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गांधी परिवार का मुगलों से था करीबी रिश्ता, नहेरू का सच जान ,बौखला जाएंगे।

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दोस्तों आज मैं बताऊंगा कि गांधी परिवार का मुगलों से क्या रिश्ता था। मुगल साम्राज्य से गांधी परिवार का आखिर क्या रिश्ता था। आज मैं आपको यह भी बताऊंगा कि गांधी परिवार में कितने मुस्लिम व्यक्ति हैं। क्योंकि आए दिन सोशल मीडिया पर ये चर्चा होती है कि गांधी परिवार का मुस्लिम कनेक्शन गांधी परिवार में ये मुस्लिम थे तो ये क्रिश्चियन है तो ये पारसी हैं। आज मैं एक-एक करके सबके धर्म और जातियां बता दूंगा कि कौन कहां से आया और कौन बाद में क्या हो गया। इसका पूरा विश्लेषण आपको साथ ही मैं आपको ये बताऊंगा कि जवाहरलाल नेहरू में ये नेहरू शब्द कहां से आया। नेहरू ना तो कोई शब्द है, ना तो कोई जाति है, ना तो कोई धर्म है। तो यह नेहरू आया कहां से?

इसी तरह मैं आज आपको यह भी बताऊंगा कि इंदिरा गांधी इंदिरा प्रियदर्शनी से इंदिरा गांधी कैसे बन गई? जबकि जवाहरलाल नेहरू की लड़की इंदिरा गांधी थी। उनका नाम इंदिरा प्रियदर्शनी नेहरू था तो वो अचानक गांधी कैसे बन गई और उसके बाद से संजय गांधी, फिरोज गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, गांधी ही गांधी सब लोग कैसे हो गए? । है। लेकिन इससे आपको गांधी परिवार के बारे में जानने का भरपूर मौका मिलेगा और तथ्यात्मक विवरण मिलेंगे कि कौन सी चीज कहां से आई है। ।

देखिए नेहरू और गांधी परिवार का इतिहास जहां तक कागजों और किताबों में विवरण विवरण आता है वो 1716 के आसपास से आना शुरू हो जाता है। हालांकि कुछ किताबों में उससे पहले के भी हैं लेकिन कुछ-कुछ उसमें विवाद भी नजर आते हैं। लेकिन 1716 में इसकी यात्रा कहां से शुरू होती है ये मैं पहले बता देता हूं। सबसे पहले नेहरू परिवार के बारे में जान लीजिए। नेहरू जो का परिवार पूर्वज थे वो कश्मीरी पंडित नेहरू भी कश्मीरी पंडित थे। सारस्वत ब्राह्मण थे और इनके पूर्वजों को राज कॉल कहा जाता था।

ये अपने नाम के आगे कॉल लगाते थे। जैसे कुछ लोग पांडे, त्रिपाठी, यादव अपनी जातियां लगाते हैं ना। इसी तरह कश्मीर के सारसत ब्राह्मण कश्मीरी पंडित कॉल लगाते हैं। तो ये अपने नाम के आगे कॉल लगाती थी। और इस उन्हें जो है फारसी का और संस्कृत का और हिंदी का बहुत तगड़ा ज्ञान था। कॉल लोग जो वहां पर रहते थे, सारस्वत ब्राह्मण थे, पंडित थे। उन्हें हिंदी, फारसी, फारसी और संस्कृत इसका गजब ज्ञान था, गजब गुणागणित आता था। और इससे बहुत सारे लोग प्रभावित होते थे। आप कश्मीरी पंडितों की चर्चा सुनते होंगे विद्वता के नाम पर। इसी से प्रभावित हो गया मुगल बादशाह फारुख सियार। जब मुगल बादशाह फारुख सियार कश्मीर यात्रा पर आए थे तो वो देखे कि वहां के कश्मीरी पंडित ये जो कॉल लोग हैं ये बहुत अच्छा कर रहे हैं। बहुत अच्छी फारसी जानते हैं।

बहुत अच्छा संस्कृत जानते हैं। तो उसके बाद से नेहरू के पूर्वज जो थे उनको इन्होंने ऑफर किया कि ऐसा है कि आप दिल्ली चले आओ। वहां पर हम आपको रहने की जगह देंगे। बढ़िया पैसा देंगे। साम्राज्य देंगे। खाने की चिंता नहीं। मतलब आप समझिए कि अचानक आपसे किसी की मुलाकात होती है और आपका टैलेंट देखकर वो कहता है कि ऐसा है भैया आप मेरे ऑफिस में कल से काम करोगे और जो पैसा मांगोगे वो मिलेगा। इसी तरह हुआ था कुछ नेहरू के पूर्वजों के साथ 1716 में। अब समझिए इनकी विध्वता से मुगल जो बादशाह थे फारुख सियार प्रभावित हो गए थे। राज कौल ने दिल्ली जाने का निर्णय ले लिया। समझिए राज कॉल परिवार जो था वो दिल्ली जाने का निर्णय ले लिए।

ये लोग दिल्ली चले गए और दिल्ली जाने के बाद जब ये दोबारा उनसे मिलने गए मुगल बादशाह से तो इन्होंने कहा कि आप लोग आप आ गए हैं अब तो बहुत बढ़िया अब आपको जो हम रहने की जगह देंगे और आप अब यहां दरबार का काम आप करेंगे। तो जो सबसे पहली जगह दी गई इनको सबसे पहले नहीं वही जगह ही दी गई थी वो यमुना के किनारे नहर के पास दी गई थी। नहर के पास दी गई नहर के पास एक मकान और जागीर पूरी एक विरासत बहुत बड़ा एरिया उनको इनाम में दिया गया कि यहीं आप किसानी कीजिए यहीं बंगला बनाइए यहीं घर बनाइए सारा चीज मुगल साम्राज्य प्रोवाइड कराएगा आप यहीं पे रहिए तो नहर के किनारे दिया गया नहर शब्द सुन रहे हैं ।

लेकिन मुगल के प्रोनन्सिएशन जो थी वो नहर को नहर कहते थे जैसे सिंधु से हिंदू ऐसी तमाम चीजें आती नहीं है जैसे गांधी से गांधी दिल्ली से दलही इसी तरह प्रोनन्सिएशन जो थी वो डिफरेंट होते गई जो नहर के किनारे थे उनको वो नेहर-नहर बोलने लगे और उसके बाद से जब मुगल दरबार से किसी को बुलाया जाता था नेहरू के वहां से तो उनको बुलाया गया नेहरू मतलब नहर के किनारे रहने वाले नेहरू आप समझ रहे हैं ।

यहां से नेहरू शब्द आया उस उसके बाद से ये लोग नेहरू उपनाम पड़ गया कॉल और नेहरू मतलब कॉल और नेहरू आज भी बहुत सारे लोग होते हैं जैसे कुछ लोग फिराक हैं गोरखपुर के कवि हैं। उन्होंने अपने नाम के आगे गोरखपुर लगा लिया। इसी तरह कुछ लोग बनारसी लगा लेते हैं। इसी तरह इमरान है वो अपने नाम के आगे प्रतापगढ़ी लगाते हैं।

कुछ लोग टाइटल हटा देते हैं। तो उसी समय नेहरू ने क्या किया? अपने कॉल के नाम के आगे उस समय के खानदान के नेहरू के पूर्वजों ने कॉल के आगे नेहरू लगाना शुरू कर दिया। कॉल नेहरू और बाद में ये सिर्फ नेहरू पड़ गया। इसका मूल कारण था कि ये लोग नहर के किनारे रहते थे। मुगल की प्रोनंसिएशन गलत थी वो नहर को नेहर बोलते थे और नहर के किनारे रहने वाले लोगों को नेहरू कहा जाता था।

तो ये नेहरू वहीं से आया और नेहरू एक ही परिवार था। एक ही परिवार था जो नहर के किनारे कहा जाता था और उसी परिवार को नेहरू कहा जाने लगा। तो यहां से आया नेहरू। इसी तरह परिवार जो है वो दिल्ली में बस रच गया। कई पीढ़ियों तक मुगल दरबार में दरबारी की प्रशासनिक और क्लर्क और बड़े पदों पर अन्य-अ्य लोग परिवार के काम करते रहे। इसके बाद से 1857 की प्रथम क्रांति हुई [हंसी] वो वाली क्रांति जो देश भर में देश को बताया कि ब्रिटिशर्स जो हैं वो देश में आतंक फैला रहे हैं और हमें ब्रिटिशर्सों से मुक्ति चाहिए।

देश भर में खूब हंगामा हुआ। उसमें कभी कहा जाता है कि मुगल ने भी उस समय इंडिया के लोगों का समर्थन किया था। ये सब अलग विषय हो जाएगा अगर हम इतिहास की तरफ बढ़ेंगे। लेकिन 1857 की क्रांति ऐसी रही कि उस समय जो है अंग्रेज खूब परेशान हुए और अंग्रेज इतना परेशान हुए कि जब क्रांति के बाद उन्होंने बदला लेना शुरू हुआ। बदला लेना शुरू किया। एक-एक करके उन लोगों पर निशाना साधते थे जो अंग्रेजों के खिलाफ बोलते थे। उसमें जो है वो नेहरू का परिवार भी था। इसी कारण नेहरू ने बचाव के लिए नेहरू के परिवार नेहरू तो अभी पैदा ही नहीं हुए थे।

नेहरू के जो पूर्वज हैं वो बचाव के लिए उसके बाद से आगरा का रुख लिए। उन्हें दिल्ली छोड़ना पड़ा ताकि आगरा में कुछ उस समय मुगलों का दबदबा था। उनके कुछ राजा थे, वंशज थे। आगरा भी उनको सेफ लग रहा था। आगरा चले गए और आगरा में रहने बसने लगे। इसके आगे की कहानी ये शुरू होती है। मैं बहुत अगर डीप में जाऊंगा तो बहुत बड़ा हो जाएगा।

ये इलाहाबाद कैसे पहुंचे? अब आप ये सोच रहे होंगे कि आप ये सोच रहे होंगे कि इनका इलाहाबाद में आनंद भवन है और आनंद इलाहाबाद में नेहरू का जन्म माना जाता है। उसके बाद से दिल्ली में इनका इस समय है। लेकिन आगरा से रिश्ता था। आगरा में काफी समय तक रहे। आगरा में गंगाधर नेहरू जो मोतीलाल नेहरू, मोतीलाल नेहरू कौन थे? जवाहरलाल नेहरू के पिता। मोतीलाल नेहरू के पिता का निधन हो गया।

आगरा में ही मोतीलाल नेहरू के पिता गंगाधर नेहरू का जन्म अह निधन हुआ। गंगाधर नेहरू दिल्ली के अंतिम कोतवाल थे। अब समझिए कि ये लोग कश्मीर से आए थे और अंतिम कोतवाल बन गए थे। अब समझिए कोतवाल कितना बड़ा शब्द होता। वो दिल्ली संभाल रहे थे। इतने बड़े पदों पर मुगलों ने उसके बाद से को कभी अंग्रेजों के साथ तो विरोध रहा लेकिन मुगलों ने जो है अंतिम कोतवाल इन्हें बना कर रखा। वो गंगाधर नेहरू थे मोतीलाल नेहरू के पिता। मोतीलाल नेहरू का जो जन्म है वो 6 मई 1961 को आगरा में हुआ था और मोतीलाल नेहरू वहीं रह रहे थे। आगरा में ही पैदा हुए थे ।

जवाहरलाल नेहरू के पिता। उनके भाई नंदलाल नेहरू जो है उनकी परवरिश करने लगे। नंदलाल नेहरू बड़े थे। घर में एकेडमिक माहौल था। पढ़ाई लिखाई का माहौल था। वो भी पढ़ाई किए। आगे वो वकालत की प्रैक्टिस शुरू किए। वकालत करना शुरू किए। लेकिन 1860 में उस समय परिवार आगरा में ही था। तो वो प्रैक्टिस-वैक्टिस वहां करते थे। लेकिन 1860 में क्या हुआ कि ब्रिटिश सरकार ने नॉर्थ वेस्टर्न हाई कोर्ट को जो है आगरा से पहले आगरा में हाई कोर्ट था आगरा से शिफ्ट करके इलाहाबाद कर दिया उसे ट्रांसफर कर दिया।

अब 1860 की ये बात है। उसके बाद से हाई कोर्ट इलाहाबाद जब आ गया तो हालांकि वो लोग वहां भी प्रैक्टिस करते थे। अभी जो थे मोतीलाल नेहरू वो छोटे थे और वो वहां प्रैक्टिस कर चुके थे। लेकिन उनको ये लगा कि जो नंदलाल नेहरू हैं उनको ये लगा कि अगर हम लोग यहां से इलाहाबाद चले जाते हैं तो हमारी जो एजुकेशन है वो और अच्छे काम आएगी क्योंकि आगरा वाला हाईकोर्ट अब इलाहाबाद में चला गया है। तो नेहरू का पूरा परिवार 1880 में के दशक में आगरा से इलाहाबाद आ गया। आगरा में भी मकान था और इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू और उनके भाई नंदलाल नेहरू दोनों ने वकालत शुरू की।

मोतीलाल नेहरू पढ़ने में बहुत तेज थे, बहस करने में बहुत तेज थे। और चूंकि उनको गाइडेंस अपने भाई की मिली थी तो उसके बाद से मोतीलाल नेहरू की वकालत बहुत सफल हुई। वो देश के और इलाहाबाद के प्रसिद्ध वकीलों में से एक बन गए। उन्होंने खूब पैसा कमाया और मोतीलाल नेहरू ने वहीं पर आनंद भवन खरीदा। आनंद भवन पहले से था। आनंद भवन खरीदा जो परिवार का बाद में मुख्य केंद्र बना। स्वतंत्रता आंदोलन का वो प्रमुख स्थान बना, ऑफिस बना। जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी वहां पर शादी हुई है।

इंदिरा गांधी की वो तस्वीरें आज भी आप आनंद भवन में जाएंगे तो देखेंगे। इंदिरा गांधी का घर है वहां पर और वो वहां पर पूरी फोटो है। आप उस घर में जाएंगे तो ऐसा लगेगा कि सब कुछ जीवंत सा दिख रहा है और यहीं नेहरू बाहर निकल के चले आएंगे। इंदिरा इस कमरे से बाहर निकल जाएंगी। वो आज भी आपको देखने को मिलेगा। इसी इलाहाबाद में आनंद भवन में जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को हुआ। अब आए यहां से नेहरू जिसको आप नेहरू नेहरू बोलते हैं वो नेहरू कितने पहले से हैं? अब आप इसको समझ सकते हैं। जैसे फिराक गोरखपुरी, इमरान प्रतापगढ़ी वैसे ही जवाहरलाल नेहरू, नेहरू नहर के किनारे और उनके पिता पिता के पिता से लगता हुआ चला आ रहा था। अब यहां आप समझ गए होंगे।

इसी तरह नेहरू परिवार स्थाई रूप से इलाहाबाद में बस गया और यहीं से उनकी राजनैतिक यात्रा शुरू हुई। गांधी जी से संपर्क और ये तमाम चीजें आगे आपको इतिहास में पढ़ने को मिलेंगी। लेकिन अब मैं आपको बताऊंगा कि गांधी परिवार का इतिहास कि नेहरू तो आप समझ लिए। अब गांधी को समझिए कि इंदिरा गांधी गांधी कैसे बनी थी? इंदिरा प्रियदर्शनी नेहरू से इंदिरा गांधी कैसे बनी थी? इसको मैं बताऊंगा लेकिन गांधी परिवार में कौन किससे शादी किया है? कौन किस धर्म का है?

यह भी आपको जान लेना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू के पिता आपको बता दिया मोतीलाल नेहरू, मोतीलाल नेहरू के पिता गंगाधर नेहरू, कश्मीरी पंडित और माता स्वरूप रानी नेहरू कश्मीरी पंडित। मोतीलाल नेहरू की तीन संतान थी। जवाहरलाल नेहरू, शादी हुई उनकी कमला नेहरू से। ये दोनों लोग कश्मीरी पंडित थे। जवाहरलाल नेहरू की दो बहनें थी।

पहली का नाम विजय लक्ष्मी पंडित, दूसरी का नाम कृष्णा नेहरू हट्टी सिंह। और इन दोनों लोगों की शादी जैसे विजय लक्ष्मी पंडित जी की शादी जो है वो रंजीत सीताराम पंडित से हुई और किशा कृष्णा नेहरू हट्टी सिंह की शादी जीपी हट्टी सिंह से हुई। अब ये महिला का परिवार है। इसलिए ये नेहरू खानदान से अब उस समय अलग हो गया। मतलब बहनें दूसरे घर चली जाती हैं। लड़कियां दूसरे घर चली जाती हैं। ठीक है? इसके बाद से इंदिरा गांधी का विवाह और गांधी शब्द की एंट्री आपको समझ लेते हैं। इसके बाद से मैं खानदान में और लोगों के बारे में बताता हूं। इंदिरा गांधी में गांधी शब्द कहां से आया? फिरोज गांधी। फिरोज गांधी का जो शुरुआती नाम था उनका नाम था फिरोज जहांगीर गैंडी।

फिरोज जहांगीर गैंडी। गैंडी जो होता है वो फारसी शब्द होता है। फारसी जाति होता है। इनका जन्म 12 सितंबर 1912 को बॉम्बे में हुआ था। पारसी परिवार में जन्मे थे। फिरोज के पिता का नाम था जहांगीर फरदून गैंडी। ये एक इंजीनियर थे और माता का नाम था रतमई। और इंदिरा गांधी फिरोज गांधी जुड़ने लगे क्योंकि फिरोज गांधी भी देश के आंदोलन से जुड़े हुए थे। भारत को बचाने के लिए उस समय देश में जो स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था उसमें फिरोज गांधी भी जुड़े हुए थे।

इंदिरा गांधी भी जुड़े हुए थे। तो अक्सर इन दोनों लोगों की मुलाकात होती थी। दोनों लोगों की विचारधारा कॉम्बिनेशन बाद में भले कहा जाता है गड़बड़ा गया लेकिन शुरुआत में जो बड़ा एक था और शादी दोनों लोग करना चाहे दोनों लोगों में प्रेम हो गया और दोनों लोग शादी करना चाहते थे इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी अभी फिरोज गैंडी थे और इंदिरा प्रियदर्शनी थी।

आप समझिए यहां पे इन फिरोज गैंडी थे और इंदिरा प्रियदर्शनी थी अलग-अलग किताबों में इसके अलग-अलग जिक्र मिलते हैं इसलिए यहां पर कई कई जगह विवाद उत्पन्न हो जाता है। फिरोज़ गैंडी गैंडी थे। लेकिन फिरोज़ गांधी ने गांधी जी से प्रभावित होकर अपने गैंडी नाम को गांधी कर दिया। कुछ लोग ये भी कहते हैं कि फिरोज गांधी का जो परिवार था वो नेहरू परिवार के वहां अधिक जा जाता रहता था। गांधी जी से मुलाकात करता था और गैंडी को बार-बार अखबार वाले गांधी लिख देते थे। इसलिए एक दिन उन्हें लगा कि गांधी ये लिखना ठीक है। तो ये भी कुछ लोग इस तरह की बातें करते हैं। लेकिन जो तथ्यात्मक चीजें हैं मैं वो बता रहा हूं। जब इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी गैंडी की प्रेम कहानी नेहरू जी के पास आई तो नेहरू जी उस समय इसके समर्थन में नहीं थे। नेहरू जी नहीं चाहते थे कि इंदिरा प्रियदर्शनी की और फिरोज गैंडी की शादी हो।

जवाहर नेहरू नहीं चाहते थे कि इनकी शादी हो और किसी उपयुक्त परिवार किसी बड़े परिवार में इंदिरा प्रदर्शनी की वो शादी कराना चाह रहे थे चाह रहे थे लेकिन अंत में 26 मार्च 1942 को हिंदी रीति रिवाज से शादी हो गई। अच्छा इसमें दो किताबों का वर्णन है। सागरिका घोष की किताब है द इंडिया मोस्ट प्राइम मिनिस्टर पावर प्राइम मिनिस्टर में उल्लेख मिलता है कि फिरोज ने अपने सरनेम में गै गांधी रखा महात्मा गांधी के सम्मान में। फिरोज गांधी का मूल नाम गांधी था। ये किताब में सागरिका घोष की है। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर मैं आज पढ़ रहा था। उसमें छपी खबर के अनुसार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह नाम में बदलाव आया। लेकिन जो बातें वर्बबली कही जाती हैं।

लोग कहते हैं कि जब इन दोनों परिवारों के इस की मैं पुष्टि नहीं कर रहा हूं। लेकिन वर्बली जो चर्चा होती रहती है कि जब इन दोनों परिवारों में शादियां नहीं हो रही थी। जवाहरलाल नेहरू तैयार नहीं थे इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की शादी करवाने के लिए तो उस समय महात्मा गांधी ने चूंकि महात्मा गांधी जाति पाती धर्म के खिलाफ रहते थे वो अक्सर जाति पाती तोड़ो अभियान में रहते थे तो उन्होंने कहा कि इनको मैं दोनों को अपना सरनेम दे देता हूं। हालांकि कहीं-कहीं जिक्र आता है कि 1931 में ही फिरोज गांधी ने अपना नाम के आगे गांधी शब्द लगाना उपयोग कर लिया था।

इसका भी इतिहास में जिक्र आता है और शादीकि जो है 1942 में हुई थी 12 साल बाद हुई थी और दोनों के रस्ते हो गए थे और इंदिरा गांधी भी इंदिरा गांधी को भी गांधी जी ने गांधी नाम अपना दिया था। इसकी वर्बली चर्चा खूब होती रहती है। चलिए यहां तक तो आप समझ गए गांधी जी से गांधी की एंट्री। गांधी जी ने ही गांधी से प्रेरित होकर इंदिरा गांधी अपने नाम के आगे गांधी लगा ली और फिरोज गांधी अपने नाम के आगे लगा ली। ये दोनों तथ्यात्मक है। दोनों लोग प्रेरित हो के लगाए। गांधी जी ने दिया नहीं दिया कुछ यह पता इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तो नहीं है।

लेकिन आप यह जरूर कह सकते हैं कि दोनों लोगों ने गांधी जी से प्रभावित होकर अपने नाम के आगे गांधी लगा लिया। आप भी लगा सकते हैं। हम भी लगा सकते हैं। अब जैसे मेरा नाम मित्र प्रकाश है। कल मैं मित्र प्रकाश गांधी लिख लूं तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होगी क्योंकि गांधी कोई भी गांधी से प्रभावित होकर नाम लिख सकता है। मैं लखनऊ से अगर आता हूं। मैं दिल्ली से आता हूं। मैं अपने आंग में लखनऊ दिल्ली लिख लूं। तो इससे कोई किसी को दिक्कत नहीं होगी। वो आपके नाम बनता जाएगा। आप बहुत बड़े आदमी बन गए तो आपका खानदान वो नाम लिखता चला जाएगा।

बहुत सारे लोग गांव के नाम से जाने जाते हैं। बहुत सारे लोग शहरों के नाम से जाने जा सकते हैं। इसी टाइप की चीजें होती रहती हैं। अब जवाहरलाल नेहरू की पीढ़ी अब जो मुस्लिम वाली चर्चा होती है वो मैं आपको बताता हूं कि कहां से अब ये पता चल गया कि फिरोज गैंडी पारसी थे ना कि मुस्लिम क्योंकि फिरोज गांधी को लोग मुस्लिम कहते हैं। जहांगीर उनके उनके पिता को जहांगीर खान बताते हैं। तो वो मुस्लिम नहीं पारसी थे। अब इंदिरा गांधी की बेटी की जो पीढ़ी है उस पे आते हैं।

इंदिरा गांधीकि गांधी बन चुकी थी। फिरोज गांधी भी गांधी बन चुके थे तो इनके लड़के भी गांधी ही हुए। तो राजीव गांधी संजय गांधी दो पुत्र पैदा हुए इंदिरा गांधी से। राजीव गांधी की जो पीढ़ी है उसमें राहुल गांधी हुई। प्रियंका गांधी हुई और राजीव गांधी ने शादी की सोनिया गांधी से। सोनिया गांधी का पहले नाम क्या था पता है? सोनिया गांधी का पहले नाम था एंटोनियो माइनो और इन ये जो थी वो रोमन कैथोलिक ईसाई थी। ये मुझे नाम मैंने लिखा नहीं मुझे नाम याद है क्योंकि इसकी चर्चा भी होती रहती है। तो ये थी रोमन कैथोलिक ईसाई।

अब ये शादी कैसे हुई? कहां हुई? अगर इस पे चर्चा करेंगे तो वीडियो बहुत बड़ी हो जाएगी। तो यहां मैं धर्म बता रहा हूं कि सोनिया गांधी रोमन कैथोलिक ईसाई से जब वो राजीव गांधी से शादी की तो सोनिया भी अब गांधी हो गई। उनको भारत में नया नाम मिला। उसके बाद से 84 में उनको नागरिकता भी मिल गई। उसके बाद से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी इनके दो लड़के हुए। राहुल गांधी ने अभी किसी से शादी नहीं की है। प्रियंका गांधी ने शादी की रॉबर्ट वाड्रा से। अब यहां पर रॉबर्ट वाड्रा के साथ जातिगत और धर्म वाली समस्या है। कई लोग उन्हें क्रिश्चियन कहते हैं तो कुछ लोग राजस्थानी कहते हैं तो कुछ लोग मुरादाबादी कहते हैं तो कुछ लोग हिंदू कहते हैं। तो अब इसमें भी सच्चाई जान लीजिए।

रॉबर्ट वाड्रा प्रियंका गांधी से शादी किए। यह भी एक प्रेम विवाह था। वो भी शादी पूरे देश ने देखी। लेकिन रॉबर्ट वाड्रा के पिता का नाम था राजेंद्र वाड्रा। वो एक हिंदू थे। उनकी माता का नाम था मैरिन वाड्रा। वो एक ईसाई थी। रॉबर्ट वाड्रा ने जब प्रियंका गांधी से शादी की तो वो हिंदू धर्म से रीति-रिवाज से शादी किए। कई जगह वो कहते देखे गए कि वो हनुमान जी के भक्त हैं। कई जगह वो मंदिरों में जाते रहे प्रियंका गांधी के साथ। इसलिए वो खुद को हिंदू मानते हैं। इसलिए उन्हें हिंदू कहना ही ठीक है ना ही ना कि ईसाई कहना ठीक है। उनके पिता भी हिंदू थे। उनकी माता ईसाई थी। अब ये वाड्रा शब्दकि थोड़ा सा कंफ्यूजन क्रिएट कर देता है।

लेकिन रॉबर्ट वाड्रा खुद को अभी भी हिंदू मानते हैं और वो हिंदू हैं। तो अब इससे ईसाई होने का कोई प्रमाण नहीं मिलता है। लेकिन इसके आगे अगर हम पहुंचते हैं रॉबर्ट वाड्रा के खानदान पे आते हैं तो उन रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गांधी के दो बच्चे पैदा हुए। राहयान वाड्रा रिहान कहते हैं जिनको और मियारा वाड्रा ये दो एक लड़की और एक लड़का। अब इसी में जो रिहान है उनकी सगाई हो रही है अीबा बेग से। अीबा बेग मुस्लिम है। अब अीबा बेग कौन है उनको मैं बता दे रहा हूं। दो बच्चे थे इनके वाड्रा वाड्रा के। वाड्रा गांधी भी जोड़े जाते हैं। गांधी परिवार के हैं ये लोग। तो अब अीबा वेग भी आ गई। अब अीबा गांधी ये हो सकती हैं। भविष्य में हो जाए। पॉलिटिक्स में चुनाव लड़े तो ये भी गांधी परिवार की सदस्य हो जाएंगी। तो अब अीबा से आते हैं कि अीबा वेग कौन है? क्योंकि अभिभावक की चर्चा हो रही है। पूरे गांधी परिवार को समझाने के बाद अभिभावक को समझा रहा हूं। इससे पहले भी मैं अभिभावक की कल बायोग्राफी कर चुका हूं। अगर आप वो देख चुके हैं तो ये हिस्सा छोड़ दीजिए।

नहीं तो अभिवाग के बारे में जान लीजिए। अभिवा बेग की उम्र 25 साल है। अीबा वेग दिल्ली की रहने वाली एक क्रिएटिव प्रोफेशनल हैं। अभिभाव बेग के पिता का नाम इमरान बेग है। वो दिल्ली के एक बड़े बिजनेसमैन हैं। अीबा बेग की माता का नाम नंदिता कथिपालिया बेग है। पहले वो भी हिंदू थी। एक जानीमानी इंटीरियर डिजाइनर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नंदिता बेग जो है वो प्रियंका गांधी की बहुत पुरानी और करीबी दोस्त हैं। अविवा बेग जो दिख रही हैं इनकी उम्र जो 25 साल है। इनके साथ ही रिहान वाड्रा यानी प्रियंका गांधी के लड़के की शादी हो रही है। इनकी जो शिक्षा हुई है वो स्कूल मॉडर्न जो स्कूलिंग शिक्षा हुई है वो मॉडर्न स्कूल बाराखं रोड दिल्ली से हुई है जिसे आप जानते होंगे। उच्च शिक्षा हुई है ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी से। विषय इनका रहा है जर्नलिज्म, कम कम्युनिकेशन और मीडिया स्टडीज। अभिभाव वेग ने मीडिया, फोटोग्राफी, फैशन, कल्चर और और आर्ट प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों में काम किया है। इनके और इनके होने वाले पति रिहान की दोनों की सिमिलर सोच मिलती है।

दोनों एक तरह से फोटोग्राफर हैं। फोटो खींचते हैं। एंटीिक फोटो खींचते हैं। इनके Instagram पे जाके देखेंगे तो खूब सारी एंटीिक फोटो और खूब घूमना फिरना जिसमें लंदन पेरेस की खूब सारी आपको फोटो दिखाई देंगी। आप प्रोफाइल पे इनके जाएंगे तो विजिट कर सकते हैं।

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