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नाना पाटेकर के मौ;त के बाद पुलिस ने क्यों लिखी FIR? ये है संपत्ति दान का सच,हुआ खुलासा..

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दोस्तों जब देश भर में यह खबर फैली कि महान अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे और उनकी मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई तो हर आम इंसान के मन में एक उलझन और सवाल जरूर पैदा हुआ कि जब मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी तो फिर पुलिस ने अचानक अप्राकृतिक मौत यानी अननेचुरल डेथ का मामला क्यों दर्ज कर लिया? क्या दाल में कुछ काला है? क्या इसके पीछे कोई अनसुनी कहानी या साजिश है? आइए इस पूरे मामले की तह तक चलते हैं और उन तमाम सवालों के जवाब तलाशते हैं जो इस वक्त हर शख्स के जेहन में घूम रहे हैं। सवाल नंबर एक जब मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई तो पुलिस ने अब प्राकृतिक मौत का मामला क्यों दर्ज किया? दोस्तों इस बात के पीछे कोई शक या साजिश नहीं बल्कि कानून के कुछ सख्त और तयशुदा नियम है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 75 साल के नाना पाटेकर को गोवा के डोना पावला स्थित उनके ओशन पार्क वाले घर से जब बांबोलिम के मणिपाल अस्पताल लाया गया था। तब डॉक्टर जांच के बाद समझ गए थे कि उन्हें ब्रॉट डेड यानी अस्पताल लाने से पहले ही उनकी सांसे थम चुकी थी।

भारतीय कानून और मेडिकल नियमों के मुताबिक जब भी किसी व्यक्ति को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया जाता है तो अस्पताल प्रशासन के लिए पुलिस को सूचित करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है। ऐसी स्थिति में गोवा पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता बीएएसएस की धारा 194 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की जिसे मेडिको लीगल केस यानी एमएलसी कहा जाता है। इसका सीधा सा मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि मौत किसी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है या किसी ने कोई अपराध किया है। यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया है ताकि मौत की हर परिस्थिति और उसके सटीक कारणों का आधिकारिक और पुख्ता दस्तावेज तैयार किया जा सके। डॉक्टरों ने यह भी साफ किया कि नाना पाटेकर पहले से ही दिल की बीमारी से जूझ रहे थे और उनकी दवाइयां चल रही थी। इसलिए शुरुआती तौर पर यह कार्डियक अरेस्ट का ही मामला लग रहा था। फिर भी पूरी पारदर्शिता के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज जीएमसी में उनका पोस्टमार्टम कराया गया ताकि किसी भी तरह का संशय बाकी ना रहे।

सवाल नंबर दो क्या है ना पाटेकर का वह आखिरी सफर और उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी अनकही बातें। पोस्टमार्टम और कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद देश के इस महान सपूत और बेबाक कलाकार के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव लाया गया। उन्हें ग्रामीण के डोंझे गांव में पूरे राजकीय सम्मान और नम आंखों के साथ नाना पाटेकर को अंतिम विदाई दी गई। वो शख्स जिसने अपनी पूरी जिंदगी में कभी किसी के सामने झुकना नहीं सीखा जो पर्दे पर विलेन और हीरो दोनों रूपों में आग लगा देता था। आज शांत लेटा हुआ था। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने भारी मन और कांपते हाथों से उन्हें मुखाग्नि दी। वहां मौजूद हजारों प्रशंसकों, दोस्तों और फिल्मी हस्तियों की आंखें नम थी। हवा में गूंजती पुलिस की गोलियों की सलामी और तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर ने यह साबित कर दिया कि देश अपने इस असली सबूत को कभी नहीं भुला सकता। सवाल नंबर तीन गरीबों के मसीहा और नाम फाउंडेशन का वह सच जो कोई नहीं जानता।

अब जरा उस इंसान के दूसरे पहलू पर नजर डालते हैं जिसे बहुत कम लोग पर्दे के पीछे देख पाते थे। करोड़ों रुपए कमाने और बड़े-बड़े अवार्ड जीतने के बाद भी नाना पाटेकर का दिल एक आम आदमी की तरह धड़कता था। जब महाराष्ट्र के किसानों पर सूखा और तबाही की मार पड़ती थी। जब किसान आत्महत्या करने पर मजबूर होते थे। तब यह अभिनेता अपनी फिल्मों की शूटिंग छोड़कर सीधे खेतों की धूल में उतर जाता था। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुर के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन की नींव रखी। इस संस्था के जरिए उन्होंने सैकड़ों सूखाग्रस्त गांवों में पानी पहुंचाया, तालाब खुदवाए और आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को आर्थिक रूप से संबल दिया। वह कभी पब्लिसिटी के लिए यह सब नहीं करते थे। बल्कि उनका मानना था कि समाज ने उन्हें जो शहरत दी है, उसका कर्ज चुकाने का यही एकमात्र तरीका है। सवाल नंबर चार क्या सिनेमा ने अपने सबसे सच्चे और निडर कलाकार को खो दिया? आज जब हम नाना पाटेकर के पूरे जीवन को पलट कर देखते हैं तो सवाल यह उठता है कि क्या सचमुच हमारे बीच कोई दूसरा नाना पाटेकर आ सकता है? गमन से शुरू हुआ सफर, परिंदा का खौफनाक अन्ना सेठ, तिरंगा का फौलादी तेवर, क्रांतिवीर का सिस्टम को चीरता हुआ डायलॉग और नट सम्राट की वह दिल को चीर देने वाली बेबसी। नाना पाटेकर ने अभिनय को सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि एक इबादत बनाया था। उनकी कड़क आवाज, उनकी वह पैनी निगाहें और उनका बेबाक अंदाज हमेशा हमेशा के लिए अमर हो गया है। पुलिस की जांच अपनी जगह चलती रहे। कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होती रहे। लेकिन एक बात तय है कि नाना पाटेकर सिर्फ शारीरिक रूप से हमसे दूर हुए हैं। उनके विचार, उनके किरदार और उनका समाज के प्रति समर्पण हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगा। आपकी नजर में नाना पाटेकर का कौन सा किरदार सबसे ज्यादा यादगार रहा?

जिंदगी इतनी लंबी भी नहीं है जितना हम सोचते हैं। साल गुजर जाने के बाद पता चलता है। कितना खोया है कितना कुछ पा सकते थे जब नाना पाटेकर अपनीत्वाकांक्षी फिल्म प्रहार द फाइनल अटैक की तैयारी कर रहे थे नाना पाटेकर साहब केवल पर्दे पर नकली एक्टिंग करने वाले कलाकारों में से नहीं थे। वह चाहते थे कि जब वह पर्दे पर एक मराठा लाइट इनफेंट्री के कमांडो के रूप में दिखे तो उसमें जरा सी भी बनावट या झूठ नजर ना आए। इसी सच्चाई को पर्दे पर उतारने के लिए उन्होंने भारतीय सेना से संपर्क किया और उनसे अनुमति मांगी कि वह असली सैनिकों के साथ ट्रेनिंग लेना चाहते हैं। सेना ने शर्त रखी कि ट्रेनिंग में कोई रियायत नहीं मिलेगी और नाना पाटेकर ने इस चुनौती को खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। 30 साल से ज्यादा की उम्र में जब आमतौर पर लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं। नाना पाटेकर ने पुणे स्थित भारतीय सेना के ट्रेनिंग सेंटर में कदम रखा। उन्होंने आम कैडिट्स की तरह रोज सुबह 4:00 बजे उठकर मीलों दौड़ लगाई। पत्थरों और पहाड़ियों पर रेंगते हुए सैन्य अभ्यास किया। भारीभरकम हथियार चलाने सीखे और कड़े अनुशासन का पालन किया।

3 महीने से अधिक समय तक उन्होंने सेना की उस कठोर और जानलेवा ट्रेनिंग को पूरा किया जिसे देखकर सेना के बड़े-बड़े अधिकारी भी दंग रह गए। नाना पाटेकर साहब की इस निष्ठा, लगन और देश प्रेम को देखते हुए भारतीय सेना ने उन्हें केवल एक अभिनेता नहीं माना बल्कि उन्हें अपनी टेरिटोरियल आर्मी में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक से सम्मानित किया। लाखों लोग सड़क पर भूखे सोते हैं। एक दिन भूखा सो जाऊंगा मर नहीं जाऊंगा। प्लीज प्लीज मेरे साथ आइए। प्लीज मेरे साथ आइए। ले लो। [चीखने की आवाज़] कौन सा तीर मारा? ऐसा कौन सा एहसान किया दुनिया पर पैदा होकर? दोस्तों, अब जरा बात करते हैं नाना पाटेकर साहब की उस निजी जिंदगी की जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आपने अक्सर उन्हें फिल्मों में या सार्वजनिक मंचों पर अकेले ही देखा होगा। तो सवाल यह उठता है कि आखिर इतने बड़े सुपरस्टार होने के बावजूद वह अकेले क्यों रहते थे? उनकी पत्नी कौन है? उनके कितने बच्चे हैं और उनके जाने के बाद उनकी संपत्ति का क्या हुआ? क्या परिवार ने उनकी संपत्ति से कोई हिस्सा नाम फाउंडेशन को दान किया? आइए इस अनसुने और गहरे सच से भी पर्दा उठाते हैं। नाना पाटेकर की निजी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। उनकी शादी नीलकंती पाटेकर से हुई थी जो एक जानी मानी अभिनेत्री और थिएटर आर्टिस्ट रह चुकी हैं। उनके दो बेटे हुए थे। लेकिन जिंदगी ने उनके साथ एक बहुत बड़ा और दर्दनाक मजाक किया। उनके बड़े बेटे का जन्म से ही स्वास्थ्य काफी जटिल था और कम उम्र में ही बीमारियों के चलते उनका निधन हो गया।

इस बड़े आघात ने नाना पाटेकर और उनके परिवार को अंदर तक तोड़ कर रख दिया था। इस दर्दनाक हादसे के बाद नाना और उनकी पत्नी नीलकंती के बीच रास्ते कुछ अलग हो गए। हालांकि कानूनी तौर पर उनका तलाक नहीं हुआ था और वे आज भी एक दूसरे का सम्मान करते हैं। लेकिन नीलकंती जी अपने बेटे मल्हार पाटेकर के साथ अलग रहती थी। जबकि नाना पाटेकर अक्सर या तो मुंबई के अपने साधारण से फ्लैट में या फिर पुणे के अपने 27 एकड़ वाले फार्म हाउस पर अकेले ही वक्त बिताते थे। उनका यह अकेलापन कोई मजबूरी नहीं थी। बल्कि जिंदगी के दुखों को झेलते हुए उन्होंने खुद को अध्यात्म, कला और समाज सेवा में ढाल लिया था। उनके छोटे बेटे मल्हार पाटेकर ने पिता के अंतिम संस्कार की हर रस्म को निभाया और वह हमेशा अपने पिता के उसूलों पर चलते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] अब बात आती है उस सवाल की जो हर किसी के मन में सबसे ज्यादा चल रहा है कि करोड़ों की संपत्ति छोड़ने के बाद उनके परिवार ने क्या किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नाना पाटेकर अपने पीछे लगभग 80 करोड़ की कुल संपत्ति छोड़ गए हैं। जिसमें मुंबई का फ्लैट, गोवा का घर और पुणे के पास खड़कवासला में उनका 27 एकड़ का वह प्रसिद्ध फार्म हाउस शामिल है। जहां वह खुद खेती किया करते थे। लेकिन सबसे बड़ी और दिल को छू लेने वाली बात यह है कि नाना पाटेकर ने जीते जी ही अपनी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा और अपनी संपत्ति का बड़ा भाग उन किसानों और गरीबों के नाम कर दिया था जिन्हें वह अपना परिवार मानते थे। उनके निधन के बाद उनके परिवार और बेटे मल्हार पाटेकर ने भी पूरी तरह से उनकी उस इच्छा का सम्मान किया है। सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार परिवार ने उनकी संपत्ति और कमाई का एक बड़ा हिस्सा उनके द्वारा बनाए गए नाम फाउंडेशन और सामाजिक कल्याण के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया है। ताकि महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों, मजदूरों और उनके बच्चों की शिक्षा और भरण पोषण का काम कभी ना रुके। जो इंसान पूरी जिंदगी अपने लिए एक फूटी कौड़ी जोड़ने के बजाय दूसरों के आंसू पोछने में लगा रहा।

उसने जातेजाते भी यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ पर्दे पर हीरो नहीं था बल्कि असल जिंदगी का भी सबसे बड़ा मसीहा था। तो दोस्तों, यह थी नाना पाटेकर साहब के संघर्ष से लेकर उनके फौजी सफर, उनकी कानूनी और पारिवारिक सच्चाइयों की पूरी कहानी। एक ऐसा कलाकार जो जमीन से उठकर आसमान तक गया। लेकिन अपनी जड़े कभी नहीं भूला।

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