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एक हार और हमेशा के लिए ‘बाय-बाय’! आखिर क्यों आज तक फिल्मफेयर के मंच पर नहीं लौटे आमिर?

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यूं तो आमिर खान फिल्मों में अपने एक्सपेरिमेंटल रोल्स के लिए काफी फेमस है। मगर एक ऐसा भी वक्त था जब आमिर के गुस्से का कहर अवार्ड नाइट्स पर बरस गया। आखिर क्यों आमिर खान को एक बार नहीं बल्कि कई बार अवार्ड नाइट्स में बेइज्जती महसूस हुई। आमिर के हक का हकदार कौन बना? रंगीला के साथ क्यों हुई नाइंसाफी? देखिए हमारी इस स्पेशल रिपोर्ट में। आमिर खान की पॉपुलर फिल्म रंगीला ने 31 इयर्स इंडस्ट्री में कंप्लीट कर लिए हैं।

8th ऑफ सितंबर 1995 को रंगीला रिलीज हुई थी और उसी साल शाहरुख खान की डीडीएलजे भी सिनेमाघरों में दस्तक दी थी। अब आमिर खान और शाहरुख खान दोनों ही बेस्ट एक्टर अवार्ड के लिए नॉमिनेटेड थे। लेकिन क्या हुआ वो आप इस वीडियो में देखिए। आमिर को यह बात बहुत बुरी लग गई कि आखिरकार फिल्मफेयर के बेस्ट एक्टर का अवार्ड शाहरुख खान के नाम कर दिया गया।

आमिर इससे पहले कयामत से कयामत तक और जो जीता वही सिकंदर फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर अवार्ड ना मिल पाने से खफा थे। इसीलिए जब रंगीला के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर अवार्ड नहीं मिला तो उनके सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने ऐलान कर दिया कि अब से वह किसी भी अवार्ड फंक्शन खासतौर पे फिल्मफेयर में नहीं जाएंगे। रंगीला के डायरेक्टर थे रामगोपाल वर्मा और संगीतकार थे ए आर रहमान। रंगीला का संगीत भी काफी पसंद किया गया था। रंगीला उन कुछ शुरुआती हिंदी फिल्मों में से एक है जिन्हों जिन्होंने हिंदी भाषी संगीत के शौकीनों के बीच ए आर रहमान को लोकप्रिय बना दिया था।

रंगीला ए आर रहमान की डेब्यू हिंदी फिल्म थी। इससे पहले ए आर रहमान के जो भी हिंदी गीत हमने सुने थे वो सब उन सबका स्कोर तमिल से डब किया गया था और रिलीज़ कर दिया गया था। लेकिन रंगीला का स्कोर ओरिजिनल था। इस फिल्म के संगीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर वाले ने बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का खिताब तक दे दिया। रामगोपाल वर्मा को बेस्ट स्टोरी और अहमद खान को बेस्ट सिनेमेटोग्राफर मनीष मल्होत्रा को बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइनर और आशा भोसले जी को तन्हा तन्हा गीत के लिए स्पेशल फिल्मफेयर अवार्ड दे दिया गया था। रंगीला नेपाल में भी बहुत ज्यादा सफल फिल्मों में से एक रही। नेपाली लोगों में इस फिल्म का जबरदस्त क्रेज दिखाई दिया था। रंगीला का बजट था ₹4.5 करोड़ और कमाई रही थी ₹ करोड़ 222 लाख। इस फिल्म में ए आर रहमान ने आशा भोसले जी से गीत गवाए थे। एक इंटरव्यू में रहमान ने बताया था कि वह तब से आशा जी के बहुत बड़े फैन हैं जब से उन्होंने देव साहब की फिल्म हरे राम हरे कृष्णा का गीत और दम मारो दम सुना था। जब रंगीला के म्यूजिक की बात आई तो रहमान और राम गोपाल वर्मा दोनों ने तय किया कि गीत आशा जी से ही गवाया जाएगा। रंगीला के लिए आशा भोसले जी ने पहला गीत रिकॉर्ड किया था और वह था

तन्हा तन्हा और आशा जी ने मात्र 2 घंटे में परफेक्टली इस गाने को रिकॉर्ड कर दिया था। इस गाने की रिकॉर्डिंग से जुड़ा एक रोचक किस्सा यह भी है जब रहमान खुद बताते हैं। मेरी आदत थी अपने स्टूडियो में साउंड बूथ में धूपबत्ती और अगरबत्ती जलाने की। उस दिन जब मैं धूपबत्ती जलाई तो आशा जी फौरन साउंड बूथ से बाहर चली गई। जैसे घबराकर वह बाहर आ गई हो। मैंने आशा जी से तुरंत पूछा तो उन्होंने बताया कि धूपबत्ती के धुएं से उनकी आवाज पर फर्क पड़ता है। उसी वक्त रहमान ने वैक्यूम के जरिए साउंड बूथ से सारा धुआं बाहर निकलवाया और तब जाकर आशा जी ने रिकॉर्डिंग की। ए आर रहमान के मुताबिक आशा जी ने रंगीला फिल्म का जो दूसरा गीत रिकॉर्ड किया था

वो था याई रे याई रे। वेल, आज यह गाने बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं और आज भी लोग इतने सालों बाद भी इन गानों को जरूर सुनते हैं। वेल, आज अवार्ड से ज्यादा एक्टर्स रिवॉर्ड में बिलीव रखते हैं। अवार्ड नाइट्स पर बायस्ड होने का दावा कई बार होता आया है और ऐसे इल्जाम भी लगते आए हैं। मगर 90ज में अवार्ड की एक वैल्यू हुआ करती थी जो स्टार्स के ब्रांड वैल्यू को और भी ज्यादा शानदार बना देती थी। और शायद यही एक बहुत बड़ी वजह है जब आमिर खान को उनके हक का अवार्ड नहीं मिला तो वो शायद खफा हो गए और हमेशा हमेशा के लिए अवार्ड नाइट्स को गुड बाय कह दिया।

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