हां देखिए 30 दिन के अंदर या तो प्राइवेट अपील होनी होती है जब किसी को मृत्युदंड मिलता है या फिर सरकारी अपील होनी होती है। तो जब हम लोगों ने पूछा कि प्राइवेट अपील होगी या सरकारी अपील तो दोनों ने बताया कि वो प्राइवेट अपील करेंगे और माननीय उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट सुशील शुक्ला जी उस केस को लड़ रहे हैं। दोनों का केस एक ही वकील लड़ रहा है। मुस्कान ने अपने लिए कोई दूसरे वकील की डिमांड नहीं की या उनकी तरफ से अलग वकील करने की बात नहीं कही गई। देखिए जेल को भी ऐसे बंदी जो कि प्राइवेट या सरकारी अपील करते हैं उस अपील का रिकॉर्ड रखना होता है। प्राइवेट वकीलों यह हमें इंश्योर करना पड़ता है कि प्राइवेट अपील पड़ गई है तो हम लोगों ने रिकॉर्ड देखा तो उसमें एक ही वकील दोनों के करेंगे इस अपील को और उन्होंने अपील दाखिल भी कर दी है। उसका नंबर आदि आ गया है। सर क्या लगता है कि ऐसे में अभी तक मुस्कान को साहिल के परिवार वाले अपना नहीं रहे थे। क्या इस घटना से लगता है कि अब उसको अपना लिया है क्योंकि वकील उनके द्वारा किया गया है? मैं इतनी पुष्टि कर सकता हूं कि हमारे जेल रिकॉर्ड के अनुसार इसमें प्राइवेट अपील हो गई है और एक ही वकील केस लड़ रहे हैं। बाकी उनके क्या संबंध है? अपनाया कि नहीं अपनाया? इस पर मेरा टिप्पणी किया जाना उचित नहीं होगा। क्या साहिल के परिवार वाले और जो बच्ची के ऊपर दावा करते हैं, बच्ची को लेने के लिए एप्लीकेशन लगाते हैं। तो क्या प्रोसीज है उसका और उनको कैसे वो बच्ची मिल सकती है? देखिए कोई भी बच्चा मां के साथ कारागार में जो रह रहा होता है छ साल तक रह सकता है। इस बीच यदि मां किसी को देना चाहे तो उसकी प्रक्रिया यह है कि वो अपने एक एप्लीकेशन देगी अपनी जिसमें हम उस कोर्ट से परमिशन लेंगे जिस कोर्ट में उसका केस है। यदि वह परमिशन मिल जाती है तो जिसको कहेगी वह सौंप सकती है। यदि कन्विक्ट हो गई है तो जिलाधारी का रोल आ जाता है। जैसे यदि वो एप्लीकेशन देती है और अब वो केस में कन्विक्ट हो गई, सजा पड़ गई तो जिलाधारी की स्वीकृति लेकर के हम जिस व्यक्ति को मां कहती है वो बच्ची दे सकता है। क्या साहिल के परिवार ने ऐसी कोई इच्छा अभी जताई है कि वो मुस्कान की बेटी को लेना चाहते हैं? नहीं अभी इस तरह का कोई संपर्क कारागार से नहीं किया गया है। कई बार एप्लीकेशनेशंस सीधे कोर्ट के द्वारा या कई बार एप्लीकेशनेशंस उच्च अधिकारियों के द्वारा भी आती हैं। तो इस तरह की कोई एप्लीकेशन नए नहीं आई है। कुछ सोशल इन्फ्लुएंसरर वगैरह आए थे लेने के लिए उनको बच्ची देने के लिए उसने मना कर दिया है। अगर अगर अब साहिल का परिवार चाहे मुस्कान की बच्ची को लेना तो ले सकता है। वो अपनी इच्छा जता सकता है। हां यदि परिवार चाहे इच्छा जता सकता है। लेकिन इसमें क्योंकि बेटी मुस्कान की है तो मुस्कान का रोल ज्यादा है। यदि वह अनुमति देगी लिखित में प्रार्थना पत्र देगी उस प्रार्थना पत्र पर जिलाधारी महोदय की स्वीकृति होगी तभी बेटी किसी को दी जा सकती। मां की अनुमति के बिना बच्चा किसी को नहीं दिया जा सकता। सर सवाल यह है कि अभी साहिल और मुस्कान की शादी कोई रिश्ता क्लियर नहीं हो पाया जहां उन्होंने प्रूफ ऐसा दिखाया कि वो शादीशुदा है। तो ऐसे में बच्ची कैसे दी जाएगी इसके परिवार को? नहीं अभी ऐसी कोई प्रार्थना पत्र हमारे पास नहीं आया है। यदि वह प्रार्थना पत्र देती है तो नियमों के आलोक में उस पर विचार किया जाएगा। सर मुस्कान के परिवार वालों ने कोई अभी तक मिलने की इच्छा या कोई ऐसी एप्लीकेशन आई है जो मुस्कान के परिवार वाले आए मिलने के लिए? नहीं मुस्कान के परिवार से आज तक कोई भी मिलने के लिए नहीं आया। ना कोई प्रार्थना पत्र आया ना कोई ऐसी किसी ने इच्छा व्यक्त की है। कोई भी मिलने आज तक लगभग पौने दो साल में नहीं आया। लगा है सर। क्या स्वयं मुस्कान की तरफ से कोई और ऐसी इच्छा जाहिर की गई है कि मुझे मेरी बेटियों मेरे परिवार को मिलाया जाए? मुस्कान ने बार-बार अपनी बड़ी बेटी शायद एक बाहर है। वो सात साल के आसपास है। उससे मिलने की बार-बार इच्छा व्यक्त की है। सजा सुनने से पहले कई बार उसने इच्छा व्यक्त की थी। परंतु कोई भी मुलाकात के लिए क्योंकि नहीं आया है तो उसको बता दिया गया। यदि कोई कभी भी मुलाकात के लिए आता है जिस दिन मुलाकात होती है तो जेल मैनुअल के अनुसार मुलाकात कराई जाएगी। पत्र लिखा गया। पत्र की उसको अनुमति दी गई है और अभी तक पत्र उसने दिया नहीं है। यदि वह पत्र लिखती है तो उसको हम जरूर भेजेंगे। मेरठ जिम में जिम बना चुना [गला साफ़ करने की आवाज़] अपना स्ट्रेस और डिप्रेशन दूर करने के लिए जिम कर रहा है। हां, यह बात सही है कि पिछले दिनों मेरठ के माननीय राज्यसभा सदस्य श्री लक्ष्मीकांत वाजपेई जी ने यहां पर एक 14 मशीनों का विशाल जिम जो कि सेकंड सर्किल में स्थापित किया गया है वो लगवाया। उसका उद्घाटन भी उन्होंने स्वयं ही किया था। बड़ा अच्छा ओपन जिम है। बंदी उसका पूरा लाभ ले रहे हैं और लगभग 110 बंदी उसमें जिम करते हैं। साहिल भी उसमें अपना स्ट्रेस और अपना डिप्रेशन आदि दूर करने के लिए नियमित रूप से जिम कर रहा है। सर करवा चौथ आने वाला है। क्या जो कातिल पत्नियां है यहां पर बंद है उन्होंने कुछ अपील की है कि वो व्रत रखना चाहती है और रखना चाहती है तो कौन? देखिए अभी व्रत की एक दिन पहले करवा चौथ से सूची आती है कि यह महिलाएं व्रत रखना चाहती हैं। जिन महिलाओं के पति कारागार में बंद हैं उनकी हम करवा चौथ कारागार में कराते हैं तथा मुलाकात भी कराते हैं। जिनके बाहर से जिनके पति हैं यदि वो बाहर से आते हैं दिन में मिलने तो वो दिन में मिलकर के चले जाते हैं और उनकी नियमानुसार मुलाकात कराई जाती है। सभी को यह छूट है कि जो व्रत रखना चाहती हैं वो रख सकते हैं। सर मेरा आखरी सवाल यह है जब से रविता और मुस्कान को फांसी की सजा सुनाई गई है बाकी की जो कातिल पत्नियां है दामिनी हो चाहे कविता हो अनीता बहुत सारी है संगीता है ऐसे में उनका रिएक्शन क्या है फेस रिएक्शन क्या है किस तरीके से देख रहे हैं सभी देखिए सभी महिला या पुरुष जिनके बड़े-बड़े केस हैं स्पेशली मर्डर के केस हैं वो सब लोग जब से चार फांसी जिला कारागार मेरठ में दो महिला बंदियों को दो पुरुष बंदियों को लगी हैं तब से डरे हुए हैं तथा उनका यही मानना है कि इस केस को थोड़ा सा भी लंबा खींचे अभी निर्णय ना कराएं इस प्रयास में लगे। यानी कि वो चाहते हैं कि अभी जजमेंट ना हो और उनकी कोई कारवाई रुक जाए। हां उनको डर है कि कहीं फांसी ना पड़ जाए इसलिए वो जो इस केस को लंबा खींचना चाहते हैं। क्या सर दामिनी और मुस्कान ने कभी आपस में बैठ के बात बात करने का प्रयास किया? इन्होंने सबने एक साथ बैठ के बात की। गिनती के दौरान खाना नाश्ता लेने के दौरान तथा जो सुंदरकांड भजन आदि होते हैं इनकी नियमित रूप से मुलाकात होती है तथा आपस में बातचीत करती है।
मुस्कान और साहिल ने हाई कोर्ट में अपील की है जो उनको फांसी की सजा यानी कि सजाएं मौत दी गई थी उसके विरुद्ध। इसमें सबसे खास बात यह है कि इस बार जो मुस्कान का प्रेमी साहिल है उसके परिवार की ओर से वकील किया गया है और एक ही वकील ने दोनों की अपील की है हाई कोर्ट में। अब तक मुस्कान की तरफ से जो वकील मिला हुआ था वो जेल की तरफ से मिला हुआ था। सरकारी वकील था। लेकिन ये पहली बार हुआ है जब मुस्कान को साहिल के परिवार की ओर से वकील दिया गया है। यानी के एक अंदाजा लगाया जा सकता है क्या साहिल के परिवार ने मुस्कान को अपना लिया है? क्या वो अपनी बहू मानने लगे हैं? क्योंकि ये सवाल है क्योंकि एक ही वकील है जिस केस को लड़ रहा है।
हमारे साथ वरिष्ठ जिला अधीक्षक हैं। उनसे हम पूछेंगे कि अपील क्या है और कौन सा वकील है जिसने अपील लगाई है। सर पहली बार ऐसा हुआ है कि मुस्कान को साहिल के परिवार ने वकील दिया है और उसकी दोनों की अपील की गई है। देखिए सभी जो बंदी कन्विक्ट होते हैं, सजाया होते हैं उनकी अपील का रिकॉर्ड जेल को रखना होता है तथा यदि सरकारी अपील है तो जेल ही करती है। यदि प्राइवेट है तो उनके वकील स्वयं करते हैं तो भी रिकॉर्ड यहां के जेल रजिस्टर में रहता है। तथा हमें यह इंश्योर करना पड़ता है कि अपील जो है हो चुकी है। तो साहिल और मुस्कान दोनों की अपील सीनियर एडवोकेट श्री एडवोकेट सुशील शुक्ला जो कि माननीय उच्च न्यायालय के हैं उन्होंने की है। इन दोनों की अपील में यही एडवोकेट है। तो क्या माना जाए कि सर क्या साहिल के परिवार ने मुस्कान को अपना लिया है क्योंकि साहिल के परिवार के द्वारा ही वकील किया गया है। हां, यह बात सही है कि साहिल के परिवार के द्वारा ही अपील की गई है। अब मैं अपनाया गया है कि नहीं इस पे तो मुझे ज्यादा नहीं मालूम है। लेकिन मैं सिर्फ ये कह सकता हूं दोनों के अधिवक्ता एक हैं। अपील डाल दी गई है। अपील नंबर दोनों का आ गया तथा दोनों को अधिवक्ता एक ही हैं जो कि केस लड़ रहे हैं। माननीय उच्च न्यायालय में। अब इसको कोई सरकारी वकील नहीं दिया जाएगा। नहीं अब सरकारी वकील की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जब निजी अधिवक्ता नियुक्त हो जाता है तो सरकारी वकील की आवश्यकता नहीं रह जाती।
सर अगर इस तरीके से और जो साहिल का परिवार जैसे लग रहा है कि मुस्कान को अपना सकता है तो क्या वो बेटी को मांग सकता है और बेटी को मांगेगा तो क्या प्रोसीजर है उसका? किस तरीके से और जो मांगते हैं तो कैसे सौंपी जाएगी? देखिए बेटी को मांगने का और बेटी को भेजने का तरीका यह है कि यदि मुस्कान अपनी बेटी किसी को देना चाहती है किसी के पास रखना चाहती है तो वो सबसे पहले एक प्रार्थना पत्र देगी कारागार में कि मैं अपनी बेटी इस व्यक्ति के पास भेजना चाहती हूं। जब वह प्रार्थना पत्र देती है तो हम उसको यदि अंडर ट्रायल प्रजननर होता है तो कोर्ट को क्योंकि अब कोर्ट में पतवली क्लोज हो चुकी है तो जिलाधारी के माध्यम से जिसको वो कहेगी उससे अनुमति लेंगे हम जिलाधारी महोदय की तब यदि अनुमति मिल जाती है उसके बाद हम उसको सौंप सकते हैं। कुछ और लोग भी आए थे जिन्होंने मुस्कान की बच्ची को अपनाने की बात कही थी। क्या कहा मुस्कान ने उस पर? सोशल इनफ्लुएंसर वगैरह कुछ आए थे जिन्होंने कहा था वो मुस्कान की बेटी को अपनाना चाहते हैं। पूरा खर्चा देना चाहते हैं और बेटी को लेने की बात कही थी तो उसने मना कर दिया।
उसने कहा छ साल तक मैं अपनी बेटी को अपने पास ही रखूंगी तथा कारागार के नियमों में भी यह नियम है कि छ साल तक बच्चा मां के साथ रह सकता है। मगर जो साहिल के परिवार वाले मांगते हैं तो बच्ची उनको दी जा सकती है। कानून में यह प्रावधान है। मां की सहमति और क्योंकि कन्विक्शन हो गया है तो जिलाधारी महोदय की सहमति आवश्यक होगी तभी दी जा सकती है। सर आखिरी सवाल यह है मेरठ जेल में जिम बनाया गया है। सुना है साहिल आजकल जिम कर रहा है और अपना स्ट्रेस और अपना जो डिप्रेशन है उसको दूर करने के लिए। देखिए पिछले दिनों जिला कारागार मेरठ में माननीय राज्यसभा सदस्य श्री लक्ष्मीकांत वाजपेयी जी ने एक विशाल जिम ओपन जिम की स्थापना की थी। सांसद निधि से ये जिम स्थापित किया गया था। इसमें 16 मशीन दी थी। उन्होंने ही उद्घाटन किया था।
तो सेकंड सर्किल के सभी बंदी इसमें अलऊ है आने के लिए। साहिल भी अपना इसमें आकर के जिम करता है तथा अपना स्ट्रेस मैनेजमेंट करता है। नियमित जिम कर रहा है सुबह शाम? हां वो नियमित रूप से जिम कर रहा है। शाम को नियमित रूप से आता है। तो ये वरिष्ठ जेल अधीक्षक हैं। उनका कहना है कि पहली बार ऐसा हुआ है कि मुस्कान के मुस्कान को साहिल के परिवार वालों ने वकील मुहैया कराया है। और हालांकि इस पे तो इन्होंने टिप्पणी करने से मना कर दिया कि उन्होंने अपनाया नहीं। लेकिन इस बात को इस कारवाई को इसी तरीके से देखा जा रहा है कि अब साहिल के परिवार ने क्या मुस्कान को अपना लिया