अखिलेश के आजम जेल से जेल पहुंच गए। यह तस्वीर कल सामने आई जब आजम खान रामपुर की जेल से बाहर आए। आजम खान को लगा जमानत मिल गई। अब चुनाव से पहले जेल से रिहाई हो गई।
आजम खान जेल से निकले और उसके बाद अपनी गाड़ी तक पहुंचे। चेहरे पर मुस्कान थी तब तक उन्हें नहीं पता था अगले पल क्या होने वाला है उनके साथ। वो आजम खान इशारा कर रहे थे अपने लोगों से कि ऊपर वाला उनके साथ है। लेकिन तभी देखिए ईडी पहुंच गई। दूसरी तस्वीर अब्दुल्ला आजम की। अब्दुल्ला आजम की भी रिहाई हुई और अब्दुल्ला आजम जेल से निकले उस वक्त की तस्वीर। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] और उसके बाद देखिए आजम खान ईडी से घिर गए थे। ईडी आजम खान को गिरफ्तार करने के लिए पहुंच चुकी थी। और आजम खान को ईडी ने रामपुर जेल के बाहर से ही गिरफ्तार कर लिया। आजम खान को इल्म भी नहीं था कि उनके साथ ऐसा हो जाएगा। उसके बाद आजम को आज कोर्ट में पेश किया गया। सुबह ईडी की टीम कोर्ट लेकर पहुंची और आजम खान की पेशी हुई। कहेंगे चलते रहो चलते रहते। बोलना चाहेंगे कुछ कहेंगे सर?
कुछ बोलना चाहेंगे। क्या है बोलने का? कुछ बोलना चाहिए। आजम खान से पत्रकारों ने सवाल पूछा कुछ बोलेंगे? तो आजम खान ने कहा क्या है बोलने के लिए और फिर देखिए आजम खान को जेल भेज दिया गया आजम खान की कोर्ट में पेशी हुई फिर जिला कारागार गाजियाबाद की डासना जेल में आजम खान को भेजा गया ये आजम खान गाड़ी से उतरे उन्होंने समर्थकों को हाथ हिलाया और उसके बाद रामपुर जेल से आजम खान कैसे टासना जेल पहुंच गए हैं पूरी कहानी मैं आपको बताता हूं हुआ क्या जेल से फिर जेल तक कैसे पहुंच गए आजम मम खान देखिए कल शाम करीब 7:00 बजे आजम खान रामपुर जेल से निकले गेट से निकल कर बाहरी आए और समर्थकों के बीच पहुंचे तभी सिर्फ 15 मिनट के अंदर उन्हें हिरासत में ले लिया गया यानी आजम खान जेल से निकल कर फिर सलाखों में क्योंकि अब मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने उन्हें पकड़ लिया। रामपुर जेल परिसर के बाहर से ईडी उन्हें अपने साथ ले गई। वहां से ईडी उन्हें कार से सीधे दिल्ली हेड ऑफिस लेकर पहुंची। सपा नेता आजम खान को ईडी ने रात भर ऑफिस में रखा और इस दौरान जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी पैसों के इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर 50 से ज्यादा सवाल किए। उसके बाद सुबह 10:30 बजे आजम खान कटघरे में थे। ईडी कोर्ट लेकर पहुंची और आजम खान कोर्ट परिसर पहुंचे तो काफी शांत दिख रहे थे। सिर्फ लोगों की तरफ देखते रहे और जब कार का शीशा खोला तो मीडिया ने आजम से पूछा आज कुछ बोलेंगे तो इस पर आजम ने जवाब दिया अब रह क्या गया है
बोलने को इसके बाद गाजियाबाद की विशेष एमपी एमएलए विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया जहां उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया इसके बाद आजम को कोर्ट से सीधे डासना जेल ले जाया गया इस दौरान ईडी के साथ सीआरपीएफ और पुलिस के 100 जवान भी थे दरअसल आजम के बेटे के साथ 11 महीने से रामपुर जेल में आजम बंद थे। दो पैन कार्ड मामले में बाप बेटे को 10 साल की सजा हुई थी। हालांकि 29 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने सजा सस्पेंड कर जमानत दी थी और इसके बाद दोनों की रिहाई हुई तो बेटे अब्दुल्ला तो घर चले गए लेकिन आजम खान को ईडी उठा ले गई और फिर कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया न्यायिक हिरासत में। सुनिए क्या कुछ कह रहे हैं सियासतदान और दूसरे नेता। आजम खान पर ईडी की कारवाई हो तो मुसलमान मुश्किल में है। अगर नसरुद्दीन शाह दिमागी बन जाए कि हम नक्सल है दिमागी नक्सल तो ये मुसलमान हो जाए संकट में। यह संकट उन लोगों पर है जो लोग गलत कर रहे हैं। यह बदले की भावना की पराकाष्ठा है। शोषण अन्याय अत्याचार की पराकाष्ठा है और यह जो अत्याचार अन्याय कर रहे हैं एक दिन इनको भी भुगतना पड़ेगा। आजम खान के जो लफ्ज़ थे उनके अंदर जो दर्द था उस दर्द को देश को समझना चाहिए कि देश के मुसलमान का हाल क्या कर दिया।
भैंस चोरी, मुर्गी चोरी, अंडा चोरी किस लेवल के ऊपर गिर करके किस हद तक गिर करके राजनीति हो रही है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव जी के वजह से वो कारवाई हो रही है ना कि मुसलमान होने की वजह से कारवाई हो रही है। क्योंकि समाजवादी पार्टी के शासन में जिस तरह का घपलेबाजी है, जिस तरह की रंगदारी और मनमानी तरीके से काम किया है लोगों ने उसी की सजा मिल रही है। यह बड़ी विडंबना है कि ईडी सिर्फ आजम खान साहब पर कारवाई करती है उत्तर प्रदेश में। क्या वही सिर्फ एक सरकार में मंत्री थे? पीडब्ल्यूडी मिनिस्ट्री आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे गोमती रिवर फ्रंटियर अखिलेश जी के परिवार के किसी सदस्य की कोई जांच नहीं, कोई कारवाई नहीं।
कितने-कितने मंत्रालय उनके परिवार में रहे हैं? कितने जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हैं? किसी की जांच ही नहीं हुई। क्या सब दूत के धुले यही है सिर्फ क्योंकि बोलने वाला मुसलमान पसंद नहीं है ना समाजवादी पार्टी को, अखिलेश यादव को और ना बीजेपी को। अब देखिए सियासतदान सवाल पूछ रहे हैं कि आजम खान बार-बार जेल क्यों जा रहे हैं? तो आपको बताऊं आजम खान देखिए कितने दिन जेल रह लिए। आजम खान कुल जेल 1800 दिन से ज्यादा जेल में रहे 2020 से 2026 तक। पहला दौर देखिए। 800 दिन से ज्यादा जेल में थे। 26 फरवरी 2020 से 20 मई 2022 तक दूसरा दौर आया 700 दिन 700 से ज्यादा दिन तक जेल में रहे 18 अक्टूबर 2023 से 23 सितंबर 2025 तक तीसरे दौर में 340 दिन से ज्यादा जेल रहे 17 नवंबर 2025 से 31 अक्टूबर 2026 तक ये तीन दौर थे और यही वजह है कि अब सियासतदान चुनाव से पहले सवाल पूछ रहे हैं सरकार से भी केंद्र सरकार से भी और राज्य सरकार से भी क्या कह रहे हैं?
पहले अखिलेश यादव कह रहे हैं आज के हुक्मरानों को याद रहे जब वक्त बदलता है तो तख्त बदल जाता है। आजम खान के साथ हो रही साजिश को पूरा देश ही नहीं पूरी दुनिया देख रही है। किसी उम्रदराज को बेमानी मुकदमों में फंसाकर बार-बार जेल में डालना बेहद कायराना हरकत है। आज की सत्ता जिस गलत रवायत को हवा दे रही है, हवा बदलने पर वह खुद भी इसका शिकार होगी तब भी इनसे भागते भी नहीं बनेगा। नाइंसाफी जब हद से गुजर जाती है तो जुल्म करने वाले पर कहर बन जाती है। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा आजम खान को मुसलमान होने की वजह से सजा नहीं मिली है बल्कि भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से सजा मिली है। सरकार जाति धर्म देखकर नहीं कानून के तहत कारवाई कर रही है। शिवपाल यादव ने कहा आजम खान कई झूठे मुकदमों में जेल में बंद थे। कोर्ट के आदेश पर जेल से छूटे तो ईडी ने पकड़ लिया। बताओ ऐसी जुल्मी सरकारों के खिलाफ तो बोलना ही पड़ेगा। कोर्ट की बात नहीं मानने वाली जुल्मी सरकारों को हटाना पड़ेगा। मुख्तार अब्बास नकवी कह रहे हैं बीजेपी नेता ऐसे हालात में आजम खान भावनात्मक बयान और भावनात्मक बकवास बहादुरी नहीं करेंगे तो क्या करेंगे? उन्होंने जो कहा है और जो किया है उस पर कोर्ट फैसला करेगा। ए के शर्मा ऊर्जा मंत्री हैं यूपी के। उन्होंने कहा कानून के हाथ लंबे होते हैं। जब व्यक्ति सत्ता के अहंकार में होता है तो उसको कानून के शिकंजे की परवाह नहीं होती है। कानून सब पर लागू होता है। चाहे आजम हो या फिर कोई और हो। सुनिए क्या कह रहे हैं अखिलेश यादव और सीएम योगी। बीजेपी से उम्मीद मत करिए कि न्याय मिलेगा। सर बीजेपी से उम्मीद नहीं कर सकते कि वो न्याय मिलेगा। सर आजम साहब ने कहा मुसलमान होने की यूनिवर्सिटी बनाने की हमें खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। नहीं देखिए ये सच है। यह सच है जो कहा उन्होंने उसके साथ-साथ बीजेपी से आप उम्मीद नहीं कर सकते न्याय की। समाजवादी पार्टी का मतलब बदमाश को बुला देना और भारतीय जनता पार्टी का मतलब बदलाव का सारथी बन जाना। बदलाव ये बदलाव जो आज यहां चोरीचरा में दिख रहा है।
आज समझ रहे होंगे कि मोहम्मद आजम खान कितने झूठे मुकदमों में जेल में बंद हैं। और जब न्यायालय के द्वारा जमानत पर छूट रहे थे। जैसे ही जेल से बाहर निकले बताओ सरकार के इशारे पर ईडी ने गिरफ्तार करना चाहे बताओ ऐसी जुल्मी सरकारों के खिलाफ तो फिर बोलना ही पड़ेगा और ऐसी जुल्मी सरकारों को तो हटाना ही पड़ेगा मुसलमान होने की सजा नहीं मिल रही है। यूनिवर्सिटी बनाने की सजा नहीं मिल रही है। जो अपराध किए हैं, जो भ्रष्टाचार किए हैं, उसकी सजा मिल रही है। मैं तो यह भी मांग करता हूं कि क्योंकि मोहम्मद आजम खान श्री अखिलेश यादव जी की सरकार के कैबिनेट मंत्री थे और उनकी सरकार के रहते हुए अगर इस प्रकार का गड़बड़ हुआ है तो जांच के दायरे में श्री अखिलेश यादव को भी शामिल करना चाहिए। मुसलमान होने की सजा मुझे मिल रही है। ये अल्फाज़ हैं। सोचिए कि भारत देश के अंदर मुसलमानों की क्या हाल हो गई है। अरे ये वही मुसलमान है हम जिन्होंने जंगे आजादी में अपनी जाने गवाई और आज भारत देश आजाद हुआ। कहां थे ये बीजेपी आरएसएस? बताओ मुझे कितने आरएसएस वालों ने जंगे आजादी में हिस्सा लिया और अपनी जाने गवा दी।
यह बड़ा अफसोसनाक वाकया हुआ है। एक इंसान के ऊपर इतना जुल्म हमारी समझ में नहीं आता कि इतना तो शायद टेररिस्ट के ऊपर भी नहीं होता होगा। अभी जेल से निकले ही थे गेट के बाहर आए थे। 10 मिनट अगर घर चले जाते तो कौन सी ऐसी आफत आ जाती। तो सपा नेता एसटी हसन को आप सुन रहे अब देखिए आजम खान के ऊपर दर्जनों मुकदमे हैं और ऐसे ऐसे मुकदमे जिस पर सियासतदान सवाल भी उठाते हैं। देखिए कौन-कौन से केस हैं.
आजम खान पर। आजम और उनके परिवार पर मुकदमों की लंबी चौड़ी लिस्ट है। रिकॉर्ड के मुताबिक आजम पर 100 से ज्यादा केस दर्ज हैं। इनमें अफसर को धमकाने, चोरी, डकैती, भ्रष्टाचार के केस हैं। जिनमें से आठ मामलों में आजम कोर्ट से दोषी साबित हो चुके हैं। हालांकि कई मुकदमों में बरी हो गए या जमानत मिल गई। लेकिन आजम के खिलाफ अभी 81 से ज्यादा मामले लंबित हैं। अब्दुल्ला आजम के खिलाफ भी 44 मामले अभी विचाराधीन है। जिन मुकदमों पर मजाक भी उड़ता है और सवाल भी होता है।
बकरी और भैंस चोरी। रामपुर की नसीमा खातून नाम की महिला ने एफआईआर कराई। आरोप लगाया कि आजम के इशारे पर उनकी बकरी चोरी हो गई। 2016 में कुछ लोगों ने पीड़ित के घर में तोड़फोड़ की और वहां से सोने चांदी के जेवरात के साथ-साथ चार बकरियां, तीन भैंस और एक गाय चुरा ली। एक और इल्जाम किताब चोरी का। रामपुर के एक मदरसे के प्रिंसिपल ने एफआईआर कराई। आरोप लगाया कि मदरसे से 9000 से ज्यादा दुर्लभ और कीमती किताबों और पांडुलिपियों की चोरी की गई।
जिन्हें आजम की जौहर यूनिवर्सिटी में रखवा दिया गया। पुलिस ने रेड की तो 2500 किताबें वहां से बरामद हुई। दूसरा आरोप दो जन प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में दोषी पाए गए। एमपी एमएलए कोर्ट ने आजम पत्नी को सात-सात साल की सजा सुनाई। आजम और बेटे अब्दुल्लाह पर दो पैन कार्ड रखने का भी उन्हें दोषी पाया गया। नवंबर 2025 में कोर्ट ने दोनों को 7-7 साल की सजा सुनाई। हालांकि इसी मामले में दोनों को हाईकोर्ट से जमानत भी मिल गई। जमानत मिली लेकिन जैसे ही जेल से बाहर निकले ईडी ने गिरफ्तार कर लिया।
सुनिए जरा क्या कुछ कह रहे हैं उनके सुपुत्र बेटे अब्दुल्ला आजम कहना नहीं चाहता बातें बहुत कड़वी हो जाएंगी लेकिन हम वाकया जानवर हैं और ऐसे और मैं तो कह रहा हूं अगर हम समाज के लिए इतना ही हम समाज के लिए अगर इतना ही बड़ा खतरा है कि हम सालों की तारीखें पढ़ने के बाद हमें जमानत मिल जाए और उसके बाद फिर एक 80 साल के इंसान को जिसने अपनी पूरी जिंदगी ये लोग ऐसे ही ये लोग अपराधी के लिए खड़े होते