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यु!द्ध विराम को लेकर ट्रंप का बड़ा एलान, ईरान में मचा हड़कंप!

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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से मोड़ पर पहुंच चुका है। सवाल यही है कि क्या एक बार फिर से ईरान और अमेरिका के बीच जाएगा? क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच जो इस्लामाबाद का समझौता हुआ था वो धराशाही होता हुआ नजर आ रहा है।

फार्मूस में तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए हैं। इतना ही नहीं ईरान को तेल बेचने की जो सीमित छूट मिली थी उसे भी अमेरिका ने अब वापस ले लिया है। हाल ही में जो इस्लामाबाद का समझौता हुआ था उनमें इन चीजों पर तफसील से बातचीत हुई थी। जो प्रतिबंध ईरान पर लगाए गए थे उन्हें हटाया गया था और ऐसे में अब एक बार फिर से दोनों के बीच तनातनी शुरू हो चुकी है। दोनों एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि इस्लामाबाद समझौता जो है ईरान कह रहा है अमेरिका ने तोड़ा अमेरिका कह रहा है ईरान ने तोड़ा। अब सवाल यह है कि आखिर इस कार्यवाही की वजह क्या है? इसका दुनिया पर क्या असर होगा और क्या मध्य पूर्व एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है?

दरअसल अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ हमलों का एक नया दौर शुरू किया। हमलों के साथ ही अमेरिका ने ईरानी तेल बेचने की अनुमति देने वाला जो लाइसेंस है उसे रद्द कर दिया। अमेरिका ने ईरान पर यह एक्शन ऐसे वक्त पर लिया है जब स्टेट ऑफ आर्मूस में तीन टैंकर्स पर हमले हुए हैं। स्टेट ऑफ आर्मूस में टैंकर पर अटैक और अमेरिका का नया एक्शन पश्चिम एशिया को एक बार फिर से डराने लगा है।

इससे पहले से ही नाजुक संघर्ष विराम पर दबाव और ज्यादा बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। स्टेट फॉर रूस दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में जब यहां पर तीन कमर्शियल टैंकर्स पर हमला हुआ तो अमेरिका ने इसका सीधा जिम्मेदार ईरान को ठहराया। अमेरिकी सेना ने जवाबी कारवाई की।

जवाबी कारवाई करते हुए ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, ड्रोन लॉन्च साइट्स और रेवोल्यूशनरी गार्ड के एक सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले अमेरिका की तरफ से किए गए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का यह कहना है कि इन हमलों का मकसद अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और भविष्य में ऐसे हमलों को सीधे तौर पर रोकना है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आया अली खामने के अंतिम संस्कार और शोक समारोह के बीच अमेरिका ने ईरान पर यह सैन्य कारवाई की है।

7 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड सेंट कॉम ने दक्षिण पश्चिमी ईरान के काठ ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिका ने जिन जगहों पर किए उनमें केशमदप, सिरिक और बंदर आवास के आसपास के इलाके शामिल बताए जा रहे हैं।

लेकिन मामला सिर्फ सैन्य कारवाही तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका ने ईरान को तेल निर्यात की जो अस्थाई छूट दी थी, उसे भी खत्म कर दिया गया है। मतलब साफ है कि ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचना और ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा दबाव डाल सकता है और वैश्विक तेल बाजार में भी अनिश्चितता बढ़ सकती है क्योंकि कहा यही जा रहा है कि स्टेट ऑफ फॉरमूस में एक बार फिर से परिस्थितियां बदल रही हैं। परिस्थितियां बदलने से पश्चिम एशिया में एक बार फिर से तनाव भड़क सकता है और क्रूड ऑयल की कीमतों में भी इजाफा देखा गया है। यानी कि सीधे तौर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका असर हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे वक्त पर हुआ जब ईरान में सर्वोच्च नेता आया अली खान ने के अंतिम संस्कार के कार्यक्रम चल रहे थे।

ऐसे माहौल में अमेरिकी हमलों को ईरान ने शांति समझौते का सीधे तौर पर उल्लंघन बताया है। कड़ी जवाबी कार्यवाही की चेतावनी दी गई है। अब यह भी समझते हैं कि दुनिया के लिए यह इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया है। ईरान में खामने के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 से 9 जुलाई तक चल रहे हैं। इस दौरान तेहरान, कोम, मशहद और अन्य शहरों में लाखों लोग शोक समारोह में शामिल हुए। 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में उनके सपुरदे खाक करने की तैयारी है। अमेरिका ने यह कारवाई स्ट्रेट ऑफ हरमूस में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की है। ये अमेरिका की तरफ से दावा किया जा रहा है। व ईरान ने पहले ही शोक समारोह के दौरान किसी भी सैन्य कारवाही के खिलाफ चेतावनी दी थी। ऐसे वक्त पर हुए अमेरिकी हमलों से दोनों देशों के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।

अगर स्ट्रेट ऑफ फॉर मूस में तनाव और बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो सबसे पहले असर कच्चे तेल की कीमतों पर होगा और ऐसा देखा भी गया है। अब आवाजाही पर वहां पर ब्रेक लगेगा तो जो 20% तेल वहां से आयात होता है दूसरे देशों को वो तो रुक जाएगा। तेल महंगा होने पर मतलब सीधे तौर पर पेट्रोल, डीजल, ट्रांसपोर्ट और कई जरूरी चीजों की कीमत में बढ़ोतरी होगी। आपका पेट्रोल डीजल महंगा होगा। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा तो चीजें तो ऑटोमेटिकली बाजार में महंगी होंगी और इसका असर हमने देखा भी है। यानी कि मध्य पूर्व का यह तनाव दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है। हाल घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी भी देखने को मिली है। अमेरिका ने ईरान को तेल कारोबार के लिए दी गई अस्थाई राहत अब वापस ले ली है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय यानी कि ओएफएसी ने यह कहा है यानी कि 7 जुलाई 2026 को जनरल लाइसेंस एक्स जो है वो रद्द कर दिया गया है। यह फैसला हाल ही में स्टेट ऑफ़ फॉरबूस में टैंकर्स पर जिस तरीके से हमला हुआ है और जवाबी कारवाई अमेरिका की तरफ से की गई उसके बाद अमेरिका ने यह सीधे तौर पर कह दिया है कि हम वो प्रतिबंध जो हटाए गए थे उन्हें एक बार फिर से लागू कर सकते हैं।

अब इसका क्या असर होगा? इस लाइसेंस के तहत 21 जून 2026 से 21 अगस्त 2026 तक ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन बिक्री और डिलीवरी की सीमित अनुमति दी गई थी। और इसके साथ-साथ अमेरिकी डॉलर में भुगतान जैसी संबंधित वित्तीय लेनदेन की भी इजाजत थी। अब लाइसेंस रद्द होने के बाद ईरान के तेल कारोबार पर अमेरिकी प्रतिबंध एक बार फिर से पूरी तरीके से लागू हो गए हैं। यानी कि अब एक बार फिर से भड़कता हुआ नजर आ रहा है

वो इस्लामाबाद की जो बातचीत थी वो खटाई में पड़ चुकी है। युद्ध भड़क चुका है। दोनों एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और इसका सीधा असर जो है पश्चिम एशिया में एक बार फिर से तनाव की स्थिति पैदा कर रहा

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