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मक्का मे कपल को सजा मिलने की ये है असली वजह?मौलाना रशीदी बताया सच।

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मक्का की मस्जिद को लेकर के सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दी गई। इस पूरे मामले को लेकर के चर्चाएं पूरी दुनिया भर में हो रही है कि आखिरकार ऐसा क्यों हुआ? सऊदी का सख्त कानून क्या कहता है? और इस्लाम में क्या मस्जिद के भीतर कोई कृत करने पर या गलत कृत करने पर क्या सजा का प्रावधान है और गलत कृत क्या है? ये तमाम सारे सवाल हैं जो आपके मन में भी उठ रहे होंगे।

आखिर इस्लामी कानून क्या है और इस्लामी कानून में भी क्या सऊदी अरब का कानून जो है वो इतना सख्त है या वो अलग है उसको जरा समझने की आज कोशिश करेंगे विस्तार से। हमारे साथ खास मेहमान है आज जो है न्यूज़ रूम में। अह हमारे साथ हैं मौलाना साजिद रशीदी साहब। अध्यक्ष हैं ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के। हमसे बातचीत करने के लिए इमाम साहब बहुत स्वागत है आपका। बहुत शुक्रिया। और बड़ा गंभीर मसला जिसको लेकर के पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है कि आखिरकार ये ताज़ीर क्या है कि इसके तहत किसी तरह की सजा दी गई और इस्लाम में क्या ताज़ीर है? इसको थोड़ा सा हमारे दर्शकों को आप बताइए। देखिए कुरान का जो फैसला है वह पूरा अदल और इंसाफ पर कायम है। कुरान किसी के साथ नाइंसाफी नहीं करता और जहां कुरान का कानून है वहां इस तरह के क्रेते करने पर जिस पर ये सजा हुई है सऊदी में वहां मौत की सजा है।

तो तमाम शवाय तमाम उसके खिलाफ जो सबूत थे वह मौजूद थे और सबूतों की बिना पर ही यह सजा हुई है और मैं समझता हूं कि ये इंसाफ के तकाजों को पूरापूरा करता है। सऊदी में या जहां भी इस्लामी कानून है वहां ये सजाएं दी जाती हैं और किसी की भी रियायत नहीं रखी जाती। कुरान में इस्लाम में किसी की रियायत का जिक्र है ही नहीं कि अगर कोई बादशाह है वो अपने ओहदे की वजह से अपने पैसे की वजह से छूट जाए। ऐसा कुछ भी नहीं है। ओमान के अंदर एक वाकया पेश आया। वहां भी इस्लामी कानून है कि एक लड़के के हाथ से एक बच्चे का कत्ल हो गया। तो जिसके हाथ से कत्ल हुआ था उसके परिजनों ने बहुत कोशिश की।

इस्लाम में दो कानून है कत्ल होने के कि या तो उसके बदले में उसको दूसरे को कत्ल कर दिया जाए या फिर उसके बदले किस ले लिया जाए। यानी उसके जो अमाउंट तय होता है इस्लाम में किसास का वो ले लिया जाए। तो ये जायज है जो सजा जो इस्लाम हुई और आप इसे कैसे देख रहे हैं? बिल्कुल यह सजा जायज़ है और मैं समझता हूं जो इन्होंने घिनौना काम किया है मस्जिद के अंदर वह भी तो उनकी सजा यह होनी चाहिए थी और हुई है इंसाफ का तकाजा ये सवाल उठे मौलाना साहब कि ये ये कहा गया सऊदी अरब की तरफ से कि दोनों जो है एक ये जो लड़का लड़की है कपल है उन्होंने मक्का की मस्जिद के अंदर फ़शा फ़शा किया मतलब इसे क्या इसे अगर हम साधारण भाषा में समझे तो क्या है मतलब अनैतिक कृति क्या है फहश काम कहते हैं

जिनाकारी को। जी। इसीलिए जो औरत जिनाकारी करती है, जो मर्द जिनाकारी करता है, उसको फ़हिशा कहते हैं। यानी ये जिनाकार है। जिस तरह हमारे यहां कह देते हैं कि ये बड़ी अजीब सी भाषा है वो जो हम बोलते हैं गलत काम करने वाली औरत के लिए। तो इसमें तय कौन करता है कि गलत है, क्या सही है? क्या तय करते हैं। एक दूसरे का मतलब किसी ने चुंबन ले लिया तो वो गलत हो गया। नहीं चुंबन पे सजा है ही नहीं। जी। चुंबन पे तो सजा है ही नहीं। यह जो कहा गया है कि चुंबन पे सजा है। चुंबन पे तो ये सजा है नहीं। चुंबन का मींस यह है वहां माथे पर किस करना वहां एजाज समझा जाता है। वहां हर बड़ा आदमी अपने छोटे आदमी को हाथ पे भी किस करने का माथे माथे पर किस करता है। हाथ पर नहीं हाथ हाथ पर हाथ पर बड़ों के किस करते हैं। हाथ पर बड़ों के किस करते हैं। लेकिन बड़ा आदमी अपने छोटे के माथे पर किस करता है। ये इज्जत देने वाली बात है। होठों पे किस कर दें तो वो गलत हो जाएगा। सिर्फ होठों पर किसकी बात नहीं है।

ये होठों पर किसकी बात नहीं है। यहां तो बाकायदा उनको उस हालत में देखा गया सेक्स सेक्सुअल हालत में। और वही चीज साबित होने के बाद इनके साथ ये सजा हुई है। मस्जिद के भीतर इन्होंने मैं सीधा-सीधा कहूं तो इन्होंने गलत काम किया। सेक्सुअल शारीरिक संबंध बनाए। है ना? साधारण भाषा में कहें। कोई मस्जिद के अंदर या किसी भी धार्मिक स्थल पर अगर कोई शारीरिक संबंध बनाता है तो उसके लिए मौत की सजा ऐसा ऐसा नहीं है। यह मस्जिद के अंदर तो जुर्म बड़ा हो गया। अगर यही काम ये बाहर भी करते हां क्योंकि ये दोनों शादीशुदा नहीं थे। ठीक है। दोनों मियां बीवी नहीं थे। हम तो जब मियां बीवी नहीं थे और इन्होंने शारीरिक संबंध बनाया तो ये रेप हो गया। जिना हो गया और जिना की सजा वहां मौत है। तो बहुत सारे मदरसों के अंदर आरोप लगते रहे हैं कि बच्चों के साथ यौन शोषण किया या पढ़ने वालों की कितनों को मौत की सजा होती है मौलाना हां कहां आरोप लगते हैं?

बहुत सारे बहुत सारे आरोप लगते रहे। हम आए दिन कि मदरसे के अंदर किसी का किस मदरसे की? कहीं पर भी मतलब एक सामान्य सी ये तो बताइए ना आप हिंदुस्तान की बात कर रहे हैं या सऊदी के मदरों की बात कर रहे हैं? नहीं सऊदी नहीं पूरी दुनिया में कहीं भी इस तरह की खबरें आती है। तो क्या सब जगह मौत का या सिर्फ आम नागरिकों के लिए मौलाना अपने हिसाब से तय करते हैं कि कुरान में यह लिखा हुआ है और उसी तरह से सजा फिर आप गलत लेके जा रहे हैं। या तो आप सऊदी के लिए बात करें या फिर हिंदुस्तान के लिए भी बात करें।

तो जो हिंदुस्तान में अगर इस तरह का कोई मामला है तो यहां उसका कानून अलग है। यहां इस्लामी कानून तो है नहीं। यहां कुरान के कानून तो है नहीं कि कुरान के हिसाब से सजा दी जाएगी। यहां का जो कानून है उसपे वो सजा मिलेगी। अगर साबित हो जाता है जैसे यहां रेप की सजा अलग है। लड़के के साथ सेक्सुअल असॉल्ट करने की। अच्छा मौलाना साहब ये कहते हैं कि भाई ये जो ताजीर सजा है है ना? ये कुरान और हदीस में स्पष्ट रूप से इसका निर्धारण नहीं है। आप बताएंगे कहीं है स्पष्ट तौर पर ये निर्धारण। यह कहते हैं कि काजी के विवेक पर यह निर्भर करता है। और अगर किसी के विवेक पर निर्भर करें तो मौत जैसी सजा अगर सुना दें किसी को हम तो उसकी उसकी कोई सीमा रेखा पहले होनी चाहिए कि इस तरह की सुनवाई कोई होनी चाहिए पहले कि नहीं होनी चाहिए? आपको क्या लगता है? नहीं और क्या हर अनैतिक कृति के लिए इस तरह की कड़ी सजा सही है? नहीं नहीं ताज़र।

ताजीर को क्या समझते हैं आप? ताज़र का मतलब है किसी गलती पर सजा देना। उसको कहते हैं ताज़र। ठीक है। ताज़र कोई अलग से कोई जुर्म नहीं है। हम ताज़र अलग से कोई जुर्म नहीं है। किसी भी जुर्म पर सजा देने को ताज़र कहते हैं। उसी को अरबी में हद भी कहते हैं। हम तो ये ये कोई अलग से कोई जुर्म नहीं है कि भ ताज़र क्या है? क्या नहीं है। और दूसरे इस्लामिक कानूनों में किसी भी जज को ये अथॉरिटी नहीं है कि वो अपने दिमाग से उसको उसकी सजा को तय करें। कुरान में गुनाहों की सजा मुकरर है। जी जिना करेगा तो यह सजा है। हम कत्ल करेगा तो यह सजा है। हम गाली देने की दो प्यार करने वाले अगर अल्लाह की बारगाह के अंदर अगर मिल रहे हैं तो उनकी सजा मौत है। प्यार है ही नहीं इस्लाम में। इस्लाम में प्यार का कोई वजूद नहीं है आपके। शादी से पहले प्यार का कोई तसवुर नहीं है। अच्छा। आप पहले शादी कीजिए। हम फिर दोनों मियां बीवी प्यार कीजिए। तो ये ये जायज है। अब आप ये जो कह रहे हैं बिल्कुल जायज है। मियां बीवी के साथ प्यार करना जायज़ है। लेकिन मस्जिद में सेक्सुअल असोल्ट करना या सेक्सुअल कोई ऐसी चीज़ मतलब फिर इस्लाम में ये हो गया मौलाना साहब कि कोई किसी से प्यार नहीं कर सकता बिना शादी के। शादी से पहले है ना? तो ये सब पर ही लागू होना चाहिए ना? सब पे लागू है। सब पे लागू होना। बिल्कुल सब पे लागू है। और आप तो अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहते हैं।

और आप आपका एक बयान मैं देख रहा था। कह रहे थे कि जब देश में इस्लामी कानून जब तक लागू नहीं होते महिलाएं सुरक्षित नहीं रहेंगी। करके देख लो। हाथ कंगन को आरसी क्या पढ़े लिखे को फारसी क्या? रेप की सजा मौत करके देख लो। आपको पता चल जाएगा दो चार महीने के अंदर ही। ये जो रेप करते हुए घूम रहे हैं ना सब खत्म हो जाएंगे। दो आदमियों को इस्लामिक तरीके से सजा दे दो। रेप होना लड़कियों के साथ बंद हो जाएगा। मैं दावे के साथ कह रहा हूं। सऊदी में रेप क्यों नहीं होता? इस्लामिक देशों में क्यों नहीं होता? क्योंकि वहां सख्त इतनी सख्त सजा है कि वहां अगर कोई बादशाह का लड़का भी है और उसने ऐसा काम कर दिया तो उसको भी मौत की सजा होनी है। वहां बचेगा नहीं कोई। यहां तो अगर कोई अमीर आदमी है वो बच जाता है। गरीब आदमी है वो फंस जाता है। नहीं आपको नहीं लगता कि पूरे सोशल मीडिया पर कुछ लोग ये दावा करें मौलाना साहब कि ये जो मामला सिर्फ किसिंग का था जो आप आप ही कह रहे हैं शारीरिक संबंध बनाए और या फिर हल्के स्तर का मामला था जिसमें इतनी कड़ी सजा अलग-अलग तरह के लोग अलग-अलग टिप्पणी कर रहे हैं।

सर लोगों के दावों से कुछ नहीं होता। लोग लोगों का काम कहना है वो तो हर अच्छी बात को बुरी बना दें और हर बुरी बात को अच्छी बना दें। लोगों के सोच पे इस्लामिक सजाएं नहीं है। मैं यही कह रहा हूं कि अगर जज भी सोचे कि मैं इसमें अपने दिमाग से कुछ इधर-उधर कर दूं तो नहीं कर सकता। वहां तो फिक्स हैं सजाएं। सबूत साबित हो गए बस सजा होनी है। बात खत्म। ये भी कह रहे हैं कि पारदर्शिता इस पूरे मामले में रखी जानी चाहिए थी। पारदर्शिता वो नहीं रखी गई। लोगों को जानकारी नहीं दी गई। इसीलिए लोगों ने सवाल उठाए कि किसको जानकारी नहीं दी गई कि आखिर हुआ क्या था पूरी तरह से सऊदी की तरफ से भी और यह भी कहा जा रहा है कि भाई बांग्लादेश के नागरिक थे तो उनको भी इंफॉर्मेशन नहीं दी गई कि बिल्कुल सबको इत्तला है पहले ऐसा तो नहीं कि पकड़ते उनको फांसी दे दी गई पहले उनको पकड़ एक बात क्या इस्लामी न्याय व्यवस्था में कोई ऐसा प्रावधान भी है।

मौलाना साहब के विदेशी नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार हुआ कोई रियायत स्वदेशी नागरिकों के साथ कोई रियायत किसी के साथ नहीं है इस्लामिक सजाओं चाहे वह बाहर का आदमी हो, चाहे अंदर का आदमी हो, चाहे रिक्शा चलाने वाला आदमी हो या प्लेन उड़ाने वाला आदमी हो, चाहे एक वज़र हो, चाहे बादशाह हो, वहां कोई रियायत नहीं है। इसीलिए तो पारदर्शिता है। अगर वहां भी ये चीजें फर्क होने लगे, तो फिर हिंदुस्तान नहीं बन जाएगा वो भी। कि जो चाहे करे, जिस तरह चाहे हिंदुस्तान में जो चाहे कर ले मतलब होता है। का राज नहीं है यहां। कहां कानून का राज है? क्यों नहीं है? हर सजा का प्रावधान 16 साल 16 साल की बच्ची के साथ 16 साल की बच्ची के साथ प्रावधान नहीं है 32 लोगों ने सुनो 32 लोगों ने पांच दिन तक रेप किया क्या हुआ साहब नहीं है क्या नहीं है क्या कानून प्रावधान नहीं है क्या कानून में भी आप आप भी जानते हैं अच्छा आप बता दीजिए ना क्या हुआ नहीं आप भी जानते हैं इतना तो प्रावधान नहीं है क्या हुआ छोड़ दीजिए जैसे आपने कहा ना कि कोई कोई जुर्म होता है है ना अपराध होता है और फिर वो आता है कि भाई वो साबित हो जाता है।

हम तो अदालत में गया साबित नहीं हुआ वो एक अलग मसला लेकिन प्रावधान तो है ना कानून में देखिए एक तो है प्रावधान होना हम एक है उसका इंप्लीमेंटेशन हम उस कानून को नाफिज कैसे करते हैं आप वो कानून आपके यहां कितना एक्टिव है कितना असरदार है कितना उसकी वजह से लोग डर रहे हैं कितना उसकी वजह से लोग गुनाह छोड़ रहे हैं ये ये बड़ी अच्छा आपको आपको याद है कि ऐसा मामला पहले भी आया होगा कहीं और या ये पहला पहला मामला इस जैसे ये मस्जिद में भीतर कहां याद है? नहीं मस्जिद के मामले का मैं तो मुझे तो नहीं पता कि सऊदी में कभी मस्जिद में ऐसा कुछ मामला हुआ हो और उसमें मौत की सजा हुई हो क्योंकि इसलिए भी ये नहीं मौत की सजाएं तो वहां होती हैं। इस तरह के काम करने में लेकिन मस्जिद मस्जिद का मामला ये पहली बार सुन रहे हैं कि इस तरह की बात हुई है। ये पहली बार हां पहली बार सुन रहे हैं। हो सकता है हुआ हो जिस जिसके बारे में हमें जानकारी ना हो। तो यह पूरा प्रक्रिया का पालन करते हुए आप कह रहे हैं कि इस्लाम के कानून का पालन करते हुए यह सजा सुनाई है। ये ठीक बात है। बिल्कुल बिल्कुल इस्लामिक कानून में किसी तरह की कोई रियायत किसी के साथ नहीं है। चाहे वो जितने बड़े ओदे पर हो। क्योंकि ये जो मौलाना काजी और ये ये सब है ना अपने अपने हिसाब से उसको इंटरप्रेट कर देते हैं और जहां जिस तरीके से बना दिया ये ये कहा कि कुरान में तो इसका स्पष्ट विवरण नहीं है। बताइए ना कि कहां पर ये आपकी सोच है। नहीं मेरी सोच नहीं है। लोग कह रहे हैं।

कुछ लोग कह रहे हैं कि कुरान में तो इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। मौलाना क्या करते हैं? अपने हिसाब से अभी अभी ये ताज़ीर ताज़ीर की सजा को लेकर के कि कुरान हदीस में स्पष्ट रूप से निर्धार नहीं है। आप कह रहे हैं कि कुरान ताज़ीर ताज़ीर को समझे ही नहीं आप। मैं समझा रहा हूं बता रहा हूं। इसलिए तो कह रहा हूं कि आपकी जरूरत पड़ी मौलाना। मैंने आपको मैंने आपको बताया कि ताज़र क्या है? मैंने बताया आपको। ताज़र उर्दू का लफज़ है। अब जैसे जैसे एक बयान आपको याद है? अब आपने कह दिया। अब इसको तो पहले समझ लो।

इसको तो समझ लो। पहले ताज़र को तो समझ लो। हां बताइए। ताज़र उर्दू का लफज़ है। अरबी का लफज़ उसके मुकाबले में आता है हद। यानी किसी गुनाह की कोई सजा देना। हम उसको उर्दू में ताज़र कहते हैं। अरबी में उसको हद कहते हैं। ठीक है? ताज़र कोई गुनाह नहीं है। किसी ताज़र कोई गुनाह नहीं है। किसी भी गुनाह की सजा देना। किसी की गुनाह की सजा उसको हिंदी में ताज़र कहते हैं। अरबी में उसको हद कहते हैं। लेकिन आप ये कह रहे हैं कि कुरान में ये पूरी तरह से स्पष्ट किया गया है कि भाई अगर आपने किसी पराई औरत के साथ में या किसी प्यार करने वाली औरत के साथ में आपने किसी से प्यार किया। उसके साथ में अगर शारीरिक संबंध बनाए तो वो अगर मस्जिद में बनाए तो उसकी उसकी सजा का प्रावधान अलग है। गली में बनाए या किसी घर में जाकर के अपने बनाए तो उसकी सजा का प्रावधान अलग है। मैंने मैंने मैंने कब बोला ऐसा? नहीं मैं पूछ रहा हूं सर आपसे। ऐसा है क्या? देखिए इस्लाम में मैंने आपसे बताया कि इस्लाम में शादी से पहले प्यार जैसी कोई चीज है ही नहीं। प्यार ही नहीं मतलब कुछ भी नहीं है। शादी से पहले एक अजनबी लड़की से जिसकी आपके साथ शादी ना हुई हो उसके साथ तन्हाई में बैठना उसके साथ खाने पीने पर होटलों में जाना या उसके साथ घूमना फिरना करना इस्लाम में जायज नहीं है। इस्लाम में सिर्फ इतना है। अगर किसी के साथ आप शादी करना चाहते हैं लड़की के तो उसके घर जाकर उसको देख सकते हैं। ये इजाजत है आपको। अच्छा देख सकते हैं।

तन्हाई में बैठकर उसके साथ बातें करना या उसको घूमने फिरने के लिए इस्लाम में नहीं है। जितने भी लोग अगर ऐसा कर रहे हैं तो वह इस्लाम इस्लाम के खिलाफ कर रहे हैं इस्लाम के खिलाफ इसीलिए इस्लाम में ये चीजें नहीं है जो आज मतलब इस्लाम कोई अगर मुस्लिम धर्म मानने वाला व्यक्ति है वो प्यार कर रहा है कहीं किसी से मिल रहा है और किसी से शारीरिक संबंध बना रहा है या वो ऐसा कर रहा है तो वो गलत है। बिल्कुल गलत है। गुनाह है। गुनाह कबीरा हराम है। बिल्कुल हराम है। हराम है। बिल्कुल एक तो गुनाह होता है। एक होता है गुनाह कबीरा जो हराम की श्रेणी में आता है वो इजाजत ही नहीं है। इन सबको फांसी देनी चाहिए। किसी तौर से इजाजत ही नहीं है। ऐसे लोगों को फांसी दे देनी चाहिए जो ऐसा करते हैं। आप तो ये ये आप क्या कहना चाह रहे हैं? मैं यही तो कह रहा हूं। आप तो मौलाना है ना। आप तो जानकार हैं ना इस्लाम के। देखिए यहां पहले इस्लामी कानून ले आओ। फिर बता दूं। इस्लामी कानून लाना नहीं लाने की बात नहीं है। तो फिर यहां बात ही नहीं करनी उसमें। अच्छा। तब जब आप अगर अगर यह वकालत कर दें कि भाई साहब अपने हिसाब से आप यह कह दें मौलाना साहब कि काबड़ उठाने वाले नशेड़ी भंगेड़ी है आतंकवादी है तब तो आप यह नहीं कहते मैंने क्यों मैंने क्यों कहा उनको मैंने क्यों कहा उनको नहीं क्यों कहा नहीं कहा ये बात सुनो ना सुनो ना क्यों कहा पूछो तो सही क्यों कहा इसकी नौबत क्यों आई इसमें इतना पीछे मैं जाना भी नहीं चाहता क्यों नहीं जाना चाहिए जब आप सवाल कर रहे हैं क्यों नहीं जाना सवाल तो मैंने इसमें भी किया क्योंकि ऐसे लोग जो जो भी हैं फिर इस्लाम में पैदा हुए इस्लाम को मानते हैं अगर वो किसी पराई मर्द और औरत के साथ रिश्ता रखते हैं और प्यार करने का दावा करते हैं तो वह सारे के सारे गुनहगार हैं।

उनको फांसी होनी चाहिए। अगर इस्लामिक अगर इस्लामिक मुल्क हो और इस्लामिक सजाएं यहां हो तो वही सजाएं मिलेंग उनको भी। सर मुल्क हो ये वाला क्यों? मतलब अगर आपको इजाजत है यहां किसी को गाली देने की? अगर आपने तो दी ना फिर भी सुनिए। कानूनी तौर पर तो आपको भी इजाजत नहीं है किसी धर्म को मानने वाले लोगों को भंगेड़ी कहने का, गंगजेड़ी कहने का। कौन कह रहा नहीं है? कौन कह रहा नहीं है? आपको आपको अनुमति है। एक आदमी मेरे सामने नशा कर रहा है। मैं उसको नशेड़ी बोलूंगा। आतंकवादी कह देंगे आप? बिल्कुल कह दूंगा जो पुलिस को जो पुलिस को मारेगा आतंकवादी है गाली दे देंगे किसी जो स्कूल के बच्चे को मारेगा आतंकवादी है बिल्कुल कहूंगा क्यों नहीं कहूंगा अपने हिसाब से तय नहीं मेरे हिसाब से नहीं मेरठ में दो पुलिस वालों को उन्होंने भगा भगा के मारा वैन से खींच के मारा तो मैंने कह दिया आतंकवादी हैं ये भी आप कानपुर में स्कूल के बच्चों आपने कहा कावड़ उठाने वाले नशेड़ी बंगेड़ी होते हैं कानपुर में स्कूली कावड़ उठाने वाले सारे लोग अरे सुनो ना हां हां कैसे हो सकते हैं कावड़ियों को बता रहा हूं सारे सारे आपने तो यही कहा आपका बयान के काम वाले आप लिख के गलत लाए होते हैं आप लिख के गलत लाएं मैंने कहा कि जो पुलिस को मारे वो आतंकवादी है जो स्कूली बच्चों के वैन पर हमला करे वो आतंकवादी है और बाकायदा इसमें जितने लोग जो जाते हैं उसमें ज्यादातर नशेड़ी भंगड़ी होते हैं। मेरा बयान ये है जो पुलिस पथराव करे उसको उन वो सब आतंकवादी बिना धम के कह दीजिए जो पुलिस पे कहीं भी पथराव करे पथराव कहां से आ गया कोई भी अभी आपने कहा ना पुलिस को मारे फिर क्यों नहीं करें कह दीजिए ना जो भी पुलिस पर पथराव करने वाले लोग हैं वो कहीं भी किसी जो पुलिस को मारे मतलब पथराव करना मारने का पथराव का क्या मतलब आ गया इसमें पुलिस पे पत्थर फेंक रहा है कोई पथराव का नहीं पथराव कहां से आ गया कोई आर्मी पे पत्थर फेंक रहा है बात है मारने की मारने मतलब ये बगवा चोला पहन के मार रहे हैं आर्मी के लोगों को मार रहे हैं सर चोले से डिसाइड करेंगे क्यों नहीं डिसाइड करेंगे क्यों नहीं डिसाइड करेंगे अगर कोई भी अगर भगवा अगर भगवा कलर को शांति का प्रतीक हो गया ना ये अगर भगवा कलर को शांति का प्रतीक मानते हैं आप तो फिर पुलिस पे हमला चोला पहन के मारे कोई हरा के मारे तो वो भी गलत कहां से आ गया वो भी गलत है वो कह रहा हूं वो भी गलत आपका नजरिया क्या है मैं मैं तो ये कह रहा था चोला चाहे किसी भी रंग का हो बात कपड़ों से थोड़ी पहचान की नहीं मारने की बात है कपड़ों से थोड़ी पहचान करेंगे मौलवी साहब किसी की हमारे देश के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री ने क्या कहा वो छोड़िए ना आप थोड़ी ना देश के प्रधानमंत्री कहते हैं कपड़ों से अच्छा जो देश के प्रधानमंत्री कहते हैं तो फिर वो मानते हैं।

आप ना माने उनकी बात मैं कह रहा हूं कि देश के प्रधानमंत्री वो सारी मानते हैं कुछ तो मान ही लेनी चाहिए कुछ तो क्या अपने हिसाब से मान लीजिए कुछ मान लो कुछ ना मानो उसमें क्या दिक्कत है सारी मानना तो जरूरी नहीं है ये ये अच्छा है मैंने कहा आपने इस्लामी कानून की बात की मैंने कहा इस्लाम को मानने वाले किसी भी देश में रहते हैं अगर वो किसी पराई मर्द किसी भी देश में नहीं औरत को देख किसी भी देश में में नहीं जहां इस्लामी कानून चलता सिर्फ जहां कानून चलता है वहीं पे हराम है। बाकी कहीं नहीं नहीं हराम यहां भी है। लेकिन यहां आप उनको सजा नहीं दे सकते। देना नहीं देना। आप मांग तो कर सकते हैं। ऐसे लोगों को मौत की सजा होनी चाहिए। तो मैं तो कहता हूं जो कोई भी इस्लाम को मानने वाला पराई औरत को अगर देखता है गलत नजर से उसको मौत की सजा होना चाहिए। आप ये करें। अब मेरा तो बयान है इसमें बकायदा। आप बोलिए ना। कि इस्लामी कानून ले आओ। रेप होना बंद हो जाएगा। इस्लामी कानून ले आओ। क्यों ले आओ? मतलब आप बोलिए ना पहले। यहां तो कानून है ना ऑलरेडी। क्या यहां तो कानून है देश का संविधान है यहां इसीलिए 2 साल की बच्ची के साथ तीन साल की बच्ची के साथ 5 साल की बच्ची के साथ सात साल की बच्ची के साथ 13 साल की बच्ची के साथ 11 साल की बच्ची के साथ के हिसाब से ये बात बोल रहे हैं ये ये ताहिबात है कि यहां पर कानून है उसके अंदर उसका भी जिक्र है और अदालतें हैं यहां पर सिस्टम है यहां पर अफसोस ये है कि आप जैसे पत्रकार जब उनको जस्टिफाई करते हैं ना तो उनके हौसले किसी को जस्टिफाई कर रहे हैं आप किसी को आप कहिए उनको सजा संविधान उनको मौत के घाट उतारो बोलो आप उसको कि जो भी बच्ची के साथ रेप मैं जज थोड़ी हूं बोल तो बोल तो सकते हो मैं जज थोड़ी हूं मैं अरे बोल तो सकते हो क्या कि भाई हां फांसी होनी चाहिए हां मैं तो मांग करता हूं ऐसे लोगों को फांसी होनी चाहिए मैं भी कह रहा हूं फांसी होनी चाहिए आप मैं भी कह रहा हूं फांसी होनी चाहिए इस्लाम मानने वाले जो भी लोग हैं वो अगर किसी पराई औरत पर अब इस्लाम कहां से आ गया कोई भी हो कोई भी हो जो रेप करे उसको फांसी की सजा होनी चाहिए इस्लाम कहां से गलत है इस्लाम गलत है तो इस्लाम कहां से आ गया अभी अब अब बीच में आपने आपने यह क्या गुस्सा दिया? तो जब मैंने मैंने कहा कि आपने कहा कावड़ उठाने वाले नशेड़ी भंग तो तो आपने कहा कि जो पुलिस पर भगवा चोला पहन के चोला तो कोई भी हो सकता है जो पुलिस पर अटैक कर भगवा मैंने आपके कहने पर कहा जब आपने कहा नशेड़ी बंगड़ी को कह दिया भगवा का तो जिक्र ही नहीं किया सुनो एक मिसाल मशहूर है।

सफेद कपड़े पर दाग जल्दी नजर आता है जी जो आदमी अपने आप को बहुत साफ सुथरा कहता है ना जी मैं तो बहुत साफ हूं भगवा कल शांति का प्रतीक है और फिर वो गलत करे तो उसमें उंगली गलत करे मौलाना साहब ये तकरीर होनी चाहिए कोई भी

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