दोज़ एक्सट्रीम लेफ्ट मार्क्स फर्सेस वी सी एक्सक्टली व्हाट्स हैपनिंग नाउ इन यूरोप दशहरे के दिन जब दिल्ली में कॉकरोच का पुतला जलाया जा रहा है। उसी समय पहली बार इजराइल के एक डिप्लोमेट यानिव रिवाच ने भारत में अराजकता फैला रहे कॉकरोचों और वामपंथियों पर बहुत बड़ा बयान दिया है। यानी रिवाच ने कहा है कि भारत और इजराइल दोनों एक जैसे ही हैं।
लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि हमारी चुनौतियां भी एक जैसी ही हैं। आज सड़कों पर युवा लोग जो कर रहे हैं वह खतरनाक है। हमें युवाओं को उनकी जड़ों, विरासत और भविष्य तीनों से एक साथ जोड़ना होगा। आज यूरोप में कुछ बाहरी ताकतें अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसा ही कुछ हम भारत और इजराइल में भी देख रहे हैं। इसीलिए हमें अपनी पहचान को मजबूत करने के लिए लगातार काम करते रहना चाहिए ताकि यह चरम वामपंथी ताकतें हमारे मूल्यों को अस्थिर ना कर सकें। इजराइली डिप्लोमेट यानी रिवाज ने बताया कि जब हम अपनी संस्कृति और मूल्यों के साथ जीते हैं तो कट्टरपंथी और वामपंथी हमारा मजाक उड़ाते हैं। हमें बोला जाता है कि मॉडर्न बनो। लेकिन यूरोप तो खुद को बहुत ही मॉडर्न बोलता है। तो आज यूरोप की ऐसी हालत क्यों हुई है? इसकी सबसे बड़ी वजह वामपंथी हैं।
चलिए आपको हिंदी ट्रांसलेशन के साथ इजराइल के डिप्लोमेट यानी रिवाज का बयान सुनवाते हैं। एंड वी अंडरस्टैंड दैट बोथ कंट्रीज इंडिया एंड इजराइल। भारत और इजराइल दोनों देशों के बीच ना केवल मूल्य समान है बल्कि दुर्भाग्य से हमारी चुनौतियां भी एक जैसी हैं। हमें युवाओं को उनकी जड़ों, विरासत और भविष्य तीनों से एक साथ जोड़ना होगा। इजराइल में भी हम बिल्कुल यही करते हैं और मुझे लगता है कि हमें ऐसा ही करना चाहिए। आज यूरोप में कुछ बाहरी ताकतें अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसा ही कुछ हम भारत और इजराइल में भी देख रहे हैं। इसलिए हमें अपनी पहचान को मजबूत करने के लिए लगातार काम करते रहना चाहिए ताकि यह चरम वामपंथी ताकतें हमारे मूल्यों को अस्थिर ना कर सकें। आपके अनुसार दोनों देशों के सामने अभी कौन सी सबसे गंभीर चुनौतियां हैं?
एक चुनौती यह है कि जब हम अपनी जड़ों की ओर लौटने की कोशिश करते हैं तो यह ताकतें हमें अधिक प्रगतिशील बनने के लिए कहती हैं। लेकिन यूरोप की स्थिति को देखें तो वहां अत्यधिक प्रगतिशील होने का क्या नतीजा निकला है यह सबके सामने है। अगर हम अपनी जड़ों, विरासत और संस्कृति को सहेज कर नहीं रखेंगे तो हम अपनी पहचान खो देंगे और हम देख ही सकते हैं कि इसका अंजाम क्या होता है।