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चीन ने दिया भारत को होश उड़ाने वाला ऑफर, पूरी दुनिया हैरान !

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रूस ने दुनिया के सियासी शतरंज पर एक तगड़ा दांव खेल दिया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने के बाद पुतिन ने दो बार पीएम मोदी और भारत की तारीफ की है। दरअसल रूस ने एक ऐसे गठबंधन को जिंदा करने की कोशिश की है जो अगर हो गया तो दुनिया की सूरत बदल सकता है।

अब इसी गठबंधन की बात करते हुए चीन ने भारत का नाम लेकर बहुत बड़ा ऐलान कर दिया है। चीन ने भारत को एक बड़ा ऑफर देने की कोशिश की है। हालांकि भारत को फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा। दरअसल रूस भारत और चीन के साथ मिलकर रिक ट्राइका नाम के एक संगठन को जिंदा करना चाहता है।

अब चीन ने भी भारत से कहा है कि वह इस चीज के लिए तैयार है। रिक का मतलब है रशिया, इंडिया और चाइना। तो वहीं ट्राईका का मतलब है तीन देशों का गठबंधन। आपको बता दें कि रिक फोरम की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में शुरू हुई थी। रिक फोरम में रूस, भारत और चीन व्यापार, फॉरेन पॉलिसी और एनर्जी से जुड़े क्षेत्रों पर चर्चा करते रहे हैं।

इस गठबंधन के तहत रूस, भारत और चीन के बीच 20 बैठकें भी हो चुकी हैं। लेकिन जून 2020 में भारत और चीन के बीच गलवान झड़प के बाद रिक फोरम निष्क्रिय हो गया। चीन ने कहा है कि हम रूस और भारत के साथ मिलकर त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के लिए तैयार हैं। वैसे भी चीन और भारत की सीमा पर स्थिति आमतौर पर अब स्थिर है। भारत और चीन के बीच बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं। यानी चीन भी चाहता है कि भारत रिक ट्राईका को शुरू करने के लिए तैयार हो जाए।

उसके बाद बताएंगे कि क्या भारत को चीन की बात माननी चाहिए? जो लग भी रहा है कि भारत, रूस और चीन हाथ मिला ले तो पूरी दुनिया का नक्शा ही बदल सकते हैं। वैसे यह सच भी है। रूस इस गठबंधन को पश्चिमी देशों को टक्कर देने के लिए दोबारा शुरू करना चाहता है। रूस इसलिए भी इस गठबंधन को दोबारा जिंदा करना चाहता है ताकि भारत पश्चिमी देशों के नजदीक ना जाए और आगे चलकर भारत और चीन की जंग भी ना हो क्योंकि रूस भारत और चीन दोनों पर निर्भर है।

भारत और चीन की वजह से ही रूस अभी तक नाटो देशों से लड़ रहा है। लेकिन अगर भारत और चीन की जंग हो गई तो सबसे बुरी तरह से रूस ही फंसेगा। रूस के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाएगा कि वह भारत का साथ दे या चीन का। इसीलिए रूस रिक गठबंधन को दोबारा शुरू करना चाहता है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत को रूस की बात माननी चाहिए? क्या भारत को दोबारा रिक फोरम की शुरुआत करनी चाहिए? रिक गठबंधन को लेकर भारत के मन में तीन बड़ी और जायज मुश्किलें हैं। पहली मुश्किल यह है कि चीन पाकिस्तान को खुला समर्थन देता है। सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए।

सेटेलाइट इंफॉर्मेशन दी और जितनी मदद हो सकती थी उतनी मदद भी की। पाकिस्तान को 80% हथियार देने वाला देश चीन ही है। ऐसे में अगर भारत दोबारा रिक्त गठबंधन से जुड़ता है तो यह चीन को इनाम देने जैसा हो जाएगा। भारत के लिए दूसरी बड़ी मुश्किल है रूस और पाकिस्तान की नजदीकियां।

2023 में पाकिस्तान ने भी भारत की नकल करते हुए रूस से तेल खरीदना शुरू कर दिया। रूस भी अब पाकिस्तान को कुछ दे रहा है। पिछले साल अक्टूबर में रूस ने पाकिस्तान के साथ मिलकर एक मिलिट्री ड्रिल भी की थी।

यानी रूस और पाकिस्तान अब एक दूसरे के लिए स्ट्रेंजर नहीं है। जाहिर सी बात है कि भारत को यह चीज पसंद नहीं है। बहरहाल भारत के लिए तीसरी बड़ी मुश्किल है रूस और चीन की गहरी दोस्ती जिसे दोनों देश नो लिमिट्स पार्टनरशिप बोलते हैं। रूस और चीन की यह पार्टनरशिप यूक्रेन युद्ध के बाद और भी ज्यादा मजबूत हो गई है। रूस और चीन के बीच पिछले साल 244 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ था।

इस व्यापार में रूस को ज्यादा फायदा हुआ था। यानी आप बोल सकते हैं कि रूस चीन पर पहले से भी ज्यादा निर्भर है। यहीं पर आप अगर रूस और भारत के व्यापार को देखें तो वह रूस और चीन के व्यापार का सिर्फ 1/4 ही है। इसके अलावा भारत चीन की तरह खुलकर पश्चिमी देशों का विरोध भी नहीं करता। ऐसे में रूस की निर्भरता चीन पर और भी ज्यादा बढ़ गई है।

ऐसे में सबसे बड़ा खतरा यह है कि चीन अगर चाहे तो वह रूस को भारत के खिलाफ खड़ा कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो भारत और रूस के बीच भी दरार आ सकती है। ऐसे में भारत को बहुत ही सोच समझकर कदम रखना होगा।

रिक गठबंधन को शुरू करना है या नहीं करना उसका फैसला बाद में लिया जा सकता है। लेकिन उससे पहले भारत को रूस से यह साफ कहना होगा कि चीन पर हमें भरोसा नहीं है।

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