राजस्थान के जयपुर में एक 32 साल की निर्मा जिसका होटल का कारोबार है और वह रात के लगभग 9:00 बजे अपने होटल पर विजिट करके वहां से वापस लौट रही थी अपनी गाड़ी से। लेकिन तभी अचानक से जब वह अपनी गाड़ी को सर्विस रोड से चला रही थी। बाहरी जो हाईवे होता है तो वहीं पर अचानक से उसे एक व्यक्ति बैठा हुआ दिखाई देता है जिसके पास लगभग 4 से 5 साल की एक लड़की थी और वह उसको गले लगाकर शायद फूट-फूट कर रो रहा था। लेकिन निर्मा जब पहली नजर में उस व्यक्ति को देखती है तो उसे बड़ा ही अजीब लगता है और वह सोचने लगती है कि बच्ची के गले लगकर इस तरह से व्यक्ति यहां पर क्यों बैठा है और उसके दिमाग में कुछ गलत ख्याल आते हैं। पहले तो वह गाड़ी आगे ले जाती है लेकिन उसके बाद आगे जाकर गाड़ी रोकती है और रोकने के बाद वहां से रिटर्न में आती है यानी कि बैक गियर लगा के गाड़ी को वापस लेकर आती है। अब जैसे ही वह गाड़ी वापस लेकर आई थी तो उसके पास आते वह देख लेती है कि भाई यह रो रहा है तो वहां पर गाड़ी को रोक देती है।
उसके बाद गाड़ी रोकने के बाद वह हॉर्न बजाती है और जैसे ही वह हॉर्न बजाती है तो यहां पर जो वह बाप था जो कि अपनी बेटी को गले लगाकर रो रहा था वह एकदम से अपनी आंखों के आंसू को पोंछता है और उसकी तरफ देखता है। यहां पर यह महिला जिसका नाम निर्मा होता है 32 साल की जिसकी उम्र होती है और पैसे रुपों की कोई दिक्कत नहीं है। यह उसको आवाज बुलाती है अपनी तरफ कि तुम इधर आ जाओ। तो उसके बाद वह जो पिता होता है उसका नाम सतीश होता है और वह वहां से उठकर अपनी बेटी को अपने साथ लेकर उसकी ड्राइविंग साइड की खिड़की पर पहुंच जाता है। अब जैसे ही वह उसकी ड्राइविंग साइड वाली खिड़की पर पहुंचता है तो यहां पर वह महिला अपना शीशा नीचे करके कहने लगती है कि तुम रो रहे थे क्या? अब इस बात को सुनते ही जो सतीश था वह कहने लगता है कि नहीं मैडम मैं नहीं रो रहा था। अब इस बात को सुनकर वह कहने लगती है कि नहीं तुम रो रहे थे। मैंने तुम्हें देखा था। अब इस बात को सुनकर वह फिर से मना करता है। लेकिन इस बार मना करते हुए एकदम से उसका जोर-जोर से रोना छूट जाता है और वह फूट-फूट कर रोने लगता है। इस [नाक से की जाने वाली आवाज़] बात को देखते हुए यहां पर वह महिला कहने लगती है कि आखिर क्या बात है और किस लिए तुम ऐसा रो रहे थे अपनी बच्ची को गले लगाकर? मैंने देखा तुम्हें रोते हुए और इसीलिए पूछ रही हूं। अब यहां पर जो व्यक्ति होता है वो कहता है कि कुछ नहीं बस बेटी को एक बीमारी हो गई है जिसके इलाज के लिए मेरे पास पैसे नहीं है और जो मेरा घर है वो भी मकान मालिक ने आज खाली करवा दिया है। दरअसल यहां पर जो सतीश होता है वो पीछे से राजस्थान के गांव का रहने वाला था। उसने अपनी पत्नी से पत्नी के कहने पर यहां पर आकर वो रहा था और उसको जब एक बेटी हो जाती है तो उस समय उसकी पत्नी उसे छोड़कर किसी और के साथ भाग जाती है और यह जो व्यक्ति होता है यह अपने घर में रह जाता है लेकिन अब तक उसके हिस्से की जो भी प्रॉपर्टी गांव में थी वो सारी की सारी पत्नी बिकवा चुकी थी और जब उसके पास कुछ नहीं रहता है तो तभी वह किसी और के साथ उसे छोड़कर जाती है। अब जो सतीश होता है वह बताता है कि दरअसल मेरे पास कुछ भी नहीं है और मेरा घर भी ऐसे-ऐसे है अब फिलहाल जो मकान मालिक है उसने खाली करवा दी क्योंकि किराया नहीं दे पा रहा हूं क्योंकि बेटी को एक बीमारी है और उसका इलाज चल रहा है उसके [नाक से की जाने वाली आवाज़] इलाज के चक्कर में जो कुछ भी कमाया करता हूं वो सारा के सारा पैसा उसके इलाज में लग जाता है लेकिन फिलहाल मेरे पास एक भी रुपया नहीं है और डॉक्टर साहब बोल रहे थे कि अगर इस इलाज इस बीमारी का इलाज नहीं करवाया तो दिक्कत हो सकती है बेटी इस दुनिया को छोड़कर भी जा सकती है। ऐसा कहते हुए रोते हुए अपनी पूरी कहानी बता देता है और जब वह रोता हुआ उसे दिखाई देता है उस निर्मा को तो उसके बाद वह अपने पास से लगभग ₹10 निकाल कर उसकी तरफ बढ़ाने लगती है। कहती है कि यह लो इन पैसों से तो इलाज हो जाएगा। इस बात को सुनकर यहां पर जो महिला होती है वह उसकी तरफ देखता है और कहता है कि नहीं मैडम मुझे पैसे नहीं चाहिए। अब इस बात को सुनकर वह कहती है कि ले लो अगर कम है तो और देती हूं। ऐसा कहकर वो ₹10,000 और निकालती है अपने पास से और उन्हें भी उसकी तरफ बढ़ाने लगती है। लेकिन वो मना करता है। कहता है कि नहीं मैडम मैं आपसे ऐसे पैसे नहीं ले सकता। यानी कि वो पूरी तरह से स्वाभिमानी था। तो उसके बाद वो कहने लगती है कि क्यों भाई बेटी की जान पर बनाई है लेकिन तब भी पैसे नहीं ले सकते। यह तो गलत बात है ना। इस बेटी का क्या कसूर है? अब इस बात को सुनते ही वो कहता है कि मैडम बात तो आपकी सही है लेकिन मैं नहीं कर सकता क्योंकि अगर आप मुझे पैसे देना चाहती हैं, मेरी मदद करना चाहती हैं तो मुझे कोई काम दे दो क्योंकि उसका काम भी बेटी के इलाज के चक्कर में छूट चुका था पूरी तरह से क्योंकि उसे लेकर इधर-उधर हॉस्पिटल्स में घूमना तो यह सारी चीजें उसे फेस करनी पड़ रही थी। अगर आप मुझे काम देती हो तो अपने पैसे मेरी सैलरी में से काट लेना। कोई काम हो आपके निगाह में तो काम दिला दो। तो उसके बाद ही मैं पैसे ले सकता हूं।
क्योंकि अब पैसे ले लिए तो कहां से चुकाऊंगा? इस बात को सुनकर वह महिला जो होती है वह कहती है कि ठीक है काम चाहिए और तुम्हारे पास रहने के लिए घर भी नहीं है। दोनों चीजें मिलेंगी। बैठो मेरी गाड़ी में। [नाक से की जाने वाली आवाज़] ऐसा कहकर वह उसे गाड़ी में बैठाने के लिए कहने लगती है। अब बेटी पिता की तरफ देखती है और पिता जो होता है वो भी बेटी की तरफ देखता है और यहां पर फुटपाथ पर रात गुजारने से अच्छा कि आज वो उसके साथ जाए कि वो कहीं पर भी ले जाए। कम से कम यह तो है कि उसे काम मिल जाएगा। ऐसा सोचकर जो मा पिता और बेटी होते हैं वो दोनों के दोनों उस गाड़ी में बैठ जाते हैं और उसके बाद ये महिला अपनी गाड़ी को ले जाकर सीधा अपने घर ले जाती है। घर पर और भी कई नौकर चाकर थे। बहुत बड़ा घर था और उस घर के अंदर निर्मा अकेली रहा करती थी। यहां पर जैसे उस घर के अंदर वो घुसते हैं तो यहां पर पिता और बेटी दोनों के दोनों उस घर को देखकर एकदम से हैरान हो जाते क्योंकि इतना बड़ा घर उन्होंने अपने सपनों तक में भी नहीं देखा था। बस फिल्मों में ऐसे घर देखा करते थे। अलग से गार्डन, गाड़ियों की पार्किंग और तीन-चार गाड़ियां और वहां पर खड़ी हुई थी और आलीशान घर बना हुआ था क्योंकि निर्मा के कई रेस्टोरेंट चले हुए थे और उन सभी को चलाकर वह अच्छा खासा पैसा कमाया करती थी। अब जैसे ही वह घर पहुंचते हैं तो यहां पर वह कहती है कि उतरो। तो दोनों के दोनों उतरते हैं.
यानी कि बाप बेटी दोनों उतरते हैं और उतरने के बाद वह उन्हें अंदर ले जाती है घर के अंदर। घर के अंदर ले जाने के बाद वह उसे उन्हें जो हॉल होता है उसमें बिठाती है और कहती है कि खाना खाया बेटी की तरफ मुंह करके तो बेटी नाम में सर हिलाती है जिसका नाम निशा होता है और इस [नाक से की जाने वाली आवाज़] बात को देखते हुए वह अपने एक नौकर को आदेश देती है कि जल्दी से खाना लाओ। नौकर जो होता है उसने खाना बनाकर रखा था तो उसको फौरन से लेकर आ जाता है और उसके बाद वह अपने हाथों से उस बेटी को खाना खिलाती है और कहती है कि अब [नाक से की जाने वाली आवाज़] तुम ठीक हो जाओगे। यहां पर जो निर्मा होती है वो कहती है देखो ज्यादा वैसा तो कोई काम नहीं है लेकिन मुझे कोई ईमानदार व्यक्ति चाहिए जो मेरे छोटे-मोटे कामों को कर दे यानी कि एक तरह से असिस्टेंट की तरह इस बात को सुनकर वह कहता है कि ठीक है मैडम ये काम मैं कर दूंगा.
वो पूछने लगती है कि पढ़े लिखे कितने हो तो वह कहता है कि 12वीं पास हूं मैडम कहती है कि ठीक है चल जाएगा काम बस पढ़ तो लेते हो कि क्या लिखा हुआ क्या लिखा हुआ वो कहता है कि हां बिल्कुल पढ़ लेता हूं हिंदी भी और इंग्लिश भी थोड़ी बहुत पढ़ लेता हूं बोलनी नहीं आती लेकिन पढ़ जरूर लेता हूं उसके बाद वह कहती देखो यहां पर मैं तुम्हें एक कमरा दे दूंगी जिसके अंदर तुम अपनी बेटी के साथ रह सकते हो। अपनी बेटी का इलाज करवाओ सबसे पहले तो और साथ-साथ में यहां पर काम करते रहना और जितना भी पैसा तुम्हारी बेटी के इलाज में खर्च आएगा मैं सारा पैसा तुम्हें दे दूंगी। इस बात को सुनकर जो व्यक्ति होता है वो बड़ा ही हैरान हो जाता है और कहने लगता है कि मैडम वो बात तो ठीक है। मैं काम करूंगा आप मुझे पैसे दे दोगी। यह तो एक अच्छी बात हुई। लेकिन क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता हूं अगर आप बुरा ना मानो तो? तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] इस बात को सुनने के बाद वह कहने लगती है कि हां पूछो क्या पूछना है? तो वह कहने लगता है कि दरअसल जहां पर हम बैठकर रो रहे थे और मैं अब से नहीं लगभग आधे घंटे से लगातार रो रहा था कि भाई बेटी का इलाज कैसे हो पाएगा लेकिन बहुत सारी गाड़ियां निकली।
किसी ने भी गाड़ी को नहीं रोका और आपने गाड़ी क्यों रोकी? तो इस बात को सुनकर यहां पर जो निर्मा होती है वो कहती है कि पहले तुम्हें कुछ गलत समझ रही थी लेकिन जब लौट कर आई और तुम्हें इस तरह से रोते हुए देखा तो मुझसे सहन नहीं हो पाया क्योंकि किसी दिन जिस तरह से तुम्हारी बेटी है ना ऐसी मेरी भी एक बेटी थी और जब तुम उसके गले लिपट कर रो रहे थे तो मुझे लगा कि शायद मुसीबत में है और इन्हें पूछना चाहिए इसीलिए मैं तुम्हारी मदद करना चाहती थी लेकिन तुम तो बड़े खुददार निकले और बोल दिया कि अगर काम मिलेगा तो ही वो आपकी मदद ले सकता है तो इसीलिए मैंने अब तुम्हें काम दे दिया है अपनी बेटी बेटी का इलाज करवाओ और जितने भी पैसे खर्च आएंगे मैं खर्च करूंगी। काम कर के चुका देना फ्री में मदद नहीं कर रही। तो उसके बाद जो लड़का होता है यानी कि जो सतीश था वह वहीं पर रहने लगता है और अब उसके घर के छोटे-मोटे काम हुए या कोई बाहर से बिल वगैरह भरना हो या कोई ऐसा काम हो उन सभी कामों को किया करता है और जो मैडम होती हैं वह उसे महीने का ₹00 दिया करती हैं। धीरे-धीरे करके जो सतीश होता है वह रेस्टोरेंट पर भी जाने लगता है और वहां का भी हिसाब किताब अच्छी तरह से देखने लगता है और पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम करता है। अब इस बात को देखते हुए यहां पर जो निर्मा होती है, उसे सतीश का व्यवहार बड़ा ही अच्छा लगता है और धीरे-धीरे वह उस पर पूरी तरह से डिपेंड हो जाती है। अब सतीश के ऊपर निर्मा पूरी तरह से डिपेंड हो गई थी और यहां तक कि उन दोनों के मन में एक दूसरे के लिए एक अजीब सी भावना भी आ गई थी क्योंकि सतीश उस टाइम तो जब फुटपाथ पर बैठा हुआ था तो उसके पुराने मैले कुचले कपड़े थे। लंबी-लंबी दाढ़ी मूछ बाल वगैरह बड़े हुए थे। लेकिन निर्मा ने कहा कि अच्छी तरह से क्लीन शेप में रहना ताकि कोई यह ना कहे कि भाई किस तरह से है तो उसके बाद वो अच्छी तरह से बन के रहता है और यहां पर जब निर्मा पहली बार उसे देखती है.
ऐसा अच्छी तरह से दाढ़ी वाडी कट कर तो वह एकदम से जवान लड़का था और उसे देखकर उसे बहुत कुछ मन के अंदर ख्याल आने लगते हैं लेकिन फिलहाल वह अपने ख्यालों को अलग करती है और उसके बाद धीरे-धीरे और समय बीतता है। समय के साथ-साथ कुछ दिन और बीतते हैं और कुछ दिनों बाद एक दिन अचानक से निर्मा की तबीयत खराब हो जाती है रात के समय। अब सतीश और उसकी बेटी निशा वहीं पर रहा करते थे और जैसे ही सतीश यह देखता है कि मैडम की तबीयत खराब है क्योंकि अब जैसे ही तबीयत खराब हुई थी तो वो आवाज लगाती है और सतीश वहां पर जाता है। अब जैसे ही सतीश वहां पर जाता है तो उसके बाद और भी नौकरों को बुलाया जाता है। वो लोग कोई तो कुछ कहता है, कोई कुछ कहता है। लेकिन सतीश को गाड़ी चलानी आती थी अब तक अच्छी तरह से चला लिया करता था। तो उसके बाद उस मैडम को गोद में उठाकर गाड़ी में बैठाता है और वहां से लेकर सीधा हॉस्पिटल चला जाता है। हॉस्पिटल जाने के बाद वो उसका ट्रीटमेंट करवाता है और जब उसका ट्रीटमेंट होता है तो यहां पर लगभग 2 घंटे के बाद उसे होश आता है क्योंकि वो पूरी तरह से बेहोश हो चुकी बुखार इतना तेज था और उसके बाद जब उसे होश आता है तो जो सतीश था वो वहीं पर बैठा हुआ था और ऊपर वाले से दुआ कर रहा था कि भगवान इनको जल्द से ठीक कर दो इतनी अच्छी महिला ढूंढने से नहीं मिलेगी और यह बहुत ही दयावान है। अब यहां पर जब उसे वहां पर बैठा हुआ देखती है तो वहां पर और कोई नौकर नहीं था। सभी नौकर घर पर थे केवल सतीश जो था वही बैठा हुआ था और जब उसे बैठा हुआ देखती है काफी परेशान क्योंकि आंख खुलने के बाद सतीश को नहीं पता चला था तो वो उसे आवाज लगाती है कहती है कि सतीश इधर आओ उसके बाद सतीश जो होता है वो वहां पर आता है और वहां पर आने के बाद उसे पूछने लगती है कि भाई तुम यहां पर क्यों आए और भी तो नौकर थे वो तो घर पर थे.
तुम भी घर पर रहते आराम से क्योंकि रात के समय और इस तरह से बैठा रहना यह भी कोई अलग ही बात है और अपनेपन की फीलिंग हुआ करती है तो उसके बाद वो कहता है कि मैडम आपने मेरी जिंदगी बदल दी तो मैं भला आपको [नाक से की जाने वाली आवाज़] ऐसे अकेला कैसे छोड़ देता। आप मुसीबत में थी तो इसलिए मैं बैठा हुआ था। तो वो कहने लगती चलो ठीक है बैठे हुए थे। मैं मुसीबत में थी लेकिन तुम तुम्हारे चेहरे पर काफी ज्यादा उदासी थी। तो वो कहने लगता है कि मैडम दरअसल आप बीमार थी ना तो इसीलिए मुझे डर लग रहा था कि कहीं आपको कुछ हो ना जाए क्योंकि आपसे ही तो मेरा वुद्ध है। अगर आप नहीं होती तो कुछ भी ऐसा नहीं होता। इस बात को सुनकर जो निर्मा होती है वो मन ही मन बहुत कुछ बातें सोचती है और सोचने के बाद कहती है कि चलो ठीक है अब मैं ठीक हो गई हूं और तुम जाओ अपनी बेटी के पास वो अकेली परेशान हो रही होगी वो कहता [नाक से की जाने वाली आवाज़] है नहीं मैडम कोई बात नहीं बेटी सो जाएगी उसने कहा है कि आप आंटी के पास रहना.
और मैं सो जाऊंगी ऐसा कहकर उसने मुझे भेजा है तो कोई भी दिक्कत नहीं है निर्मा जो है वो हॉस्पिटल के बिस्तर पर रहती है लेकिन जितने दिन उसका यहां पर इलाज चलता है लगभग 4 दिन तक इलाज चलता है चार दिन तक वो एडमिट रहती है तो 4 दिन तक लगातार जो सतीश है वह वहीं पर उसकी सेवा पानी में लगा रहता है। जबकि और नौकर या कोई रिश्तेदार जो होते हैं वह आए तो थे लेकिन देखकर वह चुपचाप चले जाते हैं। लेकिन सतीश ही उसकी देखभाल कर रहा था यहां पर। यानी कि जिस तरह से एक अटेंडेंट रहता है उसी तरह से सतीश उसका अच्छे से ख्याल रख रहा था। अब ये सारी बातें देखकर निर्मा के मन में सतीश के लिए जो लगाव था वो और भी ज्यादा बढ़ जाता है और उसे लगने लगता है कि भाई सतीश जो है वो सच में ही उसके लिए बना है क्योंकि जो निर्मा थी उसके पति जो थे वह इस दुनिया दुनिया को तो छोड़कर नहीं गए थे .
सॉरी गलत बात मतलब बोल दी जो निर्मा के जो पति थे वो पैसे वाले थे और जैसे ही उसकी शादी होती है तो शादी के बाद पति से उसे वो प्यार नहीं मिलता है जो मिलना चाहिए था क्योंकि पति और महिलाओं के चक्कर में था और इसीलिए जो निर्मा होती है वह अपने पति से तलाक लेती है लेकिन तलाक के एवज में उसे अच्छी खासी एलुमिनी मिलती है और उसी एलुमिनी से उसने ये होटल खोल रखे थे। अब जब होटल खोल लेती है अच्छे से कारोबार चलने लगता है। ऊपर से वह अपने पिता की इकलौती बेटी थी तो अपने पिता का जो कारोबार था वह भी उसके ही बट में आता है और उस घर के अंदर उसके पिता भी रहा करते थे कभी लेकिन फिलहाल वह पूरी तरह से अकेली हो गई थी और यहां पर इस लड़के के अंदर उसे अपनापन महसूस होने लगता है। उसके बाद निर्वा डिस्चार्ज होती है। डिस्चार्ज होने के बाद घर जाती है। लेकिन अब उसे सतीश को जो देखने का नजरिया था वह पूरी तरह से बदल चुका था। वह सतीश को एक हमसफर की तरह देखा करती थी। जबकि सतीश नॉर्मल तरीके से काम कर रहा था। बस वह उनकी इज्जत किया करता था ताकि क्योंकि उन्होंने उसकी मुश्किल वक्त में मदद की थी। तो इसीलिए धीरे-धीरे कुछ दिन बीतते हैं और कुछ दिनों बाद एक दिन शाम के समय जब सतीश बाहर से आता है होटलों का हिसाब लेकर और जो निर्मा थी वह पार्क में बैठी हुई थी घर के बाहर जो पार्क था वहीं पर बैठकर कुछ सोच रही थी बैठी-बैठी। उसी समय सतीश आता है और आने के बाद उसे हिसाब वगैरह दिखाता है तो जो निर्मा होती है वो कहती है .
बैठो सतीश आज मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। उसके बाद सतीश वहां पर बैठ जाता है और बैठने के बाद कहने लगता है देखो सतीश मैं अकेली हूं। तुम्हें पता है तो वो कहता है कि हां मैडम आप अकेली हो लेकिन अपने आप को अकेला मत समझो। मैं और मेरी बेटी आपके लिए दुआ करते हैं और हम आपके अपने हैं। भले ही यह जो नौकर हैं ये आपकी सैलरी के लिए हैं लेकिन हमने आपका स्वभाव देखा। आप बहुत अच्छी हो। तो हम आपके अपने हैं। तो वो कहती है कि ये बात मैं नहीं कर रही। उसके बाद जो सतीश होता है वो चुप हो जाता है और कहता है कि फिर क्या बात कर रही हो मैडम? तो उसके बाद जो निर्मा होती है वो कहती है कि देखो मैं अकेली हूं और तुम्हें अपनी जिंदगी के बारे में थोड़ा सा बता देती हूं। दरअसल मेरे जो पति थे मेरी शादी हुई थी। लेकिन शादी के बाद जो मेरे पति हैं वह अच्छी तरह से मेरे साथ नहीं रहते हैं ना मुझे वो पति वाला प्यार देते हैं और जब मैं पता करती हूं कि ये इतने इस तरह से क्यों रहा करते हैं तो मुझे पता चलता है तो उनके तो कई लड़कियों के साथ अवैध संबंध थे और इसीलिए मैं अपने पति को छोड़ने का फैसला करती हूं। उस समय मेरे जो पिता होते हैं वह एकदम से मना करते हैं। कहते हैं कि नहीं बेटी ऐसा मत कर लेकिन मैं जिंदगी भर एक ऐसे इंसान के साथ नहीं रह सकती थी जो मुझे महज एक फॉर्मेलिटी समझता है और इसीलिए मैंने अपने पति को छोड़ने का फैसला किया पिता के फैसले के विरुद्ध जाकर लेकिन पिता ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए और उसके बाद वह इस दुनिया को छोड़कर चले जाते हैं। मेरा मेरे पति से तलाक तो हो जाता है लेकिन तलाक के बाद मेरे पिता मेरे साथ नहीं रहते हैं। मैं पूरी तरह से टूट जाती हूं। जो एलुमनी के पैसे मिलते हैं उनसे मैंने होटल का कारोबार स्टार्ट किया है और मुझे काफी दिनों से एक ऐसे जीवन साथी की तलाश थी क्योंकि कई लोग आते थे लेकिन सब मेरी प्रॉपर्टी को देखकर मेरे पास आते थे लेकिन तुमने जिस तरह से हॉस्पिटल में मेरी सेवा की थी उससे मुझे एहसास होता है कि तुम सच्चे दिल से इंसान की सेवा कर सकते हो तो क्या तुम मुझसे शादी करोगे? अब यह बात सुनते ही जो नौकर होता है .
सतीश वो एकदम से हैरान हो जाता है और कहने लगता है कि मैडम आप यह कह क्या रही हो? तो उसके बाद वो कहती है देखो तुम्हारी बेटी के साथ भी मैं पूरी तरह से घुल मिल चुकी हूं और मुझे वो अपनी बेटी के बराबर लगा करती है तो क्यों ना तुम मुझसे शादी कर लो और हमारा पूरा एक परिवार हो जाएगा। लड़का जो होता है वो थोड़ी देर तक सोचता है और कहता है नहीं मैडम आप अमीर हो करोड़पति हो और मेरे पास कुछ भी नहीं है। अगर मैं आपसे शादी करूंगा तो लोग तरह-तरह की बातें बनाएंगे। अरे और तो क्या इस घर के जो नौकर है वही बात बनाने लगेंगे कि भई कल तक तो हमारे साथ हमारे जैसा नौकर था।
लेकिन आज देखो मालकिन के साथ मालिक बन बैठा। अब इस बात को सुनकर जो निर्मा होती है वह कहती है देखो मैंने बहुत दुनिया देखी है और शायद तुमने भी देख ली होगी लेकिन एक बात बताओ कि अगर हमारे साथ कुछ हो रहा है तो उसको भुगतने के लिए हम ही तो आते हैं। दुनिया का काम बातें कहना है लेकिन उन बातों से ना तो हमारे जीवन पर कोई इफेक्ट पड़ना चाहिए और ना ही कोई इफेक्ट पड़ता है। अगर कोई कह दे कि भगवान इसका भला कर दे तो जरूरी थोड़ी ना है कि तुम्हारा भला हो जाएगा। भला तो तभी होगा जब तुम खुद काम करोगे, खुद मेहनत करोगे। इस बात को सुनते ही जो सतीश है वो हमेशा हिलाता है। तो तभी जो निर्मा है वो कहती है कि फिर इसीलिए तो बोल रही थी कि मुझे तुम अच्छे लगे और मुझे लगता है कि तुम जैसा इंसान मुझे ढूंढने से नहीं मिलेगा तो इसीलिए तुमसे शादी करना चाहती थी।
बाकी फैसला तुम्हारा है। जबरदस्ती तुमसे जोर नहीं दूंगी। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो क्या कहेगा क्या नहीं कहेगा। बस तुम फैसला करके बता दो। अब इस बात को सुनकर जो लड़का होता है सतीश वह मना करने लगता है लेकिन वो कहती है देखो तुम्हारे पास टाइम है और टाइम लेकर सोच कर बता देना लेकिन धीरे-धीरे जब 2 दिन का समय बीत जाता है और दो दिन का वो टाइम लेता है तो 2 दिन के अंदर वो महसूस करता है कि जो निर्मा है वो उसकी बेटी को मां से भी बेहतर प्यार दिया करती है उसके लिए सामान खरीद कर लाया करती है अच्छे स्कूल में उसने उसका एडमिशन करवा रखा है और उसकी बीमारी भी पूरी तरह से ठीक हो गई है वो भी निर्मा की वजह से तो उसके बाद वह तीसरे दिन मैडम को जवाब देता है। कहता है कि मैडम आप जैसा चाहो वैसा मैं करने के लिए तैयार हूं। निर्मा जो होती है वह कहती है कि ठीक है तो आज से तुम मुझे मैडम नहीं कहोगे।
मुझे निर्मा कहकर पुकारोगे और कुछ दिनों बाद ही हम साधारण तरीके से शादी कर लेंगे। इसके बाद यहां पर जो निर्मा होती है वह एक साधारण सा आयोजन रखती है और उस आयोजन में सतीश और निर्मा की शादी हो जाती है और साथ में जो निर्मा है उस बेटी को भी अपनी बेटी बना लेती है। आज के समय में सतीश और निर्मा अपने जीवन को अच्छी तरह से जी रहे हैं और कोई भी कैसी भी दिक्कत नहीं है। ये कहानी हमें निर्मा ने ही भेजी है और उन्होंने कहा है कि नाम और जगह के नाम बदल देना वरना लोग तरह-तरह की टिप्पणियां करते हैं क्योंकि आज के जमाने में लोग कहने में पीछे नहीं हटते हैं। हालांकि उन्हें फर्क तो नहीं पड़ता लेकिन फिर भी उन्होंने यह बात की है कि इन बातों को गोपनीय रखा जाए ताकि उनकी पर्सनल लाइफ में इस बात से कोई भी दिक्कत ना आ सके।