प्रेमानंद महाराज के आश्रम के बाहर धरने पर बैठा लाचार पिता, कही चौंकाने वाली बात, मची त!बा!ही
नहीं है। मेरा गांव ब्राह्मणी है सागर पड़ता है। मेरे बेटे ने तीन महीना पहले प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी। दीक्षा लेने के घर गया। फिर पांच दिन बाद वो अपनी कंठी माला लेकर के बोला कि मैं प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने जा रहा हूं। मैंने हमारी नौकार है। मैंने कहा चला आजा। […]
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