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गुजरात के धरा कड़ीवार मौ;त केस ने मचाई सनसनी..

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जूनागढ़ शहर, गुजरात का वो इलाका जहाँ से इस पूरी कहानी की शुरुआत होती है। धारा कड़ियार, उम्र लगभग 22 साल। जूनागढ़ के नवागढ़ इलाके में रहने वाली एक साधारण लड़की, जिसके पिता विनोद भाई कड़ियार एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी थे। उन्होंने दो शादियां की थीं। धारा अपनी सौतेली मां दीना बेन और अपने भाई मीत कड़ियार के साथ रहती थी। भाई की शादी हो चुकी थी। उसकी पत्नी रश्मि घर संभालती थी। परिवार में कुछ पुरानी अनबन भी थी। जिसकी वजह से धारा ज्यादातर समय घर के बाहर ही रहती थी। कभी-कभी भाई से फोन या व्हाट्सएप पर बात होती थी। बस, इतना ही रिश्ता बाकी था।

धारा पहले राजकोट के एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। वहीं उसकी मुलाकात सतीश गोसाई नाम के एक व्यक्ति से हुई। दोनों में प्यार हुआ। परिवार की इच्छा के खिलाफ जाकर उन्होंने शादी भी कर ली। लेकिन ये शादी ज्यादा दिन नहीं चली। सतीश शराब पीता था, झगड़ा करता था। कुछ महीनों के अंदर ही दोनों का तलाक हो गया। धारा को लगने लगा कि इस दुनिया में उसका अपना कोई नहीं है। न माता-पिता का साथ, न पति का। वो किराए के घर में अकेली रहती थी। सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती थी।अब इस कहानी के दूसरे किरदार से मिलिए, सूरज सोलंकी, जिसे लोग ‘सूरज भुवाजी’ के नाम से जानते थे।

जूनागढ़ में सूरज की पहचान एक मशहूर शख्सियत जैसी थी। सूरज खुद को गुजरात में पूजी जाने वाली देवी मेड़ी मां का संदेशवाहक बताता था। यानी भगवान और भक्तों के बीच एक कड़ी। वीडियो में उसे जंजीरों से खुद को मारते, कांपते, नाचते देखा जाता था और बहुत से लोग ‘जय माताजी’ के नारे लगाते थे। दूर-दूर से लोग अपनी समस्याएं लेकर उसके पास आते थे, आशीर्वाद मांगते थे। परिवार का स्टूडेंट हॉस्टल का बिजनेस भी था, यानी आर्थिक रूप से भी मजबूत परिवार था।लेकिन इस चमकदार इमेज के पीछे एक दूसरी जिंदगी भी थी। सूरज की शादी हो चुकी थी। उसके दो बच्चे भी थे। उसकी पारिवारिक तस्वीरें पहले से ही उसके सोशल मीडिया पर थीं। लेकिन कहा जाता है कि धारा को शुरुआत में इस बारे में कुछ नहीं पता था।2021 में धारा अपनी एक दोस्त के साथ सूरज भुवाजी से मिलने गई थी। दोस्त को अपनी लव लाइफ को लेकर कुछ सवाल पूछने थे। धारा के भाई के मुताबिक, यही धारा की सूरज से पहली मुलाकात थी। इसके बाद सूरज उसे हर मंगलवार को होने वाली प्रार्थना में बुलाने लगा और धारा जाने भी लगी। भाई ने कई बार समझाने की कोशिश की। लेकिन धारा ने नहीं सुनी। धीरे-धीरे दोनों सोशल मीडिया पर बात करने लगे और फिर रिश्ता बन गया।

2021 के अप्रैल महीने के आसपास सूरज और धारा जूनागढ़ के झांजरदा इलाके में एक फ्लैट किराए पर लेकर साथ रहने लगे। बिना शादी के लिव-इन रिलेशनशिप में। पहले 10 महीने अच्छे बीते। दोनों मिलकर रील्स बनाते, सूरज ने धारा का जन्मदिन भी बहुत धूमधाम से मनाया था। लेकिन समय बीतने के साथ घर में अशांति बढ़ने लगी। धारा को धीरे-धीरे सूरज के शादीशुदा जीवन की पूरी सच्चाई पता चली कि वो सिर्फ शादीशुदा ही नहीं, दो बच्चों का पिता भी है। इसके बाद दोनों में झगड़ा शुरू हो गया। पड़ोसी अक्सर घर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनते थे।रिश्ते में दरार बढ़ने के साथ उनकी लड़ाई सोशल मीडिया पर भी पहुंच गई। आजकल किसी का झगड़ा हो तो दोनों पक्ष अपनी सफाई में वीडियो बना लेते हैं। ठीक वैसा ही यहां भी हुआ। सूरज ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर वीडियो पोस्ट करके आरोप लगाया कि धारा उसके साथ सिर्फ पैसों के लिए है।

वो फ्लैट की मांग करती है। लग्जरी लाइफ चाहती है। 25 लाख रुपये और साथ में एक फ्लैट की मांग कर रही है और न मिलने पर पुलिस में शिकायत करने की धमकी दे रही है। सूरज का ये भी दावा था कि अपनी बात मनवाने के लिए धारा कभी दवाइयां खाने की धमकी देती थी, तो कभी अपनी कलाई पर चाकू चलाने की कोशिश करती थी।दूसरी तरफ, धारा ने भी अपनी सफाई में वीडियो बनाया। उसका कहना था, वो पैसों के लिए नहीं, प्यार के खिंचाव में साथ है। वो सूरज को मनाने के लिए अहमदाबाद तक का सफर करके गई थी। यहां तक कि उसके पैर भी छुए थे। उसका दावा था कि उसने सूरज को टेक्स्ट मैसेज भी किया था कि वो पैसों के लिए नहीं, प्यार के लिए ही उसके साथ है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप कई दिनों तक चलते रहे और गुजरात के हजारों लोग सोशल मीडिया पर ये तमाशा देखते रहे।आखिरकार 24 फरवरी 2022 को धारा ने जूनागढ़ के डिवीजन थाने में सूरज सोलंकी और उसके दोस्त गुंजन जोशी के खिलाफ आईपीसी 376 यानी बलात्कार का मामला दर्ज कराया।

मामला कोर्ट पहुंच गया और इससे सूरज की सोशल इमेज पर भी असर पड़ने लगा। जिस व्यक्ति को लोग भगवान का दूत मानते थे, अब उसी पर गंभीर आरोप लगे थे। सूरज और उसका दोस्त बार-बार धारा को समझाने की कोशिश करते कि मामला कोर्ट के बाहर सुलझा लिया जाए। सूरज ने इस एफआईआर को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया।लगभग 2 महीने बाद 25 अप्रैल 2022 को धारा मान गई और दोनों पक्षों के बीच एक मैत्री करार यानी फ्रेंडशिप एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए। इस शर्त पर कि अब कोर्ट केस की जरूरत नहीं है।

आपस में मामला सुलझा लिया जाएगा। इस समझौते के बाद सूरज और धारा फिर से साथ रहने लगे। जूनागढ़ की श्रीनाथ नगर सोसाइटी में एक फ्लैट किराए पर लिया गया। बाहर से देखकर लग रहा था जैसे सब कुछ सामान्य हो गया है। लेकिन असल में सूरज के मन में तब एक अलग ही प्लान बन रहा था।समझौते के लगभग 2 महीने बाद, 19 जून 2022 की सुबह का समय। सूरज ने धारा से कहा कि अहमदाबाद जाना है। हाईकोर्ट के मामले में वकील से मिलना है। उसकी फीस भी जमा करनी है। धारा को कोई शक नहीं हुआ।

उसने भरोसा किया और गाड़ी में बैठ गई। साथ में था सूरज का दोस्त मीत शाह। इस ट्रिप की बात उसने अपने भाई मीत कड़ियार को भी बताई थी कि उसे अहमदाबाद हाईकोर्ट जाना है। यानी ये कोई अचानक बनाई गई योजना नहीं थी। घर के लोग भी इसके बारे में जानते थे।शाम 5-6 बजे के आसपास तीनों जूनागढ़ से हुंडई गाड़ी में रवाना हुए। सूरज गाड़ी चला रहा था। धारा आगे की सीट पर और मीत पीछे की सीट पर बैठा था। रास्ते में चोटिला गांव पड़ा। वहां एक मंदिर के पास तीनों ने खाना खाया। हंसी-मजाक किया। बिल्कुल सामान्य दिन जैसा माहौल था। किसी को कोई अंदाजा नहीं था कि यही धारा का आखिरी खाना होने वाला है।खा-पीकर तीनों फिर अहमदाबाद के लिए रवाना हुए। लेकिन इस बार रास्ता बदल गया। गाड़ी हाईवे से हटकर दूसरी तरफ मुड़ गई। सुरेंद्रनगर जिले के सायला तालुका की तरफ, बंतावच नाम के एक गांव की तरफ। ये सूरज का पैतृक गांव था।

जहां उनके परिवार का एक फार्म हाउस भी था। धारा ने रास्ता बदलने का कारण पूछा तो सूरज ने कहा कि यहीं से वकील की फीस के पैसे लेने हैं।रात 11 बजे के आसपास तीनों फार्म हाउस के पास सड़क पर पहुंचे। सूरज ने गाड़ी रोककर कहा, तुम यहीं रुको। मैं पैसे लेकर आता हूं। ये कहकर वो अंधेरे में फार्म हाउस की तरफ चला गया। धारा और मीत गाड़ी में ही इंतजार करने लगे। लेकिन वो नहीं जानते थे कि फार्म हाउस के अंदर पहले से ही दो और लोग छिपे थे। सूरज का भाई युवराज सोलंकी और उसका दोस्त गुंजन जोशी; यही वो गुंजन है जिसके खिलाफ धारा ने बलात्कार का मामला दर्ज कराया था।कुछ देर में युवराज और गुंजन छिपने की जगह से निकलकर गाड़ी के पास आए। गुंजन ने धारा से कहा, पैसे ले लो और सूरज की जिंदगी से हमेशा के लिए चले जाओ। ये सुनते ही धारा को बहुत गुस्सा आया। उसने पलटकर जवाब दिया कि वो सूरज और गुंजन दोनों को सबके सामने फंसा देगी। ठीक यहीं सूरज का पहला प्लान, पैसों से धारा को हमेशा के लिए हटाने का प्लान फेल हो गया। कहा जाता है कि सूरज ने इससे पहले भी धारा को 30 लाख रुपये का ऑफर दिया था। इस शर्त पर कि वो उसकी जिंदगी से चली जाए। दोनों अपने-अपने रास्ते चले जाएं। लेकिन धारा बार-बार यही कहती थी, मुझे तुम्हारे साथ ही रहना है। अपनी पत्नी-बच्चों को छोड़कर मुझसे शादी करो।प्लान ए फेल होते ही अब बारी थी प्लान बी की। सूरज इस समय फार्म हाउस के अंदर एक कमरे में बैठा था। बाहर मीत, युवराज और गुंजन ने अपना काम शुरू कर दिया। पहले से तय प्लान के मुताबिक सूरज ने धारा को सलवार-कमीज और ओढ़नी पहनकर आने को कहा था। इसका कारण बाद में समझ आएगा। धारा के इनकार करते ही पीछे की सीट पर बैठे मीत शाह ने जोर से ओढ़नी खींची।

गुंजन ने उसका मुंह दबा दिया ताकि वो सांस न ले सके और युवराज ने उसके हाथ-पैर पकड़ लिए। कुछ ही पलों में धारा निढाल हो गई।चारों मिलकर उसे गाड़ी से निकालकर फार्म हाउस के उस कमरे में लाए जहां सूरज बैठा था। सबने चेक किया कि वो सांस नहीं ले रही है। अब सबूत मिटाने की बारी थी। सूरज के काका मुकेश सोलंकी, जो इसी गांव में रहते थे, एक पेट्रोल पंप से 500 रुपये का पेट्रोल कैन में भरकर फार्म हाउस लाए। इसके बाद गुंजन ने सूरज और मीत से कहा, तुम दोनों अहमदाबाद के लिए निकलो। बाकी काम हम संभाल लेंगे।सूरज और मीत हुंडई गाड़ी लेकर अहमदाबाद की ओर रवाना हुए। इधर फार्म हाउस में युवराज, गुंजन और मुकेश धारा के शव को पास के एक सूखे तालाब के किनारे ले गए। जहां पहले से ही सूखी लकड़ियां और घास इकट्ठा करके रखी गई थी। पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई। कुछ ही देर में एक जिंदगी हमेशा के लिए राख हो गई थी। इसी बीच धारा का मोबाइल फोन भी बंद कर दिया गया, क्योंकि आगे की साजिश के लिए इस फोन को दूसरे रास्ते से इस्तेमाल करने का प्लान था।अब बारी थी झूठ को जिंदा रखने की, और ये झूठ जितना आसान लग रहा था, उससे कहीं ज्यादा चालाकी से बुना गया था। अहमदाबाद में सूरज ने अपने परिचित संजय सोहेलिया को फोन किया, जो जीवराज पार्क वेजलपुर इलाके में रहते थे।

सूरज ने कहा, सनातन सर्कल के पास तैयार रहना, हम पहुंच रहे हैं। रास्ते में ही सूरज ने अपनी गाड़ी की आगे वाली पैसेंजर सीट पर संजय को बिठाया। वही सीट जहां पहले धारा बैठती थी। धारा की वही ओढ़नी संजय को पहना दी गई ताकि सिर और मुंह ढका रहे। मकसद साफ था। अगर रास्ते में कोई सीसीटीवी कैमरा पड़े, तो लगे कि धारा अभी भी गाड़ी में मौजूद है।सुबह लगभग 4 बजे वो पालडी में मीत के घर पहुंचे। ठीक उसी समय मीत और सूरज कुमकुम होटल में चेक-इन कर लेते हैं, ताकि रिकॉर्ड में रहे कि वो रात में होटल में ही सो रहे थे। संजय मीत के घर में रुक गया। उधर जुगल ने अपनी मां मोना बेन को पूरी बात समझा दी थी कि इस झूठ में उन्हें भी साथ देना होगा। सुबह लगभग 6 बजे मोना बेन धारा के कपड़े पहनकर संजय के साथ घूमने जाने के बहाने घर से निकलीं। दोनों पालडी बाजार में इधर-उधर टहले ताकि आसपास के कैमरों में उनकी फुटेज रिकॉर्ड हो जाए।

ताकि लगे कि धारा अभी भी वहीं मौजूद है।इसके बाद प्लान के मुताबिक जुगल ने रिकॉर्ड के लिए अपने भाई मीत को फोन करके बताया कि धारा सामान लेकर घर से चली गई है। इसके बाद सूरज और मीत होटल से चेक आउट करके घर आए और धारा को खोजने का नाटक शुरू किया। जुगल भी घर से निकल गया। मोना बेन पालडी की ऐसी जगह पर जाकर खड़ी हुईं जहां कोई कैमरा नहीं था। वहां जुगल उनसे मिला और फिर दोनों घर लौट आए। संजय वहां से अपने घर चला गया।उधर जब धारा का शव पूरी तरह राख हो गया था और बची हुई राख भी मिट्टी में दबा दी गई थी। युवराज, गुंजन और मुकेश डिजायर गाड़ी लेकर अहमदाबाद के लिए रवाना हुए। साथ में धारा का मोबाइल फोन भी था। यहां से होकर वो मुंबई की ओर रवाना हुए। नाला सोपारा के पास एक होटल में वो रुके। जिसकी पुष्टि बाद में होटल मैनेजर ने भी की। वसई पहुंचकर गुंजन ने धारा का फोन ऑन किया और वहीं से सूरज को वो मशहूर व्हाट्सएप मैसेज भेजा गया कि मैंने सबको छोड़ दिया है। अब किसी से कोई रिश्ता नहीं है। मुझे खोजने की कोशिश मत करना और पुलिस को भी बीच में मत लाना। मैं अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती हूं। सारे मैसेज भेजने के बाद गुंजन ने फोन तोड़कर पास की एक खाड़ी में फेंक दिया।

अगले लगभग एक हफ्ते तक ये सब पुलिस के आसपास ही घूमते रहे। धारा को खोजने का ढोंग करते रहे और फिर धीरे-धीरे इनकी जिंदगी सामान्य होने लगी। सूरज को विश्वास था कि उसने एक परफेक्ट प्लान बनाया है। झूठे सबूत, झूठी फुटेज, झूठे मैसेज सब पुलिस को गुमराह करने के लिए तैयार थे।उधर धारा के भाई मीत कड़ियार को उसकी बहन के गायब होने की खबर तब मिली जब सूरज और धारा का एक कॉमन दोस्त आकर उसे बताता है। भाई ने सूरज को फोन किया और सूरज ने वही कहानी सुनाई। कोर्ट केस के लिए अहमदाबाद आए थे। दोस्त के घर में थे। जगह कम होने के कारण दो लोग होटल चले गए थे। सुबह पता चला धारा घर में नहीं है। साथ ही सूरज ने उस व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट भी भाई को भेज दिया। जिसमें लिखा था कि पुलिस को बीच में न लाया जाए।20 जून को ही सूरज, जुगल और मोना बेन पालडी थाने पहुंचे गुमशुदगी की डायरी लिखाने के लिए। लेकिन 24 घंटे पूरे न होने पर पुलिस ने कहा, कल आना। अगले दिन 21 जून को फिर थाने जाने पर मिसिंग कंप्लेन या गुमशुदगी की डायरी दर्ज हुई। इसी दिन धारा के नंबर से सूरज को वो मैसेज आया कि वो सबसे दूर जा रही है। खोजने की कोशिश मत करना।भाई को शुरुआत में लगा कि शायद धारा ने सच में सबसे रिश्ता तोड़ लिया है। वो अपनी मर्जी से चली गई है। इसलिए उसने भी संपर्क करना बंद कर दिया था। लेकिन मन में एक सवाल हमेशा खटकता था। अगर वो अपनी मर्जी से गई ही है, तो एक बार भी लौटकर बात क्यों नहीं की?पुलिस जांच में सामने आया कि आखिरी बार धारा की लोकेशन सुरेंद्रनगर जिले के सायला तालुका में ट्रेस हुई थी। जहां उसका फोन बंद हो गया था। 21 जून को फोन दोबारा चालू हुआ। वो भी मुंबई के वसई इलाके में। यहीं से सूरज को वो मैसेज भेजे गए थे। इसके बाद फोन घोड़बंदर इलाके में हमेशा के लिए बंद हो गया।

लगभग एक महीने इंतजार के बाद भाई ने जूनागढ़ के बोडिजान थाने में भी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने की कोशिश की। लेकिन वहां से कहा गया कि जिस इलाके से लड़की गायब हुई है वहीं शिकायत करो। 30 अगस्त 2022 को पालडी पुलिस ने आखिरकार एक गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की। इसके बाद भी महीनों तक कोई खास प्रगति नहीं हुई। पुलिस की तरफ से ये भी कहा गया कि शायद वो किसी दूसरे देश चली गई है। हालांकि धारा के पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं था। परिवार की तरफ भी शक की उंगली उठने लगी।निराश होकर भाई एक वकील से मिला और गुजरात हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की। एक ऐसा कानूनी हथियार जिसके जरिए अदालत खुद जांच का आदेश दे सकती है और यहीं से मामले का रुख पूरी तरह बदलने वाला था।हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस पर जांच जल्दी पूरी करने का दबाव बना। शुरुआत में मामला एक हेड कांस्टेबल के हाथ में था। जिसने 12 सितंबर 2022 को शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया था। 3 महीने बाद 13 दिसंबर को मामला पीएसआई वी सी परमार को सौंपा गया। धारा की तस्वीर न्यूज मीडिया और सोशल मीडिया में प्रचारित की गई। अन्य थानों में भी अलर्ट भेजा गया।इसी समय गुजरात में लापता महिलाओं की खोज का एक नया अभियान शुरू हुआ। जोन सात के लोकल क्राइम ब्रांच के डीसीपी भागीरथ सिंह जडेजा के नेतृत्व में पुराने बंद पड़े मामलों को फिर से खोला गया। धारा कड़ियार की फाइल भी इस ढेर में शामिल थी।

जांच अधिकारी ने फाइल दोबारा पढ़ी और एक आसान सवाल पूछा। अगर धारा सच में अपनी मर्जी से गई है, तो उसने घर के लोगों से एक बार भी संपर्क क्यों नहीं किया? इस एक छोटे सवाल ने ही पूरी जांच का रुख बदल दिया।टीम ने मोबाइल के टावर लोकेशन दोबारा खंगाले। नतीजा चौंकाने वाला था। जिस समय वो मशहूर मैसेज भेजा गया था। फोन की लोकेशन जूनागढ़ या अहमदाबाद में नहीं, बल्कि मुंबई के पास वसई इलाके में थी। एक लड़की, जिसके बारे में कहा जा रहा था वो अपनी मर्जी से गई है। उसका फोन अचानक ऐसे शहर में कैसे एक्टिव हुआ, जिससे उसका कोई संबंध ही नहीं था?इसी समय टीम ने वो पुरानी सीसीटीवी फुटेज भी दोबारा निकाली, जिसमें धारा को पालडी इलाके में देखा जा रहा था। परिवार के सदस्यों को ये फुटेज दिखाई गई। घर के लोगों का कहना था, ये धारा नहीं लग रही।

बेशक कपड़े उसके जैसे ही हैं, लेकिन लंबाई और चलने का तरीका नहीं मिल रहा। फुटेज की क्वालिटी भी बहुत साफ नहीं थी। इसलिए चेहरा ठीक से पहचानना मुश्किल था। लेकिन परिवार निश्चिंत हो गया था कि धारा के कपड़ों में कोई और था।ये सामने आते ही जांच का पूरा रुख बदल गया। शक की सुई अब सूरज सोलंकी और उसके दोस्त गुंजन जोशी की तरफ घूम गई, क्योंकि आखिरी बार कॉल और व्हाट्सएप पर बात सिर्फ सूरज से ही हुई थी। किसी और से नहीं। पुलिस ने सूरज के दोस्तों और परिचितों की पूरी लिस्ट खंगाली। सायला में जिस समय फोन बंद हुआ था, उस समय आसपास कौन-कौन से मोबाइल एक्टिव थे? पास के टावर का पूरा डंप डेटा निकाला गया। सूरज के दोस्त मीत, मीत के भाई जुगल और मां मोना बेन को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।3 अप्रैल से 6 अप्रैल 2023 के बीच गांधीनगर के डायरेक्टरेट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज में चार लोगों का लेयर्ड वॉयस एनालिसिस यानी एलवीए टेस्ट हुआ। सूरज सोलंकी, मीत शाह, मोना बेन और धारा के भाई मीत कड़ियार। इस टेस्ट में बोलने के तरीके का विश्लेषण करके समझा जाता है कि सामने वाला सच बोल रहा है या कुछ छिपा रहा है। टेस्ट के बाद तीनों—सूरज, मीत और मोना बेन पर शक और गहरा हो गया।

आखिरकार पूछताछ के समय मीत शाह टूट गया और पूरा सच बता दिया। 27 मई 2023 को बडी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई और अहमदाबाद के पालडी थाने में पहले से मौजूद जीरो एफआईआर भी जूनागढ़ ट्रांसफर कर दी गई, क्योंकि साजिश की असल शुरुआत जूनागढ़ से ही हुई थी।28 मई को पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया। सूरज सोलंकी, गुंजन जोशी, मीत शाह, युवराज सोलंकी, संजय सोहेलिया, मुकेश सोलंकी, जुगल शाह और मोना बेन। आरोपियों से कई मोबाइल फोन जब्त किए गए। साथ ही हुंडई कार, डिजायर कार, एक बाइक और धारा की एक टी-शर्ट भी बरामद की गई। फॉरेंसिक टीम आरोपियों के बताए उस फार्म हाउस पर पहुंची। जहां पास के सूखे तालाब से रीढ़ की हड्डी के नौ टुकड़े बरामद किए गए। इनका डीएनए प्रोफाइलिंग किया गया और नतीजा धारा के भाई से मिल गया। यानी ये अवशेष धारा के ही थे।जिस व्यक्ति को हजारों लोग भगवान का दूत मानकर पूजते थे। वो अब हत्या के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे था। ये खबर गुजरात में फैलते ही विरोध का तूफान उठा। कोली और ठाकुर समाज की रैली सड़कों पर उतर आई। फांसी की मांग उठने लगी। जिन वीडियो ने कभी सूरज को भुवा स्वघोषित साधु बनाया था। अब वही वीडियो उसके खिलाफ इस्तेमाल होने लगे।सारी जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने 25 अगस्त 2023 को जूनागढ़ सेशन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। आठ आरोपियों के खिलाफ मामला शुरू हुआ। इसी बीच कुछ आरोपी जमानत पर बाहर आ गए और कई ने दोबारा सोशल मीडिया इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिसमें सूरज भी था। अदालत में 3 साल तक सुनवाई चली। गवाहों के बयान, फोन के रिकॉर्ड, मैसेज, सीसीटीवी फुटेज, हर सबूत को खंगाला गया। धारा का परिवार हर सुनवाई में मौजूद रहता था। कभी उम्मीद के साथ, कभी डर के साथ।

15 जुलाई 2026 को जूनागढ़ सेशन कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फैसला सुनाया। पांच आरोपी सूरज सोलंकी उर्फ भुवाजी, गुंजन जोशी, मीत शाह, युवराज सोलंकी और मुकेश सोलंकी, आईपीसी 302 यानी हत्या के आरोप में। 120बी यानी साजिश और 201 यानी सबूत मिटाने के आरोप में दोषी ठहराए गए। सजा, आजीवन कारावास। सबूत मिटाने के लिए 3 साल की अलग सजा और हर एक पर 5000 रुपये का जुर्माना। अदालत ने साफ कर दिया कि ये मामला ‘रेरेस्ट ऑफ रेयर’ या दुर्लभतम घटना की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड देना संभव नहीं है। दूसरी तरफ तीन आरोपी संजय सोहेलिया, जुगल शाह और मोना बेन के खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया।

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