कश्मीर से ऐसी दो तस्वीरें आई हैं जिन्हें देखकर पूरा भारत डर जाएगा। एक तरफ जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि पाकिस्तान हमें बचा रहा है। नहीं तो दिल्ली के इरादे नेक नहीं है। मुकाबला करने की हिम्मत रखो। तो वहीं दूसरी तरफ कश्मीर की जिस पवित्र पहाड़ी को पीएम मोदी ने प्रणाम किया था उसी पहाड़ी पर कई डिब्बे मिले हैं। इन डिब्बों के ऊपर हरी चादर मिली है। इन डिब्बों का सच जब आपको पता चलेगा तो आपके होश उड़ जाएंगे। इस वीडियो में हम आपको पहले इन डिब्बों का राज ही बताएंगे। उसके बाद आपको बताएंगे कि फारुख अब्दुल्ला ने यह बयान 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाले इंडी गठबंधन के महा विरोध से पहले क्यों दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 मार्च 2024 को अपनी कश्मीर यात्रा के दौरान श्रीनगर पहुंचे थे। इस दौरान पीएम मोदी ने दूर से ही शंकराचार्य पहाड़ी को नमन किया था। इसी शंकराचार्य पहाड़ी पर यह डब्बे मिले हैं। आपको बता दें कि शंकराचार्य पहाड़ी श्रीनगर में स्थित एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक पहाड़ी है। शंकराचार्य पहाड़ी और उस पर बना शंकराचार्य मंदिर हिंदुओं और विशेष तौर पर कश्मीरी हिंदुओं के लिए अत्यधिक धार्मिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। इसे कश्मीर घाटी का सबसे प्राचीन हिंदू मंदिर माना जाता है जो भगवान शिव को समर्पित है। मगर अब सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं
कि इसी पवित्र शंकराचार्य पहाड़ी पर प्लास्टिक के कई डब्बे मिले हैं। उन डब्बों के ऊपर हरी चादर डालकर कब्रें बनाई जा रही हैं। हम आपको एक बार फिर बता दें कि यह दावे सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं। इनकी तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का दावा है कि शंकराचार्य पहाड़ पर बनाई जा रही इन कब्रों के आसपास कुछ दिनों बाद नमाज पढ़नी भी शुरू कर दी जाएगी। आपको जानकारी के लिए बता दें कि हिंदू पहचान से जुड़ी शंकराचार्य पहाड़ी को सदियों पहले तख्त एस सुलेमान नाम दे दिया गया था। जब कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था उस समय पाकिस्तान के इशारे पर हिंदुओं को इस पर्वत पर बने शिव मंदिर में जाने तक नहीं दिया जाता था।
लेकिन मोदी सरकार ने जब 2019 में जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया और 2020 में कई सालों बाद इस शंकराचार्य पर्वत पर मौजूद शिव मंदिर में पहली बार शिवरात्रि मनाई गई थी। मगर अब कई लोगों का कहना है कि इस पर्वत का दोबारा इस्लामीकरण शुरू हो गया है। अगर यह तस्वीरें सच है तो भारत सरकार को तुरंत एक्शन लेना होगा। वैसे भारत सरकार को तो फारुख अब्दुल्ला के बयान पर भी एक्शन लेना चाहिए। आपको बता दें कि 1 नवंबर को इंडी गठबंधन का दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन है। हैरानी की बात देखिए कि 1 नवंबर 1984 को दिल्ली में सिख विरोधी हिंसा हुई थी और अब 1 नवंबर से ठीक पहले एंडडी गठबंधन के
हिस्से फारुख़ अब्दुल्ला ने कश्मीरी लोगों से कहा है कि तैयार रहो। फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरी लोगों के सामने कहा है कि हिम्मत रखो मुकाबला करने की। हिम्मत नहीं रखोगे तो मिट जाओगे। तुम्हारा नामोनिशान मिट जाएगा। हमारा पड़ोसी इनके पीछे लगा हुआ है। कश्मीर का मुद्दा उठाकर पाकिस्तान ही हमें बचा रहा है। नहीं तो केंद्र सरकार के इरादे हमें नेक नहीं लग रहे। इससे ज्यादा भड़काऊ भाषण और क्या होगा? आइए अब आप जाते-जाते यह बयान सुन लीजिए। क्या उम्मीद करेंगे आप इनसे दिल्ली से? करेंगे। अरे हिम्मत रखो उनका मुकाबला करने का। नहीं रखोगे तो मिट जाओगे। तुम्हारा नाम और निशान नहीं होगा। ये चुप है। क्योंकि दुनिया में शोर है और हमारा पड़ोसी लगा हुआ है पीछे। हर जगह कश्मीर का पैसा नहीं वो हमें बचा मैं तो इनके नहीं