नमस्कार दोस्तों। बात कर लेते हैं नीले ड्रम केस यानी मेरठ के उस केस की जिसमें आरोपी थी साहिल और मुस्कान। आपको बता दूं इसमें कोर्ट का फैसला आ गया है और दोनों को फांसी की सजा सुना दी गई है। यानी कि लोअर कोर्ट ने अब दोनों आरोपियों के लिए फांसी मुकर्रर की है। हालांकि अभी बैटल बहुत लंबी है क्योंकि इस फैसले के खिलाफ जो आरोपी पक्ष है वो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है। लेकिन कोर्ट ने माना कि ये रेस्ट ऑफ रेयर केस है। कोर्ट ने माना कि जिस तरह से सौरभ की हत्या की गई उसके शव के टुकड़े किए गए और उसको ड्रम के अंदर डाल दिया गया। यह अपने आप में हीनियस क्राइम था और यह रेस्ट ऑफ रेयर केस है। इसी बिना पर अब फैसला आया कोर्ट का चंद मिनटों पहले। दरअसल सुबह कोर्ट ने जो पॉइंट ऑफ सेंटेंस था उस पर आर्गुमेंट की थी। जब दोनों से पूछा यानी दोनों आरोपियों से साहिल शुक्ला से और मुस्कान से कि वो कुछ कहना चाहते हैं तो दोनों ने कुछ नहीं कहा। इसके बाद कोर्ट ने 4:00 बजे के लिए फैसला मुकरर कर दिया। अब जैसे ही कोर्ट जज अरविंद मिश्रा पहुंचे तभी उन्होंने दोनों आरोपियों के लिए डेथ सेंटेंस मुकरर की है।
ये अपने आप में बड़ा फैसला है क्योंकि जिस तरह से ये पूरा प्रकरण हुआ क्या थी इसकी टाइमलाइन कैसे-कैसे वो हुआ आपको बताता हूं। दरअसल मेरठ का इसको नीला ड्रम हत्याकांड कहते हैं। इसकी पूरी टाइमलाइन आपको बताता हूं। फरवरी 2025 से लेकर आज तक फरवरी 2025 यानी कि 24 फरवरी को मर्चेंट नेवी अवसर सौरभ अपनी पत्नी मुस्कान और बेटी का जन्मदिन मनाने आप सोचिए लंदन से मेरठ लौटा। इसके बाद 28 फरवरी को बेटी पीहू के जन्मदिन पर सौरभ और मुस्कान का साथ में डांस करने का एक वीडियो भी वायरल हुआ जो सबने देखा। 3 मार्च को पुलिस की जांच के मुताबिक इसी रात मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर सौरभ की बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद शव के टुकड़े कर दिए और नीले प्लास्टिक के ड्रम में भर दिए। दुर्गंध दबाने के लिए उसमें सीमेंट और बालू का घोल भर दिया और उसको सील कर दिया। आप सोचिए कितनी बेरहमी से इसने हत्या की। इसके बाद किसी को पता ना चले। हत्या को अंजाम देने के बाद मुस्कान अपने आशिक साहिल के साथ हिमाचल प्रदेश घूमने चली गई और वहां होटल में पतिप बनकर रह गई। इस दौरान सौरभ के फोन से उसके परिवार को संदेश भेजे जाते रहे ताकि यह पता लगे कि शायद वह जिंदा है। आप सोचिए किस तरह की उसने साजिश रखी। 17 फरवरी को जब काफी समय हो गया, परिवार का संपर्क नहीं हो पा रहा था तो उसके बाद हिमाचल से लौटने के बाद शक गहराने पर मुस्कान ने अपने परिवार के सामने जुर्म कबूल किया और पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई।
लेकिन आपको बता दूं इस इस सीक्वेंस से पहले क्या हुआ था। दरअसल यह लड़की भागी-भागी फिर रही थी और लगातार सौरभ भी नहीं मिल रहा था। पुलिस जो है इन्वेस्टिगेशन कर रही थी। जब पुलिस इन्वेस्टिगेशन करते-करते कुछ सीसीटीवी फुटेज मिले। इसकी सीडीआर रिकॉर्ड्स निकाली तो पता चला कि यह गायब है और यह फोन भी पिक नहीं कर रही है। ये भी पता चला कि उसका सौरभ का फोन भी कुछ वक्त के लिए चला था और यह भी पता चला कि फोन की लोकेशन लास्ट लोकेशन जो है हिमाचल प्रदेश आ रही है। ऐसे में पुलिस की टीम ने छापेमारी करी और फाइनली इसको अरेस्ट कर लिया। और आपको बता दूं इसने ऐसा क्यों किया था? इसका साफ-साफ कहना था कि वो उससे प्यार करती थी और वो चाहती थी कि सौरभ से पीछा छूट जाए। इसी वजह से उसने इस हत्या का अंजाम दिया। आपको बता दूं 18 मार्च 2025 को ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र स्थित मकान में पुलिस ने छापा मारा और आप सोचिए नीले ड्रम से सौरभ राजपूत का सड़ा गला शव बरामद हुआ। पुलिस ने मुख्य आरोपी मुस्कान और साहिल को अरेस्ट कर लिया। 19 मार्च को शव का पोस्टमार्टम कराया गया और दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। मई 2025 की बात है जब पुलिस ने इस मामले में कई धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए 34 गवाहों और सबूतों के साथ अदालत में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट के बाद सुनवाई शुरू हुई और मेरठ के मेडिकल अस्पताल में एक बेटी को इसने जन्म दिया मुस्कान ने और ये से इत्तेफाक किया गया कि सौरव राजपूत का भी उस दिन जन्मदिन था जब इसने जन्म दिया बच्ची को। ट्रायल चलता रहा। कई सारे विटनेसेस पेश हुए।
अदालत में सीआरपी की धारा 313 के तहत आरोपियों के बयान दर्ज हुए। 13 महीने का वक्त हुआ। आप सोचिए 126 से ज्यादा तारीखें डेट्स लगी और 22 से ज्यादा गवाह इस पूरे मामले में उनके बयान दर्ज हुए। इसके बाद अंतिम बहस हुई। अंतिम बहस हुई। साफ-साफ जो मेरठ की जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा 19 सितंबर को। और आप सोचिए 30 सितंबर को सबसे पहले इसमें फैसला आया जिसमें दोनों मूल दोषी का नाम दे दिया गया। लेकिन अब सवाल ये था कि पॉइंट ऑफ सेंटेंस पर आर्गुममेंट होनी थी। आज सजा का दिन था। यह मुकरर होना था कि सजा कितनी दी जाए। जब कोर्ट आज सुबह बैठी तो इस मामले में दोनों का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान हुआ। हालांकि उस दौरान ना तो साहिल ने कुछ बोला ना मुस्कान ने कुछ बोला। जब उनसे पूछा गया कि कोई वो दलील देना चाहते थे तो उन्होंने कोई नहीं दिया। 4:00 बजे दोबारा कोर्ट बैठी और कोर्ट ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। ये अपने आप में ऐतिहासिक फैसला होगा। लेकिन जैसे मैंने बताया कि बैटल अभी बहुत लंबी है। अभी सिर्फ यही नहीं है कि यहां पर जो फैसला आ गया है उससे चीजें बदल जाएंगी। अभी हाई कोर्ट है, सुप्रीम कोर्ट है। यानी आरोपियों को फांसी के स्तर तक पहुंचने में वक्त लगेगा। और ये भी हो सकता है कि ऊपरी अदालत में कई बार ऐसा होता है फैसला भी चेंज हो जाए। कई बार होता है सेम रहता है। तो हम उम्मीद यही करते हैं इस मामले में जो सख्त से सख्त सजा है वो आरोपियों को मिले। भी कोर्ट ने जो आदेश दिया है उस पे आप अभी अभी उन्होंने फांसी का ऐलान किया है। फांसी की डेट डिसाइड नहीं करी है।
अगर फांसी जिस दिन हो जाएगी उस दिन हमको संतुष्टि ये बात तो सामने आ गई थी कि किस तरीके से सौरभ के जो मुस्कान के माता हैं उन्होंने लिख के दिया था कि अगर फांसी की सजा होती है तो आगे नहीं जाएंगे और सौरभ अच्छा लड़का था। वो तो वो वो किस वजह से बोल रहे हैं? वो अपने आप को बचाने के मारे बोल रहे थे कि सौरभ बहुत अच्छा है। अगर उनके उसका साथ देते और अपनी लड़की का साथ नहीं देते वो। जिस तरीके से पिछला डेढ़ साल बीता उसको अब आप कैसे देखती हैं? जब यह कोर्ट का यह फैसला बहुत बहुत दुख भरा दिन निकले हैं। हर दिन हम रो-रो के निकले हैं। हर दिन याद करते थे। हर चीज हमारे नजरों के सामने घूमती है। हमारी नजरों से तो खैर हमारा बच्चा जाने का ही नहीं। घर के एक-एक कोने में बसा पड़ा है वो। अच्छा अब आप बताएं कि अब आप जिस तरीके से नीला ड्रम एक कहें कि पूरे देश में एक सिंबल बन गया था। अब आप क्या संदेश देना चाहेंगे आज तक? माता जी क्या संदेश देना चाहेंगे? हम तो यही देना संदेश चाहते हैं भैया किसी का भी बच्चे को मारो मत नहीं रहना उनके साथ अलग हो जाओ अगर कोई लड़का नहीं चाहता लड़की को मार देता है तो वह भी अपने नई लड़की के साथ रहना तो वह भी अलग हो जाए अगर अगर ऐसा काम करेंगे तो उनको भी फांसी की ही सजा होएगी