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पाकिस्तान में कहां निकली जगन्नाथ रथ यात्रा? क्या है इतिहास?

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क्या आप जानते हैं कि सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी हर साल भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है। एक मुस्लिम बहुल देश में हजारों श्रद्धालु जय जगन्नाथ के नारे लगाते हैं। रथ खींचते हैं और भजन कीर्तन करते हैं। आखिर पाकिस्तान में यह परंपरा कब से शुरू हुई? कौन सा मंदिर इसका केंद्र है? और वहां रथ यात्रा कैसे मनाई जाती है?

आइए इस वीडियो में पूरी कहानी बताते हैं। जब श्री जगन्नाथ रथ यात्रा का नाम आता है तो सबसे पहले ओसा के पूरी का नाम याद आता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची में भी हर साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। यह यात्रा मुख्य रूप से श्री स्वामी नारायण मंदिर और मारी माता मंदिर से जुड़ी हुई है।

जहां पाकिस्तान का हिंदू समुदाय बड़ी श्रद्धा से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पूजा करते हैं। 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान में रहने वाले लाखों हिंदुओं ने अपनी धार्मिक परंपराओं को बचाए रखा। सिंध में बसे हिंदू समुदाय ने भगवान जगन्नाथ की पूजा और रथ यात्रा की परंपरा को भी जीवित रखा। वक्त के साथ स्थानीय मंदिरों और सामाजिक संगठनों ने इसे संगठित रूप दिया।

आज भी कराची में हर साल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को सुंदर रथ पर विराजमान कर शोभा यात्रा निकाली जाती है। रथ यात्रा से पहले भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। फिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथ पर विराजमान करते हैं। इसके बाद हजारों श्रद्धालु रस्सियों से रथ को खींचते हैं। इस यात्रा में केवल स्थानीय हिंदू ही नहीं बल्कि

विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य और कई स्थानीय नागरिक भी शामिल होते हैं। अक्सर लोग सोचते हैं कि पाकिस्तान में पूरी जैसा विशाल जगन्नाथ मंदिर होगा। असल में वहां पूरी जैसा ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर तो नहीं है। लेकिन कराची में स्थित श्री स्वामी नारायण मंदिर और मारी माता मंदिर रथ यात्रा में प्रमुख केंद्र होते हैं। फिलहाल इस वीडियो में इतना ही। वीडियो को लाइक और शेयर करें। साथ ही चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें।

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