इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। एक ऐसी एक्ट्रेस जिन्होंने अपनी जिंदगी एक्टिंग को समर्पित कर दी। जिन्होंने कभी मां बनकर दर्शकों का दिल जीता तो कभी सास के किरदार में अपनी दमदार अदाकारी से लोगों को हैरान किया। अब वो आज हमारे बीच नहीं है। उनके जाने से सिर्फ उनके चाहने वालों को ही नहीं बल्कि पूरी फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री शो कर रही है और शायद उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो पाएगी।
एक ऐसी एक्ट्रेस जिनकी एक्टिंग में एक अलग ही सादगी थी। जिनकी आवाज, जिनका अंदाज और जिनके निभाए हुए किरदार आज भी दर्शकों के ज़हन में जिंदा है। पर्दे पर भले ही वह कई बार सख्त और गुस्सैल नजर आए, लेकिन असल जिंदगी में उनका दिल बेहद नरम था। उनके अपने उन्हें सिर्फ एक कलाकार नहीं बल्कि परिवार का हिस्सा मानते थे और उन्हें याद कर फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों की आंखें नम हैं। खासतौर पर एक ऐसे एक्टर का दर्द सामने आया है जो उन्हें अपनी दूसरी मां मानते थे। उन्होंने जिस तरह अपनी इस मां को याद किया है उसे पढ़कर किसी का भी दिल भरा सकता है।
दरअसल हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड और मराठी सिनेमा की दिग्गज अदाकारा दया डोंगरे की। दया डोंगरे का निधन आज ही के दिन 3 नवंबर 2025 को 85 साल की उम्र में हुआ था। वह काफी समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थी और आज उनकी पहली डेथ एनिवर्सरी पर एक बार फिर से पूरी इंडस्ट्री उन्हें याद कर रही है। उनके निधन की खबर ने उस समय मराठी सिनेमा से लेकर हिंदी फिल्म और टेलीविजन जगत तक को गमगीन कर दिया था।
उनके जाने से सबसे ज्यादा भावुक अभिनेता नीतीश भारद्वाज हुए थे। जिन्हें आज भी महाभारत में भगवान श्री कृष्ण के किरदार के लिए याद किया जाता है। नितीश ने दया डोंगरे के निधन पर सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट को शेयर किया था।
इस पोस्ट में उन्होंने दया डोंगरे को अपनी दूसरी मां बताया था और उनके साथ बिताए गए पलों को याद किया था। नितीश ने लिखा था कि मेरी पहली फीचर फिल्म में मेरी मां दया मौसी का निधन हो गया। मैं अपनी दूसरी मां के निधन पर शोक मना रहा हूं जो हमेशा मेरा हालचाल जानने के लिए मुझसे संपर्क करती थी। नितीश ने आगे बताया कि पर्दे पर दया डोंगरे भले ही बेतुकी और अन्याय नजर आती थी लेकिन असल जिंदगी में वह बेहद अच्छी इंसान थी।वह अपने माहिम स्थित घर की रसोई में खड़े होकर उनके लिए बहुत ही अच्छा खाना बनाया करती थी। नितीश को बस उन्हें यह बताना होता था कि उनका क्या खाने का मन है और दया मौसी उनके लिए वो डिश तैयार कर देती थी। उन्होंने यह भी लिखा कि उनकी मां के निधन के बाद दया ही वो इकलौती इंसान थी जिन्हें उन्हें डांटने का हक था। सोचिए किसी कलाकार के लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है कि पर्दे पर निभाया गया रिश्ता असल जिंदगी में भी इतना गहरा हो जाए कि सामने वाला आपको अपनी मां का दर्जा दे दे। लेकिन नितीश भारद्वाज का यह पोस्ट यहीं खत्म नहीं हुआ। उन्होंने आगे लिखा कि वह मौत के पीछे के दर्शन को समझते हैं, लेकिन एक मां का जाना हमेशा एक ऐसा खालीपन छोड़ जाता है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।
अब उनका दिल एक बार फिर से डूब गया है। उन्होंने डोंगरे और डांडेकर परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं जाहिर की थी और दया मौसी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की थी। नितीश ने अपने नोट के आखिर में बेहद ही प्यार से लव यू मौसी भी लिखा था। आपको बता दें कि नितीश भारद्वाज और दया डोंगरे ने मराठी फिल्म में साथ काम किया था जो साल 1987 में रिलीज भी हुई थी। इसी फिल्म के दौरान दोनों के बीच एक खास रिश्ता बन गया। नितीश उन्हें सिर्फ अपनी एक कोक स्टार नहीं मानते थे बल्कि परिवार का मेंबर समझते थे। अब बात करते हैं दया डोंगरे की जिंदगी और उनके उस शानदार सफर की जिसने उन्हें मराठी और हिंदी सिनेमा की यादगार एक्ट्रेस में शामिल किया। दया डोंगरे का असली नाम दया मोडक था। उनका जन्म 11 मार्च 1940 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। उनका परिवार पहले से ही आर्ट और इंडस्ट्री की दुनिया से जुड़ा हुआ था। उनकी मां यमुना ताई मोदक एक अभिनेत्री थी। जबकि उनकी मौसी शांताबाई मोडक एक मशहूर सिंगर थी। यही वजह थी कि बचपन से ही दया का इंटरेस्ट म्यूजिक और एक्टिंग की तरफ होने लगा था। उन्होंने छोटी उम्र में ही गाने में दिलचस्पी लेना शुरू किया।
यहां तक कि उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के कंपटीशन में भी हिस्सा लिया था। जहां से उनकी प्रतिभा को शुरुआती पहचान मिली। वहीं दया के सपने सिर्फ सिंगर बनने तक सीमित नहीं थे। उन्हें एक्टिंग की दुनिया भी अपनी तरफ खींच रही थी। स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने थिएटर की दुनिया में कदम रखा और महज 16 साल की उम्र में उन्होंने मोजी रंग नेकर के नाटक रंभा से स्टेज एक्टिंग की शुरुआत की थी। इतनी कम उम्र में मंच पर उतरना और अपनी अदाकारी से लोगों का ध्यान खींचना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। इसके बाद उन्होंने पुणे में आगे की पढ़ाई की और अभिनय को गंभीरता से सीखने के लिए दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा यानी कि एनएसडी में दाखिला लिया। हालांकि शादी के बाद उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई लेकिन उन्होंने एक्टिंग का साथ कभी नहीं छोड़ा। दया डोंगरे ने अपने करियर की शुरुआत ही मराठी थिएटर से की थी।
रंगमंच पर उन्होंने अपने एक्टिंग की ऐसी छाप छोड़ी थी कि धीरे-धीरे उन्हें फिल्म्स और टेलीविजन में काम मिलने लगा। उनकी पहली मराठी फिल्म उमरठा थी जो साल 1982 में रिलीज हुई। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया। मराठी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने के बाद दया डोंगरे ने हिंदी फिल्मों का भी रुख किया। साल 1992 में वह आमिर खान और जूही चावला की फिल्म दौलत की जंग में नजर आई थी। इस फिल्म में उनके काम को दर्शकों ने खूब पसंद भी किया था। इसके अलावा टेलीविज़ की दुनिया में भी उनका योगदान काफी अहम रहा। दूरदर्शन के मशहूर सीरियल गजरा ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई थी। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह जिस भी किरदार को निभाती थी उसमें पूरी तरह ढल जाया करती थी। उनकी पर्सनल लाइफ की बात करें तो उनके पति का नाम शरद डोंगरे था।
शादी के बाद भी उन्होंने अपने एक्टिंग के सफर को जारी रखा था और दया डोंगरे उन स्टार्स में से एक थी जिन्होंने सिर्फ ग्लैमर के दम पर नहीं बल्कि अपनी एक्टिंग और मेहनत के दम पर दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। आज भले ही दया डोंगरे हमारे बीच मौजूद ना हो, लेकिन उनके निभाए गए किरदार, उनके साथ काम करने वाले कलाकारों की यादें और उनके चाहने वालों का प्यार हमेशा उनके साथ रहेगा और दया डोंगरे के लिए नितीश भारद्वाज के वह शब्द इस बात का सबूत है कि उन्होंने पर्दे पर ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी लोगों के दिलों में मां जैसी जगह बनाई थी। आज पहली पुण्यतिथि पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री इस दिग्गज अदाकारा को याद कर रही है और दया डोंगरे भले ही इस दुनिया से विदा हो गई हो लेकिन उनकी आर्ट और उनकी यादें कभी खत्म नहीं होंगी। मैं