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एक गलती PM पर पड़ी भारी! फ्रांस वाले भाषण के बाद क्यों मोदी का बना मज़ाक ?

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दोस्तों वीडियो में बात करेंगे कि पीएम मोदी जब फ्रांस में भाषण दे रहे थे जब भारतीय समुदाय को संबोधित कर रहे थे तो कौन सा वीडियो लीक हो गया पीएम मोदी की भाषण बाजी के बीच और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने क्या सीन दिखा दिया जिसके बाद विपक्षी नेता कटाक्ष करते हुए कहते हैं वाह क्या सीन है और उसके बाद विश्व गुरु वाले कटाक्ष किए जाते हैं कई लोग सवाल उठाते क्या कोई अंतरराष्ट्रीय साजिश है ।

पीएम मोदी की छवि को खराब करने की कितनी मेहनत की जाती है उन बातों को छुपाया जाता है जो अंतरराष्ट्रीय मीडिया बार-बार दिखा रहा है। आजकल पीएम मोदी जहां भी जाते हैं, हमारे टीवी चैनल के कैमरे जिन बातों को छुपाते हैं, हमारी न्यूज़ एजेंसियों के कैमरे जिस बात को छुपाते हैं, पीएमओ की टीम के कैमरे जिन बातों को छुपाते हैं, अंतरराष्ट्रीय मीडिया उन बातों को बार-बार क्यों दिखाता है? इंप्रेशन अच्छा नहीं जाता है। अगर इंप्रेशन अच्छा जाता, कोई समस्या नहीं होती, तो वह सीन पीएम मोदी के भाषण में भी दिखाई देता।

लेकिन शुरुआत से अंत तक पीएम मोदी के भाषण में सिर्फ पीएम मोदी दिखाई देते हैं और पीएम मोदी की बातें सुनाई देती हैं। कहीं भी आपको टेलीप्रटर नजर नहीं आएगा। कैमरे का एंगल ऐसा बनाया जाता है कि एक भी टेलीप्रटर नजर नहीं आता। जबकि पीएम मोदी जब भाषण देते हैं तो दो-दो टेलीप्रॉन्टर लगते हैं। फ्रांस में एक बार फिर यह सीन सामने आया जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने पीएम मोदी के टेलीप्रॉन्टर दिखा दिए और उसे लेकर विपक्षी नेता अब ट्रोल करने पर तुल आए हैं।

क्या-क्या बोला जा रहा है। तमाम नेताओं के बयान आपको सुनाएंगे। पहले यह वीडियो आप देखिए कि पीएम मोदी किस अंदाज में दोनों टेलीप्टर में पढ़कर बोलते हैं। हर रिसर्च इंस्टीट्यूशन को हर एंटरप्रेन्योर को बहुत आग्रह पूर्वक आमंत्रित करता हूं।

आप भारत आइए हमारे साथ मिलकर काम करिए। भारत में डिजाइन कीजिए, भारत में डेवलप कीजिए और दुनिया के लिए सॉल्यूशन तैयार कीजिए। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। थैंक यू वेरी मच। तो पीएम मोदी यहां पर एक बार इस टेलीप्रटर में देखकर पढ़ते हैं। उसके बाद उधर मुंह करेंगे तो उस टेलीप्रटर में पढ़कर बोलते हैं और बीजेपी नेता और हमारे मीडिया एंकर दावा करते हैं कि पीएम मोदी से बेहतर वक्ता भारत की राजनीति में नहीं है। राहुल गांधी तो किसी नजरिए से मुकाबला ही नहीं कर सकते।

उनकी तो पप्पू वाली छवि बनाई जाती है जो एकआध बार फंबल हो जाता है। हालांकि इसमें पीएम मोदी से भी फंबल हुआ है। हर किसी से हो जाता है। यह देखिए आप रिसर्च को क्या बोला पीएम मोदी ने? और हर रिसर्च इंस्टीट्यूशन को रिसर्च इंस्टीट्यूशन बोला है पीएम मोदी ने। रिसर्च को गलती से रिसर्च बोल गए। एक आध शब्द एक आध बार छूट जाता है। हमसे भी ऐसी गलती हो जाती है। पीएम मोदी से भी हो सकती है। राहुल गांधी से भी हो सकती है। लेकिन राहुल गांधी से फंबल हो जाए तो पप्पू की छवि बनाई जाती है। पीएम मोदी से फंबल हो जाए फिर भी बेहतर वक्ता बताया जाता है।

टेलीप्रटर से पढ़कर बोलते हैं फिर भी बेहतर वक्ता बताया जाता है। और जो सामने पब्लिक बैठी है, टीवी वालों को दिखाई नहीं देता। आप टीवी पर देखते हैं, YouTube पर देखते हैं, पीएम मोदी के कैमरे हैं, हमारे न्यूज़ चैनल के कैमरे हैं। वो टेलीप्रटर नहीं दिखाते तो हमें पता नहीं चलता। लेकिन वहां पर जो पब्लिक बैठी है, उसे कितना अजीब लगता होगा जब पीएम मोदी के चेहरे के आजू-बाजू दो यह टेलीप्रटर दिखाई देते हैं तो वो कनेक्ट आई टू आई कनेक्ट नहीं हो पाता। जब टेलीप्रटर में पढ़कर बोला जाता है। वहीं राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो बिंदास बोलते हैं।

क्या आपने कभी राहुल गांधी को टेलीप्रटर का इस्तेमाल करते देखा है? तो फिर यह दावा कैसे किया जा सकता है कि राहुल गांधी से अच्छे वक्ता पीएम मोदी हैं? अगर अच्छे वक्ता होते मातृभाषा में ही बोल रहे हैं। अंग्रेजी में बोलते तब समझ आता कि पीएम मोदी अंग्रेजी में उतने सहज नहीं है जितना राहुल गांधी हैं। विदेश में अगर अंग्रेजी में भाषण देते तो समझ आता कि चलो भैया टेलीप्रटर लगा लिया। वो भाषा नहीं है जिसमें पीएम मोदी अक्सर बोलते हैं। लेकिन हिंदी में ही हमेशा बोलते आए हैं। अच्छी हिंदी पर पकड़ है पीएम मोदी की। उसके बावजूद टेलीप्रर की आखिरकार जरूरत क्या है? माना कि हमारे यहां के टीवी चैनलों के कैमरे टेलीप्रटर को छुपा लेते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने जब यह दिखाया तो उसके बाद विपक्षी नेता किस तरह कटाक्ष कर रहे हैं? सुप्रिया स्नेत विश्वगुरु वाला कटाक्ष करती हैं और कहती हैं बिना टेलीप्रटर के ये दो शब्द नहीं बोल सकते।

चले हैं विश्व गुरु बनने। इसके बाद अतुल लौंदे पाटिल क्या कहते हैं? टेलीप्रटर ना होता तो मोदी जी का क्या होता? उसके बाद रिटायर्ड विंग कमांडर अनुमाचार्य क्या कहती हैं? अंतरराष्ट्रीय कैमरे पीएम मोदी को बखशी ही नहीं रहे। इटली से लेकर फ्रांस तक सभी देशों में पीएम मोदी और टेलीप्टर का जन्मजन का साथ प्रसिद्ध हो चुका है। वहीं पीएम मोदी के टेलीप्रोटर के मामले में देसी मीडिया और विदेशी मीडिया की तुलना करते हुए कांग्रेस की प्रवक्ता गिरजा शेतकर कहती हैं, गोदी मीडिया ऐसे एंगल से वीडियो शूट करता है जिससे टेली पॉटर छिप जाता है। लेकिन विदेशी मीडिया इस तकनीक से वाकिफ नहीं है। नतीजतन यह साफ हो जाता है कि मोदी जी दो टेलीपोटर के बिना दो शब्द ही नहीं बोल सकते। इसके बाद एडवोकेट विजय सिंह कहते हैं टेलीप्रटर वाली गलती बार-बार हो रही है। सच में इंटरनेशनल साजिश है या कैमरामैन शातिर है। मोदी जी को टेलीप्रटर की आदत है।

दोनों कुछ नहीं बस कोइंसिडेंस। तो ये इत्तेफाक भी हो सकता है कि बार-बार मीडिया के कैमरे में टेलीप्रटर आ जाते अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कैमरे में? तो क्या कोई इंटरनेशनल साजिश हो सकती है? यह विपक्षी नेताओं के साथ-साथ आम पब्लिक भी सवाल उठाती है। रागिनी नायक ट्रोल करते हुए टेलीप्टर जीवी कहकर बुलाती हैं। इसके अलावा देश के पत्रकार क्या कहते हैं? गोविंद प्रताप सिंह कटाक्ष करते हुए कहते हैं, यह अंतरराष्ट्रीय साजिश है। हर बार कैमरामैन ऐसे एंगल से जानबूझकर वीडियो निकालता है ताकि टेलीप्रटर दिख जाए।

इसके बाद कॉमेडियन राजीव निगम कहते हैं, एक पढ़े लिखे इंसान हैं। वह इसलिए पढ़ रहे हैं। बिना पढ़े जिस दिन बोल देंगे ना, उस दिन देखना सबकी ऐसी तैसी हो जाएगी। इसीलिए प्लीज उनको पढ़ने दें। तो राजीव निगम ने कटाक्ष किया है कि जिस दिन बिना टेलीप्टर के बोलेंगे उस दिन ऐसी तैसी हो जाएगी। डॉ. मोनिका सिंह कहती हैं, मोदी जी टेलीप्र लिखा भाषण क्यों पढ़ते हैं? देश के पीएम हैं। आप बिना देखे भाषण देना चाहिए। उसके बाद जोशिश यादव कहती हैं यह विदेशी मीडिया की साजिश है। जानबूझकर टेलीप्रर दिखाते हैं। बताइए भला हिंदी बोलने के लिए भी मोदी जी को टेलीप्रटर की जरूरत पड़ेगी क्या? तो कटाक्ष करते हुए यह सवाल उठाया जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार कृष्णाकांत कहते हैं प्रधानमंत्री कम से कम इतना पढ़ा लिखा होना चाहिए कि दो-दो टेलीप्रोटर लगाकर भाषण ना बाजना पड़े।

देश को टेलीप्रटर का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है। गलती से कनेक्शन कट गया तो इंटरनेशनल बेज्जती अलग से। वहीं टेलीप्र वाले खेल पर अनु सिंह कटाक्ष करते हुए कहती हैं, कल तक जिस चालबाजी को मोदी जी की काबिलियत और हुनर बताया, आज उसका सच सबके सामने समय-समय पर आता रहता है। हर भाषण में टेलीप्रटर दिखते हैं। अब यह आम हो गया है। पर उसे इग्नोर किया जाता है। जब यह सत्ता से बाहर होंगे, तब ना जाने कितने राज खुलेंगे। तो विपक्षी नेताओं से लेकर पत्रकार तक टेलीप्टर को लेकर पीएम मोदी को ट्रोल करने पर उतर आए हैं। आप इस पूरे मुद्दे को लेकर क्या सोचते हैं? क्या हमारे प्रधानमंत्री को टेलीप्रटर लगाकर पढ़ना चाहिए? पढ़ने को लेकर, बोलने को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बड़ा मजाक उड़ाया करते थे बीजेपी वाले। मोहन मोहन कहा करते थे।

यह कहा करते थे कि अच्छे वक्ता नहीं हैं। तो जो अच्छे वक्ता होते हैं, क्या उन्हें हर भाषण में टेलीपॉइंटर की जरूरत पड़ती है?

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