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नेपाल ने बा!ढ़ के दौरान भारत की मदद लेने से क्यों किया इंकार? वजह जानकर होश उड़ जाएंगे।

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नेपाल में आई ने ऐसा कहर बरपाया है कि पूरा देश सहम गया है। घोटे कोशी नदी का पानी जब अचानक पर आया तो देखते ही देखते घर, सड़कें और पुल सब पानी और मलमे में समा गए। सैकड़ों लोगों की जा चुकी है और 1500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लेकिन इस के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। भारत ने नेपाल की मदद के लिए अपनी एनडीआरएफ टीम भेजने की पेशकश की थी। सिर्फ भारत ही नहीं चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने भी अपनी विशेषज्ञ रेस्क्यू टीमें भेजने की पेशकश की।

लेकिन नेपाल फिलहाल इन सभी विदेशी रेस्क्यू टीमों को आने की इजाजत देने से इंकार कर रहा है। लेकिन सवाल है आखिर ऐसा क्यों? नेपाल सरकार का कहना है कि उसकी सेना और पुलिस राहत बचाव अभियान संभालने में पूरी तरह सक्षम है। इसके पीछे 2015 का वो भी बड़ी वजह है। उस वक्त दुनिया के कई देशों से राहत टीमें नेपाल पहुंची थी।

मदद तो मिली लेकिन इतनी बड़ी संख्या में विदेशी टीमों के आने से उनके बीच तालमेल बैठाना और पूरे को संभालना काफी मुश्किल हो गया था। नेपाल सरकार को डर है कि इस बार भी अगर बड़ी संख्या में विदेशी टीमें पहुंची तो रेस्क्यू ऑपरेशन को मैनेज करना और मुश्किल हो सकता है। यानी नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को मना कर दिया है। लेकिन मदद को पूरी तरह ठुकराया नहीं है। भारत अब तक करीब 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसके अलावा भारत ने बाढ़ में टूटे रास्ते और संपर्क व्यवस्था को बहाल करने के लिए बेली ब्रिज और बीफक ट्रस्ट ब्रिज देने की पेशकश की है। उधर अमेरिका, ब्रिटेन और विश्व बैंक की तरफ से भी आर्थिक मदद का ऐलान किया गया है।

एशियन डेवलपमेंट बैंक ने भी नेपाल के पुनर्निर्माण और भविष्य में ऐसी आपदाओं से पहले लोगों को चेतावनी देने वाले अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करने में मदद का भरोसा दिया है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है जिनके अपने अभी तक लापता हैं। नेपाल में फंसे दूसरे देशों के नागरिकों की जानकारी जुटाने के लिए विदेश मंत्रालय ने एक रिस्पांस टीम बनाई है।

यह टीम सुरक्षा बलों के साथ मिलकर लापता लोगों की जानकारी जुटाएगी और उनके परिवारों और दूतावासियों तक पहुंचाएगी। फिलहाल नेपाल के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली मलवे और तबाही के बीच लापता लोगों को ढूंढना। दूसरी पार के बाद उजड़ चुके इलाकों को दोबारा खड़ा करना क्योंकि पानी का सैलाब भले ही उतर जाए लेकिन इसके पीछे छोड़ गया मलवा और अपनों को खोने का दर्द इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाला। मिला है और लकड़ी मिला है और मछली तो पे पानी हो गया है। बहुत गंदा पानी हो गया है। उसमें जितना मछली थे सब बाहर ऊपर आ गए। लोग मछली पकड़े और लकड़ी पकड़े हैं। और कुछ नहीं आया। मिला था। पानी नहीं बढ़ा था। ज्यादा पानी जब पानी बढ़ा था हल्का बढ़ा था। हां ज्यादा उतना नहीं था। कोई खतरा नहीं है।

इधर अपने गांव क्षेत्र में बाहर क्षेत्र में खतरा है। हमारे वहां गंडक नदी में पानी तो अधिक नहीं आया था लेकिन गैस सिलेंडर वगैरह मकान का टूटा फूटा मलवा और मछली बहुत आई थी। बड़ी-बड़ी मछली आई थी। नदी में आपको क्या-क्या मिला है? है खाली और जलान का लकड़ी और कुछ नहीं उसमें आ रहा था ना लकड़ी चौकी नहीं खाली सिलेंडर लकड़ी पानी तो रात में आया और सुबह तक पानी समाप्त हो बहुत कम पानी है और पानी के साथ-साथ काफी लकड़ियां देखिए देख सकते हैं आप कीमती लकड़ी है

है ग्रामीण यहां के लोकल जो लोग हैं काफी मछली पकड़ रहे हैं और तो बाकी सारी चीजें ठीक है। कोई क्षति नहीं हुई है। नहीं है। अब तक स्थिति कंट्रोल है।कि प्रशासन भी रहा है। प्रदेश से लेकर के जिला स्तर तक और सारी अधिकारी एक्टिव रहे हैं। कहीं से कोई दिक्कत नहीं है। सारी चीजें कंट्रोल है। नेपाल से हुआ था कि कूड़ा पानी आ रहा है पर वैसा नहीं है।

थोड़ा रात को ज्यादा था पर अब कम हो चुका है। खतरा का कोई बात नहीं है। पूरा पानी मतलब कि अब नियंत्रण में है। हम लोग का सोशल मीडिया के थ्रू सूचना मिली थी तो हम लोग तो यहां के नहीं है हालांकि पश्चिमी चंपारण के हैं बेतिया जिला घर है तो हम लोग देखने के लिए आए हैं लेकिन यहां आने के बाद लग रहा है कि सामान्य स्थिति में अभी बाढ़ का स्थिति है ज्यादा पानी आया नहीं है लेकिन सामान्य है यहां पे मैं यहां का स्थान स्थानीय निवासी धीरज कुमार मैं ईस्टर्न गंडक कैनाल में कार्यरत हूं कल सर 11:00 बजे के आसपास हमें बैरा से भी सूचना दी जाती है कि नदी का बांध टूट गया है।

जिसके चलते बैराज में पानी की मात्रा ज्यादा बढ़ सकती है। उसी समय से ही जिला प्रशासन को भी मैंने देखा कि यहां पूरी मुस्तैदी बनी हुई थी और पूरे जिला प्रशासन की तरफ से अनाउंसमेंट भी किया जा रहा था कि जो भी बांध के किनारे हैं वो ऊंचे सुरक्षित जगह पे चले जाएं। इस समय क्या स्थिति देख इस समय स्थिति अभी 14400 क्यूसे हमारे बैराज में पानी चल रही है और हम लोग बिल्कुल इस समय सुरक्षित हैं। कल 11:00 बजे रात तक सर हम लोग तो कल दिन से बने हुए थे। लेकिन 11:00 बजे रात तक 1 लाख 50500 क्यूसे पानी चल रही थी।

मलवा भी ज्यादा आ रहा था। उस मलवे में सर बहुत सारा चीज जैसे सिलेंडर लकड़ी ये सब देखने को मिला। लेकिन फिलहाल सर हम लोग अभी इस समय सुरक्षित हैं। जिला प्रशासन की मुस्तैदी पूरी बनी हुई है। सर क्या स्थिति है बाढ़ की इस समय?

सामान्य है और कहीं कोई जैसा कहा जा रहा था वैसा कुछ भी नहीं हुआ है। अभी देख रहे हैं कि नॉर्मल पानी बह रहा है। जैसे रात में भी वही था। हम 1 लाख 41 42000 तक गया था। कुछ एक पानी उससे ज्यादा हुआ ही नहीं कुछ। नेपाल हम लोग तैयारी पूरी रखे थे। लोगों को आया था। उसको देखते हुए किस तरह तैयारी थी और क्या इस समय देख रहे हैं? हम लोगों ने पूरी तैयारी की थी।

नदी किनारे जितने लोग बसे हुए थे सबको सुरक्षित स्थान पर ऊंचे स्थान पर स्कूल में सब जगह का ले आए थे और जो हर बार का एसओपी बना हुआ है व्यवस्था खानेपीने सब कर लिए थे। लेकिन वैसा कुछ नहीं है और लोग जो है सब अपना वापस भी फिर से अपने स्थान पर जा रहे हैं। नेपाल में आई ने भारी मचाई है।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक इस आपदा में कम से कम 162 लोगों की हो चुकी है। जबकि हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता भारतीय नागरिकों को लेकर है।

नेपाल सरकार के मुताबिक करीब 300 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की बताई जा रही है। नेपाल सरकार इन लापता भारतीयों का पता लगाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है।

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