े ने सैमस के भविष्य पर एक बड़ा असर डाला। परिवार के सब लोग एक दूसरे से इतने नाराज थे कि चेयरमैन लीक उन्हीं ने ही तय कर लिया कि वह अपने बच्चों के लिए गद्दी की लकीर एकदम साफ खींचेंगे। कोई शक, कोई बंटवारा, कोई झगड़ा नहीं। अगला राजा सिर्फ एक होगा उनका इकलौता बेटा ली जे योंग जिन्हें दुनिया जे ली के नाम से जानती है। तो जे ली को सत्ता मिलनी थी। सब कुछ क्लियर था लेकिन किस्मत ने कुछ और ही सोच रखा था। मई 2014 में चेयरमैन लीक उन्हीं को अपने ही घर में दिल का दौरा पड़ गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया और फिर वो अगले छह सालों तक एक भी बार पब्लिक में नजर नहीं आए। इससे एक बड़ी मुसीबत खड़ी हुई कि चेयरमैन है तो जिंदा लेकिन अस्पताल में है। ऐसे में आगे का रास्ता था कि उनके वारिस जेली को सत्ता सौंप दी जाए। उनको चेयरमैन बना दिया जाए। लेकिन जेली के सामने एक बड़ी मुश्किल थी। कैसी बड़ी मुश्किल? एक ऐसा भारी भरकम टैक्स बिल जिसकी रकम सुनकर किसी के भी होश उड़ जाते। टैक्स क्या था? आपको हम आगे समझाएंगे। लेकिन अभी समझिए कि इस प्रॉब्लम का हल करने की कोशिश में जेली एक ऐसा सौदा करने वाले थे जो उन्हें तो जेल पहुंचाएगा ही देश के राष्ट्रपति की कुर्सी भी छीन लेगा। जब मई 2014 में चेयरमैन लीक ही अस्पताल में गुम हो गए तो साम्राज्य की कमान असल में उनके इकलौते बेटे जेली के हाथ में आ गई। लेकिन यहां एक दिलचस्प बात है। जिस बेटे को 30 साल से राजा बनने की ट्रेनिंग दी जा रही थी, उसे लेकर खुद कोरिया में बहुत भरोसा नहीं था कि यह कर पाएगा नहीं। जेली अपने पिता से बहुत अलग थे। पिता बड़े अग्रेसिव थे। हर हाल में रिजल्ट्स लाने वाले इंसान थे। जबकि बेटे को शर्मीला, चुप रहने वाला और कुछ ज्यादा ही कॉशियस माना जाता था।

कुछ लोग यह भी मानते थे कि उनकी बहन उनसे ज्यादा काबिल है और यह भी कहा जाता था कि जेली कंपनी चलाने की वो काबिलियत नहीं रखते। जेली का अपना एक प्रोजेक्ट E Samsung इंटरनेट के शुरुआती दौर में बुरी तरह फेल हुआ था। सवाल यह भी था कि क्या वो इस उलझे हुए साम्राज्य का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले पाएंगे और यही असली पेज भी था। दरअसल Samsung ग्रुप कंपनीज का एक समूह है कि एक कॉग्लोमरेट है जैसा हमारे यहां Tata है। लेकिन दिक्कत यह है कि Samsung ग्रुप में कोई एक मेन पेरेंट कंपनी एक होल्डिंग कंपनी नहीं है जो बाकी सब कंपनियों को संभालती हो। जैसे कि भारत में Tata SS है। इसके बजाय यहां दर्जनों इंडिपेंडेंट कंपनीज़ हैं जैसे Samsung इलेक्ट्रॉनिक्स, Samsung CNT, Samsung लाइफ इंश्योरेंस वगैरह-वगैरह-वगैरह। अब ये सब कंपनियां आपस में जुड़ी हुई हैं शेयर्स के जरिए। ऐसे समझिए कि कंपनी A के पास कंपनी B के शेयर हैं। कंपनी B के पास कंपनी सी के शेयर हैं और कंपनी C के पास वापस कंपनी A के शेयर हैं। क्यों किया गया ऐसा? दरअसल इस सिस्टम को ऐसा इसलिए बनाया गया ताकि ली परिवार Samsung पर अपना कंट्रोल रख सके। परिवार किसी एक कंपनी यानी मान लीजिए यहां पे कंपनी A इसमें अपने हिस्सेदारी बढ़ा ले तो वह बिना एक्स्ट्रा पैसा खर्च किए कंपनी B और C पर भी अपना कंट्रोल रख सकता है। आप आगे सुनेंगे और क्लियर होगा। Samsung ग्रुप की सबसे इंपॉर्टेंट कंपनी आज के डेट में Samsung इलेक्ट्रॉनिक्स है। ली परिवार सीधे तौर पर Samsung इलेक्ट्रॉनिक्स के बहुत कम शेयर्स का मालिक था। पहले 4 से 5% इतने कम शेयर्स के दम पर कोई भी बाहरी इन्वेस्टर आ सकता था और उन्हें कंपनी के बोर्ड से हटा सकता था। परिवार का नियंत्रण पूरी तरह इस बात पर टिका था कि समूह की दूसरी कंपनियां जैसे Samsung लाइफ इंश्योरेंस और Samsung CNT ये दो या ऐसी दूसरी कंपनी Samsung इलेक्ट्रॉनिक्स में बहुत शेयर्स रखती थी। इसलिए पूरे साम्राज्य पर राज करने के लिए उन बाकी कंपनीज़ पर कंट्रोल होना जरूरी था। जब 2014 में पिता अस्पताल गए तब जेली को इस नियंत्रण को कानूनी रूप से मजबूत करना था और इसके लिए एक तो सीधा रास्ता था कि Samsung इलेक्ट्रॉनिक्स के आप शेयर खरीदो।

लेकिन इस रास्ते में दो बड़े पेश थे। पहला इसके लिए अरबों डॉलर की जरूरत थी जो जेली के पास नहीं थे। इससे भी बड़ी दिक्कत थी एक टैक्स कोरिया में इन्हहेरिटेंस टैक्स लगता है। यानी बाप ने अपनी संपत्ति बेटे को दी तो टैक्स देना पड़ता है। यह टैक्स कई देशों में लगता है। लेकिन कोरिया सबसे ज्यादा इन्हहेरिटेंस टैक्स वाले देशों में से एक है। करीब 50% लेते। इसका मतलब था कि अगर जे ली को पिता की सत्ता मिलती है ना? पूरा Samsung का राजपाट मिलता तो उन्हें टैक्स के रूप में $ अरब डॉलर से ज्यादा यानी करीब ₹85,000 करोड़ का टैक्स देना पड़ता। अब इतने पैसे किसी के बैंक अकाउंट में तो होते नहीं है। जेली को यह टैक्स चुकाने के लिए परिवार के अपने शेयर्स बेचने पड़ते जो इन्हहेरिटेंस में मिल रहे थे। और अगर ऐसा होता तो कंपनी पर कंट्रोल और कमजोर होता क्योंकि नंबर ऑफ शेयर्स तो घट रहे हैं आपके। अब इस मुश्किल से निजात पाने के लिए ली फैमिली ने फिर एक तीसरा रास्ता निकाला। उंगली टेढ़ी की। साल 2015 में Samsung की दो कंपनियों का आपस में मर्जर किया। यह दो कंपनी थी Samsung कंस्ट्रक्शन एंड ट्रेडिंग कॉरपोरेशन, Samsung CNT और chीलel Industries मर्जर क्यों किया गया आपको समझना पड़ेगा। जैसे पहले हमने बताया था Samsung में हर कंपनी के पास दूसरी Samsung कंपनी के शेयर होते हैं। तो Samsung CNT के पास Samsung इलेक्ट्रॉनिक्स में लगभग 4% शेयर थे। मतलब

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