अंकल, इसमें हमारे प्रधानमंत्री इंदिरा जी का फोटो था इसलिए मैंने कार्ड लीव किया। दोस्तों, हिंदी फिल्मों में कुछ ऐसे चाइल्ड आर्टिस्ट रहे जिन्होंने बचपन में तो काफी सक्सेसफुल करियर लीड किया लेकिन बड़े होकर अपनी कोई खास पहचान नहीं बना पाए और समय के साथ पर्दे से गायब हो गए। नहीं मां, स्वीटी बहुत अच्छी है। स्वीटी ने मेरे साथ कोई बुरा सलक नहीं किया। वहीं कुछ बाल कलाकार ऐसे रहे जिन्होंने बचपन में भी काफी नेम फेम कमाया। फिल्मों से अपनी पहचान बनाई और बड़े होकर भी स्टार बने या मीनिंगफुल रोल निभाए।
धर्म क्या धर्म क्या ये तो इन दोनों तरह के चाइल्ड आर्टिस्ट के बारे में आज हम चर्चा करेंगे और जानेंगे कि आज वो कहां और किस हाल में है। मां तुम फिल्मों में गाना क्यों नहीं गाती? तू जाग रहा है अभी। इतना अच्छा गाना सुन के कोई सोता है? तो सबसे पहले बात करेंगे एक ऐसी एक्ट्रेस की जिन्होंने शुरुआत में एज अ चाइल्ड आर्टिस्ट कुछ शानदार फिल्मों में काम किया और बड़ी होकर हिंदी सिनेमा की वन ऑफ द बेस्ट एक्ट्रेस के तौर पर जानी गई।
बच्चे मन के सच्चे सारे जग की आंख के। यह है साल 1966 में आई फिल्म सूरज से हिंदी फिल्मों में एंट्री करने वाली चाइल्ड एक्ट्रेस बेबी सोनिया। इन्होंने इस फिल्म में राजेंद्र कुमार और बैजंती माला के साथ काम किया था। वो सूरज है। भैया। मैं कहता हूं वो सूरज है। बोल। इसके बाद इन्होंने 10 लाख, दो कलियां, वारिस, पवित्र और घर-घर की कहानी जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया। अगले हफ्ते हमारे स्कूल में बहुत बड़ा प्रोग्राम हो रहा है। मैं परी बन रही हूं उसमें। फिल्म दो कलियां में इनके डबल रोल ने वाकई धमाल मचा दिया। मुझे डर लग रहा है। चल जमुना तू मेरे पास हो जा। तू सच कह रही है? हां। अब आप सोच रहे होंगे कि बेबी सोनिया नाम की तो बॉलीवुड में कोई एक्ट्रेस ही नहीं है।
तो पहले देखिए बतौर एक्ट्रेस इनकी पहली फिल्म का यह सॉन्ग। मैं हसीन हूं मैं जवान हूं। अरे दिल का मैं। जी हां दोस्तों, हम बात कर रहे हैं सदाबहार फिल्मों की एक्ट्रेस नीतू सिंह की जिन्होंने बतौर एक्ट्रेस साल 1973 में आई फिल्म रिक्शा वाला से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया था। तुझे मिलके भी प्यास नहीं घटती नजारे हम क्या। आगे चलकर नीतू सिंह ने कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया और अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को खूब एंटरटेन किया। हालांकि इन्होंने अपने करियर के पीक पर साल 1980 में दिग्गज एक्टर ऋषि कपूर के साथ शादी करके फिल्मों को अलविदा भी कह दिया। नजरों से कह दो प्यार में मिलने का मौका। हमारी इस लिस्ट में अगला नाम है बॉलीवुड की वन ऑफ द फाइनेस्ट एक्ट्रेस श्रीदेवी का। जिन्होंने साउथ की फिल्मों से बतौर बाल कलाकार अपने करियर की शुरुआत की। और जब इन्होंने बतौर एक्ट्रेस बॉलीवुड में कदम रखा तो बड़ी-बड़ी एक्ट्रेसेस को पीछे छोड़ दिया और देखते ही देखते एक्ट्रेस नंबर वन बन गई।
तो चलिए पहले देखते हैं इनका यह सीन जिसमें यह बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट नजर आई थी। साथ ही इनका यह गाना देखिए। चिक दोस्तों, यह वही चेहरा है जिसने देश विदेश के करोड़ों युवाओं के दिलों में एक खास जगह बनाई। हालांकि अब यह हमारे बीच नहीं है, लेकिन अपने पीछे छोड़ गई हैं अपनी बेहतरीन एक्टिंग से सजी कई बेहतरीन फिल्में। कोई नहीं है बस तुम हो साथ कहनी थी तुमसे जो दिल की बात श्रीदेवी ने महज 4 साल की उम्र में तमिल फिल्म कंधान करुनई से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपने करियर की शुरुआत की इसके बाद इन्होंने कई फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम किया। यह फिल्में हैं तनुई वन, पमपुट्टा, नमनाडू, बाबू आदि और साथ ही कई अवार्ड भी जीते। यह बहुत ही कम लोगों को पता है कि श्रीदेवी ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट एक हिंदी फिल्म में भी काम किया था। और यह फिल्म थी साल 1975 में आई सुपरहिट फिल्म जूली। मम्मी, हमारा ड्रेस पहले ही बदला है। हम चले पार्टी में? नो, अभी तुम बहुत छोटा है। छोटा है। प्ले मैन श्रीदेवी ने बतौर एक्ट्रेस हिंदी फिल्मों में अपना डेब्यू अमोल पालेकर के साथ साल 1979 में आई फिल्म 16वां सावन से किया था। जो कि एक तमिल फिल्म की हिंदी रिमेक थी। देख आज से तूने किसी के सामने हाथ फैलाया पैसा मांगा तो मैं गुस्सा हो जाऊंगी। लेकिन श्रीदेवी को बॉलीवुड में असली पहचान मिली 4 साल बाद आई फिल्म हिम्मतवाला से।
यह फिल्म भी इनकी पहली फिल्म की तरह एक तेलुगु फिल्म की रिमेक थी और इस फिल्म में इन्होंने जितेंद्र के साथ काम किया। ताकी रे यह फिल्म उन दिनों सुपरहिट रही और इसके बाद फिर कभी श्रीदेवी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अगर आपने रवि को उंगली भी लगाई तो कल मैं आपको जिंदा नजर नहीं आऊंगी। आज जहां फैन लटक रहा है, कल वहां मेरी लाश लटक रही होगी। हमारे इस लिस्ट में जो तीसरे नंबर पर स्टार हैं, इनका पहले यह सीन देखकर इन्हें पहचानने की कोशिश कीजिए। मम्मी नहीं आती। मम्मी को बहुत याद करती हूं। हां, बहुत याद करती हूं। अगर आप इन्हें पहचान पाए, तो यह गाना देखिए। कोई नहीं, कोई नहीं। कोई नहीं, कोई नहीं। मेरा। दोस्तों, हम बात कर रहे हैं हिंदी फिल्मों की बेहतरीन एक्ट्रेस रही सारिका की। इन्होंने हिंदी फिल्मों में अपनी शुरुआत बतौर बाल कलाकार महज 5 साल की उम्र से की थी। बाबा हम्म थोड़ा खाना खाओ ना। तो तुमने बनाया है क्या? नहीं तुमने खाओगे तो मां भी नहीं खाएगी। इसके बाद देखते ही देखते इन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट मजली दीदी, हमराज, बेटी, आशीर्वाद, हारजीत, छोटी बहू, देवी जैसी दर्जनों फिल्मों में काम किया। वाह मेरा बेटा। मैं स्कूल जा रहा हूं। नमस्ते दीदी। नमस्ते। तुझे नमस्ते करना किसने सिखाया तुम्हें? मां ने। मां ने। सारिका ने बतौर एक्ट्रेस साल 1975 में राजश्री बैनर की सुपरहिट फिल्म गीत गाता चल से बॉलीवुड में डेब्यू किया। मैं वही दर्पण वही ना जाने ये क्या हो गया। इस फिल्म में इन्होंने एक्टर सचिन के साथ काम किया और फिर कभी पलट कर नहीं देखा और बॉलीवुड में एक बेहतरीन एक्ट्रेस के तौर पर जानी गई। सबकी बात तो बताती है गौरी। हां, लेकिन खुद की बात नहीं बताती। अरे, मेरे मुंह बोले भैया अमर के साथ इसकी जो आंख में चोली चल रही है ना, वह मुझे साफ़ पता है। इस लिस्ट में अगला नाम है सचिन का। यह वैसे तो गुजरे जमाने के फेमस चाइल्ड आर्टिस्ट रहे और इन्होंने बतौर बाल कलाकार करीब 65 फिल्मों में काम किया। मन भर माए नैना बांधे ये डगरिया कहीं गए। सचिन ने महज 4 साल की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपने करियर की शुरुआत मराठी फिल्म हाम मजा मार्ग एकला से की थी। परीक्षा आज उत्तर बरोबर। अरे वाह! पर दादा, आज तो तुम्हारा उशीर का? और इस फिल्म में इनकी शानदार एक्टिंग के लिए इन्हें नेशनल अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। और इस फिल्म के बाद इन्होंने बतौर बाल कलाकार, डाकघर, मजली दीदी, ब्रह्मचारी, बचपन, मेला, ज्वेलथिफ जैसी कई हिंदी फिल्मों में काम किया। दादा, रामू दादा। क्या है किसान? इसका ₹1 मिलेगा। अरे चांदी कहां है?
तो इसे खरीद लो ना। मुझे ₹1 चाहिए। बतौर लीड एक्टर इन्होंने सारिका के साथ ही साल 1975 में राजश्री बैनर की सुपरहिट फिल्म गीत गाता चल से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया। सांवरे की बंसी को बजने से काम इस फिल्म के बाद इन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और कई फिल्मों और टीवी सीरियल्स में काम करके दर्शकों के बीच दशकों तक छाए रहे। मिस लेली मुझे ख्याल तक नहीं था कि आप प्राचीन हिंदी की रचनाओं के बारे में इतना सब जानती हैं। अगर मैं जज होता ना तो आप ही को पुरस्कार देता। चलिए अब अगले स्टार की बात करते हैं। तो साल 1988 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म कयामत से कयामत तक से बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहे जाने वाले आमिर खान ने डेब्यू किया था। लेकिन शायद आपको यह पता नहीं होगा कि इस फिल्म से एक क्यूट चाइल्ड आर्टिस्ट ने भी डेब्यू किया। इस छोटे उस्ताद ने आगे चलकर बॉलीवुड की कुछ बेहतरीन फिल्मों में काम किया और नाम कमाया। जी हां, हम बात कर रहे हैं आमिर खान के भांजे इमरान खान की। इन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट आमिर खान के बचपन का रोल दो फिल्मों में निभाया। तो कयामत से कयामत तक के अलावा इनकी दूसरी फिल्म रही 1992 में आई जो जीता वही सिकंदर। इन दो फिल्मों के बाद इन्होंने सीधा डेब्यू किया बतौर लीड एक्टर साल 2009 में आई फिल्म से जो थी जाने तू या जाने ना। कभी-कभी आदती जिंदगी में यूं ही कोई अपना लगता है। कभी-कभी आदत इस हिट फिल्म के बाद भी इन्होंने कुछ बेहतरीन फिल्मों में काम किया जिनमें किडनैप, लक, वंस अपॉन अ टाइम मुंबई दोबारा और कट्टी बट्टी शामिल रही। तुम रख लो बेसुरी और बेवकूफ। अरे यार, सेक्सीी होना फुल टाइम काम है। यार, मुझे असली न्यूज़ कवर करनी है और यह बकवास मिल रहा है। इस लिस्ट में जो हमारे अगले चाइल्ड आर्टिस्ट है, इन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1983 में आई शेखर कपूर की बेहतरीन फिल्म मासूम से की थी। मम्मी कहती थी कि अगर टूटता हुआ तारा देख लो तो जो भी मांगो मिल जाता है। देखो देखो अंकल एक टूटा हुआ तारा। एरिट सेगल के नवेल मैन वुमेन एंड चाइल्ड से अडॉप्टेड इस फिल्म का म्यूजिक भी उन दिनों बेहद लोकप्रिय हुआ था। तुझसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान। यह थे जुगल हंसराज। यह जितने गुड लुकिंग बचपन में थे, इनकी उतनी ही अट्रैक्टिव पर्सनालिटी बड़े होकर भी रही। घर से निकलते ही कुछ दूर चलते इन्होंने हिंदी फिल्मों में बतौर लीड एक्टर अपना डेब्यू साल 1994 में आई फिल्म आग गले लग जा से किया था। इसका मतलब आप मेरे प्यार को बेच आए हैं।
तो दौलत भी तो ढेर सारी लाया हूं ना मैं। आपकी निगाह में दौलत ही सब कुछ है। मैं कुछ भी नहीं। मेरी खुशी कुछ भी नहीं। इस फिल्म के बाद इन्होने कई बेहतरीन हिंदी फिल्मों में काम किया। जिनमें पापा कहते हैं मोहब्बतें सलाम नमस्ते आजा नचले जैसी फिल्में शामिल रही। आज हमें मालूम हुआ क्या चीज मोहब्बत इस लिस्ट में जो अगला नाम है इन्होंने भी चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर जुगल हंसराज के साथ मासूम फिल्म में काम किया था। लकड़ी की काठी, काटी पे घोड़ा, घोड़े की धो। हालांकि, इससे पहले यह कर्म और कलयुग जैसी बेहतरीन फिल्मों में भी बाल कलाकार की आर्टिस्टिक भूमिका निभा चुकी थी। यह क्यों मुंह बना के बैठा है? आपकी बह रानी इसे दाजीलिंग भेज रही है। डिसिप्लिन के लिए बोर्डिंग स्कूल अच्छी रहती है सावित्री। अब तक तो आप पहचान ही गए होंगे कि यह थी उर्मिला और इन्होंने एज अ चाइल्ड आर्टिस्ट लगभग एक दर्जन से ज्यादा हिंदी फिल्मों में काम किया और पहली बार लीड एक्ट्रेस यह साल 1991 में आई सुपरहिट फिल्म नरसिम्हा में नजर आई। जाओ तुम चाहे जहां याद करोगे वहां रंगीला गर्ल नाम से मशहूर उर्मिला मातुंडकर ने आगे इंडस्ट्री में अपनी स्ट्रांग पहचान बनाई और रंगीला दौड़ सत्य मस्त लज्जा पिंजर जैसी फिल्मों में बेहतरीन काम करके अपने टैलेंट को प्रूव किया। इस प्यार से मेरी तरफ ना देखो। हमारी इस लिस्ट में जो अगले एक्टर हैं, इन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में वो मुकाम हासिल किया जो हर एक्टर का सपना होता है। ये क्या मिला दिया? ये क्या मिला दिया? इस कवाली में परफॉर्म कर रहे यह सिंगर कोई और नहीं संजय दत्त हैं। हालांकि राजकुमार हिरानी ने अपनी फिल्म संजू में इनके बारे में काफी कुछ बता दिया है। तो शायद आपको हैरानी ना हो कि यह भी बाल कलाकार के तौर पर काम कर चुके हैं। संजय दत्त ने साल 1971 में आई अपने पापा सुनील दत्त की फिल्म रेशमा और शेरा से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया और फिर लीड एक्टर साल 1981 में आई फिल्म रॉकी से बड़े पर्दे पर नजर आए। को सलाम, दुश्मनों को सलाम। चलिए बात करते हैं अपने इस लिस्ट के एक और बेहतरीन एक्टर की जिन्होंने एक सुपर डांसर, मोस्ट हैंडसम एंड टैलेंटेड एक्टर के तौर पर अपनी पहचान बनाई। दोस्तों, फिल्म आशा में इस डांस के लिए इस बच्चे को फिल्म के डायरेक्टर ने ₹100 का इनाम दिया था।
आप इनके कुछ और डांसिंग मूव देखिए। इनके थोड़े और बड़े होने के बाद इन्होंने फिल्म भगवान दादा में काम किया जिसमें रजनीकांत के अडॉप्टेड सन का रोल प्ले किया। नाम गोविंदा काम शांति नगर फैक्ट्री का मैनेजर और भगवान दादा का बेटा। इन फिल्मों के बाद इन्होंने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर भी कुछ फिल्मों में काम किया जिनमें खुदगर्ज, कोयला, किंग अंकल और करण अर्जुन जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल रहीं। एक्टर डायरेक्टर राकेश रोशन के मल्टीटलेंटेड बेटे रितिक रोशन जिनका डांसिंग सिग्नेचर स्टाइल हमेशा के लिए लोगों के दिमाग में छप सा गया। एक पल का जीना। साल 200 में रतिक ने सुपरहिट फिल्म कहो ना प्यार है सेब बतौर लीड एक्टर धमाकेदार डेब्यू किया और फिर इंडस्ट्री और दर्शकों के दिलो दिमाग पर छा गए। इसके बाद रतिक ने दर्जनों हिट फिल्में दी और आज भी इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। धर्म क्या धर्म क्या ये मतलब अपने अगले चाइल्ड आर्टिस्ट की बात करें तो साल 1977 में एक सुपरहिट फिल्म आई थी धर्मवीर। इसका यह सीन देखिए। धर्म तू राम दीन का बेटा है। हथौड़े का एक फटका 10 के बराबर होना चाहिए। यह बाबा बाबा तो यह लो। इस चाइल्ड आर्टिस्ट ने इस फिल्म में धर्मेंद्र के बचपन का किरदार निभाया था। हालांकि बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट इन्होंने सिर्फ एक इसी फिल्म में काम किया। यह थे धर्मेंद्र के छोटे बेटे बॉबी देओल जिन्होंने आगे चलकर एक सक्सेसफुल करियर लीड किया। इस फिल्म के बाद इन्होंने बतौर लीड एक्टर साल 1995 में आई फिल्म बरसात से अपनी पारी शुरू की। नहीं यह हो नहीं सकता कि तेरी याद ना आए बिना और बॉबी आज भी फिल्मों में अच्छा काम कर रहे हैं। आएंगी मेरा तो चलिए अगले चाइल्ड एक्टर की बात करते हैं। साल 1973 में आई फिल्म यादों की बारात में एक प्यारा सा बच्चा नजर आया था। फिल्म में इस बच्चे ने तारिक खान के बचपन का किरदार निभाया। यादों की बारात निकली है आज तेरे द्वारे। यह कोई और नहीं बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान थे। पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा बेटा। हालांकि लोगों को यह लगता है कि 1988 में आई फिल्म कयामत से कयामत तक इनकी डेब्यू फिल्म थी। लेकिन ऐसा नहीं है। इस फिल्म से पहले साल 1984 में आई फिल्म होली में भी यह काम कर चुके थे। आई एम सॉरी यार। ठीक है। भागना नहीं। नहीं नहीं बेनर्जी को रेस्टिकेट कर दिया क्या? अब मैं चलता हूं ऑडिटर मेंबर तू आ जाना। हां ओके। और आगे आमिर का करियर कैसा रहा यह बताने की जरूरत नहीं है। आमिर फिल्मों के लीजेंड के तौर पर जाने जाते हैं और एक वर्ल्ड फेमस पर्सनालिटी हैं। हमारे इस लिस्ट में अब जो अगला नाम है यह साउथ फिल्मों में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम कर चुके एक बेहतरीन एक्टर हैं। पहले आप इनका यह सीन देखिए। मनी जमीदार। महज 5 साल की उम्र में इस बच्चे ने अपनी डेब्यू तमिल फिल्म कलाथुर कनम्मा के लिए प्रेसिडेंट से गोल्ड मेडल जीता। यह थे मल्टी टैलेंटेड एक्टर कमल हसन। देखिए मैडम मैं बड़ा इज्जतदार आदमी हूं। राजे महाराजे रानी महारानीियों ने कभी मुझे तू या तुम नहीं कहा। आपका अगर आप भी मुझे आप पुकारे आपका एहसान होगा। आगे चलकर साउथ के सुपरस्टार होने के साथ-साथ हिंदी फिल्मों में भी इन्होंने जबरदस्त फेम कमाया। ऐसे वक्त पर एक योद्धा हमेशा क्या बोलता है पता है? अरे संभाल लेंगे। चलिए अब उन बच्चों की बात करते हैं जिन्होंने बचपन में तो बहुत बेहतरीन काम किया लेकिन बड़े होने के बाद उनकी किस्मत ने वैसा साथ नहीं दिया जैसा वो डिर्व करते थे। क्योंकि एक्टिंग तो उनके अंदर आ ही चुकी थी पर फिर भी या तो सही मौके नहीं मिले या किसी और वजह से आगे नहीं बढ़ पाए। साहब हम बूट पॉलिश करता है। कोई भीख नहीं मांगता। पैसा उठाकर हाथ में दो। सबसे पहले हम बात करेंगे मास्टर बिटू उर्फ विशाल देसाई की। अमर बेटे ये क्या कर रहे हो बेटे? पिस्तौल छुपा रहा हूं। छोटे ने देख लिया तो मांग लेगा। मास्टर बिटू ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1978 में आई फिल्म पतिप और वो से की थी। जिसके लीड एक्टर थे संजीव कुमार। गाना आए या ना आए गाना चाहिए। हां गाना। इस फिल्म में इनकी खूबसूरत एक्टिंग और मासूमियत को दर्शकों ने खूब पसंद किया और बेहद कम वक्त में यह एक चहेते आर्टिस्ट बन गए। अमर अकबर एंथनी, अमर प्रेम, द बर्निंग ट्रेन, नटवरलाल, यराना, नागिन और फकीरा जैसी फिल्मों में इस बच्चे ने अपने शानदार अभिनय से खूब शोहरत बटोरी। नहीं मां, स्वीटी बहुत अच्छी है। स्वीटी ने मेरे साथ कोई बुरा सलुक नहीं किया। लेकिन बड़े होने के बाद यह फिल्म इंडस्ट्री से तो जुड़े रहे लेकिन एक्टिंग में नहीं बल्कि फिल्म मेकिंग में इन्होंने अपना करियर आगे बढ़ाया।
अब इन्हें मनपसंद काम नहीं मिला या कोई और वजह रही पता नहीं। विशाल ने सबसे पहले साल 2004 में टीवी सीरियल कामिनी दामिनी में हेमा मालिनी को असिस्ट किया। इसके बाद साल 2006 में बी आर चोपड़ा को भी असिस्ट किया। विशाल ने आगे एज अ असिस्टेंट डायरेक्टर विरासत, भूतनाथ और बागवाबान जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया। 2018 में इनकी फिल्म बदला हिंदुस्तानी का देखने को मिली। साथ ही यह एक बहुत बड़े एंटरटेनमेंट चैनल के क्रिएटिव डायरेक्टर भी हैं। इस लिस्ट में दूसरा नाम है जूनियर महमूद यानी कि नईम सैयद का। हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं। हम तेरे तेरे तेरे इस प्यारे से बच्चे ने 9 साल की उम्र से फिल्मों में एक्टिंग शुरू की और उस दौर में किसी सुपरस्टार की तरह खुद की पहचान बनाई। अरे साब हुआ अभी यहां का वो तो अभी किसी प्राइवेट होटल में खाना खा रहा आएगा। प्राइवेट? मेरा मतलब है जहां खाने के साथ चुल्लियों की खनक हो, पायल की झलक हो। एक वक्त ऐसा भी था जब लगभग हर फिल्म में यह किसी ना किसी रोल में नजर आते थे। इनकी कमाई और पॉपुलैरिटी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज 16 साल की उम्र में इन्होंने विदेश से अपने लिए एक लग्जरी कार इंपोर्ट कराई थी और तब मुंबई में सिर्फ 12 लोग ही थे जिनके पास यह कार थी। दीदी आप सब फिल्म ब्रह्मचारी ने इन्हें कामयाबी की ऊंचाइयों पर लाकर खड़ा कर दिया। ये गोरे गाला तंदाना ये रेशमी वाला तंदाना ये 16 साला तंदाना इस परफॉर्मेंस को रिक्रिएट करने के बाद ही इसे देखकर महमूद साहब ने ही इन्हें अपना नाम जूनियर महमूद दे दिया था। तुम लोग ऐसा करो उन्हें बाहर लेके आओ। फिर मैं उनका मूड ठीक सच्चा हूं। इनकी पॉपुलर फिल्में रही कारवां, दो रास्ते, हरे रामा हरे कृष्णा, कटी पतंग, आन मिलो सजना, हाथी मेरे साथी आदि। तुम भी वही किया करो जो मैं करता हूं। इस कान से सुनो और इस कान से निकाल दिया करो। ना जाने बुढ़ापे में आदमी इतनी बक-बक क्यों करता है। हालांकि बड़े होने के बाद इन्हें लीड एक्टर के तौर पर एक्सेप्टेंस नहीं मिल पाई। और इनकी वही बचपन वाली इमेज लोगों के दिमाग पर छाई रही। हालांकि 80ज 90ज में इन्होंने जैसी करनी वैसी भरनी और बाप नंबरी बेटा 10 नंबरी जैसी कई शानदार फिल्में की लेकिन कभी एक मेन स्ट्रीम लीड एक्टर नहीं बन पाए। यह कुछ फिल्मों में सपोर्टिंग रोल करते नजर आए। साथ ही कुछ मराठी फिल्में भी प्रोड्यूस की जैसे मस्करी, पागलपन, कर्म योग आदि। साल 2012 के बाद इन्होंने छोटे पर्दे पर भी काम किया और आगे साल 2023 में इन्हें कैंसर होने की बात सामने आई। फिर इसी बीमारी से एक शानदार कलाकार ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। अपने अगले आर्टिस्ट की बात करें तो 70 के दशक का यह मासूम चेहरा आपको जरूर याद होगा। क्या करना है? क्या करना है? कर लिया। यह हैं मास्टर राजू श्रेष्ठ जिन्हें बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट बेशुमार शोहरत मिली। इन्होंने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। अपनी एक्टिंग से मासूमियत की ऐसी छाप छोड़ी कि लोग इन्हें आज भी याद करते हैं। यस सर। कल कहां थे? सर, स्कूल में आते-आते तबियत खराब हो गई थी। उल्टे आए थे? नहीं सर पेट में दर्द हो गया था। चिट्ठी लाए? नहीं सर। दीदी की हैंडराइटिंग है ना? इनका असली नाम फहीम अजानी था। जिन्होंने 5 साल की उम्र में गुलजार साहब की फिल्म परिचय से अपने करियर का आगाज किया।
ये लंगड़ा भूत सुबह-सुबह यहां क्या कर रहा है? हां? आपका हाथ कैसा है? ओ हां तो ठीक है बेटा क्यों दीदी ने पिश भेजा कहा है मालिश कर लो इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ही फिल्म के एक्टर संजीव कुमार ने इनका नाम राजू रख दिया और यही नाम इनकी पहचान बन गया इन्होंने बाबरची अभिमान दाग अखियों के झरोखों से चितचोर खट्टामीठा वो सात दिन और किताब सहित 100 से ज्यादा फिल्मों में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट धमाकेदार काम किया। मां तुम फिल्मों में गाना क्यों नहीं गाती? तू जाग रहा है अभी। इतना अच्छा गाना सुनके कोई सोता है? 1976 में आई फिल्म चितचोर के लिए इन्हें बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का नेशनल अवार्ड भी मिला। गुड इवनिंग दोस्त। गुड इवनिंग। आज कौवे नहीं उड़ा रहे? अभी उड़ाता हूं दोस्त। लेकिन बड़े होने के बाद फिल्म मेकर्स ने इन्हें लीड रोल नहीं दिया और थक हारकर इन्होंने कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर काम करना शुरू किया और अफसाना, प्यार का दिल जले और साथी जैसी कई फिल्मों में नजर आए। इन्होंने छोटे पर्दे पर भी कई टीवी सीरियल्स में काम किया जैसे चुनौती, अदालत, महाराणा प्रताप, जय हनुमान आदि। आप जिस महान पुत्र की माता बनेंगी, वो रूद्र का 11वां अवतार होगा। ऐसा चमत्कारी बालक संसार में ना हुआ था ना होगा। हालांकि अब यह ना तो फिल्मों में नजर आते हैं और ना ही सीरियल्स में और इनका कोई नया अपडेट अवेलेबल नहीं है। 70-80 के दशक में बॉलीवुड में एक और चाइल्ड आर्टिस्ट ने दस्तक दी जिसका नाम था मास्टर अलंकार उर्फ अलंकार जोशी। अरे चाचा इसमें हम सब खाना भी खा लेंगे और खोली का भाड़ा भी जमा हो जाएगा। यह एक्ट्रेस पल्लवी जोशी के छोटे भाई थे। फिल्मों में इनकी शुरुआत साल 1975 में आई फिल्म दीवार से हुई थी। जिसमें इन्होंने अमिताभ बच्चन के बचपन का किरदार निभाया था। साहब हम भूख पॉलिश करता है। कोई भीख नहीं मांगता। पैसा उठाकर हाथ में दो। इसके बाद इन्होंने कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया। जैसे ड्रीम गर्ल, सीता और गीता, शोले और डोना दी। अरे तू क्या जाएगा? तुझे तो इंग्लिश भी नहीं आती। दीदी चेक मी। आई विल कम विद यू। मैं नहीं। लेकिन ये चाइल्ड आर्टिस्ट भी जब बड़े हो गए तो बॉलीवुड ने इन्हें एक्सेप्ट नहीं किया। और 90ज आते-आते बॉलीवुड ने इन्हें काम देना बंद कर दिया। इसके बाद इन्होंने आईटी फील्ड में अपना करियर बनाया और खुद की आईटी कंपनी डेवलप की। आज यह अमेरिका में रहते हैं और एक बिजनेस ट्राइकून के रूप में इनकी पहचान है। हमारे इस लिस्ट में जो अगले चाइल्ड आर्टिस्ट हैं, इन्हें आपने बचपन में डिफरेंट किरदारों में देखा होगा। यह हैं मास्टर सत्यजीत उर्फ सत्यजीत पुरी। एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल। जग में रह जाए। बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट इन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1966 में आई फिल्म मेरे लाल से की थी। इसके बाद इन्होंने बहुत सारी पॉपुलर फिल्मों में काम किया। जैसे खिलौना, हरे रामा, हरे कृष्णा, समाधि, शोर, चाचा, भतीजा, धर्म कर्म आदि। आपने मुझे वहां पर दो दिन के लिए भेज दिया। अरे बदमाश, यहां तुझे लोग ढूंढ रहे हैं। मैं यहां परेशान हूं। तू गया कहां था? मैं तो बस में बैठ कर आ रहा था। अरे अकेले क्यों आया? भोला को साथ क्यों नहीं लाया? भोला मां से पूछता और मां मुझे आने देती। हालांकि इन्हें भी बड़े होने के बाद सिर्फ कैरेक्टर आर्टिस्ट या साइड एक्टर का रोल ही ऑफर होने लगा। तब इन्होंने अर्जुन, डकैत, खून भरे मांग, त्रिदेव, शोला और शबनम जैसी कई फिल्मों में काम किया। उसे ढूंढने का एक आसान तरीका मैं आपको बताता हूं। कश्मीर से ले कन्याकुमारी तक आप अपनी पूरी पुलिस फोर्स को दौड़ा दीजिए। कहीं ना कहीं तो आपको करन जरूर मिल जाएगा। आखिरी बार यह सनी देओल की फिल्म घायल वंस अगेन में नजर आए थे। अब बात करेंगे उस फीमेल चाइल्ड आर्टिस्ट की जो 80 के दशक की बहुत सी कामयाब फिल्मों का हिस्सा रही। इनका नाम था बेबी गुड्डू उर्फ शाहिदा बेग। मेरे पापा मुझे ढूंढते होंगे। बहुत चिल्लाते होंगे। तुम लोग एक छोटे से बच्चे को नहीं संभाल सकते क्या? इनके टैलेंट की वजह से ही उस दौर की बाकी चाइल्ड आर्टिस्ट के मुकाबले इनका रोल फिल्मों में ज्यादा होता था। इन्होंने साल 1984 में आई फिल्म पाप और पुणे से फिल्मों में डेब्यू किया। जिसमें इनकी एक्टिंग को बेहद पसंद किया गया। मम्मी ये लो। किसने दिया है? वो अंकल ने दिया है। बेबी गुड्डू फिल्म मेकर एम एम बेग की बेटी थी। जिन्होंने सिर्फ 3 साल की उम्र में टूथपेस्ट और सॉफ्ट ड्रिंक के एड्स करने शुरू कर दिए थे। आई लव इट फ्रेश के। स्टॉप बैड ब्रेथ, फाइट टू डिके। इन्होंने औलाद, परिवार, आज का अर्जुन, घर-घर की कहानी, नगीना और समंदर जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया और अपनी क्यूटनेस के लिए बेहद पसंद की गई। हेलो पापा। गुड्डू। मैं बहुत दूर जा रही हूं छुपने के लिए। बेटे, मुझे सिर्फ इतना बता दो कि तुम्हारे साथ कौन है? मेरे साथ है दोस्त। दोस्त? कौन दोस्त? वही मासी वाला दोस्त, अजीत। राजेश खन्ना को यह इतनी पसंद आई कि इनके लिए उन्होंने एक टेली फिल्म भी बनाई थी। आधा सच और आधा झूठ। जिंदगी क्या है एक लसीफा है। जीने का यही बस। करीब 30 फिल्मों में काम करने के बाद बेबी गुड्डू ने करीब 12 साल की उम्र में अचानक फिल्मों को अलविदा कह दिया और अपनी पढ़ाई पूरी करने चली गई। फिलहाल शाहिदा बेग दुबई में है और अमीरात एयरलाइंस में जॉब करती हैं। इनकी उम्र 40 के करीब है और सोशल मीडिया पर इनके बारे में काफी कम इंफॉर्मेशन मौजूद है। इस लिस्ट में अगला नाम है मास्टर रवि उर्फ रवि बलेचा का। छोटू तुझे भूख लगी है? मैं अभी से कुछ खाने को लाता हूं। इन्होंने साल 1976 में आई फिल्म फकीरा से हिंदी फिल्मों में अपना डेब्यू किया था। हालांकि इन्हें असली पहचान साल 1977 में आई फिल्म अमर अकबर एंथनी से मिली। इस फिल्म में यह अमिताभ बच्चन के बचपन का किरदार निभाकर घर-घर में पॉपुलर हो गए। फादर, मैं कन्फ्यूजन के लिए आया हूं। यस। फादर, आज मैंने अपने स्कूल की किताबें भेज दी। इसके बाद मास्टर रवि ने कई फिल्मों में अमिताभ के बचपन की भूमिका निभाई। जिनमें कुली, देशप्रेम, शक्ति, नास्तिक, मिस्टर नटवर लाल जैसी फिल्में खास रही। मां जी आप अजमेर शरीफ जा रही हैं? अगर जा रही हैं तो
मेरी तरफ से ₹1 की चादर गरीब नवाज पे चढ़ा देना और दुआ करना कि मुझे मेरी बिछाई हुई मां मिल जाए। इसके अलावा रवि ने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया जैसे परिचय, रोटी, सीता और गीता और देश प्रेमी आदि। देखिए हम किसी का दिल नहीं तोड़ना चाहते। आप लोगों की भोलीभाली सूरत देखकर हमने फैसला किया है कि हम यहीं रहेंगे। मास्टर रवि ने कई भाषाओं की लगभग 300 फिल्मों और टीवी सीरियल्स में काम किया। लेकिन बड़े होने पर फिल्म इंडस्ट्री से सही रिस्पांस ना मिलने की वजह से इन्होंने फिल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया और अहमदाबाद के नेशनल इंस्टट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से हॉस्पिटिटी और फैसिलिटीज में एमबीए की डिग्री लेकर अपना अलग करियर बनाया। आज रवि बलेचा हॉस्पिटिटी इंडस्ट्री में बड़ा नाम है और इंडिया के टॉप प्राइवेट सेक्टर बैंकों को अपनी हॉस्पिटिटी की सर्विस देते हैं। अब बात करेंगे एक ऐसे चाइल्ड आर्टिस्ट की जिन्होंने बॉलीवुड में बहुत ज्यादा काम नहीं किया लेकिन कन्नड़ फिल्मों में अपना सिक्का जमाया। यह थे मास्टर मंजूनाथ। इन्होंने साल 1984 में आई फिल्म उत्सव से बॉलीवुड में डेब्यू किया। लेकिन इन्हें असली पहचान मिली टेलीविजन सीरीज मालगुड़ी डेज से। वो लड़का बहुत लंबा, चौड़ा ताकत वाला होगा। आठ साल का तो हो ही नहीं सकता। इस सीरियल में शानदार एक्टिंग के लिए इन्हें छह इंटरनेशनल, एक नेशनल और एक स्टेट अवार्ड मिला। इसके अलावा मंजूनाथ ने बेनाम बादशाह, अग्निपथ, विश्वात्मा जैसी फिल्मों में काम किया। इसके बाद इन्होंने स्टोन बॉय नामक एक और हिंदी टीवी सीरियल में काम किया जिसने इन्हें हिंदी लैंग्वेज ऑडियंस में काफी पॉपुलर कर दिया। यू, उसे क्या समझा रहे हो? मुझे समझाओ। यस, व्हाट? क्या? भैया, मम्मी ने मना किया था ना, गंदे बच्चों से बात करने के लिए? फिल्म अग्निपथ में भी इन्होंने अमिताभ बच्चन के बचपन का किरदार निभाया जिसके लिए इन्हें काफी सराहना मिली। रिपोर्ट करने का था। किया वो भी किया मैंने। पर क्या किया तुम लोगों? हां? कुछ नहीं। इसीलिए मैं किया। चला डाला। 19 साल की उम्र में इन्होंने एक्टिंग छोड़ दी और अपनी पढ़ाई पर फोकस किया और आज यह बेंगलुरु में एक पीआर कंसलटेंसी चलाते हैं। तो दोस्तों, यह थे गुजरे जमाने के कुछ फेमस चाइल्ड आर्टिस्ट जिनमें से कुछ की किस्मत ने साथ दिया और वह बड़े होने के बाद भी स्टार के तौर पर जगमगाते रहे। तो वहीं कुछ ने बचपन में खूब शोहरत कमाई, लेकिन बड़े होने के बाद या तो दर्शकों ने उन्हें नकार दिया या फिल्म मेकर्स ने टाइप कास्ट होने की बात कहकर अच्छा काम ही नहीं दिया। इनमें से आपका फेवरेट चाइल्ड आर्टिस्ट कौन था? आप कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताइएगा। दोस्तों, इस लिस्ट में कुछ ऐसे नाम भी आते हैं जो पहले चाइल्ड आर्टिस्ट थे और बाद में बड़े एक्टर बने। लेकिन ज्यादातर लोग उनके बारे में जानते हैं। इसलिए मैंने इस एपिसोड में उनकी चर्चा नहीं की। जैसे ऋषि कपूर, शशि कपूर, आफताब शिवदानी आदि। अगर आप 90ज के बाद के फेमस चाइल्ड आर्टिस्ट जैसे कुणाल खेमो, हंसिका मवानी आदि के बारे में जानना चाहते हैं तो भी हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा। हम उस पर भी एक अलग एपिसोड बनाने की कोशिश करेंगे। तो मिलते हैं अगले एपिसोड में कुछ नए किस्से कहानियों के साथ। तब तक के लिए नमस्कार।