अंतिम संस्कार किसका हुआ? चेहरा तो ढका हुआ था। हिंदू शास्त्र के हिसाब से रात के अंधेरे में अंतिम संस्कार नहीं होता है। तो वहां से तो डाउट आता ही है कि मौत सच में हुई है। वो जो बॉडी जली वो सच में उसकी बॉडी थी या किसी और की बॉडी थी। अरे मैं खुद शहर आ जाती हूं चेक करने के लिए। सच में गया है कि ये सब ढकोसला है। स्टेट ओनर के लिए भी 12 घंटे का, 24 घंटे का या तीन दिन का, दो दिन का ऐसा कुछ प्रोटोकॉल होता है। इतना बड़ा फेकू चंद कि मरतेमरते भी फेंक रहा है। मरा भी है कि नहीं वो उसका भी डाउट है मुझे। शायद भाग गया है देश से। हाय एवरीवन। अच्छा कोई मुझे बताएं कि बात तो मैं पते की कर रही हूं। बॉलीवुड इंडस्ट्री में और मीडिया में किसी ने नाना पाटेकर की बॉडी नहीं देखी और इतनी क्या जल्दी थी रात के बीच में मिडिल ऑफ द नाइट अंतिम संस्कार करने की इतना बड़ा लेजेंड इतना बड़ा इतने बड़े लेजेंड की डेथ हुई है तो शोक सभा तो रखनी चाहिए थी ताकि बॉलीवुड के लोग आते हैं मीडिया के लोग आते हैं डेड बॉडी को अ देखते उसको टच करते मतलब हिंदू शास्त्र हिंदू धर्म में जैसा है कि लोग आते हैं शोक सभा में बॉडी को टच करते हैं प्रणाम करते हैं देखते हैं अपनी आंखों से रियल लाइफ डेड बॉडी फिर शोक सभा होती है मीडिया कवरेज होती है लोग आते हैं इतना बड़ा लेजेंड इतना महान इंसान की डेथ हुई है और शोक सभा नहीं रख पाए इतनी तो कोई जल्दी नहीं थी लोग डेथ के तीन-तीन चार-चार दिन बाद भी शोक सभा रखते हैं। अंतिम संस्कार होता है तीन-तीन चार-चार दिन। अब पूना था कोई गांव तो नहीं था कि बॉडी को स्टोरेज में नहीं रख सकते थे। बीच-रात में रात के अंधेरे में बिना किसी को बताए गांव वालों की उपस्थिति में सिर्फ गांव वालों की उपस्थिति में मतलब भोलेभाले गांव वाले जो जिनको जो बोल दिया जाता है वह वही मान लेंगे। वही करेंगे। उनकी उपस्थिति में अंतिम संस्कार हो गया। किसी भी सेलिब्रिटी की डेथ होती है तो हस्पताल से ही वीडियोस निकल आते हैं। अगर अचानक से किसी की मौत हो जाती है, अचानक से हार्ट अटैक हो जाता है। किसी सेलिब्रिटी को अगर अस्पताल लिया जाता है तो वहां पर आजकल तो हर किसी के पास स्मार्टफोन है। सर्वेंट के पास भी स्मार्टफोन होगा। अस्पताल में सबके पास होता है। कोई सेलिब्रिटी जाता है अस्पताल? हम लोग छोटी-छोटी चीजों के लिए अगर कभी अस्पताल पहुंच गए तो 400 वीडियोस निकल जाते हैं। फोटोग्राफ्स निकल जाते हैं। अस्पताल के अंदर घुसते हुए अगर बैंडेज हो रहा है जब मेरा एक्सीडेंट हुआ था यहां पर। तो मतलब यह बात मुझे हजम नहीं हुई। एक कोई वीडियो नहीं आया नाना पाटेकर का। अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में मृत घोषित किया गया। अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम की तो वीडियो होनी चाहिए। हमें ना हमें ना दे लेकिन अथॉरिटीज को इन्वेस्टिगेट तो करना चाहिए। पोस्टमार्टम की वीडियो हुई क्या? एव्री डेथ पोस्टमार्टम हैज़ टू हैव अ वीडियो रिकॉर्डिंग। तो नाना पाटेकर की पोस्टमार्टम की वीडियो होनी चाहिए और असली वीडियो होनी चाहिए।
आजकल तो वीडियो असली है या एआई है तो वो एआई बता देगा। आप किसी भी चार्जिबिटी या किसी भी टूल पर आप वीडियो अपलोड करें और पूछें चाची पिटी से चाची पिटी यह फोटो असली है कि एआई है चाचीपटी यह वीडियो असली है कि एआई है कुछ भी अगर आपको डाउट होता है वीडियो या फोटो असली है कि नहीं आप किसी भी एआई टूल में चाहे जीबीटी हो गया Google जर्मिनी हो गया किसी भी किसी भी एआई टूल में आप वीडियो या फोटो अपलोड करके चाहे वह वीडियो सोशल मीडिया में आपको मिला, कहीं पे भी मिला। सोशल मीडिया से डाउनलोड करके आप चैट जीपीटी पे अपलोड करिए और पूछिए कि यह असली है कि नकली है। एक सेलिब्रिटी को अस्पताल लेके गया जाया गया और अस्पताल में किसी ने वीडियो नहीं बनाई। किसी ने फोटो नहीं बनाई। ऐसा होना नहीं चाहिए। लेकिन कोर लोग तो करते हैं ना। इतना दिग्गज कलाकार जो कि गोवा में तो ज्यादा सेलिब्रिटीज रहते भी नहीं है। उसका सर्वेंट उसको ले गया तो सर्वेंट ने भी वीडियो नहीं निकाली। कोई भी सर्वेंट अपने आप को बचाने के लिए फोटो या वीडियो तो निकालेगा कि कल को उसके ऊपर ब्लेम ना आ जाए। सोचो लॉजिक सर्वेंट ही निकाल लेगा। सबसे पहली वीडियो फोटो तो सर्वेंट ही निकाल लेगा। अपने आप को बचाने के लिए कि कल को उस पर ना आ जाए। उसने भी नहीं निकाली कोई फोटो वीडियो। अस्पताल ने डॉक्टर ने नहीं करनी निकाली। नर्सेज अस्पताल के स्टाफ होते हैं। सबके पास स्मार्टफोन होता है। किसी ने एक फोटो एक वीडियो नहीं निकाली। उसकी ना एक फोटो है ना वीडियो है। कुछ नहीं है। पर डेड बॉडी किसी ने नहीं देखी। बॉलीवुड में उसके इतने मतलब महान महान दोस्त कलाकार जो सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। आपको पता भी है कि उसकी मौत सच में हुई है? आपने मान लिया। आपको बोला गया कि ऐसीसी अच्छी-अच्छी बातें करो। किसी ने बॉडी देखी? उसके फैमिली ने भी बॉडी प्रॉपर्ली देखी। अंतिम संस्कार किसका हुआ? चेहरा तो ढका हुआ था। किसका हुआ अंतिम संस्कार? गांव वाले सवाल नहीं पूछेंगे। यह सवाल तो इंटेलिजेंट लोग पूछते हैं ना। मीडिया जाती है वहां पे तो मीडिया बोलती है हमें फेस देखने दो। बॉलीवुड के लोग अगर श्रद्धांजलि देने जाते हैं इन पर्सन तो वह पूछते हैं हमें फेस देखने दो। क्योंकि जब शोक सभा होती है या फिर श्मशान घाट में ही क्यों ना आ जाए लोग शोक जताने तो सबसे पहले तो डिमांड होती है कि हमें चेहरा देखना है जिनको हम श्रद्धांजलि देने आए हैं जिनको हम अलविदा कहने आए हैं उनकी उनका चेहरा तो देखना था हमको तो ना बॉलीवुड के लोग गए क्यों पुणे बॉम्बे इतनी दूर है क्या बुला नहीं सकते थे बॉलीवुड के लोगों को चलो आपने शोक सभा नहीं रखी आपको अचानक से बीच रात में आपको जल्दी-जल्दी में अंधेरे रात के अंधेरे में अंतिम संस्कार करना था। इतनी जल्दी रात के अंधेरे में तो भी हिंदू शास्त्र के हिसाब से रात के अंधेरे में अंतिम संस्कार नहीं होता है। हिंदू शास्त्र के हिसाब से सूरज ढलने तक ही अंतिम संस्कार की सारी प्रक्रिया होती है। तो क्या वो हिंदू भी नहीं था? हिंदू तो था। तो जब मौत होती है तो सबसे पहले तो पंडित जो भी अंतिम संस्कार क्रिया कर्म के जो लोग होते हैं वह सबसे पहले वह तो बिल्कुल ही एकदम फुट डाउन कर देते हैं। मैंने तो जीवन भर यही देखा है। अगर आप किसी भी श्मशान घाट में जाए हर श्मशान घाट में पंडित और ये सारे लोग होते हैं। कहीं पर भी हिंदू धर्म का इतना बड़ा उल्लंघन आज तक नहीं हुआ है। चाहे कितनी भी बड़ी हस्ती हो,
कितनी भी बड़ी हस्ती हो, हिंदू धर्म का इतना बड़ा उल्लंघन कभी नहीं हुआ है कि जहां पर हमारे धर्म में शाम ढलतेशाम ढलने के बाद अंतिम संस्कार नहीं किए जाते। तो यहां पे मिडिल ऑफ द नाइट जल्दी-जल्दी में अंतिम संस्कार हो गया। तो भी इतने दिग्गज महान जिसकी इतनी मतलब वाहवाही हो रही है सोशल मीडिया में तो संत बना के भगवान बना के बैठे हैं तो इतने बड़े आदमी इतने बड़े दिग्गज इंसान के लिए एक दिन मतलब शास्त्र भी फॉलो नहीं कर पाए इतनी क्या जल्दी थी रात के अंधेरे में चुपचाप चोरों की तरह अंतिम संस्कार करना तो वहां से तो डाउट आता ही है कि मौत सच में हुई है वो जो बॉडी जली वो सच में उसकी बॉडी थी या किसी और की बॉडी थी ना मीडिया को बुलाया गया ना बॉम्बे से किसी भी उसके यार दोस्त जान पहचान के लोग इतने तो लोग उन्होंने उसने काम किया इतने लोग सहानुभूति और सपोर्ट में आ रहे हैं लेकिन किसी को भी बुलाया गया उसके अंतिम संस्कार में लोग जाते नहीं जब बॉडी गोवा से निकल रही थी तभी अगर बता देते इतने बजे श्मशान घाट आ जाइए अरे मैं खुद शायद आ जाती चेक करने के लिए सच में गया है कि ये सब ढकोसला है तो गोवा से पूना बॉडी ला रहे थे और किसी को बताया नहीं कि आज रात को ही उसका अंतिम संस्कार कर देंगे। अगले दिन शोक सभा रख लेते हैं। पूरे बॉलीवुड को बुलाते हैं। तो बॉलीवुड तो जाती ना। ये सारे लोग ये पॉलिटिशियन और कुछ आद लोग जो इतना शोक मना रहे हैं सोशल मीडिया पे इतना कुछ कर रहे हैं। लेजेंड वेजेंड तो वो नहीं आते। शोक सभा में अगले दिन। ओवरनाइट बॉडी को कोल्ड स्टोरेज में रख के अगले दिन पूरी शोक सभा होती। पूरी बॉलीवुड जाती। इतने दिग्गज कलाकार को देखने के लिए तो बॉलीवुड जाती अंतिम विदाई के लिए लेकिन जाती तो चेहरा दिखाना पड़ता ना। बॉडी दिखानी पड़ती। मीडिया जाती तो मीडिया तो बॉडी देखे बगैर फेस देखे बगैर मानती नहीं। 100% तो क्या इसीलिए रात के अंधेरे में फटाफट फटाफट एकदम मतलब जल्दबाजी में। चलो रात को ही बुला लेते हैं। जब गोवा से बॉम्बे गोवा से पुणे बॉडी आ रही थी तभी बोल देते। चलिए आप मीडिया वाले लोग आ जाइए। रात रात को ही अंतिम संस्कार होने वाला है फॉर सम रीजन जो कि शास्त्र अनुसार अलाउड नहीं है और आज तक किसी भी श्मशान घाट में अगर कोई सच में पंडित रहा है तो तो अलऊ ही नहीं करेगा इतना बड़ा उल्लंघन शास्त्रों का हां तो चलो उल्लंघन हुआ लेकिन मीडिया को बता देते बॉलीवुड के लोगों को बता देते कि चलो शोक सभा नहीं होने वाली सीधा अंतिम संसार होने वाला है रात को ही आ जाइए सब बॉम्बे से बाय रोड पुन आ जाते दो-ती घंटे का तो रास्ता है। कौन सी बड़ी बात है? किसी को नहीं बताया। एक इंसान को नहीं बताया बॉलीवुड में। मीडिया के एक एक इंसान प्रेजेंट नहीं था। और अच्छा एक और यह कौन सा स्टेट ओनर होता है जो रात के 3:00 बजे मिलता है? ये कौन सा स्टेट ओनर होता है जो रात के 12:00 के बाद मिलता है? स्टेट ओनर्स की भी प्रोटोकॉल होती है। वह जो कहते हैं ना कि अंतिम संस्कार में स्टेट ओनर के साथ अंतिम संस्कार किया गया तो उसका भी प्रोटोकॉल होता है। ये सब फेक एआई स्टोरीज है। सिर्फ गांव वाले प्रेजेंट थे और फैमिली के एक आध लोग प्रेजेंट थे। उसके अलावा कोई भी नहीं था वहां पे। स्टेट ओनर स्टेट ओनर अकॉर्डिंग टू द रूल्स ऑफ द स्टेट ओनर वो दिन में मिलते हैं। संविधान में भी ऐसा कोई प्रोविजन नहीं है कि रात के 12:00 बजे के बाद स्टेट ओनर मिलेगा। तो या फिर तो आपने रात के 12:00 बजे के बाद आपने अंतिम संस्कार किया है तो स्टेट ऑनर नहीं हुआ है तो स्टेट ऑनर की झूठी खबरें क्यों फैलाई गई? सोशल मीडिया में आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कुछ भी बनगंत कहानी बनाई जा सकती है। पता तो करो कि सच में स्टेट ऑनर मिला है कि नहीं। क्योंकि उस अंतिम संस्कार में सिर्फ गांव वाले प्रेजेंट थे और फैमिली के कुछ आद लोग प्रेजेंट थे। मीडिया को भी नहीं बुलाया। बॉलीवुड से किसी को नहीं बुलाया। एंड स्टेट ओनर्स आर नॉट गिवन इन द डेड ऑफ द नाइट। स्टेट ओनर्स का टाइमिंग होता है सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम के 5 या 6:00 बजे तक मैक्सिमम। कोई स्टेट ओनर रात के 12:00 बजे के बाद नहीं होती किसी भी चीज के लिए। और मुर्दे इंसान के लिए फ्यूनरल के लिए स्टेट ओनर डेफिनेटली डजंट हैपन। इट ड स्टेट ओनर्स डोंट हैपन इन श्मशान घाट पीरियड। श्मशान घाट के अंदर स्टेट ओनर्स नहीं दिए जाते हैं। और रात के 12:00 बजे के बाद तो बिल्कुल ही नहीं। तो ये ये झूठ किसने फैलाया और क्यों फैलाया? हैं? यह क्या बकवास है? तो यह यह खबर किसने फैलाई? वो भी एक बड़ा सबसे बड़ा झूठ। तो इतने झूठ क्यों फैल रहे हैं? किसी अगर किसी की सच में मौत हुई है तो इतनी मनगढ़ंत कहानियां इतने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए हुए सोशल मीडिया पोस्ट मतलब ग्लेटेंट लाइ तो मैंने अभी पकड़ लिए। हिंदू शास्त्र के हिसाब से सूरज ढलने के बाद अंतिम संस्कार नहीं होते। अगर आधी चिता भी जल रही है ना कभी कबभार ऐसे बहुत स्ट्रिक्ट जगहों पर वहां पर भी हंगामा करना शुरू कर देते हैं। मैंने तो यही देखा है बीइंग अ हिंदू मसेल्फ इतना स्ट्रिक्ट है हमारे में या फिर बोलते हैं आप कोल्ड स्टोरेज में रखिए कल सुबह-सुबह लेके आइए। वो नहीं करते हैं। एंड स्टेट ओनर्स उसका भी प्रोटोकॉल होता है। स्टेट ओनर्स आर नॉट गिवन एट 12 ओ क्लॉक इन द नाइट। उसकी प्रोटोकॉल होती है। उसको तीन दिन पहले बुक करना पड़ता है। अगर उन्होंने बॉडी को वापस लाया होता कोल्ड स्टोरेज में रख के उसको दो दिन बाद करते तो प्रॉपर्ली स्टेट ओनर हो पाता। स्टेट ओनर अफरातफरी में नहीं होती है। नोबडी कैन सेंशन अ स्टेट ओनर एट अ फ्यू आवर्स नोटिस। यह प्रोटोकॉल में ही नहीं है। यह संविधान में है ही नहीं। स्टेट ओनर के लिए भी कुछ आद 12 घंटे का, 24 घंटे का या तीन दिन का, दो दिन का ऐसा कुछ प्रोटोकॉल होता है। इसीलिए जिनको स्टेट ओनर मिलती है उनकी बॉडी को ऑलमोस्ट 99% ऑफ द टाइम उनकी बॉडी को कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है। जैसे कि कोई बहुत सेलिब्रेटेड डेकोरेटेड कोई आर्मी पर्सन हो गए, एयरफोर्स पर्सन हो गए, बहुत ही कोई बड़े नेता हो गए या कुछ हो गए उनको ही स्टेट ऑनर्स मिलती है। एक्टरों को नहीं मिलती स्टेट ऑनर्स। और अगर किसी ने सेंशन किया भी होगा तो क्या उनके मरने से पहले उन्होंने एप्लीकेशन डाल के रखी थी और एप्लीकेशन अगर डाली भी थी और एप्लीकेशन अगर अप्रूव भी हुई थी फिर भी स्टेट ओनर्स हैपन इन द डे टाइम दे डू नॉट हैपन एट 12 ओ क्लॉक इन द नाइट एंड स्टेट ओनर्स में भी जब होती है स्टेट ओनर्स चेहरा क्लियर दिखता है स्टेट ओनर में तो पूरा बाकायदा फोटोग्राफ्स ली जाती है। देयर इज़ ऑलवेज डॉक्यूमेंटेड फोटो एविडेंस ऑफ द बॉडी। अरे प्रोटोकॉल होता है यार इस ऐसी ऐसी हवे में नहीं है यह वही बात हो गई यह आर्मी में भी था यह एनिमल वेलफेयर में भी था सब गोल अरे इतना फेकू चंद इतना बड़ा फेकू चंद कि मरतेमरते भी फेंक रहा है मरा भी है कि नहीं उसका भी डाउट है मुझे आई रियली डाउट जगमोहन सिंह इस सेइंग पुलिस मीडिया सरकार को नाना पाटेकर ने पैसे खिलाए होंगे फेक डेथ सर्टिफिकेट बनाने के लिए कोर्ट से बचने के लिए देखो लोग तो ऐसा ही अब बहुत लोग के मन में डाउट तो आ गया है। ये मेरे मन में बात ऐसे वैसी नहीं आई है। लोग बातें कर रहे हैं। और यह मैंने सोशल मीडिया पोस्ट देखा तब मेरे मन में ये मेरे मन में भी डाउट आया। वरना मैंने भी मान लिया था। मैं तो थोड़ा खुश होने लगी थी कि चलो पिंड छूटा, बला टली इविल इज डेड। लेकिन फिर मैंने एक सोशल मीडिया पोस्ट देखा और उसमें सोशल मीडिया पोस्ट में पूछ रहे थे लोग कि इतनी जल्दी क्या थी? पोस्टमार्टम अम् फ्यूनरल करने की हिंदू शास्त्र के हिसाब से रात में होता ही नहीं है। रात के अंधेरे में ऐसा कौन सा फ्यूनरल हो गया? फिर उसी सोशल एक और सोशल मीडिया पोस्ट मैंने देखा जिसमें पूछ रहे थे स्टेट ओनर्स कैसे होता है रात के बीच में? स्टेट ओनर्स तो दिन में होते हैं। और स्टेट ओनर्स की एप्लीकेशन अप्रूव होने में ही तीन दिन लगते हैं। बाय द वे स्टेट ओनर्स के एप्लीकेशन अप्रूव होने में तीन दिन लगते हैं। उसके अप्रूवल के बाद फटाफट हो सकता है कि कोई अरेंज कर दे। लेकिन मौत हुई सेम डे बॉडी भी आ गई। जिस दिन मौत हुई सुबह को उसी दिन बॉडी को रात को पुणे ले आकर पुणे के किसी गांव में रात के अंधेरे में अंतिम संस्कार कर दिया। रात के अंधेरे में स्टेट ऑनर्स भी हो गया। अरे भाई ऐसा नहीं होता। इतनी लंबी-लंबी मत फेंको।
और मुझे भी नहीं आईडिया था। जब मैंने पोस्ट और YouTube वीडियोस देखे तो मेरा भी दिमाग ठनका यार यह बात तो सही है। फिर मुझे याद आया कि हां सबके फैमिली में अगर हिंदू है आप सबके फैमिली में कोई ना कोई डेथ तो हुई है। हिंदू फैमिलीज में हिंदू धर्म में शाम ढलने के बाद कोई प्रक्रिया नहीं होती अंतिम संस्कार की। और इतने स्ट्रिक्ट होते हैं पंडित कि वो बोल वो बोलेंगे सड़ने दो बॉडी को लेकिन हम नहीं करेंगे अंतिम संस्कार। 6:30 या सात मुहूर्त निकलने के बाद नहीं होता है। कितनी बार हुआ है कि फैमिली को बॉडी कोल्ड स्टोरेज में ले जाना पड़ा है। बिकॉज़ वो लेट हो गए श्मशान आते हुए या फिर दूसरी बॉडीज जल रही थी। इनका लेट हो गया तो फिर वो बंद कर देते हैं श्मशान घाट तो फिर उनको बॉडी लेके वापस जाना पड़ा। कितनी बार ऐसा हमने सुना है। पूरे सबने सुना है। तब यंग जनरेशन को उतना पता नहीं होता है। मुझे भी मैंने ध्यान नहीं दिया। फिर मैंने वो YouTube वीडियोस देखे तो मेरा भी नहीं बहुत लगा कि यार ये ये शैतान मरा नहीं है शायद। ये शायद भाग गया है देश से। किसने देखी बॉडी? तुम बताओ तुम लोग मेरे को गाली दे रहे हो ना सोशल मीडिया में रिले बना बना के। तुम लोग मेरे को गाली दे रहे हो। क्या पता ये इंसान भाग चुका है। फर्जी पासपोर्ट और फर्जी नाम पैसे तो उसने बना लिए बहुत। अब अगर उसका किसी केस में नाम आने वाला है तो उन लोगों ने उसको और भी ज्यादा पैसे दिए होंगे। अब उसको क्या फर्क पड़ता है? जिंदगी उसकी बची कितनी है? अगर भाग भी जाए कहीं पर तो किसको ही पता चलेगा? हां। लेकिन यहां रह के अगर एक्सपोज कर देता बाकियों को मतलब झोल तो कुछ है। और इतना बड़ा झूठ बोलने की क्या जरूरत है कि स्टेट ओनर्स मिला। पता कर लो। ऐसे नहीं होता स्टेट ओनर्स। रात के अंधेरे में 3:00 बजे। इट डजंट हैपन लाइक दैट। उसकी प्रक्रिया होती है। उसकी अप्रूवल होती है। कुछ भी कोई भी बोल रहा है सोशल मीडिया पर डंगे बड़ी-बड़ी डंगे मतलब फेंक फेंक फेंक फेंक फेंक के मतलब इतनी लंबीलंबी फेंकी है ना कि यहीं से सबको डाउट होने लगा है। नॉट जस्ट मी एटलीस्ट फाइव अदर पीपल हैव एक्सप्रेस द सेम डाउट कि यह बड़ा अजीब लग रहा है। और इतनी मीडिया पीियर किसी की मौत होती है ना तो एक सन्नाटा सा होता है। साइलेंस होता है। अजीब अजीब लोग जो आउट ऑफ वर्क है मतलब इनको कोई काम नहीं देता कोई मतलब अजीब लोग टाइप के जिनको मैं जानती भी नहीं कौन है यार ये लोग आके सोशल मीडिया पे रीले बना रहे हैं मुझे विलनाइज कर रहे हैं मेरी ट्रोलिंग कर रहे हैं सो मेनी रील्स आई सॉ वि फेक न्यूज़ मतलब कोई मर चुका है तो उसको अपनी इमेज की इतनी क्यों पड़ी होगी अगर कोई मर चुका है तो उसको कोई फर्क नहीं पड़ेगा वो मर चुका है उसको फर्क नहीं पड़ेगा कि उसके मरने के उसकी उसकी उसका ईगो बूस्ट हो रहा है कि नहीं? उसके मरने के बाद कौन उसको उसको कैसी छवि उसकी कैसी छवि बनाई जा रही है? उसके मरने के बाद उसके सारे दुश्मनों की ट्रोलिंग हो रही है कि नहीं? मतलब ऑलमोस्ट इमीडिएटली नाना पाटेकर की डेथ की न्यूज़ आई और मेरी ट्रोलिंग शुरू हो गई। इतना प्यार किसी की मौत पे अरे इससे बड़े-बड़े स्टार्स हैमिंग कर कर के इसका करियर चला है और 208 में तो इसके पास काम भी नहीं था। 208 में आई वास अ बिग स्टार। सबसे मेरी लाइफ की सबसे बड़ी गलती पता है क्या है? मैं अपने पीक पे मैंने इस भिखारी के साथ काम कर लिया। 2008 में तो इसकी भिखारी जैसी हालत थी। और इसके प्रोडूसर्स हॉर्न ओके पीस के प्रोड्यूसर्स मेरे पास आए थे। वर्बर्टि में बताती हूं। वो बोल रहे थे कि इनके नाम पर पिक्चर नहीं बिक रही है। यह कैरेक्टर आर्टिस्ट हैं।
इनके साथ हमने पिक्चर कर ली है और हमारे भी पैसे डूब गए हैं। हम पिक्चर रिलीज नहीं कर पा रहे हैं। मैडम आप आप आइटम सॉन्ग कर लेंगे तो हम फिल्म को रिलीज कर पाएंगे। दो साल से पिक्चर डब्बे में बंद थी। उसके बाद मेरे ऊपर कंट्रोवर्सी करके इन लोगों ने पूरा नैरेटिव ही चेंज कर दिया। कहा मैं बड़ी स्टार थी। मेरे नाम पे इनको पिक्चर बेचनी थी। इनकी पूरी प्लानिंग थी। मेरे साथ कंट्रोवर्सी करके मेरे को दबा के मेरे को नीचा दिखा के अपने आप को स्टार दिखाना अपने आप को रिवाइव करना अपने को वापस लाइमलाइट में लाना पब्लिसिटी स्टंट किसने करी थी ताकि इसका करियर वापस से आ जाए अगर मैं अगर पिक्चर रिलीज हो जाती फिल्म रिलीज हो जाती गाना रिलीज हो जाता तो सबका फायदा होता लेकिन असुर जो होते हैं ना वो लॉजिकली नहीं सोचते हैं वो लॉजिकली नहीं सोचते अगर गाना रिलीज हो गया होता तो सुख शांति से सबका फायदा होता। फिल्म का भी फायदा। फिल्म रिलीज हो गई होती। वो प्रोड्यूसर तो दिवालिया हो गए क्योंकि उनकी पिक्चर ही रिलीज नहीं हुई। मेरा मेरा करियर तबाह हो गया क्योंकि इन लोगों ने इतना नेगेटिविटी गलत गलत पूरा एकदम स्मियर कैंपेन कर दिया और मेरा बेसिकली दिमाग खराब हो गया। मुझे 60 फिल्म्स के ऑफर्स आए थे। हॉर्नो के पीस के बाद भी क्योंकि मेरी इंडस्ट्री में उतनी पोजीशन थी। 60 फिल्म ऑफर्स माय डैड हैड रिटन इट डाउन इन अ डायरी। वो आकर मुझे बोलते थे ना कि फिल्म का ऑफर आया तो मेरे हाथपांव फूल जाते थे। उस सेट का इंसिडेंट सोच के कि मतलब मैंने उस बंदे के साथ इंटिमेट स्टेप करने को मना कर दिया तो उसने गुंडे बुला दिए। पॉलिटिकल पार्टी को बुला दी। सेट के में 200 लोग आ गए थे गुंडे। पॉलिटिकल गुंडे पॉलिटिकल महाराष्ट्र के जो ये पॉलिटिकल पार्टी जो गुंडागर्दी करते हैं वैसे लोगों को बुला लिया था मेरे ऊपर। उन लोगों ने आके हम मेरी गाड़ी पर अटैक कर दिया। मेरे मम्मी डैडी बूढ़े मम्मी डैडी गाड़ी के अंदर थे। मैं गाड़ी के अंदर थी। मेरे स्टाफ पे अटैक कर दिया। और इन सब चीज ये सारी चीजें वीडियो पे रिकॉर्ड है। YouTube पे है। दिस एंटायर अटैक ऑन माय मी एंड माय फैमिली। जस्ट फॉर रिफ्यूजिंग दैट गाय। और इसके फैंस इतनी गंदी गंदी अब बातें बना रहे हैं कि नाना पाटेकर ने इसका रेप किया था। मैंने रेप केस नहीं लगाया। मैंने सेक्सुअल हरासमेंट केस लगाया। देयर इज़ अ डिफरेंस। वो शायद मेरा रेप करना चाहता था। मैंने रेप होने नहीं दिया। अगर मैंने उसके साथ इंटरमेट स्टेप कर लिया होता। क्या पता मुझे खींच के कहीं पर ले जाता कोने में वो गलत ही करता। पुलिस ने एफआईआर ली। कोर्ट ने केस लिया। 5 साल केस को ड्रैग किया गया।
तो अभी अचानक से स्टट्यूट ऑफ लिमिटेशन की बात कहां से आ गई? तो उन्होंने स्टट्यूट ऑफ लिमिटेशन बोल के केस को बंद कर दिया। उसको क्लीन चिट नहीं मिली। नाना पाटेकर को क्लीन चिट नहीं मिली। उसको बरी नहीं किया गया। उस केस को स्टट्यूट ऑफ लिमिटेशन स्टट्यूट ऑफ लिमिटेशन मतलब इस केस की सुनवाई का वक्त गुजर चुका है। वाह भाई जिस दिन हमारा आई विटनेस आया वो आई विटनेस जिसको 5 साल से डराधमका केस से दूर रखा गया था। उसके घर में धमकियां आती थी। उसको फोन पीसीओ से कॉल आते थे। उसकी मम्मी ने मेरे को बोला बेटा आपको पता नहीं हमारे पास कैसे-कैसे कॉल आए हैं। हमें डर लगता है। फिर हम लोगों ने उस लेडी जहां पर रहती थी उस एरिया के किसी पॉलिटिशियन से उसको मिला के उसको अशोरेंस दिया गया कि आपकी सुरक्षा की रिस्पांसिबिलिटी लेते हैं मतलब आपको कुछ होगा नहीं फिर वो आई विटनेस बनने के लिए और ऐसीऐसी अजीब अजीब घटनाएं भी हुई ना जब वो विटनेस बनने के लिए आई थी मतलब लोग उसकी लोग वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे जब मेरे एडवोकेट और वो कोर्ट में ये ये सब प्रक्रिया चल रही थी। देयर वर पीपल अराउंड देम कास्टेंटली वीडियो रिकॉर्डिंग देम, वाचिंग देम। ये सब चल रहा था। खैर सबमिट हो गया एफिडेविट। और विदिन लाइक जब नेक्स्ट सुनवाई हुई तो अचानक से कुछ नया ही कांसेप्ट निकल आया।
स्टट्यूट ऑफ़ लिमिटेशन करके केस को बंद किया गया। और जज ने यह भी स्टेटमेंट मारा था कि केस को बंद किया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं कि कंप्लेनेंट की बात झूठी है। या वह सच्चे हैं। जज ने यह स्टेटमेंट भी किया था। सो प्लीज गेट दैट स्टेटमेंट आउट। क्योंकि जज को पता था कि वह गलत कर रहा है। जज को तो पता था ना कि वो गलत कर रहा है। तो उसको मेरा भी पक्ष रखना था। तो जज ने यह स्टेटमेंट किया था। जब उसने फाइनल यह सुनाया कि हम केस बंद कर रहे हैं तो जज ने बोला कि स्टट्यूट ऑफ लिमिटेशन की वजह से बंद हो रहा है। इसका मतलब यह नहीं कि कंप्लेनेंट झूठी है। हम एविडेंस को कंसीडर नहीं कर सकते क्योंकि ये स्टट्यूट ऑफ लिमिटेशन से बाहर चला गया। क्योंकि एविडेंस इतना बड़ा आ गया था ना तो उसको कंसीडर करते तो उनको अगली तो सजा सुनानी होती। तो जज ने यह स्टेटमेंट किया था कि कंप्लेनेंट झूठा नहीं है। यह स्टट ऑफ लिमिटेशन की वजह से बंद किया गया। तो यह जो सोशल मीडिया में झूठी झूठी बात फैला रहे हैं ना कमेंट्स पे झूठी झूठी बात यह एक पूरा पीआर कैंपेन है। और किसी की मौत पे इतना पीआर कैंपेन नहीं होता है। मतलब मौत के बाद भी कोई आपकी इनोसेंस को प्रूफ करने की कोशिश कर रहा है। मतलब आप मरे भी हो कि नहीं? इतना ईगो मौत के बाद किसको होता है? हु केयर्स मौत के ब