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अमेरिकी नाकाबंदी का ईरान ने निकाला नया तोड़, अब ऐसे निकलेंगे जहाज।

Hindi Post

अमेरिका का एक और दांव बुरी तरह से फ्लॉप हुआ है और ईरान ने यूं कहें कि उसे चित्त कर दिया है। अभी तक कई दांव अमेरिका चल चुका है। प्रेसिडेंट ट्रंप हर हफ्ते कोई नया कोई नया मुद्दा लेकर हाजिर हो जाते हैं। कोई नया दांव चलते हैं। यह सोचकर कि यह काम कर जाएगा। कभी वो कहते हैं कि ईरान की जमीन पर उतरेंगे। कभी वो कहते हैं कि ईरान की पूरी सभ्यता को मिटा देंगे और अब हुरमुस को ब्लॉकेट कर दिया। लेकिन हुरमुज में ईरान ने क्या किया वो दिव्यांशु आपको बताएंगे। जरा ध्यान से सुनिएगा।

बिल्कुल एक बारी मैं वो ग्राफिक चाहूंगा कि उसको दिखा दें। इस वक्त जो है वो ईरान के जो जहाज है जो शिपमेंट है उनकी तरफ से जो जा रही थी वो ट्रैकिंग लोकेशन ऑन करने के बावजूद वो किस तरीके से अमेरिका को चिप कर रहे हैं चारों खाने और बकायदा वो बता के इस तरीके से पहले जो उनकी डेफिनेशन दी गई है या पहले जो लोकेशन बताई गई है कि वो कहां जाने वाले हैं और वो वहीं से रास्ते को चेंज कर ले रहे हैं। मैप को चेंज करिए एक बार मैप पर आइएगा। होरमुज में जिस तरीके से अगर आप देखेंगे तो जैसे जिस तरीके से पहले से ये पर्टिकुलर ये डिसाइड लोकेशन रहती है। जी अब इसी लोकेशन को वो चेंज करके ईरान के बेहद करीब से निकल रहे हैं।

तो ये काम बेसिकली अगर एक लफज़ में कहें तो सिर्फ और सिर्फ एक तरीके से कहा जाता है चूना लगाना। वही काम इस वक्त चल रहा है कि पहले से बताया जा रहा है कि लोकेशन ये डिसाइडेड है लेकिन लोकेशन को चेंज करके वो दूसरे तरीके से निकल रहा है। तो दो काम कर रहा है ईरान। एक तो जहाजों की लोकेशन चेंज कर दे रहा है। अमेरिका को पता नहीं चल पा रहा और दूसरी है कि चीन के जहाज ही गुजार रहा है। अपना माल भी उन्हीं जहाजों पर निकाल दे रहा है। ये उसकी खासियत है। और अमेरिका चीन से इस रूप में डरता है कि अगर चीन को छेड़ा तो चीन साउथ चाइना सी में एक तरह से मचा देगा।

या यूं कहें यहां पर केशम द्वीप आपको दिखाई दे रहा होगा। एक बार और चेंज करिएगा। केशव ये भी ईरान का ही कंट्रोल वाला एक आइलैंड है। ये ये है द्वीप और यहां से बेसिकली यहां से उन जहाजों को निकाला जा रहा है और ठीक यहीं पर अमेरिकन डिस्ट्रयर हैं। और यही वजह है कि जैसे अगर ये लोकेशन पहले से उन्होंने यहां से डिसाइड कर रखी है तो वो उसको चेंज कर दे रहे हैं बकायदा और पीछे जाइए फिर से। तो ये जहाज जो बताया जा रहा है वो चीन के जहाज बताए जा रहे हैं और चीन के जहाजों पर अटैक करने से फिलहाल अमेरिका कहां जा रहा है वो बच रहा है वो डायरेक्ट इस वॉर में नहीं उलझना चाहता कि चाइना जैसा कंट्री उसके खिलाफ हो और बार-बार वो चीन को भी अलर्ट कर रहा है कि आपको नहीं करना चाहिएलेकिन चीन की तरफ से जवाबी पलटवार दिया जा रहा है कि आप ना तो तनाव को बढ़ाइए और ना ही इस तरीके का काम करिए क्योंकि आप नहीं है कि आप वहां पर देखिए वहां पर अपने डिस्ट्रॉय देखिए ये लोकेशन पर्टिकुलर करीब करीब यही बताई जा रही है गल्फ ऑफ ओमान में यहां पर ये खड़े हैं। लेकिन वो बेहद करीब से निकाल कर वापस चीन जहाज चले जा रहे हैं।

साउथ चाइना सी से दुनिया भर का 33% माल निकलता है वहां से और वो बहुत अहम रूट है और वहां पर चीन का दबदबा है। अमेरिका उसको लेकर के कई बार इन दोनों के बीच में झड़प जैसी स्थितियां भी बन चुकी हैं। कई बार इनके जंगी भेड़े पहुंच गए थे। उससे थोड़ी दूर आके खड़े हो गए थे। बहरहाल अब तो जंगी भेड़ों का कोई मतलब ही नहीं रह जाता। अमेरिका ने जो इस जंग में कर दिया है उसके बाद तो अमेरिकन जंगी बेड़ों के आने से या वो कार्ल कार्ल विल्सन चल पड़ा है या यूएसएस अब्राहम लिंकन चल पड़ा पड़ा है ये कहना अब ऐसा लगता है दूर की बात हो गई पुरानी बात हो गई अब ना कोई इससे डरने वाला है ना सहमने वाला है ना किसी को फर्क पड़ने वाला है कुछ इस तरह की स्थिति ईरान ने बना दिया है खासतौर से इस जंग में तो ऐसी स्थिति में चीन को ना छेड़ के अमेरिका एक बड़ी लड़ाई से बचना चाह रहा है और उसकी वजह भी है कि प्रेसिडेंट ट्रंप शायद अगले महीने चीन का दौरा कर सकते हैं और उससे पहले वो चाइना को नहीं छेड़ना चाहते हैं क्योंकि कोई बिजनेस डीलें होंगी बड़ी और प्रेसिडेंट ट्रंप बिनेस के मामले में बहुत दूर की सोच रखने वालों में से हैं।बिजनेस के ही व्यक्ति हैं वो कारोबार से से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। तो इसीलिए भी ये माना जा रहा है

कि ईरान इसी का फायदा उठाकर अपना काम कर रहा है। और हुरमुस की सारी नाकेबंदी सारी कुंडी जो है ईरान ने पहले दिन से तोड़ना शुरू कर दिया। 10,000 के करीब सैनिक यहां पर तैनात है अमेरिका के। एक बुलेट पॉइंट दिखाइएगा वो। दूसरी तरफ इन्होंने ताकावर अपनी जो हमने कल जिस चीज पर बात की थी ईरान की तरफ से उनकी आरजेसी की एक नेवल फर्सेस है जिसका नाम ताकावर है। उनको उन्होंने उधर से तैनात कर रखा है। यानी एक तरफ अमेरिकन डिस्ट्रयर्स हैं। 10,000 सैनिकों के साथ मरीन कॉप्स के साथ और दूसरी साइड आप देखिए ताकावर है। तो 20 जहाज अभी खबर ये है कि यूएस नाकाबंदी तोड़ कर गुजर जा चुके हैं। मतलब 20 आप समझिए।दूसरी तरफ 10,000 अमेरिकी सैनिक उनको रोकने में नाकामयाब बताए गए क्योंकि चीन लाइबेरिया के जहाज खुलेआम निकल रहे हैं। जिनकी लोकेशन को भी ऑन किया गया है। बकायदा यूएस वाले उसको देख भी रहे होंगे अमेरिका वाले कि जहाज निकल रहा है लेकिन वो चीन के झंडे के तले निकल रहे हैं सब। ईरान ने केशव द्वीप से रूट को जो है वो चेंज कर दिया। हमने बताया मैप में चीन के जहाजों पर यूएस हमला नहीं कर रहा है। लोकेशन बदलकर ईरान जो है वो खेल पूरी तरीके से पलट रहा है। ए एलआईसीआईए जहाज ने जो प्रस्थान देश है जो लोकेशन है जहां जाना है उसे वो बीच में ही चेंज कर लेता है। ईरान के सामने बार-बार जो है अमेरिका जैसा हम पहले से बता रहे हैं कि वो फेल हो जा रहा है।

एक तरीके से उसकी नाकेबंदी अगर देखें वो करीब 48 घंटे का वक्त बीत चुका होगा और अब तक कुछ भी उसे हासिल नहीं हुआ।कुछ भी हासिल नहीं हुआ। मतलब सीधे तौर पर देखें तो ये दांव भी फेल ही हुआ है और इस दांव के फेल होने से ये अच्छा हुआ है कि खासतौर से अरब देशों को राहत मिलेगी क्योंकि अरब देश भी अपने स्तर पर अंदरखाने अमेरिका पर प्रेशर बना रहे होंगे कि एक तो जंग की ऊपर से हमको पिटवाया तीसरा होमोंस बंद करा के हमारा तेल का रास्ता बंद करा दिया अब जैसे तैसे हम निकाल रहे थे बात करके डील करके तो वहां पर भी आपने अपना ब्लॉकेट लगा दिया तो हम करें क्या हमको तो बर्बाद कर दोगे आप इसलिए जो है हो सकता है बहुत सारे दूसरे भी दबाव होंगे। सिर्फ यही वजह नहीं है और भी दबाव होंगे जिसके चलते अमेरिका का ये पूरा दांव ये पूरी कोशिश एक तरह से फ्लॉप हो गई है। और हम देख तो प्रेसिडेंट ट्रंप का इस हफ्ते का भी जो चैलेंज था वो बेकार रहा। अब अगला जो है उनके लिए बस ये हो जाता है कि बातचीत की टेबल पर शांति से बैठे और संजीदगी के साथ बात करें। कुछ शर्तें अपनी मनवाएं। कुछ शर्तें उनकी माने और आगे बढ़े और इसराइल के प्रभाव में ना आए। जैसा कि एक्सपर्ट कहते हैं। हम नहीं कहते एक्सपर्ट कहते हैं। जी और यही वजह है देखिए ये जो सब कारनामे वो कर रहे हैं।बेसिकली उनकी सोच यही है कि अगर इस तरीके की चीजें ऐसी हरकतें करते हैं तो ईरान थोड़ा हो सकता है डर जाए। ईरान टेबल पर आए तो सोचे कि नहीं उन्होंने जंगी बेड़ा डिस्ट्रयर लगा दिया है तो युद्ध भड़क सकता है दोबारा से और अमेरिका के साथ उलझना अच्छी बात नहीं है। ये सब इनको लग रहा है। लेकिन दूसरी तरफ ईरान को पता है कि ये इसके अलावा कुछ नहीं कर सकते क्योंकि दोबारा से युद्ध में आना इनके लिए ही खराब हो जाएगी स्थिति। 40 दिन तक जंग लड़ के देख चुके हैं।

कुछ नहीं हासिल हुआ। फिर से 40 दिन लड़ लेंगे और ये 40 दिन दोबारा टिक पाएंगे कि नहीं? ये ईरान की तरफ से सोच है। तो ये वही चीज़ कर रहे हैं एक प्रेशर पॉलिटिक्स कि अगर हम इस तरीके से चीज़ करते तो हो सकता है कि टेबल पर आने के बाद ईरान जो है वो हमारी शर्तों पर खराब हो जाए। लेकिन लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ रहा है ईरान को। वो सारे प्रेशर झेल रहा है। पहले से झेल रहा है। उनकी आदत है झेलने की और इस जंग में तो वो मस्जिद हो के जज्बा हुसैनी के साथ झेल रहे हैं कि किसी भी तरह से जो है हम आपके दबाव में नहीं आएंगे। झुकेंगे नहीं, सर कटा देंगे। जब ये वाला भाव आ जाए तो फिर आप कितना भी प्रेशर बनाइए, कितने भी तरीके अपनाइए किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता नहीं है। तो ये स्थिति है तो ईरान ने ये एक तरह से हुरमुस की जंग भी अपनी तरह से जीत ली है।इसको आप किस तरह से देखते हैं? क्या आप इस तरह से देखते हैं? ये हमें जरूर बताइएगा। और जिस तरह से 20 जहाज पार हो गए हैं। क्या हुरमुस से अमेरिकन ब्लॉकेट के बावजूद भी जहाजों के जाने का सिलसिला इसी तरह से अब चलता रहेगा। एक तरह से अमेरिका अपनी बात रखने के लिए औपचारिकता निभा रहा है। जो उनकी एक जिद होती है कि भाई हमने हॉर्मोस ब्लॉक किया तो बस वो ऐसा करके वहां बैठा रहेगा और चीजें अपने मामूल के मुताबिक सामान्य रूप से चलती रहेंगी। आपको क्या लगता है कमेंट बॉक्स में बताइए दिव्यांशु कुछ कहना चाह रहे हैं? बिल्कुल एक चीज ये है देखिए जब तक आप युद्ध में नहीं थे तब तक आप धमकियां देते थे। आप दबाव वाली पॉलिटिक्स खेलते थे। प्रेशर बनाने की चीजें करते थे।

तब तक थोड़ा बहुत ईरान को लगता रहा होगा कि भाई हो सकता है अमेरिका जैसा कहा जाता है कि बहुत ताकतवर है। बड़ी सारी चीजें हैं उसके पास। लेकिन जब आप युद्ध में चले गए आपने 40 दिन तक समय भी बिता लिया उसके बाद ईरान भाग चुका है आपके पास कितनी शक्तियां है।आप क्या कर सकते हो ज्यादा से ज्यादा और आप वही कर रहे हो ज्यादा से ज्यादा जो इस वक्त कर रहे हैं। अमेरिका की स्थिति वही थी कि बंद मुट्ठी लाख की थी। अब खुल गई है तो खाक की हो गई है। पूरी दुनिया ने देख लिया कि महाशक्तियों का जलवा जो है रूस को उधर देख ही रहे हैं लोग जो यूक्रेन है चार साल हो गए वो लड़ाई जारी है और अमेरिका का एक दबदबा था अमेरिका का एक डर लगता था लोगों को वो ईरान ने खत्म कर दिया तो एक तरह से पूरा वर्ल्ड ऑर्डर खासतौर से महाशक्तियों के मामले में अब चेंज होगा आगे आने वाले दिनों में और उसका असर दुनिया में दिखेगा ऐसा लगता है।

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