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500 ग्राम बादाम अधिकारी की टेबल पर पटका, मिली File और अब FIR?

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आपके लिए मैं बादाम लेकर के आया हूं। आपको इसको खाना और आपको जब याद आ जाए कि आपका फाइल कहां पर है आप मेरे को बता देना। अपमानित सी महसूस कर रही हूं और बहुत तनावपूर्ण महसूस को झूठ बोल रहा है कि एक साल से उसका पेंडिंग कोई भी प्रकरण नहीं था। नमस्कार N 24 देख रहे हैं आप और मैं हूं आपके साथ मुस्कान शास्त्री। बिलासपुर में बादाम कांड अब सिर्फ वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा। मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है और कहानी ने नया मोड़ ले लिया है। दरअसल शुरुआत होती है तरुण साहू नाम के एक युवक से जो पिछले करीब एक साल से अपनी प्रॉपर्टी म्यूटेशन की फाइल के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा था। तरुण का कहना है कि उसने रिसेल के जरिए एक ईडब्ल्यूएस फ्लैट खरीदा लेकिन फाइल गुम होने के चलते आज [संगीत] तक उसके नाम ट्रांसफर नहीं हो पाया। हर बार दफ्तर जाने पर वही जवाब आता फाइल मिल ही नहीं रही। इसी से परेशान होकर तरुण ने विरोध का एक अलग तरीका चुना। वो सीधे दफ्तर पहुंचा और अधिकारी की टेबल पर 500 ग्राम बादाम बिखेर दिए। फिर तंज कसते हुए बोला कि शायद इससे याददाश्त तेज हो जाए आपकी और मेरी फाइल मिल जाए। पहले जरा आप यह पूरी वीडियो देखिए। मैडम आपके लिए मैं बादाम लेकर के आया हूं।

ये देखिए। आपको इसको खाना और आपको जब याद आ जाए कि आपका फाइल कहां पर है। आप मेरे को बता देना। ठीक है? ठीक है। एक साल से जो मेरे को आप घुमा रही हो कि आपका फाइल पता नहीं कहां रखा है, कहां रखा है करके हो जाए तो आप बता देना। आप बनाइए कोई नहीं है। आप खाइए बादाम आप बादाम खाइए आप और खाने के बाद फिर आपको जब याद आ जाए मेरा फाइल जो आप घुमा के रखी हो आपको मिल नहीं रहा है जो यहां पर एक साल से मेरे को आप परेशान करके रखी हो। आप इसको खाइए। जब आप खा लेंगे आपको याद आ जाएगा। इससे याददाश्त तेज होता है बादाम से। जब याद आ जाएगा तो आप मेरे को बता देना कॉल करके। ठीक है? प्राप्त जानकारी के अनुसार युवक के उस वीडियो ने विभाग में ऐसा बवाल मचाया कि खुद विभागीय उपायुक्त को फाइल खोजने की जिम्मेदारी दे दी गई थी। आखिरकार उन्होंने फाइल ढूंढ भी निकाली। हालांकि युवक ने जिस महिला अधिकारी को जाकर बादाम दी थी, उन्होंने भी युवक के खिलाफ एक्शन लेते हुए उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। लेकिन अब इस पूरी कहानी का दूसरा पक्ष सामने आया है। इसी मामले में महिला अधिकारी पूनम बंजारी ने तरुण साहू के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि युवक बिना अनुमति उनके [संगीत] कैबिन में घुसा। सरकारी काम में बाधा डाली, दबाव बनाने की कोशिश की और अभद्र व्यवहार किया। अब जरा यह पूरी वीडियो देखिए जिसमें अधिकारी मैडम ने युवक पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। सर यह सरा सर वो झूठ बोल रहा है कि एक साल से उसका पेंडिंग कोई भी प्रकरण नहीं था। उसने आवेदन दिया था। उसके आवेदन में कुछ डॉक्यूमेंट की कमी थी। उस डॉक्यूमेंट के लिए हमारे स्टाफ के द्वारा भी मेरे द्वारा भी उसको कॉल किया गया कि इस डॉक्यूमेंट को खोलते हुए उस टाइम भी मुझे धमकी दिया और छोटे जाति के लोग ऐसे सीट में बैठ स्टाफ के द्वारा भी मेरे द्वारा भी उसको कॉल किया गया कि इस डॉक्यूमेंट को आप पूरा करिए।

जिन अधिकारी को कितने रुपए का रिश्वत लेता है या किसी काम अगर उसका पेंडिंग है तो वह बड़े अधिकारी के पास जाना करते हुए अपमानित करते हुए और यह कहते हुए कि तुम इस बादाम को खाओ और तुम अपने याददाश्त को बढ़ाइए और जब तुम्हारी याददाश्त बढ़ जाएगी तो तुम मेरा फाइल को अपमानित सी महसूस कर रही हूं और बहुत तनावपूर्ण महसूस देखा आपने अब आप देखिए कि युवक ने अपनी सारी बातें मानी है और वो लगातार अपनी आपबीती बता रहा है कैमरे के जरिए सोशल मीडिया के जरिए बादाम मैंने इसलिए वहां पर गिराया क्योंकि अगर मैं पूरा पैकेट आपको देता तो यह लगता कि मैं आपको रिश्वत दे रहा हूं करके। मैम मैं आपसे कोई तू तड़ाके से बात नहीं किया। मैं आपसे ही बात किया वहां पर भी आप क्लिप चेक कर सकते हैं। वीडियो देख सकते हैं जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें। मेरा फाइल जो आप घुमा के रखी है। आपको मिल नहीं रहा है जो यहां पर एक साल से मेरे को मैम आप जितना तनाव में है ना उससे ज्यादा तनाव में मैं एक साल से था। बड़ी मुश्किल से मैंने लोन पे यह घर खरीदा है

और एक साल से आप मेरे को घुमा रही हैं कि आपका फाइल नहीं मिल रहा है। मैम मैं जब भी उस ऑफिस पे जाता था मुझे एक ही चीज बोला जाता था कि आपका काम सिर्फ बंजारे मैडम ही करेंगी। फाइल उनके ही पास में है। एक और चीज मैं आपको बता दूं कि डायरेक्ट नहीं आया था। 2 घंटे पहले भी मैं आपके पास आया था और मिला था मैं। आपने कई बार मुझसे फाइल ढूंढाया। वहां पर अगर सीसीटीवी कैमरा लगा होगा तो जितने बड़े अधिकारी उनसे निवेदन है कि आप चेक करिए। उनके अलमारी से फाइल मुझे ढूंढाया जा रहा था। दो से 3 घंटे तक फाइल मैं ढूंढ रहा था। जबकि वहां पर इतने सारे कर्मचारी थे। कभी भी आपके स्टाफ के द्वारा या फिर आपके द्वारा कोई भी कॉल नहीं आया है मेरे पास में। अगर आप कॉल किए हैं तो आप कॉल डिटेल पेस कर सकते हैं। जबकि मैं आपके पास आकर के यही बोलता था कि मैम प्लीज आप काम करवा के मुझे कॉल करिए क्योंकि मैं जब यहां पर आता हूं तो मेरा बहुत ज्यादा नुकसान होता है। मुझे अपने जॉब से छुट्टी लेना पड़ता है। प्लस मेरा पेट्रोल का खर्चा है वह अलग। तो मैं हमेशा आपको बोलता था तो आप एक ही चीज जवाब देती थी कि मैं किसी को कॉल नहीं करने वाली। आपका काम है आपको ही आना पड़ेगा। आम सूचना का जो पाउती है वो मुझे आज मिला है। शनिवार को जब वीडियो वायरल हुआ है तब अधिकारी है उनका भी मैं जो कॉल रिकॉर्डिंग है वो मैं लगा सकता हूं अगर आपको चाहिए तो। मैम मेरी कोई औकात नहीं किसी को रिश्वत देने की क्योंकि मैं इतने कम सैलरी में जॉब करता हूं और बड़ा मुश्किल से मैं यह घर खरीदा हूं।

मैं आपको बता दूं मैं भी एक छोटी जाति के यहां ही पला बड़ा हूं और मेरी शादी भी एक छोटी जाति फैमिली में होने वाली है। बहुत सारे लोग सिस्टम से प्रताड़ित है मैम। आप बहुत सारे लोगों को परेशान करके रखी हो। आपका सैलरी बराबर टाइम से आ जाता है। मैम जब हम आपके पास में आते हैं ना तो हमारी सैलरी कटती है हमारी फैक्ट्री से। आपको समझना चाहिए। आप जो अभी बता रहे हैं ना कि आपका कोई डॉक्यूमेंट्स पेंडिंग है करके। कौन सा डॉक्यूमेंट्स पेंडिंग है मुझे बताइए। आज तो मैं ऑफिस गया था। वहां पर मुझे कोई बताया नहीं गया। इस पूरी वीडियो में सबसे अहम बात यह है कि अधिकारी का कहना है कि यह सिर्फ विरोध नहीं था बल्कि मानसिक उत्पीड़न और धमकी देने की कोशिश थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युवक ने बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर डालकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की। वीडियो में उन पर रिश्वत लेने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं जिन्हें अधिकारी [संगीत] ने पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताया है।

सोशल मीडिया पर यह विवाद उतनी ही तेजी से बहस का मुद्दा बन चुका है। इस वीडियो को लेकर युवक ने कहा कि यह किसी का काम नहीं करेगी और फिर अपमानित महसूस करेंगी। धन्य हो सिस्टम। सरकार से कोई यह नहीं पूछता कि इनसे कोई अपने काम को लेकर [संगीत] सवाल करेगा तो यह जवाब भी नहीं देंगी और सवाल पूछने वाले पर कोई कैसे एफआईआर दर्ज करा सकती है। दूसरे युवक ने कहा कि अब पूरा विभाग इस व्यक्ति के कार्य फाइल में कमी जानबूझकर कमी निकालेगा और अगर कमी नहीं मिली तो उसे जानबूझकर बनाई जाएगी ताकि विभाग को पूजनीय स्थल की तरह पवित्र साबित करें। वहीं एक अनयूजर ने लिखा कि एक साल तक जब फाइल नहीं मिली तो उसे खुशी हो रही थी क्या? जुडिशरी इंक्वायरी होनी चाहिए। वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा है कि कितनी बेशर्मी से झूठ बोल रही हैं यह। सरकारी नौकरशाही में भ्रष्टाचार कितना अंदर तक घुस चुका है। यह महिला उसका परफेक्ट उदाहरण है। देखा आपने यह मामला अब साफ तौर पर सरकारी कर्मचारी वर्सेस आम नागरिक की लड़ाई बन चुका है और यही पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। एक तरफ एक आम आदमी है जो एक साल से अपनी ही फाइल के लिए भटक रहा है। हर बार वही जवाब फाइल नहीं मिल रही। अगर सिस्टम वक्त पर काम करता तो क्या किसी को बादाम फेंक कर याद दिलाने की नौबत आती?

दूसरी तरफ अधिकारी हैं जिन्होंने सीधे एफआईआर का रास्ता चुना। मानसिक उत्पीड़न, धमकी, मानहानि जैसे गंभीर आरोप लगा दिए। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले में सिस्टम की जवाबदेही भी तय होगी या सिर्फ विरोध करने वाले को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाएगा? किसी भी सरकारी दफ्तर में घुसकर इस तरह विरोध करना सही नहीं ठहराया जा सकता। यह मर्यादा के खिलाफ है। लेकिन उतना ही बड़ा सच यह भी है कि जब सिस्टम सुनना बंद कर देता है तो लोग ऐसे ही अनोखे तरीके अपनाने पर मजबूर हो जाते हैं। यह सिर्फ एक वीडियो या एक एफआईआर की कहानी नहीं है। यह उस गुस्से की कहानी है जो हर उस आम नागरिक के अंदर है जो महीनों सालों तक फाइलों के पीछे

[संगीत] भागता रहता है। अगर हर शिकायत का जवाब एफआईआर होगा तो फिर सवाल उठेगा। आम आदमी जाए तो जाए कहां? सरकारी सिस्टम को यह समझना होगा कि सम्मान सिर्फ कुर्सी का नहीं जनता का भी होता है। फिलहाल आप इस पूरे मुद्दे पर क्या कुछ कहेंगे? अपनी राय हमें कमेंट कर जरूर बताएं। नमस्कार, मैं हूं मानक गुप्ता। अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर करें और हां हमें सब्सक्राइब और फॉलो करना ना भूलें ताकि आप देश और दुनिया की कोई खबर मिस ना करें। तो जुड़े रहिए हमारे साथ और देखते रहिए न्यूज़

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