छोटा सा तोहफा है यह आनंद अंबानी जी की तरफ से। आप प्लीज आपकी पट्टी हटा दो। कैसे हो भैया? क्या नाम है आपका? सुजीत सिंह। सुजीत सर। कैसे हो? बढ़िया। बढ़िया सर। आप डिलीवरी करते हो? जी। साइकिल पे क्यों? साइकिल है सर तो साइकिल से ही करेंगे। अब कहां जाएंगे गाड़ी?
तो आपको बाइक तो ले लेना चाहिए ना सर। अब सर इतने कम में कहां हो पाएगा ये महंगाई? बाइक लेना आप तो जानते ही हैं। प्रॉब्लम तो ये दशहरा क्या आपने ये बाइक पे लगा दिए? जी। अब यही हमारी बस साधन है तो इसी से हमें कमाना है तो हम इसकी सेवा करेंगे तब तो ये हमारी सेवा देगी। अब एक काम करो आप डिलीवरी मारो। जी। डिलीवरी आप दे दो तुम्हारा। और मेरे साथ चलो। छोटा सा तोहफा है ये आनंद अंबानी जी की तरफ से। आप प्लीज आपकी पट्टी हटा दो। और खोलो हैप्पी रो मत सर रो मत रो मत ठीक है आप साइकिल चलाते थे। यह आपके नसीब में था। साइकिल सर जब दशहरे में आपने वो साइकिल पे लगाए थे। जी सर। अब ये बाइक पे लगा लो। जी सर
। मैंने कभी ऐसा सोचा नहीं था। क्या नहीं सोचे थे? ऐसी गाड़ी मैं कभी ले। मेरा लकाब बन के आए। मैं आप भगवान करे कि आनंद आनंदानी जी के लिए जितनी पोस्ट पे हैं वो हम गरीबों की दुआ से उससे डबल पे भी जाए। मेरी दिल और जान सब हाजिर है सर। भगवान उन्हें खूब तरक्की दे। कम से कम हम लोग गरीब के बारे में सोच रहे हैं। जितना है वो उससे डबल एक बार थोड़ा सा बैठिए ना सर। मैं बैठो जी मैं बैठो जी ये फोटो हमारे दिल में रहेगी सर। इसीलिए हमने आपको पहले गाड़ी पर बैठाकर फोटो खींचा है।