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रुक जाएगी मुस्कान -साहिल की सजा? नीला ड्रम केस में आया चौंकाने वाला ट्विस्ट, मचा चकचार

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सीमेंट कंक्रीट नीला प्लास्टिक का ड्रम और उसके अंदर छिपा वो खौफनाक राज जिसने पूरे देश की रूह कपा दी थी। मेरठ का चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड जिसमें अदालत ने मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई। लेकिन अब खतरनाक क्राइम कहानी में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। क्या मुस्कान और साहिल की फांसी की सजा पर ब्रेक लग जाएगा?

क्या निचली अदालत का वो सख्त फैसला बदल जाएगा? जी हां, नीले ड्रम कांड के आरोपियों ने बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 14 अक्टूबर 2026 मेरठ की जिला अदालत ने इस जघन्य वारदात को रेिस्ट ऑफ रेयर यानी कि विरल से विरलतम मानते हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी का फरमान सुनाया था। साथ ही ₹500 का जुर्माना भी लगा था। लेकिन अब इस फैसले को चुनौती दी गई है। देश की सबसे बड़ी हाईकोर्ट में से एक इलाहाबाद हाईकोर्ट में दोषियों की ओर से सीनियर एडवोकेट सुशील शुक्ला, निधि त्रिवेदी, रितेंद्र प्रताप सिंह, चंदेल और इसी के साथ संदीप कुमार दुबे की मजबूत कानूनी टीम ने एक संयुक्त याचिका दाखिल की है। मांग सीधी है। 30 सितंबर के दोष सिद्धि के आदेश और 14 अक्टूबर की मौत की सजा को पूरी तरह से रद्द किया जाए। आखिर वकीलों ने हाईकोर्ट में क्या दांव खेला है? दोषियों की तरफ से पेश अपील में कहा गया है कि पुलिस का पूरा केस सिर्फ सबूतों पर टिका है और अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। अपील में पांच बड़े तकनीकी सवाल उठाए गए हैं। जिसमें हथियार, सीमेंट और ड्रम खरीदने वाले गवाहों के बयानों में आपस में मेल नहीं है। खरीद की ना तो कोई पक्की रसीद है और ना ही सीसीटीवी फुटेज। जब पुलिस ने बरामदगी की तो कागजों पर किसी स्वतंत्र गवाह के साइन नहीं थे। वीडियोग्राफी की प्रक्रिया में बड़ी खामियां होने का दावा किया गया है। डिजिटल सबूतों के लिए जो जरूरी सर्टिफिकेट चाहिए होता है, वह भी पेश नहीं किया गया। अपील के मुताबिक निचली अदालत ने सबूतों की अनदेखी की और कानून के सिद्धांत को ताक पर रखकर यह फैसला सुनाया। मेरठ के बहुचरर्चित सौरव राजपूत हत्याकांड में मुस्कान ने अब जेल प्रशासन से दया की गुहार लगाई है। मुस्कान ने अपनी दो मासूम बेटियों के भविष्य और उनके पालन पोषण का हवाला देते हुए माफी की मांग की है। हालांकि फांसी की सजा पर अंतिम फैसला हाई कोर्ट और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही तय होगा। यह पूरा सनसनीखेज मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र का है। जहां 3 मार्च 2025 की रात मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या कर दी थी। आरोप है कि पहले सौरभ को खाने में नशीली दवा देकर बेहोश किया गया और फिर चाकुओं से गोद हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर बाथरूम में ले जाकर शव के टुकड़े किए, सिर और हाथ को धड़ से अलग कर दिया, और फिर शव को एक नीले ड्रम में रखकर ऊपर से सीमेंट भर दिया। इसके बाद दोनों आरोपी हिमाचल प्रदेश भाग गए। 18 मार्च को जब दोनों वापस लौटे, यानी कि मेरठ वापस लौटे, तो पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए दोनों को अरेस्ट कर लिया। आरोपियों की निशानानदेही पर ही नीले ड्रम से सौरभ का शव बरामद किया गया था। ठोस सबूतों और सुनवाई के बाद जिला अदालत ने दोनों आरोपियों को फांसी यानी कि मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। फिलहाल अब गेंद इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच के पाले में है। अगले हफ्ते इस केस में सुनवाई होने की संभावना है।

क्या दोषियों के यह तर्क टिक पाएंगे? क्या सबूतों की कड़ियों में वाकई कोई कमी रह गई थी? या फिर निचली अदालत की सजा बरकरार रहेगी? पूरे प्रदेश की नजरें फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी है। नीले ड्रम के इस मिस्ट्री में आगे क्या होगा? यह अहम सवाल है।

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