प्राण से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा फिल्म उपकार (1967) से जुड़ा है। 1950 और 1960 के दशक में प्राण की पहचान हिंदी सिनेमा के सबसे खलनायकों में होती थी। उनकी विलेन वाली छवि इतनी मजबूत थी कि कई माता-पिता अपने बच्चों का नाम “प्राण” तक रखने से बचते थे।
ऐसे समय में निर्देशक और अभिनेता मनोज कुमार ने उन्हें उपकार में “मलंग चाचा” का सकारात्मक किरदार ऑफर किया।शुरुआत में प्राण को डर था कि दर्शक उन्हें एक नेक इंसान के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन मनोज कुमार के आग्रह पर उन्होंने भूमिका स्वीकार कर ली। फिल्म रिलीज़ हुई तो “मलंग चाचा” का किरदार दर्शकों के दिलों में बस गया।
खासकर गीत “कसमें वादे प्यार वफ़ा” पर उनका अभिनय बेहद सराहा गया। कहा जाता है कि इस फिल्म के बाद पहली बार लोगों ने प्राण को खलनायक नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कलाकार के रूप में देखना शुरू किया। उपकार ने उनकी छवि बदल दी और साबित कर दिया कि प्राण सिर्फ महान विलेन ही नहीं, बल्कि एक शानदार चरित्र अभिनेता भी थे।