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होर्मुज स्ट्रेट पर किस देश का हक? क्या कहता है अंतर्राष्ट्रीय कानून..

Hindi Post

ईरान इजराइल युद्ध के बीच होमज स्ट्रेट की चर्चा हो रही है क्योंकि होरमज स्ट्रेट से जिस तरीके से जहाजों की आवाजाही बंद है तो दुनिया में महंगाई की मार देखने को मिल रही है। इसी वजह से होरमज पर बहुत चर्चा हो रही है। यहां बड़ा सवाल ये है कि आखिर होरमज पर किसका अधिकार है? लेकिन उससे पहले आपको बता दें कि दुनिया का 20 से 25 फीसदी ऊर्जा आपूर्ति होमज स्टेट के जरिए ही होता है और इसीलिए यह पूरी दुनिया के लिए अहम हो जाता है। और यहीं से यह सवाल भी होता है कि क्योंकि जिस तरीके से ईरान कंट्रोल कर रहा है होमस्ट्रेट पर तो एक सवाल का जन्म होता है। आखिर होमजिस्ट्रेट पर किस देश का अधिकार है? क्या ईरान का अधिकार है? या इसके लिए कोई अंतरराष्ट्रीय नियम है? दरअसल ईरान द्वारा इस अहम समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही सीमित किए जाने के बाद से ही इस सवाल का जन्म हुआ है।

और सवाल यही क्या उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ऐसा करने का अधिकार मिला है? और क्या अमेरिका जैसे देश सैन्य काफिलों के जरिए इस रास्ते को सुरक्षित बना सकते हैं? जैसा कि पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोरमुच फोर्स गठन करने की वकालत की थी। हालांकि तब दुनिया के कई देशों ने मना कर दिया था। लेकिन अब छह देशों ने होरमुच पर बड़ा बयान दिया है। तो ऐसे में इस पूरे वीडियो में आपको बताता हूं कि होरमुच पर अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है? होरमुच पर किस देश का अधिकार है और होरमुच की अहमियत क्यों है? तो सबसे पहला सवाल यही कि क्यों अहम है होरमुच? होमज स्टेट फॉरेस्ट की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है

और यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। होरमुज स्टेट की चौड़ाई 39 कि.मी. है और यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपना अहम योगदान देता है क्योंकि दुनिया का 20 से 25% ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते के जरिए होता है। अब सवाल यह है कि क्या ईरान होरमोज पर जबरन कब्जा कर सकता है? क्योंकि ईरान की तरफ से यह बार-बार चेतावनी सामने आई कि अगर कोई देश जो अमेरिका और इजराइल से जुड़ा हुआ है या उसका सपोर्टर है उसका जहाज अगर यहां से जाता है तो उस पर हम मिसाइलों से हमला करेंगे और कई देशों के जहाजों पर ईरान की तरफ से हमला भी किया गया। तो यहीं पर यह सवाल है कि क्या ईरान ऐसा कर सकता है?

और क्या अमेरिका दुनिया के कई देशों के साथ मिलकर यहां ईरान के खिलाफ हमला कर इस पूरे स्टेट पर कब्जा जमा सकता है कि जैसा कि पिछले दिनों ट्रंप ने पूरी दुनिया से आवाह्वन किया था और एक पोस्ट लिखा था जिसमें यूरोप समेत कई देशों से यह अपील की थी कि आप लोग आइए अपनेपने जहाजी बीड़े को आप भेजिए और होरमुच पर कब्जा जमाते हैं और पूरी दुनिया के लिए ऊर्जा आपूर्ति का रास्ता सुनिश्चित करते हैं। एक और सवाल है कि क्या अमेरिका दुनिया के कई देशों के साथ मिलकर यहां ईरान के खिलाफ हमला कर कब्जा जमा सकेगा?


जैसा कि पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के कई देशों से अपील की थी जिसमें यूरोप के देश थे, ऑस्ट्रेलिया था, जापान था। कई देशों से अपील की थी कि आइए अपने जंगी बेड़े को आप लोग भेजिए और हम लोग होरमुज पर कब्जा जमाते हैं और पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति के मामले को सुनिश्चित करते हैं। तो इसीलिए होरमुज स्टेट पर ये पूरा बवाल है। अब अगर अमेरिका इस पर कब्जा जमाएगा तो क्या असर पड़ेगा? दरअसल अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से होरमुज को अंतरराष्ट्रीय स्टेट माना जाता है।

मतलब इस पर अंतरराष्ट्रीय नियम लागू होता है। किसी एक देश का नियम लागू नहीं होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि भले ही यह ईरान और ओमान के अधिकार क्षेत्र में आता हो लेकिन दुनिया के सभी देशों के जहाजों को यहां से गुजरने का अधिकार है। शर्त केवल इतनी है कि जहाज बिना रुके और लगातार इस मार्ग को पार करें। मतलब इस दरमियान ओमान और ईरान के बीच जहाजों को रोकना नहीं होगा। शर्त बहुत सीधा है कि आप आइए और गुजर जाइए। रुकने की आवश्यकता नहीं। यह अंतरराष्ट्रीय कानून है। तो यहां पर एक और सवाल है।

क्या युद्ध के समय नियम बदल जाते हैं? क्योंकि आम दिनों में तो ऐसा है कि आपके जहाज यहां से गुजर सकते हैं अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक। आप पर कोई हमला नहीं करेगा। आपके जहाज पर किसी भी तरह का कोई नियंत्रण हासिल नहीं करेगा। जैसे ही युद्ध का वक्त आता है और सशस्त्र संघर्ष शुरू होता है तो नियम भी बदल जाते हैं और समुद्री युद्ध कानून लागू हो जाता है। इस कानून के तहत देशों को दो भागों में बांटा जाता है। युद्ध जैसे कि ईरान, इजराइल और अमेरिका और इसके अलावा तटस्थ जो इस संघर्ष का हिस्सा नहीं है।

मतलब जो इस युद्ध में भाग नहीं ले रहे हैं उन देशों के लिए अलग कानून होता है और जो इस युद्ध में शामिल हैं जैसे कि मौजूदा समय में ईरान है, अमेरिका है और इजराइल है। इन दोनों के लिए अलग-अलग नियम लागू होते हैं। तो युद्ध के समय आपको बता दें कि 1994 में सैन वेमो मैनुअल दस्तावेज साइन हुआ था और यही लागू होता है। इस दस्तावेज में समुद्र में नौसैनिक युद्ध के नियमों का नियमों को परिभाषित किया गया है और तद देशों को समुद्र स्टेट से गुजरने का पूरा अधिकार दिया गया है। युद्ध में शामिल देश जहाजों को निशाना नहीं बना सकते हैं। मतलब कि जो देश युद्ध में शिरकत कर रहे हैं, भाग ले रहे हैं, वो उन देशों के जहाजों पर हमला नहीं कर सकते हैं

जो इस युद्ध में शामिल नहीं। लेकिन हां यहां पर नियम ये है कि अगर वहां से इजराइल या अमेरिका का झंडा लगा कोई जहाज गुजरता है तो ईरान उस पर हमला कर सकता है क्योंकि ये दोनों देश युद्ध में शामिल है और यहीं से एक और सवाल पैदा होता है कि क्या होरमुच को ईरान बंद कर सकता है क्योंकि लगातार उसकी तरफ से ऐसी धमकियां दी जाती रही क्योंकि युद्ध के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कानूनी रूप से स्थिति सीधी नहीं है। अगर कोई स्ट्रेट तदस्थ देश को नियंत्रण में हो तो उसे खुला रखना अनिवार्य होता है।

लेकिन जब वह किसी युद्धरत देश के प्रभाव में हो जैसे कि होरबुज के मामले में ईरान तो स्थिति बिल्कुल जटिल हो जाती है। ऐसे में ईरान पूरी तरह से रास्ता बंद करने का दावा तो कर सकता है लेकिन ऐसा कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर टकराव और प्रतिक्रिया को भी जन्म दे सकता है। मतलब एक व्यापक युद्ध को जन्म दे सकता है। अमेरिका जैसे देश अक्सर अपने युद्धपोतों के साथ व्यापारिक जहाजों को एक्सॉर्ट करने की रणनीति अपनाते हैं। जिससे उन्हें हमलों से बचाया जा सके। लेकिन यह रणनीति खुद जोखिम से भरी हुई है।

अगर कोई व्यापारी जहाज अमेरिकी युद्धपोत के साथ चलता है तो वह ईरान के लिए वैध सैन्य लक्ष्य बन सकता है। यानी सुरक्षा देने की कोशिश को कई बार खतरे को और भी बढ़ा सकती है। क्योंकि अगर जिस तरीके से अमेरिका की जो नीति होती है ऐसे वक्त में आपका एक व्यापारिक जहाज है और उसको स्कॉट किया जाता है। तो ऐसे में कई बार यह संदेश चला जाता है कि क्या जो दूसरा जहाज आ रहा है उसको जो स्कॉट किया जा रहा है क्या वो युद्ध की मंशा से आ रहा है या नहीं? और यहीं पर जो देश खुद को किसी भी तरफ का नहीं बताते हैं मतलब तथ हैं

उनके लिए भी जोखिम कम नहीं है। अगर कोई भी देश अप्रत्यक्ष रूप से किसी पक्ष की मदद करता है तो उसे भी युद्ध का हिस्सा माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में उसके जहाज और युद्धपोत भी हमले के दायरे में आ सकते हैं। यानी तटस्थ बने रहना भी इस संघर्ष में आसान नहीं है और उन पर भी युद्ध हो सकता है। जैसे कि कोई एक ऐसा देश है जो अमेरिका की मदद कर रहा है। लेकिन वो उस युद्ध में भागीदार की भूमिका में नहीं है।

और अगर ईरान को लगता है कि वह जो वो देश है वह अमेरिका या इजराइल की हेल्प कर रहा है चाहे वो सैन्य हेल्प हो चाहे वो किसी भी प्रकार की मदद हो तो ऐसी सिचुएशन में उस देश के जहाज पर ईरान हमला कर सकता है। यहां पर नियम बदल जाता है। होरबुज स्टेट पर अंतरराष्ट्रीय कानून अस्पष्ट दिशा जरूर देता है। लेकिन जमीनी हकीकत कहीं ज्यादा जटिल है। युद्ध के माहौल में कानूनी अधिकार और सैन्य रणनीतियां अक्सर आमने-सामने आ जाती हैं। तथा जहाज भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रह पाते हैं।

ऐसे में होरमुज अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है और इस परीक्षा ने कईयों को परेशानी में डाल दिया है। होमस को लेकर जो सवाल पैदा हुए हैं दुनिया के कई देशों के पास अभी तक उनका जवाब नहीं और जिस तरीके से यह जंग दिन-बदिन भयंकर होता जा रहा है। होमच को लेकर जो सवाल पैदा हो रहे हैं आने वाले वक्त में और भी जटिल हो सकते हैं.

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