देखो मैंने देखा है ये एक सपना फूलों के शहर मेरी याद आ रही है तेरी याद ये जमीन गा रही है आसमान गा रहा है इनकी आवाज में एक अनोखी कशिश थी एक नशा था एक सुरूर था और साथ ही कुछ बेफिक्री भी [संगीत] हिंदी सिनेमा जगत के एक वर्सटाइल प्लेबैक सिंगर जिन्होंने 80 और 90 के दशक में अनगिनत लोकप्रिय गाने दिए और यंग एक्टर्स की पहचान बन गए। कैसा लगता है? अच्छा लगता है इन्होंने ना सिर्फ एक गायक के रूप में बल्कि एक एक्टर, म्यूजिक डायरेक्टर, राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के तौर पर भी अपनी छाप छोड़ी और उससे भी पहले बाल कलाकार के रूप में सिनेमा में कदम रखा। एक पंछी मत वाला रे लेकिन क्या आपको पता है
कि सिंगिंग इनकी रगों में दौड़ता था और यह महान गायक किशोर कुमार और बंगाली सिनेमा की प्रसिद्ध अदाकारा रूमा घोष के बेटे हैं। मैं जिस दिन भुला दूं तेरा प्यार दिल क्या आप जानते हैं कि इनके गाए अनेक गानों को आज भी कई लोग किशोर कुमार के ही गीत मानकर सुनते हैं क्योंकि इनकी गायकी में वही मधुरता और वही अंदाज झलकता है। रोज रोज आंखों तले और क्या आप विश्वास करेंगे कि अपने पिता के समान आवाज होने के कारण ही इन्हें सबसे अधिक नुकसान हुआ और जब इंडस्ट्री में किशोर कुमार की शैली के कई गायकों की बाढ़ आ गई तो इन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया। गीत गाता हूं मैं गुनगुनाता हूं मैं। मैंने हंसने का वादा। तो कौन है यह गायक?
और क्यों एक प्रतिष्ठित फिल्मी घराने से संबंध रखने के बावजूद इन्हें भी रिजेक्शन का सामना करना पड़ा और क्यों इतनी टैलेंटेड होते हुए भी इनकी अपनी पहचान नहीं बन सकी। देखो मैंने देखा है ये एक सपना फूलों के शहर में। बताएंगे और भी बहुत कुछ आप जुड़े रहिए हमारे साथ। अरे नजर लगे ना साथियों अरे हो ये लड़की जरा सी दीवानी लगती है मुझे तो यह गुड़िया जापानी लगती दोस्तों आज हम एक ऐसे गायक की बात कर रहे हैं जिनके अधिकांश गीतों को आप शायद किशोर कुमार के गीत समझ कर ही सुनते आए हो जी हां हम बात कर रहे हैं 80 और 90 के दशक में अपनी आवाज से सबको मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्लेबैक सिंगर अमित कुमार की कभी खुशी कभी रंग तर रम पम पम हंसो और हंसाया करो। एक जिंदा दिल इंसान जिनमें अपने पिता किशोर कुमार की पूरी झलक दिखाई देती है। वही ह्यूमरस अंदाज बड़े-बड़े कलाकारों की नकल उतार कर उनकी बातें कहना और अद्भुत वाकपटुता जैसा कि कई टीवी शो और इंटरव्यूज में भी देखा गया है। वो पूरा ग्रुप थोड़ा पंचम का। ओए वो मुझे ओए उल्लू के पट्टे तूने अंतरे में शोक को शौक बोल दिया।
अमित कुमार के स्वर में एक ऐसा आकर्षण था कि श्रोता उसकी मादकता में डूब जाया करते थे। [संगीत] हीरो हीरो ही लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि अमित कुमार म्यूजिक इंडस्ट्री में वो स्थान नहीं बना पाए जिसके ये हकदार थे। क्या कारण रहे इसके पीछे? आज इन्हीं सब पहलुओं पर डिटेल में बात करेंगे। तो चलिए इस कहानी की शुरुआत अमित कुमार के बचपन से करते हैं। करते हैं सब मुझे सलाम। लेते हैं सब मेरा नाम। अमित कुमार का जन्म 3 जुलाई 1952 को किशोर कुमार गांगुली और रूमा घोष के पुत्र के रूप में कोलकाता में हुआ। हालांकि इनके माता-पिता किसी परिचय के मोहताज नहीं है। फिर भी आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिता किशोर कुमार हिंदी सिनेमा इतिहास के सबसे वर्सटाइल और पॉपुलर सिंगर्स में से एक थे। तो वहीं इनकी मां रूमा घोष बंगाली सिनेमा की एक जानीमानी एक्ट्रेस और शास्त्रीय गायिका थी। अमित की आरंभिक शिक्षा मुंबई के बसंत मॉन्टेसरी स्कूल से हुई। इसके बाद इनकी कुछ पढ़ाई हजारीबाग के स्कूल में भी हुई। लेकिन अमित जब केवल 5 6 साल के ही थे तभी साल 1958 में इनके माता-पिता का तलाक हो गया।
तलाक के बाद अमित अपनी मां रूमा घोष के साथ कोलकाता चले गए। जबकि किशोर कुमार मुंबई में ही रहे। हालांकि किशोर दा कभी-कभी अपने बेटे से मिलने कोलकाता जाया करते थे। कोलकाता में अमित का दाखिला पहले साउथ पॉइंट स्कूल में और फिर पथ भवन में कराया गया। जहां इन्होंने अपने आगे की शिक्षा पूरी की। इधर अलगांव के बाद जहां पिता किशोर कुमार ने साल 1960 में एक्ट्रेस मधुबाला से दूसरी शादी कर ली तो वहीं इनकी मां रूमा घोष ने साल 1961 में अरूप गुहा ठाकुरता से दूसरी शादी कर ली। साल 1964 में किशोर कुमार अपने बेटे को एक फिल्म में बाल कलाकार के रूप में एक्टिंग करने के लिए मुंबई ले गए। तब अमित लगभग 11-12 साल के रहे होंगे। यह फिल्म थी दूर गगन की छांव में और इसमें बाप बेटे पर फिल्माया गया एक गीत बेहद पॉपुलर हुआ। चल के तुझे मैं लेके चलूं एक ऐसे इसके बाद अपने पिता की एक और फिल्म दूर का राही में भी अमित कुमार ने एक्टिंग की। दीदी ने आपको बुरा भला कहा है।
उनकी बात का बुरा मत मानिए। वो बहुत अच्छी है। किशोर कुमार के कठोर अनुशासन के कारण इस फिल्म में तेज बुखार से पीड़ित होते हुए भी अमित कुमार ने इसके कई सीन फिल्माए और एक गीत भी गाया। मैं एक पंछी मतवाला रे। मैं एक पंछी मतवाला रे मतवाला और निराला रे। हालांकि अमित कुमार फिर कोलकाता लौट आए और अपनी आगे की पढ़ाई में बिजी हो गए। लेकिन पढ़ाई में इनका अब अधिक मन नहीं लगता था क्योंकि इन्हें अब मुंबई की फिल्मी दुनिया की हवा लग चुकी थी। वैसे तो अमित की मां रूमा गुहा भी बहुत अच्छा गाती थी और क्लासिकल सिंगिंग में निपुण थी। लेकिन यह अमित को पढ़ाई पर फोकस करने और गायकी से दूर रहने की ही सलाह दिया करती थी। लेकिन साल 1969 में फिल्म आराधना में अपने पिता किशोर कुमार के सुपरहिट गीतों को सुनने के बाद अमित कुमार को बॉलीवुड के गीत और ज्यादा पसंद आने लगे। गोरा कागज था। ये मन मेरा और यह अपने दोस्तों के साथ-साथ छिपकर फिल्मी गीतों की महफिल भी सजाने लगे। अमित की आवाज भी मधुर थी और जब यह गुनगुनाते तो इनके सुर बहुत पक्के लगते थे। साल 1970 में एक बार फेमस एक्टर उत्तम कुमार ने दुर्गा पूजा के अवसर पर भवानीपुर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें उन्होंने आयोजकों को अमित कुमार का नाम सुझाया और कहा कि यह किशोर कुमार का लड़का है। अच्छा गाता है इससे गवाओ। अमित को गाने के लिए कहा गया और यह अपने दोस्तों को लेकर वहां पहुंच गए। उस दिन के कार्यक्रम में 17 18 साल के अमित कुमार ने ऐसा समा बांधा कि लोगों ने अपनी फरमाइशों की झड़ी लगा दी और अमित ने भी एक के बाद एक किशोर कुमार के दर्जनों गीत सुना डाले और किसी को निराश नहीं किया। इसके बाद तो दुर्गा पूजा के अलावा भी कई कार्यक्रमों में अमित कुमार गाने लगे और मेहनताने के तौर पर 500 या ₹1000 भी मिलने लगे। अमित हर जगह किशोर कुमार के ही गीत गाते और अपने दोस्तों के साथ मस्त घुमा करते। हालांकि इस बात की भनक इनके मां-बाप में से किसी को नहीं थी।
लेकिन एक दिन अचानक यह बात इनकी मां तक पहुंच गई और वह बेहद क्रोधित हो गई। उन्होंने किशोर कुमार को फोन करके इसकी शिकायत की और कहा कि तुम्हारा बेटा गायकी में कूद पड़ा है। गली मोहल्ले के कार्यक्रमों में तुम्हारे गाने गाता फिर रहा है और पढ़ाई लिखाई में इसका कोई ध्यान ही नहीं है। इस बारे में बात करते हुए एक इंटरव्यू में अमित जी ने बताया कि किशोर कुमार को यह शिकायत भी इतनी मीठी लगी कि वह खुश होकर बोले कि गुड गुड वेरी गुड और फिर अपने बेटे का गाना सुनने के उद्देश्य से कोलकाता पहुंच गए। इत्तेफाक से उसी दौरान रविंद्र सदन में अमित कुमार का एक लाइव शो होने वाला था जिसे देखने किशोर कुमार भी जा पहुंचे। किशोर कुमार ऊपर लाइट रूम में जाकर बैठ गए जिससे कि लोगों की नजर उन पर ना पड़े और कोई अफरातफरी ना बचे। उस दिन उन्होंने अपने बेटे को गाते हुए सुना और इतने खुश हुए कि उन्हें अपने साथ मुंबई ले जाने का फैसला भी कर लिया। हालांकि रूमा गुहा चाहती थी कि अमित पहले क्लासिकल सिंगिंग और टैगोर संगीत सीखें जिससे यह संगीत की बारीकियों को समझ सके। खैर, अमित मुंबई गए और पिता के सानिध्य में संगीत को समझने लगे। तब तक किशोर कुमार की दूसरी पत्नी मधुबाला का गंभीर बीमारी के कारण साल 1969 में निधन हो चुका था और किशोर दा अकेले ही रहते थे। हालांकि वहां बड़े भाई अशोक कुमार और बहनोई शशिधर मुखर्जी का परिवार हमेशा आता जाता रहता था और उनका कुबा काफी बड़ा था जिसमें अमित भी गुलमिल गए। वहां किशोर कुमार ने साल 1971 में सन्मुखानंद हॉल में एक बड़े शो में अपने बेटे को लॉन्च किया और साथ में प्रस्तुति भी दी। इस शो को कई भागों में रखा गया जो कि साल 1973 तक चला। यहां पे उन्होंने सन्मुखानंद हॉल सायन में स्पेशल प्रोग्राम रखा। डैडी किशोर एंड सनी अमित टुगेदर ऑन स्टेज फादर एंड सन वेरी इंट्रोड्यूस मी मुझे उन्होंने लोगों के सामने लाया। इसकी खबर तब फिल्म इंडस्ट्री को भी लगी और वहां आए कई संगीतकारों ने इनका गाना भी सुना।
इसी दौरान राज कपूर फिल्म बॉबी बना रहे थे। जिन्हें अपने बेटे के लिए एक नई और फ्रेश आवाज की जरूरत थी। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने इसके लिए अमित कुमार का नाम सुझाया और इन्हें ऑडिशन के लिए बुलावा भेजा गया। लेकिन अमित इतने बड़े-बड़े लोगों के जरिए फोन आने से घबरा गए और बिना पिता को बताए ही कोलकाता भाग गए। फिर उस फिल्म में अमित कुमार की जगह शैलेंद्र सिंह को मौका मिल गया और इनके हाथ से एक बहुत बड़ा अवसर निकल गया। हालांकि इसके बाद पिता की डांट खाकर यह वापस मुंबई आए और फिर साल 1973 में इन्हें रामसे ब्रदर्स की फिल्म दरवाजा के लिए गाने का मौका मिला। सपन जगमोहन जी के संगीत से सजे इस गीत के बोल थे होश में हम [संगीत] कहां। हालांकि यह फिल्म देर से बनी और साल 1978 में रिलीज हुई। इस दौरान 1973 के बाद अमित कुमार को, मदन मोहन, सलील चौधरी और जय कुमार पाटी ने भी कुछ गीत गवाए, लेकिन यह फिल्में रिलीज ही नहीं हो सकी। साल 1974 में एक फिल्म आई बढ़ती का नाम दाढ़ी जिसमें किशोर कुमार ने पहली बार अमित कुमार को अपने साथ एक गाना गवाया। अपने बस की बात नहीं भई, प्यार प्यार का चक्कर। इस चक्कर में आगे चलकर इस बाप बेटे की जोड़ी ने लगभग 27 फिल्मों में एक साथ डट गीत भी गाए। जीवन के दिन छोटे सही हम भी बड़े इनमें साल 1978 में आई फिल्म देश परदेश का एक गाना काफी फेमस हुआ। अरे नजर लगे ना साथियों पर हो। लेकिन साल 1974 में वापस लौटे तो इसी साल संगीतकार आर डी बर्मन ने शक्ति सामंता की फिल्म बालिका वधू में अमित कुमार को एक गाना गाने का मौका दिया और यही गाना इनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
बड़े अच्छे लगते हैं। हालांकि रिकॉर्डिंग के 2 साल बाद यानी साल 1976 में यह फिल्म रिलीज हुई और जब यह गाना लोगों ने सुना तो मंत्रमुग्ध हो गए और पहली बार अमित को नेशनल लेवल पर रिकॉग्निशन भी मिला। हम तुम कितने पास हैं, कितने दूर इस गाने को लोगों का भरपूर स्नेह मिला और अमित कुमार को एक गायक के तौर पर पहचान भी मिली। साथ ही यह गीत साल 1977 में प्रसिद्ध रेडियो शो बिनाका गीतमाला कार्यक्रम के टॉप गीतों में भी शुमार हो गया। और तुम बड़े-अच्छे बताया जाता है कि आर डी बर्मन ने अमित कुमार पर सबसे ज्यादा विश्वास जताया और उनके लिए अमित ने 170 हिंदी गाने रिकॉर्ड किए। साल 1978 में किशोर कुमार ने एक फिल्म बनाई शाबाश डैडी जिसमें अमित कुमार ने एक्टिंग भी की और पिता पुत्र की भूमिका में दोनों नजर भी आए। गुड मॉर्निंग मिस्टर रोमियो। रोमियो, अगर मैं रोमियो हूं तो तुम मेरी जूलियट हो। पहचाना मैं कौन बोल रहा हूं? बड़ी बात यह थी कि फिल्म में योगिता बाली भी थी जिनसे उसी दौरान साल 1976 में किशोर कुमार ने तीसरी शादी भी कर ली थी। साहब तुझे बहुत तकलीफ थी ना। इसमें तकलीफ की कौन सी बात है? आराम से बैठो आराम से बैठो। हालांकि इस फिल्म के रिलीज से पहले ही किशोर कुमार और योगिता अलग भी हो गए और उससे कुछ समय बाद यानी साल 1980 में किशोर दा ने लीला चंद्रावरकर से चौथी शादी कर ली और अमित कुमार की यह सौतेली मां इनसे बस 2 साल ही बड़ी थी जिसकी खूब चर्चा भी रही। किशोर कुमार ने अपने बेटे अमित और चौथी पत्नी लीला चंद्रावरकर को लेकर के भी एक फिल्म बनाई ममता की छांव में। हालांकि किशोर कुमार के निधन की वजह से यह फिल्म अधूरी रह गई जिसे बाद में अमित कुमार ने पूरा किया। चिट्ठी में तार अचानक अचानक चला आया। बात ही कुछ ऐसी है मां। क्या बात है? क्या बात है? तू इस तरह चुप क्यों है? तू उदास क्यों है? खैर, साल 1981 में जब राजेंद्र कुमार ने अपने बेटे कुमार गौरव को लॉन्च किया, तो लव स्टोरी नाम की इस फिल्म में भी आर डी बर्मन ने ही संगीत दे रहे थे और उन्होंने एक बार फिर से अमित कुमार से ही इस फिल्म के गाने गवाने का फैसला किया। देखो मैंने देखा है ये एक सपना फूलों के शहर में। आनंद बक्शी के लिखे इस फिल्म के कुछ गाने इस कदर लोकप्रिय हुए कि अमित कुमार छा गए। ये लड़की जरा सी दीवानी लगती है। मुझे तो ये गुड़िया जब उस दौर में इस सुपरहिट फिल्म के ब्लॉकबस्टर गानों की जबरदस्त धूम रही और इन्हें लता जी के साथ याद आ रही है। गाने के लिए फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला। याद आ रही है। तेरी याद आ रही है।
इसके बाद तो राजेश खन्ना ने अपनी कई फिल्मों के लिए अमित कुमार से ही गाने गवाए। जिनमें 1981 की फिल्म 50-50 और 1985 की फिल्म जय शिव शंकर और आखिर क्यों शामिल रही? दुश्मन ना करे दोस्त ने वो काम किया है। इसके अलावा साल 1990 की फिल्म में घर का चिराग और स्वर्ग और 1996 की फिल्म सौतेला भाई में भी अमित कुमार ने राजेश खन्ना के लिए कई गाने गाए। अपने ही गिराते हैं नशे मन पे बिजलियां। नशे मन पे बिजली। 1980 में ही अमित कुमार को फिल्म कुर्बानी के कुछ गानों को गाने का मौका मिला। जिसमें इन्होंने पूरी एनर्जी लगा दी। लैला ओ लैला लैला ऐसी तू लैला साल 1981 में आशा भोसले के साथ अमित ने फिल्म श्रद्धांजलि का एक गाना गाया जो कि सुपरहिट रहा। यूं तो हसीन हजारों नजर से। इसके अलावा भी साल 1981-82 के दौरान इनके कई गाने चार्ट बस्टर साबित हुए। गलीगली ढूंढा तुझे कोनेकोने देखा रे। साल 1984 में अमित के कई हिट गाने आए जिसमें फिल्म जवानी का यह गाना खूब पॉपुलर हुआ। हल्ला गुल्ला मजा है जवानी जवानी चढ़ा नशा है जवानी जवानी। साल 1986 में फिल्म अनोखा रिश्ता का गाना मेरी तू हो जा मेरी और जीवा फिल्म का गाना रोज-रोज़ आंखों तले भी सुपरहिट रहे। रोज रोज आंखों तले। हम पांच बुलंदी इतनी सी बात और हमारी बहू अलका के भी गाए इनके कई गाने खूब पॉपुलर हुए का जानू मैं सजनिया चमकेगी कब चंदनिया इसके अलावा अमित ने अनोखा बंधन उस्तादी उस्ताद से भीगी पलकें मालामाल खतरों के खिलाड़ी जैसी कई फिल्मों में दर्जनों गाने गाए फिल्म चोरी मेरा काम आपबीती परवरिश ढोंगी खट्टामीठा और कसमे वादे जैसी सुपरहिट फिल्मों में भी अमित ने तमाम सितारों को अपनी आवाज दी। मांग लूंगा मैं तुझे तकदीर से। इल्जाम रामा ओ रामा जायदाद चालबाज आग से खेलेंगे और त्रिदेव जैसी कई फिल्में रही जिसमें अमित कुमार की दमदार आवाज सुनने को मिली। ये भीगा हो तेरा इस दिल में आग लगा देगा। ये भीगा हो। अमित कुमार ने अपने दौर के लगभग सभी बड़े गायकों के साथ डिट सॉन्ग्स गाए। जिनमें लता जी के साथ का जानू मैं सजनिया और राम करे अल्लाह करे बेहद कर्णप्रिय गाने रहे। का जानू मैं सजनिया चमकेगी कब चंदनियाम करे अल्लाह करे तेरी मेरी दोस्ती। तो वहीं मोहम्मद रफी के साथ हम तो आपके दीवाने हैं। खूब पसंद किया गया। आपके दीवाने हैं। बड़े मस्ताने हैं। आ आशा भोसले के साथ पहले प्यार की और यह तुझे क्या हुआ जैसे गाने भी खूब फेमस हुए। तेरी आदत है अक्सर मैं भूल जाता हूं। पहले प्यार की क्या है ये दीवानगी उससे मिलकर हो गई। इसके अलावा तेरे नैना मेरे नैना और छोटा सा परिवार हमारा भी पसंद किए गए। ना मेरे नैनों से मीठीमीठी बातें कर छोटा सा परिवार हमारा तो वही अनुराधा पडवाल के साथ इनका गाया गाना कह दो कि तुम हो मेरी वरना सुपरहिट साबित हुआ कह दो कि तुम हो मेरी वरना जीना नहीं इसे साल 1988 की फिल्म तेजाब में अनिल कपूर के ऊपर फिल्माया गया था और इससे अमित कुमार इंडस्ट्री में एक बार फिर से छा गए 90 90 के दशक में इनके जो गाने हिट हुए उनमें से कुछ की बात करें तो बागी फिल्म का गाना कैसा लगता है? कैसा लगता है? अच्छा लगता है। फिल्म आज का अर्जुन का गाना चली आना तू पान की दुकान पर। चली आना तू पान की दुकान पे।
फिल्म घायल का गाना प्यार तुम मुझसे। प्यार तुम मुझसे करती हो जो उनसे नो फिल्म चालबाज का गाना ना जाने कहां से आई है ये भीगा हुआ बदन तेरा इस दिल में आग लगा देगा ये भीगा फिल्म पुलिस पब्लिक का गाना मैं जिस दिन भुला दूं मैं जिस दिन भुला दूं तेरा प्यार दिल फिल्म बड़े मियां छोटे मियां का मखना सॉन्ग मेरे प्यार का रस जरा चखना ओए मखना ओए मखना ऐसे फिल्म सैलाब का गाना पलकों के तले और मुझको यह जिंदगी लगती है पलकों के तले जो सपने पले तुझको ये जिंदगी लगती फिल्म 100 डेज का गाना ले ले दिल दिल दिल दे दे दिल दिल दिल मौका है बड़ा हसीन अमित कुमार ने अपने दौर के लगभग सभी एक्टर्स के लिए गाने गाए और 30 से 35 हीरो की आवाज बने इनमें चाहे धर्मेंद्र जितेंद्र रहे हो या अमिताभ बच्चन या फिर मिथुन चक्रवर्ती मैं ना झूठ बोलूं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] वही गोविंदा पर फिल्माए गए अमित के कुछ सनसनीखेज गानों ने तो कमाल ही कर दिया फिल्मों के सारे हीरो मेरे आगे है जी फिल्म हम में जब गोविंदा के लिए इन्होंने यह गाना गाया तो इसकी मददगोशी में सुनने वाले डूब गए ये हुस् ये अदा ये फूल सा वही सुनील शेट्टी जैसे उभरते हुए सितारों को भी इन्होंने अपनी दमदार आवाज में कुछ हिट गाने दिए और दूसरे यंग हीरोज़ के लिए भी गाया काजल काजल तेरी आंखों का ये काजल पागल साथ ही अक्षय कुमार रजनीकांत और चिरंजीवी सबके लिए इन्होंने कई धमाकेदार गाने गाए। जीना अगर जरूरी है तो पीना बहुत जरूरी है। अमित कुमार तीनों खान की भी आवाज बने और उनके लिए भी कई हिट गाने गाए। बारिश शुरू हो गई। आमिर के ऊपर फिल्माया गया इनका गाना। दीवाना मुस्सा नहीं और कुछ और गानों को भी दर्शकों का खूब प्यार मिला। दीवाना होता नहीं हो दीवाना ओ आधी रात को जुल्फों की छांव में आधी रात को जुल्फों की फिल्म कभी यहां कभी नाम में शाहरुख खान के लिए भी अमित कुमार की परफेक्ट आवाज नजर आई तो कुछ और गाने भी हिट रहे दीवाना दिल दीवाना दोस्तों ऐसा नहीं था कि यह सिर्फ अपने पिता के दोस्त आर डी बर्मन के ही चहेते सिंगर थे। इन्होंने कल्याण जी आनंद जी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, राजेश रोशन, बप्पी लाहरी, शिव हरी, राम लक्ष्मण, जतिन ललित, इलैया राजा और अनु मलिक समेत उस दौर के लगभग सभी बड़े संगीतकारों के साथ काम किया और ढेरों हिट सॉन्ग्स दिए। हालांकि साल 1987 में किशोर कुमार और साल 1994 में आर डी बर्मन के निधन से इन्हें काफी धक्का लगा जिसका असर इनके करियर पर भी देखने को मिला। दरअसल 90 के दशक के अंत में अमित कुमार ने कई फिल्मों में गाने के प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया कि उन गानों का लेवल इनके हिसाब का नहीं था। अमित का कहना था कि तब इंडस्ट्री में संगीत की गुणवत्ता खराब होने लगी थी और 1996 के बाद इन्होंने खुद को फिल्म इंडस्ट्री से धीरे-धीरे दूर करना शुरू कर दिया। इसके बाद अमित कुमार ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लाइव स्टेज शो परफॉर्म करना शुरू कर दिया और उसी में रमते चले गए। तो वहीं 80 के दशक के अंत और फिर 90 के दशक में ढेर सारे गायक फिल्म इंडस्ट्री में आने लगे और देखते ही देखते जहां युदास, मोहम्मद अजीज, शब्बीर कुमार, सुरेश वाडकर और अनवर जैसे गायकों ने ढेर सारी फिल्मों में अपना कब्जा जमा लिया तो
वहीं बाद में कुमार सानू, उदित नारायण, अभिजीत और सोनू निगम जैसे गायकों ने कमान संभाल ली। ऐसे में अमित कुमार पिछड़ते चले गए और पिता की विरासत को ठीक तरह से आगे नहीं बढ़ा पाए। जबकि इनकी आवाज में पूरा दम था और इनकी काबिलियत पर भी शक नहीं किया जा सकता था। लेकिन यहां कुछ पॉलिटिकल रीजंस भी थे। जानकारों की मानें तो इनकी आवाज में वह जादू था जिससे यह अपने दौर में सबको टक्कर देते थे। साथ ही किशोर कुमार के बेटे होने की वजह से इंडस्ट्री में इनकी काफी जान पहचान भी थी। अब इसे भाई भतीजावाद कहें या अमित की किस्मत लेकिन किशोर कुमार के बेटे होने का इन्हें भरपूर फायदा भी मिला तो कुछ हद तक नुकसान भी हुआ। नुकसान ऐसे कि इनकी आवाज क्योंकि इनके पिता किशोर कुमार से काफी हद तक मिलती जुलती थी तो इनके गायक ज्यादातर गानों को किशोर कुमार का ही गाना समझा जाता था। यहां तक कि ज्यादातर श्रोताओं को आज भी नहीं पता कि बड़े अच्छे लगते हैं और रोज-रोज आंखों तले जैसे दर्जनों हिट गाने किशोर कुमार ने नहीं बल्कि अमित कुमार ने गाए हैं। इस वजह से अमित ने भले ही 80-90 के दशक में सैकड़ों हिट गाने दिए हो लेकिन इनकी उस आवाज को अपनी अलग पहचान नहीं मिल सकी। हालांकि इन्होंने दर्जनों ऐसे गाने भी दिए जिनमें इनकी गायकी पर किशोर कुमार का असर नहीं देखने को मिला। लेकिन उस दौर में ढेर सारे गायकों के इंडस्ट्री में होने की वजह से उन गानों को भी एक अलग शख्सियत नहीं मिल सकी। अमित कहते हैं कि गायकी में मैं अपने पिता के नाखून बराबर भी नहीं हूं लेकिन लोग हमेशा ही तुलना करते रहे क्योंकि मैं उनका बेटा था तो मुझ में किशोर कुमार की झलक भी देखना लाजमी था। वो मुझे हमेशा कहते थे कि देखो बेटा तुम भी गाओगे लेकिन जहां तक हो सके मुझे कॉपी करने की कोशिश मत करना क्योंकि तुम्हें सरपास करना है मुझे। सब बोलेंगे अरे किशोर कुमार जैसे गाता है। किशोर कुमार जैसे गाता है। किशोर कुमार नहीं तो ये हाथ ताली मुझे मिलेगी। तुम्हें नहीं। कहा यह भी जाता है कि अमित कुमार कभी भी खुद से आगे बढ़कर म्यूजिक डायरेक्टर से कांटेक्ट करके काम नहीं मांगते थे। यह अपने सेटिस्फेक्शन के लिए गाते थे क्योंकि गाना इनके खून में था। गायकी इनका शौक था और इनका पैशन था। लेकिन इन्होंने कभी खुद को फिल्मों में गाने के लिए मजबूर नहीं किया और ना ही प्रोडक्शन हाउसेस के चक्कर काटे। यह मस्त मौला अंदाज में रहते थे और अपनी शर्तों पर काम करते थे। जबकि यह वो दौर था जहां ज्यादातर गायक काम पाने के लिए म्यूजिक डायरेक्टर्स के स्टूडियो के बाहर घंटों बैठे रहते थे और कुछ लोग काम पाने के लिए इतना स्ट्रगल कर रहे थे कि उन्हें गुटबाजी और जरूरत पड़ने पर पॉलिटिक्स से भी कोई ऐतराज नहीं था। ऐसे में किसी मस्त मौला फक्कड़ इंसान के लिए इंडस्ट्री में टिके रहना मुश्किल रहा क्योंकि यहां हद से ज्यादा ममारी और टफ कंपटीशन होती है जो उस दौर में भी होने लगी थी। हालांकि एक अंतराल के बाद अमित कुमार ने एक बार फिर करियर में वापसी करने की कोशिश की और राजू चाचा और कभी खुशी कभी गम जैसी फिल्मों को अपनी आवाज दी। सोनी कितनी सोनी आज तू लगदी वे बस मेरे साथ ये जोड़ी तेरी साथ ही पेज थ्री
दूल्हा मिल गया और हिम्मत वाला जैसी फिल्मों में भी इनके गाने सुनने को मिले और फिल्म खंडहर और अपना सपना मनी मनी के लिए भी अमित कुमार ने कुछ गाने गाए देखा जो तुझे यार दिल में बची गिटार छलका आंखों से प्यार दिल में बजी गिटार इन्होंने आगे चलकर कई बंगाली फिल्मों के लिए संगीत भी तैयार किया जिसे खूब पसंद किया गया इनमें एक फिल्म रही अमानत जिसमें इन्होंने संगीत गीत दिया और लता मंगेशकर और आशा भोसले ने उसमें गाने भी गाए। इस तरह इन महान गायिकाओं को अपनी फिल्म में गवाने का इनका सपना भी पूरा हो गया जो किसी भी संगीतकार के लिए बड़ी बात होती है। साथ ही आगे चलकर अमित ने एक लेखक, निर्माता और निर्देशक के तौर पर भी काम किया। इन्होंने एक बंगाली फिल्म गायक में भी काम किया जिसमें इन्होंने एक स्ट्रगलिंग सिंगर की भूमिका निभाई। वहीं बंगाली फिल्मों में एक गायक के तौर पर भी इनकी खूब ढाक रही। इनके कुछ एल्बम्स की बात करें तो उनमें से खास रहे मैड। प्यार तो बस प्यार है। दम दमादम ओ स्वीट हार्ट सागरिका जानम फॉरएवर ब्लू और बाबा मेरे दम दमा दम दम तुम रहो ना तुम हम रह रहे ना हम अमित कुमार ने टीवी के लिए भी काम किया और 80 के दशक में दूरदर्शन के सीरियल चुनौती और कैंपस के लिए टाइटल ट्रैक को भी आवाज दी। साथ ही इन्होंने d्नी एनिमेटेड सीरीज के हिंदी डब वर्जन डक टेल्स के टाइटल ट्रैक को भी अपनी आवाज दी। जिंदगी तूफानी है जहां है डक पर गाड़ियां ले अमित कुमार साल 2007 और आठ के दौरान son टेलीविजन पर प्रसारित सिंगिंग रियलिटी शो के फॉर किशोर में जज के रूप में भी नजर आए तो पिताजी ने पूछा एक दफा जाके बैक स्टेज में क्यों तुम क्यों आते हो अभी दादा मुनि मेरा शो देखने तुम तो मुझे इतना क्रिटिसाइज करते थे दादा मुनि बोलते थे ये जी बांग्ला के रियलिटी शो सारे गामा का भी हिस्सा रहेगा गाना शुरू करने से पहले वो आ इसके अलावा सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल 12 में अमित कुमार को बुलाया गया। लेकिन उस शो को लेकर काफी विवाद भी हुआ। दरअसल इस एपिसोड के बाद अमित कुमार ने खुलासा किया। मुझे मेकर्स की ओर से यह कहा गया था कि आपको सभी कॉन्टेस्टेंट्स की तारीफ करनी पड़ेगी। जबकि मैं कुछ कंटेस्टेंट्स की आलोचना भी करना चाहता था कि वह किस तरह से गा रहे हैं।
अमित की इस बात के बाद शो के होस्ट आदित्य नारायण ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर उनको इतनी ही दिक्कत थी तो शो के दौरान ही बोलते। हालांकि इसके अगले साल यानी 2022 में इन्हें इंडियन आइडल 13 में भी किशोर कुमार स्पेशल एपिसोड में जज के तौर पर फिर से बुलाया गया। जिसमें इन्होंने कुछ बेहतरीन नगमे भी सुनाए। याद करेगी दुनिया तेरा मेरा इसे देखकर यह अंदाजा लगाया गया कि समझौता हो गया होगा। अमित कुमार ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक बार इन्होंने अपने पिता से यह जिद शुरू कर दी कि अब यह शास्त्रीय गाने सीखेंगे। किशोर कुमार पहले तो हंसे फिर इनकी जिद देखकर इन्हें मन्न डे साहब के पास भेज दिया। इन्होंने मन्ना डे से कुछ बारीकियां सीखी और फिर उन्होंने अमित को गुलाम मुस्तफा खान के पास जाने को कहा। अमित कुमार ने गुलाम साहब से लगभग 6 महीने तक शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग ली। लेकिन जब इन्हें ज्यादा समझ में नहीं आया तो फिर यह माफी मांगकर वहां से बाहर निकले। हालांकि आगे चलकर अमित कुमार गायकी को लेकर थोड़े सीरियस हुए और फिर बनारस घराने के सत्यनारायण मिश्रा जी से 6 साल तक गायन सीखा और संगीत की बारीकियों को भी समझा। अमित कुमार कहते हैं कि अब के बॉलीवुड गानों में वह बात नहीं है जो पहले के गीतों में सुनने को मिलता था। अब मेलोडी, लिरिक्स और हार्मोनी गायब हो चुके हैं। मेरे जमाने में जो गाने बनते थे वो आज तो बिल्कुल नहीं बन रहे हैं। इसमें मुझे कोई मतलब सही बात कह रहा हूं। कहूंगा मैं आई विल स्पीक द ट्रुथ। इट्स नॉट हैपनिंग एनी मोमो। अपने पिता की यादों को साझा करते हुए अमित बताते हैं कि 12 अक्टूबर 1987 को जब किशोर कुमार का अचानक निधन हो गया तब अमित एक लाइव शो के सिलसिले में कनाडा के टोरंटो में थे।
उस दिन इनके चचेरे भाई देव मुखर्जी ने इन्हें फोन किया और पूछा कि तुम कब तक आ रहे हो? अमित ने कहा कि बस आज ही। फिर तुरंत डायरेक्टर शक्ति सामंता का फोन आया और उन्होंने बताया कि किशोर कुमार अब नहीं रहे। उस खबर ने अमित को तोड़ कर रख दिया। किशोर कुमार के निधन के बाद इन्होंने अपने भाई सुमित कुमार के साथ मिलकर दुई किशोर नाम का एक एल्बम रिलीज़ कर अपने पिता को श्रद्धांजलि दी। जो गिर ताराए से मुख वहीं अमित कुमार के पर्सनल लाइफ की बात करें तो इनकी शादी थोड़ी देर से हुई। साल 2003 में इन्होंने रीमा गांगुली से शादी की जिनसे साल 2004 में इनकी एक बेटी भी हुई जिसका नाम मुक्तिका रखा गया और फिर दूसरी बेटी वृंदा का भी जन्म हुआ। अमित की मां रूमा गुहा को उनकी दूसरी शादी से दो बच्चे हुए थे। यानी अमित कुमार के सौतेले भाई बहन जिनके नाम अयान और श्रमना रखे गए। इन दोनों से भी अमित के अच्छे रिश्ते रहे। तो वहीं किशोर कुमार की चौथी पत्नी लीना चंद्रावरकर से भी इनके एक भाई का जन्म हुआ जिनका नाम सुमित रखा गया। आगे चलकर अमित ने अपने इसी हाफ ब्रदर सुमित कुमार के साथ मिलकर केबीएम यानी कुमार ब्रदर्स म्यूजिक नाम से एक म्यूजिक कंपनी भी ल्च की और इसके तहत कई गाने बनाए और गाए भी। अमित कुमार और सुमित कुमार दोनों में अच्छी बनती है और दोनों हमेशा साथ देखे जाते हैं।
किशोर कुमार के निधन के बाद अमित ने अपने सौतेले भाई सुमित को हमेशा सहारा दिया और उनके लिए हर परिस्थिति में खड़े भी रहे। हाल में दोनों भाई लंबे समय तक रेडियो पर एक शो में भी साथ काम करते रहे जिसे काफी पसंद किया गया। अपनी सौतेली मां लीना चंद्रावरकर से भी अमित के हमेशा अच्छे रिश्ते रहे और लीना जी ने इनके एल्बम के लिए भी कई गाने लिखे। फेमस द कपिल शर्मा शो में किशोर कुमार को समर्पित एपिसोड में ये पूरा परिवार एक साथ पहुंचा जहां इनकी केमिस्ट्री देखकर सभी भावुक हो गए। मैं उससे हीरो लेना चाहता था लेकिन थैंक यू लेकिन उसने ऐसा बदतमीजी की। उसने ऐसा किया पूरा सुना दिया। अमित अब अपने परिवार के साथ मुंबई के गौरी कुंज जूहू तारा रोड वाले अपने पिता के बंगले में ही रहते हैं और अपने काम में बिजी रहते हैं। यह भले ही अब फिल्मों के लिए गाने नहीं गा रहे हो, लेकिन इनका अपना YouTube चैनल है जहां यह अपने नए-नए कॉम्पोजिशन बनाकर लोगों को एंटरटेन करते हैं। साथ ही अमित देश विदेश में ढेरों लाइव शोज़ में भी नजर आते हैं और अपनी लाइफ को एंजॉय करते हैं। ये जीवन है इस जीवन का। तो दोस्तों, आपको आज का हमारा अमित कुमार स्पेशल वीडियो कैसा लगा हमें कमेंट्स में बताएं। साथ ही आपको अमित कुमार जी का कौन सा गाना पसंद है वह भी शेयर करें। बॉलीवुड की किसी बेबाक स्टोरी के साथ अगले वीडियो में आपसे फिर होगी मुलाकात। तब तक के लिए नमस्कार। जय