बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी इन दिनों अपनी फिल्म आवारापन 2 की सफलता को एंजॉय कर रहे हैं। फिल्म बंपर कमाई कर रही है। चंद दिनों में फिल्म ने दुनिया भर में 100 करोड़ से अधिक की कमाई कर ली है। हालांकि उनकी पेशेवर उपलब्धियों से परे उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया था जब काम की सफलता का उनके लिए कोई मोल नहीं रह गया था। साल 2014 में जब उनका बेटा आयान केवल 3 साल का था तब एक आम पारिवारिक आउटिंग ने इस परिवार की पूरी जिंदगी बदल कर रख दी थी। हाल ही में एक पॉडकास्ट में बात करते हुए इमरान हाशमी ने अपने बेटे के कैंसर के इलाज और उस दौरान झेले गए 5 साल के लंबे संघर्ष के बारे में दिल छू लेने वाले खुलासे किए। रणवीर अलाबादिया के इंटरव्यू में इमरान ने बताया
कि जनवरी 2014 की उस घटना को शब्दों में बयां करना आज भी उनके लिए बेहद कठिन है। उन्होंने बताया वह 13 जनवरी 2014 का दिन था जब परिवार के लिए लंच के दौरान यह अप्रत्याशित घटना सामने आई। इमरान अपने मासूम बेटे के साथ पिज़्ज़ा खा रहे थे। तभी अयान ने अचानक वाशरूम जाने की बात कही। वाशरूम में उसके पेशाब में खून दिखना इस बीमारी का पहला और शुरुआती लक्षण था। बिना किसी पूर्व चेतावनी के आई इस खबर ने पूरे परिवार के होश उड़ा दिए। इसके महज 3 घंटे के भीतर ही वे डॉक्टर के क्लीनिक में बैठे थे।
डॉक्टर ने स्पष्ट कर दिया कि आयान को कैंसर है और अगले ही दिन उसकी सर्जरी के साथ कीमोथेरेपी शुरू करनी पड़ेगी। महज 12 घंटे के भीतर मेरी और मेरे परिवार की हंसी खेलती दुनिया पूरी तरह से पलट गई थी। इमरान ने आगे बताया कि उस समय आयान की उम्र सिर्फ 3 साल और 11 महीने थी। जांच के बाद पता चला कि वह विस ट्यूमर नामक बीमारी से पीड़ित था जो बच्चों में पाए जाने वाला किडनी कैंसर का एक प्रकार है। इससे पहले आयान में बीमारी की कोई भी लक्षण या चेतावनी नहीं दिखी थी। इसलिए इस अचानक आई खबर से परिवार गहरे सदमे में आ गया।
अपने उस कठिन दौर को याद करते हुए इमरान ने कहा कि साल 2003 में अपने अभिनय करियर की शुरुआत के बाद मैं लगातार मेहनत कर रहा था और अपने करियर के बेहतरीन दौर का लुफ उठा रहा था। लेकिन 2014 में आई इस त्रासदी ने मुझे भीतर तक हिला कर रख दिया। यह मेरे लिए सिर्फ स्पीड ब्रेकर की तरह नहीं था बल्कि ऐसा लगा मानो वे किसी कंक्रीट की दीवार से टकरा गए हो। बीमारी का पता चलते ही पहला सबसे बड़ा संकट बेटे के सामने खुद को टूटने से बचाना था। इमरान और उनकी पत्नी परवीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती को समझने के साथ-साथ अपने डर को बेटे से छुपाना था। उन्होंने कहा जब डॉक्टर ने बीमारी की पुष्टि कर दी तो हम दोनों पति-पत्नी बेटे के सामने नहीं रोए। आयान को अकेला छोड़कर दूसरे कमरे में गए और वहां जाकर फूट-फूट कर रोए ताकि बच्चे के मन और मानसिक स्थिति पर इसका कोई नकारात्मक असर ना पड़े। शुरुआती एक हफ्ता दोनों के लिए बेहद भारी बीता। उस कठिन हफ्ते के बाद हम दोनों ने बेटे के सामने एक मजबूत चेहरा बनाए रखने का फैसला किया। पहले 6 महीने तक आयान को दर्दनाक सर्जरी और कीमोथेरेपी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इस पूरे दौर में हमने बेटे के भीतर उम्मीद और आत्मविश्वास की किरण जगाए रखी कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। 6 महीने की मुख्य चिकित्सा प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी परिवार की चिंताएं खत्म नहीं हुई थी। कैंसर के दोबारा उभरने की आशंका हमेशा बनी रहती थी।
जिसके चलते अगले 5 साल तक 3 महीने में आयान के नियमित मेडिकल टेस्ट कराए जाते रहे। इमरान के अनुसार अयान बहुत छोटा था इसलिए उसे उस दर्दनाक प्रक्रिया की ज्यादा बातें याद नहीं है। लेकिन उस दौर की कुछ छाया उसके अचेतन मन में आज भी जरूर मौजूद होगी। इस संघर्ष के दौरान इमरान ने हार मानने के बजाय कैंसर और अपने बेटे की स्थिति के बारे में गहराई से पढ़ना शुरू किया। वे चिकित्सा से जुड़ी किताबें और रिसर्च आर्टिकल इतना पढ़ने लगे थे कि कई बार डॉक्टर भी उनसे पूछने लगे थे कि उन्हें इस बीमारी के बारे में इतनी बारीक जानकारी कैसे है? अपने इसी अनुभव और पढ़े गए ज्ञान के आधार पर इमरान ने आगे चलकर एक किताब लिखी जिसका नाम द किस
ऑफ लाइफ हाउ अ सुपर हीरो एंड माय सन डिफिटेड कैंसर है। इमरान ने स्पष्ट किया कि इस किताब को लिखने का मकसद सिर्फ अपनी आपबीती सुनाना नहीं था बल्कि उन अन्य माता-पिता की मदद करना था जो अपने बच्चों के साथ कैंसर जैसे घातक बीमारी से जूझ रहे हैं। इमरान कहते हैं कि इन सब हादसों ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद मजबूत बना दिया। एक्टर का कहना है कि जब परिस्थितियां अपने सबसे बुरे दौर में होती है तब भी इंसान को उम्मीद का दामन थाम कर रखना चाहिए। इस अपडेट पर आपका क्या कहना है? कमेंट कर हमें जरूर बताएं। टीवी और बॉलीवुड की दुनिया की तमाम अपडेट के लिए देखते रहिए एबीवी एंटरटेनमेंट।