[संगीत] मजा आता है घर से भाग जाने में। आज का जब तुम्हें पता हो कि वहां किसी को तुम्हारी जरूरत नहीं। उन दिनों काठमांडू में हरे रामा हरे कृष्णा की शूटिंग चल रही थी। एक दिन देव साहब ने फिल्म के एक सीन के लिए कुछ हिप्पियों को जमा कर लिया। उस दौर में काठमांडू हिप्पीज पैराडाइज [संगीत] यानी हिप्पियों का स्वर्ग हुआ करता था। वहां हर तरफ हिप्पी ही हिप्पी नजर आते थे। देवानंद ने जिन हिप्पियों को इकट्ठा किया था, वह सभी बहुत खुश थे क्योंकि उन्हें ना सिर्फ एक बॉलीवुड मूवी में नेपाल की खूबसूरत वादियों में चिलम फूंकते हुए फीचर होने का मौका मिल रहा था बल्कि मुफ्त का खाना और कुछ पैसे भी मिल रहे थे। देवानंद उस सीन को पूरे परफेक्शन के साथ शूट करना चाहते थे। वो चाहते थे कि फिल्म की सेंट्रल कैरेक्टर जेनिस जिसे जीनत अमान निभा रही थी वह भी कैमरे में ऐसी दिखे जैसे उन्होंने सच में नशा किया है।
देव साहब ने जब जीनत से अपने इस आईडिया का जिक्र किया तो वो बेझिझक इसके लिए तैयार हो गई। आईडिया था कि जीनत सच में नशीला पदार्थ भरी चिलम में कश मारे। जी हां, वही नशीला पदार्थ जिसे माल, [संगीत] जुल्फा, हैश, हशीष वगैरह-वगैरह कहा जाता है। कोई और नाम आपको भी पता हो तो बताइएगा कमेंट करके। खैर जीनत क्योंकि उस वक्त काफी युवा थी और वो स्मोकर भी थी तो वह चिलम फूंकने के लिए फौरन तैयार हो गई। उस वक्त जीनत के लिए भी वो एक नया एक्सपेरिमेंट था। राम का नाम बदनाम ना करो। शूटिंग शुरू हुई और वह सीन कंप्लीट करने में कई टेक्स लेने पड़ गए। जीनत हर टेक में चिलम फूंक रही थी। शाम को जिस वक्त देवानंद ने पैकअप अनाउंस किया। उस वक्त तक जीनत अमान नशे में पूरी तरह धुत हो चुकी थी। वो फुल हाई थी। ज़ीनत कहती हैं कि उस दिन उन्हें लग रहा था जैसे वह किसी पतंग की तरह हवा में उड़े चली जा रही हैं। वह इतने नशे में थी कि उन्हें एहसास हो गया था कि वह खुद तो होटल तक नहीं जा सकेंगी।
यूनिट के कुछ लोगों ने जीनत को कार में बैठाया। जिस होटल में हरे रामा हरे कृष्णा की यूनिट ठहरी हुई थी, वो शूटिंग लोकेशन [संगीत] से जरा दूर था। इसलिए वहां तक पहुंचने में वक्त लगा। यूनिट को नेपाल आए हुए कुछ दिन हो चुके थे। लेकिन उस दिन नेपाल जीनत अमान को जितना खूबसूरत लग रहा था, उससे पहले नहीं लगा था। होटल की तरफ जाते हुए जीनत हिमालय की खूबसूरती को बहुत प्यार से निहार रही थी। किस्मत से ज़ीनत जब तक होटल पहुंची तब तक वो हाई से लो आ चुकी थी। यानी उनका नशा उतर चुका था। एक हजारों में मेरी बहना है। जीनत की मां भी उनके साथ काठमांडू [संगीत] आई थी। लेकिन जिस दिन चिलम फूंकने वाला वो सीन शूट हुआ था उस दिन मां होटल में ही रुक गई थी। जीनत आराम से होटल में आई और खा पीकर सो गई। उन्हें अगले दिन खबर मिली थी कि वो चिलम फूंक कर नशे में हो गई थी। यह बात उनकी मां को भी पता चल गई थी और उनकी मां बहुत नाराज हुई थी। जीनत की मां ने एक सीनियर क्रू मेंबर को तगड़ी डांट भी लगाई थी लेकिन उन्होंने जीनत को कुछ नहीं कहा। दम मारो दम। चलिए साथियों अब जीनो तमान जी की दूसरी रोचक कहानी जानते हैं जो कि उनके करियर की दूसरी बेहद अहम महत्वपूर्ण फिल्म से जुड़ी है। वो फिल्म थी सत्यम शिवम सुंदरम और कहानी है कि कैसे जिनतमान को सत्यम शिवम सुंदरम फिल्म में रूपा का रोल मिला था। कौन गली [गाना गाने की आवाज़][संगीत] गए श्याम ये साल 1976 की बात है। जीनतमान वकील बाबू नाम की एक फिल्म की शूटिंग कर रही थी।
उस फिल्म में मुख्य किरदार यानी [संगीत] वकील बाबू का किरदार निभा रहे थे राज कपूर। उनके छोटे भाई शशि कपूर जी भी उस फिल्म में थे। वो जीनत अमान के प्रेमी बने थे। शूटिंग के दौरान एक शॉट से दूसरे शॉट के बीच जब सेट व लाइटिंग्स में बदलाव किए जाते थे तब राज कपूर, शशि कपूर और जिन्नत तमान को थोड़ा ब्रेक मिल जाता था। जिसमें ये तीनों तथा अन्य कुछ कलाकार खूब बातें करते थे। उसी बातचीत के दौरान राज कपूर ने जिन्नतमान को एक नई कहानी बताई थी। कहानी कुछ यूं थी कि एक आदमी को एक लड़की की आवाज से इश्क हो जाता है। लेकिन जब वह उसका चेहरा देखता है तो दुविधा में फंस जाता है क्योंकि लड़की दिखने में खूबसूरत नहीं है। जीनत बताती हैं कि राज कपूर ने वकील बाबू फिल्म की शूटिंग के दौरान कई दफा उनके सामने पूरी एक्साइटमेंट में उस कहानी का जिक्र किया। यह भी बताया कि वह इस कहानी को फिल्म की शक्ल देने के लिए कितने बेकरार हैं। लेकिन उन्होंने एक बार भी जीनत को यह हिंट नहीं दिया कि वह इस फिल्म की हीरोइन हो सकती हैं। जबकि उस वक्त तक जीनत खुद भी एक जानी पहचानी एक्ट्रेस बन चुकी थी। देवानंद की हरे रामा हरे कृष्णा फिल्म ने जीनत अमान को बहुत मशहूर कर दिया था। राज कपूर की कहानी सुनने के बाद जीनत उस बदसूरत लड़की रूपा का किरदार निभाने के ख्वाब देखने लगी थी। राज कपूर ने रूपा के किरदार को जीनत से एक्सप्लेन भी किया था। इसलिए जीनत ने सोचा कि क्योंकि अब तक लोगों ने उन्हें एकदम मॉडर्न और वेस्टर्नाइज्ड लुक में देखा है।
तो शायद इसीलिए राज कपूर उन्हें एक गांव की लड़की रूपा के किरदार में लेने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। जीनत ने फैसला किया कि अब उन्हें ही कुछ करना होगा। ज़ीनत को पता था कि राज कपूर अपने आर के स्टूडियो वाले क्वार्टर में काफी वक्त गुजारते हैं। वहीं पर राज कपूर अपनी फिल्मों से जुड़ी इंपॉर्टेंट मीटिंग्स भी रखते हैं। तो एक दिन वकील बाबू फिल्म का अपना काम जीनत ने थोड़ा जल्दी खत्म किया और ड्रेसिंग रूम में जाकर उन्होंने कुछ वैसा लुक लिया जैसा कि राज कपूर ने कहानी सुनाने के दौरान गांव की लड़की रूपा के बारे में बताया था। जीनत ने एक घाघरा चोली पहनी और अपने बालों को गांव की लड़कियों की तरह चोटी करके बांधा। अपने चेहरे को बदसूरत दिखाने के लिए उन्होंने ग्लू से कुछ टिश्यू पेपर चेहरे पर चिपकाए। फिर जीनत पहुंच गई आर के स्टूडियो। गेट पर जीनत की मुलाकात राज कपूर के राइट हैंड माने जाने वाले जॉन से हुई। जीनत अमान को गांव की लड़की के भेष में देखकर जॉन को बड़ी हैरत हुई। जीनत ने जॉन से रिक्वेस्ट करते हुए कहा कि साहब जी को कहो कि रूपा आई है। जॉन भीतर गए और उन्होंने राज कपूर को वैसा ही बताया जैसा कि जीनत ने उनसे कहने को कहा था। वह सुन राज कपूर ने फौरन जीनत को अंदर बुलवाया और जब जीनत को उन्होंने उस रूप में देखा तो पहले तो वह बड़े हैरान हुए। फिर जोर से हंसे। अपनी हंसी रोक कर उन्होंने जीनत से कहा,
“तुम रुको। मैं जरा एक फोन करके आता हूं। दरअसल जीनत के एफर्ट से राज कपूर बहुत प्रभावित हुए थे। उन्हें जीनत की यह बात अच्छी लगी थी कि रूपा का रोल हासिल करने के लिए जीनत खुद पर काफी मेहनत करके आई हैं। कोई 20 मिनट के बाद राज कपूर की पत्नी कृष्णा जी वहां आई। कृष्णा जी के पर्स में कुछ सोने के सिक्के थे। राज कपूर ने कृष्णा जी से वह सोने के सिक्के [संगीत] लिए और जीनत अमान को थमाते हुए कहा यह तुम्हारा साइनिंग अमाउंट है। यूं इस तरह जीनत अमान बनी सत्यम शिवम सुंदरम की रूपा जीनत बताती है कि वो सोने के सिक्के उनके पास काफी वक्त तक रहे। लेकिन कुछ साल पहले उनके घर से किसी ने वो सोने के सिक्के चुरा लिए। राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला [संगीत] आखिर में एक और बात वकील बाबू नाम की जिस फिल्म के सेट पर जीन्नत अमान को राज कपूर ने सत्यम शिवम सुंदरम फिल्म की कहानी सुनाई थी वो बहुत देर से [संगीत] यानी 1982 में रिलीज हुई थी। जबकि सत्यम शिवम सुंदरम 1978 में ही रिलीज हो गई थी कोई 4 साल पहले। [संगीत] साथियों यह कहानी आपको कैसी लगी कमेंट करके बताइएगा जरूर। पसंद आई हो तो इस वीडियो को लाइक जरूर कीजिएगा और फिल्मी दुनिया के ऐसे ही अनसुने किस्से कहानियां देखने के लिए किस्सा टीवी को सब्सक्राइब भी जरूर कीजिएगा क्योंकि किस्सा टीवी पर आए दिन ऐसे ही किस्से आते रहते हैं। जय हिंद जय भारत।