अपनी जान की परवाह किए बगैर इजराइली यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय कैप्टन स्मिथ मछड़ को संयुक्त अरब अमीरात ने अपने देश का सर्वोच्च नागरिक वीरता पुरस्कार दिया है। भारत और इजराइल के पक्के दोस्त संयुक्त अरब अमीरात ने हिंदू पायलट कैप्टन स्मिथ मछार को सम्मान देने के साथ-साथ इजराइल के मुस्लिमों पर बहुत बड़ा ऐलान किया है। यह ऐलान सुनकर भारत और दुनिया भर के मुस्लिम भी चौंक जाएंगे।
लेकिन वीडियो की शुरुआत कैप्टन स्मिथ मछार से करते हैं और आपको यह बताते हैं कि कैप्टन स्मिथ मछार के सर की चर्चा क्यों हो रही है। दरअसल विमान हादसे के बाद पहली बार कैप्टन स्मिथ मछार अस्पताल के बाहर पूरी तरह से स्वस्थ दिखे हैं और मजबूती से अपने पैरों पर खड़े हैं। लेकिन इन मजबूत पैरों के साथ-साथ पूरी दुनिया कैप्टन स्मिथ मछार के सर को भी देख रही है। ओमान के मुस्लिम को-पायलट के हमले के बाद कैप्टन स्मिथ मछार की खोपड़ी में फ्रैक्चर हो गया था। स्मिथ मछार के सर पर गहरी चोट आई थी। उन्हीं चोटों को ठीक करने के लिए कैप्टन स्मिथ मछार के सर पर टांके लगाए गए थे।
सर पर लगे टांकों का यह एक-एक निशान कैप्टन स्मिथ मछार की बहादुरी की कहानी बता रहा है। ऐसी बहादुरी जिसके सामने दुनिया का सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार भी छोटा पड़ सकता है। लेकिन इसके बावजूद संयुक्त अरब अमीरात ने कैप्टन स्मिथ मछार को गले लगाया। अपने देश का सर्वोच्च नागरिक वीरता पुरस्कार दिया। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि सैकड़ों यात्रियों को बचाने और भारत के खिलाफ ग्लोबल इस्लामिक इको सिस्टम के एजेंडे को नाकाम करने के दौरान स्मिथ मछार को यह जख्म मिले थे। वरना तो ओमान के मुस्लिम को-पायलट की पूरी तैयारी थी कि वो स्मिथ मछार को मार दे।
लेकिन भगवान का शुक्र है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ। कैप्टन स्मिथ मछार ने अपने सिर पर चोट लेकर पूरे भारत का सर गर्व से ऊंचा कर दिया। लेकिन आज भी राहुल गांधी और ज्यादातर मुस्लिम स्मिथ मछार की बहादुरी पर कुछ नहीं बोल रहे। लेकिन यह कसर संयुक्त अरब अमीरात के मुस्लिमों ने पूरी कर दी है। अब आप इसे संयोग कहिए या प्रयोग लेकिन संयुक्त अरब अमीरात ने उसी दिन स्मिथ मार को सम्मान दिया जिस दिन इजराइल में वोटों की गिनती चल रही है और नेतन याू बढ़त बना चुके हैं। हैरानी की बात देखिए कि नेतन याहू को हराने के लिए इजराइल के मुस्लिमों ने जमकर वोटिंग की। लेकिन फिर भी वह नेतन याहू को नहीं हरा पाए। अब इसी कड़ी में संयुक्त अरब अमीरात के मुस्लिम इजरायली मुस्लिमों पर बहुत बड़ा बयान दे रहे हैं।
इनमें सबसे बड़ा नाम है अमजद ताहा का। अमजद ताहा ने तंज कसते हुए कहा कि दुनिया भर के मुस्लिमों से कहा जाता है कि इजराइल में भेदभाव होता है। इजराइल मुस्लिमों का विरोधी है। लेकिन इजराइल के चुनावी नतीजों ने इस एजेंडे को चखनाचूर कर दिया है। इजराइल के शहरों और कस्बों में अरब समुदाय के मुस्लिमों का मतदान प्रतिशत 70% से भी ज्यादा रहा। मुस्लिम पार्टियों को 17 सीटें मिलती दिख रही हैं। अब जरा सोचिए कि अगर इजराइल मुस्लिमों के खिलाफ होता तो फिर मुस्लिम सांसद इजराइल की संसद में चुनकर कैसे पहुंच रहे हैं? सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अरब और फिलिस्तीनी मूल के जो मुस्लिम इजराइल की नागरिकता ले चुके हैं, वह इजराइल में वोट डाल सकते हैं। लेकिन फिलिस्तीन के मुस्लिम अपना नेता नहीं चुन सकते क्योंकि वह वोट ही नहीं डाल सकते। फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास जनवरी 2005 में सिर्फ 4 सालों के लिए राष्ट्रपति चुने गए थे। उनका कार्यकाल 2009 में ही समाप्त हो गया था। लेकिन इसके बावजूद वह बिना किसी नए चुनाव के अब तक पद पर बैठे हुए हैं।