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नीम करौली बाबा का किरदार निभाने वाले शोभिनव कौन हैं?

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नहीं पहली बार बड़े पर्दे पर आने वाला कोई कलाकार लोगों के दिलों में इतनी गहरी छाप छोड़ देगा शायद खुद शोभिनव सत्य [संगीत] ने भी नहीं सोचा होगा। फिल्म हनुमान अंश में नीमकरली बाबा का किरदार निभाने वाले शो अभिनव इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। वजह सिर्फ उनका अभिनय नहीं बल्कि [संगीत] वो भावुक पल है जब वो सिनेमाघरों में अपनी फिल्म देखने पहुंचे और दर्शकों ने उन्हें देखते ही ऐसे रिएक्ट किया जैसे नीम करौली बाबा खुद उनके सामने आ गए हो। कोई उन्हें देखकर भावुक हो गया। किसी ने हाथ जोड़ लिए तो किसी की आंखों में आंसू [संगीत] आ गए। इन वीडियोस ने लोगों के मन में एक सवाल खड़ा कर दिया। आखिर यह शोभिनव सत्य कौन है जिन्हें लोग उनकी पहली फिल्म में इतना पसंद कर रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि शोभिनव सत्य इस फिल्म में अभिनेता बनकर आए ही नहीं थे। वह तो शुरुआत में फिल्म की टीम का हिस्सा असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर बने थे। यानी उनकी जगह कैमरे के सामने [संगीत] नहीं कैमरे के पीछे थी। लेकिन फिल्म की कहानी के साथ-साथ शोभिनव की अपनी [संगीत] कहानी में भी एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। दरअसल फिल्म में नीमकरली बाबा का किरदार निभाने [संगीत] वाले अभिनेता की तबीयत खराब हो गई।

अब निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के सामने एक बड़ी चुनौती [संगीत] थी। फिल्म में महाराज जी का किरदार बेहद महत्वपूर्ण था और इसके लिए सिर्फ कोई अच्छा अभिनेता ढूंढना काफी नहीं था। उन्हें ऐसा चेहरा चाहिए [संगीत] था जिसमें नीमकरली बाबा की झलक दिखाई दे और जो उनके व्यक्तित्व की शांति [संगीत] और आध्यात्मिकता को भी पर्दे पर उतार सके। तभी निर्देशक की नजर शोभिनव पर गई। विशाल को लगा शोभिनव के चेहरे में महाराज जी से एक खास समानता है और यहीं से असिस्टेंट डायरेक्टर शोभिनव के अभिनेता [संगीत] बनने का रास्ता खुला। लेकिन सिर्फ शक्ल मिलना इस किरदार के लिए काफी नहीं था। इसीलिए शोभिनव का बाकायदा ऑडिशन लिया गया और यह कोई छोटा-मोटा ऑडिशन नहीं था। बताया गया कि मंदाकिनी नदी में एक नाव पर शोभिनव का करीब 5 घंटे तक ऑडिशन होगा। निर्देशक यह परखना [संगीत] चाहते थे कि क्या शोभिनव सिर्फ देखने में नीमकरली बाबा जैसे लग रहे हैं या उनके अंदर उस किरदार को महसूस करके निभाने [संगीत] की क्षमता भी है। 5 घंटे की इस परीक्षा के बाद शोभिनव को वो भूमिका मिल गई जिसके बारे में शायद उन्होंने खुद भी शुरुआत में नहीं सोचा [संगीत] था। लेकिन इस किरदार के लिए शोभिनव का चुनाव सिर्फ शायद उनके चेहरे की वजह से नहीं हुआ था। की जिंदगी में पहले से ही नीमकरली बाबा के लिए आस्था मौजूद थी। शोभिनव के मुताबिक वह 2009 से महाराज जी के भक्त हैं। यानी जिस संत का किरदार अब उन्हें लाखों लोगों के सामने निभाना था, उससे उनका रिश्ता कैमरे के सामने आने से बहुत पहले का था। रिपोर्ट्स के मुताबिक [संगीत] यही जुड़ाव उनके लिए इस किरदार को बाकी फिल्मी किरदारों से अलग बना देता है। एक इंटरव्यू में शोभिनरव ने बताया कि इस किरदार को निभाने के लिए उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल बदल दी। पूरे प्रोजेक्ट के दौरान सख्त दिनचर्या अपनाई शाकाहारी रहे। [संगीत] शराब से दूर रहे।

फिल्म के सेट पर भी एक अलग तरह का माहौल रखा गया। टीम ने कोशिश की कि सेट पर गाली गलौज बेवजह तेज आवाज में बहस या ऐसा माहौल ना बने जो फिल्म के आध्यात्मिक विषय से बिल्कुल उलट हो। शूटिंग की शुरुआत [संगीत] और अंत हनुमान चालीसा के पाठ से की जाती। टीम का मानना था कि इस आध्यात्मिक वातावरण ने मुश्किल परिस्थितियों से भी उन्हें संभाले रखा और जब आप शोभिनव को फिल्म में नीमकरली बाबा के रूप में देखते हैं तो सिर्फ उनका लुक ही ध्यान नहीं खींचता। इस किरदार की सबसे बड़ी चुनौती थी उसकी शांति [संगीत] और ठहराव को पर्दे पर लाना। क्योंकि महाराज जी जैसे आध्यात्मिक व्यक्तित्व को निभाने के लिए सिर्फ शक्ल या कपड़ों की नकल करना काफी नहीं था। चेहरे पर एक अलग तरह की शांति [संगीत] बोलते हुए ठहराव और हर परिस्थिति में भीतर से स्थिर नजर आना यह सब [संगीत] चीजें किरदार का हिस्सा थी। एक इंटरव्यू के दौरान शोभिनव ने फिल्म के एक बेहद चर्चित सीन [संगीत] का जिक्र किया है। नेमकरली बाबा से जुड़ा ट्रेन वाला प्रसंग। इस सीन में बाबा को ट्रेन से उतार दिया जाता है। लेकिन शोभिनव के मुताबिक इस दृश्य को निभाने के वक्त उन्हें सिर्फ अपने साथ हुए अपमान का भाव नहीं दिखाना था। निर्देशक विशाल की सोच थी। एक गुरु को तकलीफ अपने अपमान से ज्यादा [संगीत] अपने भक्त के साथ हुए गलत व्यवहार से हो सकती है। यानी किरदार की भावनाओं में भी खुद से ज्यादा अपने भक्त के लिए चिंता और करुणा दिखाई देनी थी। शोभिनव ने इसी सोच को पकड़ कर [संगीत] इस सीन को निभाया और शायद यही वो चीज है जिसने दर्शकों को उनके किरदार से जोड़ दिया क्योंकि हनुमान [संगीत] अंश में शोभिनव सिर्फ नीमकरली बाबा का रूप लेकर स्क्रीन पर नहीं आए। दर्शकों के लिए वह एक ऐसे व्यक्तित्व की छवि लेकर आए जिनसे करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। इसका असर तब देखने को मिला जब शोभिनव अपनी ही फिल्म देखने सिनेमाघरों [संगीत] में पहुंचे।

वहां मौजूद दर्शकों को जैसे पता लगा कि सामने नीम करौली बाबा का किरदार निभाने वाले [संगीत] अभिनेता खड़े हैं। माहौल भावुक हो गया। लोगों ने देखते रहे हाथ जोड़ते रहे कई लोग भावुक हो उठे। सोशल मीडिया पर इन पलों की वीडियोस वायरल हुई और शोभिनव को लेकर लोगों की क्यूरोसिटी और ज्यादा बढ़ गई। लेकिन सवाल यह भी है कि शोभिनव सत्य का एक्टिंग से रिश्ता कितना पुराना है? शोभिनव मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले हैं। उनका सफर सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रहा। [संगीत] उन्होंने अभिनय और फिल्म मेकिंग की ट्रेनिंग ली है। लखनऊ के ऑपोलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म से जुड़े रहे। जहां बाद में उन्होंने एक्टिंग, टीचर, काउंसलर और मार्केटिंग हेड के तौर पर भी काम किया। यानी फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले ही वह एक्टिंग और फिल्म मेकिंग की दुनिया को करीब से समझ रहे थे। इसके अलावा उनका जुड़ाव फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टट्यूट ऑफ इंडिया यानी एफटीआईआईए [संगीत] पुणे से भी रहा है। लेकिन उनकी खास बात यह है कि उन्होंने अपना काफी वक्त कैमरे के पीछे बिताया। वो असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। फिल्म और टीवी प्रोडक्शन [संगीत] की बारीकियों को समझ चुके हैं। साल 2019 में आई वेब सीरीज [संगीत] रागिनी एमएमएस रिटर्न्स में उन्होंने ट्रेनी असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया था। [संगीत] इसके बाद वह लोकप्रिय टीवी शोज़ सीआईडी से जुड़े। 2025 में इसके कुछ एपिसोड्स में सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने कंटिन्यूटी सुपरवाइजर के तौर पर भी काम किया। यानी जिस कलाकार [संगीत] को आज लोग नेमकरली बाबा के किरदार में देख रहे हैं। उसने फिल्म इंडस्ट्री का सफर सीधे लीड एक्टर बनकर शुरू नहीं किया था। उसने पहले कैमरे के पीछे खड़े होकर सीखा कि कैमरे [संगीत] के सामने कहानी को किस तरह से जिंदा किया जाता है और फिर आया हनुमान अंश का वो मौका जिसने उनकी पूरी पहचान बदल दी। बतौर अभिनेता यह शोभिनव सत्य की पहली फिल्म है।

सोचिए पहली ही फिल्म में आपको ऐसा किरदार मिल जाए जिससे लाखों करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। ऊपर से ये किरदार उस संत का है जिसके चेहरे और व्यक्तित्व की लोगों के मन में पहले से एक मजबूत छवि मौजूद है। ऐसी भूमिका [संगीत] निभाना किसी भी अभिनेता के लिए बेहद बड़ी चुनौती हो सकती है। लेकिन शोभिनव ने इसे सिर्फ एक फिल्मी ओपोरर्चुनिटी की तरह नहीं लिया। उन्होंने इसे एक जिम्मेदारी की तरह लिया। यही वजह है कि उनकी तैयारी सिर्फ शूटिंग तक सीमित नहीं रही। वह खुद महाराज जी [संगीत] के भक्त रहे हैं। इसीलिए उनके लिए इस किरदार में एक व्यक्तिगत जुड़ाव भी था। उन्होंने बताया कि जब वह खुद फिल्म देखते हैं तब वह भी भक्ति [संगीत] भाव में डूब जाते हैं। उनका कहना है कि फिल्म का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि युवाओं को उन संस्कारों और भक्ति से जोड़ना भी है जो कहीं पीछे [संगीत] छूटती जा रही हैं। और इसी जगह पर हनुमान अंश की कहानी भी शोभिनव की कहानी से जुड़ जाती है।

फिल्म कोई बड़ी सुपरस्टार वाली फिल्म नहीं बजट भी ₹2 करोड़ के आसपास बताया गया और शुरुआत में इसे बहुत ज्यादा स्क्रीनंस भी नहीं मिली। लेकिन दर्शकों के बीच धीरे-धीरे इसकी चर्चा [संगीत] बढ़ी। फिल्म को लेकर वर्ड ऑफ माउथ मजबूत हुआ। यही वजह है कि फिल्म की स्क्रीनिंग बढ़ने लगी। दर्शकों की प्रतिक्रिया सामने आने लगी। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे खूबसूरत बात बॉक्स ऑफिस के आंकड़े नहीं [संगीत] है। सबसे खूबसूरत बात है एक अभिनेता का पहली फिल्म में दर्शकों के दिल तक पहुंच जाना। क्योंकि फिल्मों में सफलता सिर्फ करोड़ों कमाने का नाम नहीं। कभी-कभी सफलता उस पल में दिखाई देती है जब कोई दर्शक आपको देखकर भावुक हो जाए, गले लगा ले, पैर छूने लगे। आपके किरदार को सिर्फ अभिनय ना समझकर अपने विश्वास से जोड़ लें। जब पर्दे पर निभाया गया किरदार इतना असर छोड़ दें कि असल जिंदगी में सामने आने पर भी लोग आपको उसी श्रद्धा की नजर से देखने लगे। शोभिनव सत्य [संगीत] के साथ फिलहाल कुछ ऐसा ही होता दिखाई दे रहा है। फिलहाल के लिए इस वीडियो में इतना ही।

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