जिस आश्रम में श्रद्धालु आस्था और शांति की तलाश में पहुंचते हैं। उसी श्री राधा केलीकुंज आश्रम को लेकर अब एक के बाद एक गंभीर दावे सामने आ रहे हैं। संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद विवाद बढ़ा। गुटबाजी के आरोप लगे। बच्चों के लापता होने को लेकर सवाल उठे और अब संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जेड प्लस सुरक्षा की मांग कर दी गई है। लेकिन आखिर इन दावों के पीछे पूरा मामला क्या है?
चलिए आपको समझाते हैं। वृंदावन का श्री राधा केलीकुंज आश्रम इन दिनों चर्चा में है। संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मृत्यु के बाद आश्रम को लेकर कई तरह के सवाल और आरोप सामने आए। अब श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। दिनेश फलाहारी का दावा है कि संत प्रेमानंद के शिष्यों के बीच दो गुट बन गए हैं। उनका आरोप है कि एक गुट श्री राधा केकु से जुड़ा है जिसमें आपराधिक प्रवृत्ति के लोग और कथित भूमाफिया शामिल हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग संत की आड़ में संपत्तियों और आश्रम संचालित कर रहे हैं।
हालांकि यह गंभीर आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। पत्र में दावा किया गया है कि गुटबाजी से आहत होकर संत प्रेमानंद महाराज अपने साथ कुछ अन्य तपस्वीयों के साथ यमुना पार बेलवन स्थित अपने आश्रम में चले गए। दिनेश फलाहारी ने संत प्रेमानंद जी की सुरक्षा के लिए Z प्लस श्रेणी की सुरक्षा देने की मांग की है। साथ ही यमुना खादर में कथित प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े साधुओं की संपत्तियों की जांच और आश्रम के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। लेकिन विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा बच्चों से जुड़ा है। फलाहारी का दावा है कि कुछ बालक बालिकाएं भक्ति में डूबकर आश्रम में रहने लगते हैं और बाद में उनके परिजन उन्हें तलाशते हुए आश्रम पहुंचते हैं। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया है कि कहीं आध्यात्म की आड़ में बच्चों को बंधक तो नहीं बनाया जा रहा। उन्होंने बाल आयोग से जांच कराने की मांग भी की है ताकि ऐसे परिवारों की शिकायतों की जांच हो सके और अगर कोई बच्चा वास्तव में लापता है तो उसे उसके परिवार तक पहुंचाया जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने आश्रम के सेवादारों की पुलिस वेरिफिकेशन की मांग भी की है और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप की जांच की बात भी कही गई है। हालांकि यहां एक बात साफ करना जरूरी है कि बच्चों को बंधक बनाने, किडनी माफिया से जुड़े होने या आपराधिक गतिविधियों के आरोप अभी दावे हैं। स्थापित तथ्य नहीं। इनकी पुष्टि संबंधित जांच एजेंसी की जांच के बाद ही हो सकती है। अब सवाल रसिक दुलारी शरण की मौत का भी है। उनकी मृत्यु के बाद ही आश्रम से जुड़े विवाद ने ज्यादा जोर पकड़ा। मामले को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए और मौत की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए गए।
यही वजह है कि अब आश्रम की व्यवस्था, वहां रहने वाले लोगों, सुरक्षा और लापता परिजनों से जुड़े मामलों को लेकर जांच की मांग तेज हो रही है। इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यही है कि आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर रखा जाए।
एक तरफ संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है तो दूसरी तरफ कुछ परिवार अपने परिजनों और बच्चों को लेकर सवाल उठा रहे हैं और तीसरी तरफ आश्रम से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और पुलिस इन शिकायतों पर क्या कारवाई करते हैं और जांच में इन आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है। फिलहाल संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े इस विवाद ने वृंदावन की श्री राधा केकुंज आश्रम को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।