भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर एक मुस्लिम देश में आग के सामने जाकर खड़े हो गए। इस जगह और इस आग का सच जब हम आपको बताएंगे तो आप चौंक जाएंगे। इस जगह पर विदेश मंत्री एस जयशंकर का पहुंचना एक बहुत ही बड़ी घटना की तरफ इशारा कर रहा है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जिस मुस्लिम देश में यह आग जल रही है वहीं पर भगवान गणेश और भगवान शिव की नटराज मूर्ति स्थापित है।
यानी एक तरफ यह आग जल रही है तो दूसरी तरफ भगवान शिव का तांडव है जिसे फायर डांस भी कहा जाता है। आपको बता दें कि इस मुस्लिम देश ने पाकिस्तान और तुर्की की वजह से भारत से दुश्मनी मोल ली थी। दुश्मनी भी ऐसी कि भारत सरकार के साथ-साथ भारत के आम लोग भी इस मुस्लिम देश पर टूट पड़े थे।
लेकिन अब एक बहुत बड़ा उलटफेर हो गया है। आइए अब आपको इस होश उड़ा देने वाली कहानी के बारे में समझाते हैं। सबसे पहले इसी आग की बात करते हैं। दरअसल डॉक्टर एस जयशंकर मुस्लिम देश अज़र-बैजान की राजधानी बाकू पहुंचे हैं। बाकू के पास ही अतेशगाह नाम का एक फायर टेंपल है। मुस्लिम देश अज़र-बैजान में मौजूद इस मंदिर में भगवान गणेश और भगवान शिव विराजमान है। इस मंदिर की दीवारों पर देवनागरी लिपि में संस्कृत और गुरुमुखी में पंजाबी भाषा के कई प्राचीन शिलालेख और मंत्र दर्ज हैं। आपको बता दें कि इस स्थान का उपयोग हिंदू, सिख और पारसी तीनों समुदायों के लोगों ने अलग-अलग कालों में पूजा और ध्यान के केंद्र के रूप में किया था।
यह मंदिर जमीन के नीचे से निकलने वाली प्राकृतिक गैस के रिसाव के ऊपर बना हुआ है जिसकी वजह से यहां पर हमेशा एक पवित्र ज्वाला प्रज्वलित रहती है। डॉक्टर एस जयशंकर इसी ज्वाला के सामने खड़े हैं और यहीं से उन्होंने एक बहुत बड़ा दांव खेल दिया है। आपने इस कहानी का धार्मिक एंगल तो समझ लिया है। अब आते हैं इसके कूटनीतिक धमाके पर। आप जानते हैं कि अज़र भाई जान हमेशा से पाकिस्तान और तुर्की का करीबी रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अज़र भाईजान ने तुर्की के साथ मिलकर पाकिस्तान का समर्थन किया। जिसके बाद भारतीय लोगों का गुस्सा अज़र-बैजान पर टूट पड़ा। भारत के आम लोगों ने अपनी अज़र-बैजान की यात्राओं को रद्द कर दिया।
इस देश को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचना शुरू हो गया। इसी बीच भारत सरकार ने अज़र-बैजान के पड़ोसी अर्मेनिया को जमकर हथियार बेच दिए और शायद आखिरी डंडा भगवान गणेश और शिव जी ने चला दिया। जिस तुर्की के नाम पर अज़र-बैजान भारत के सामने अकड़ दिखा रहा था, उसी तुर्की के साथ अज़र-बैजान की बहुत अजीब जंग शुरू हो गई है। सबसे पहले तो तुर्की को यह पसंद नहीं आया कि अज़र-बैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीव कुछ समय पहले पीएम मोदी से क्यों मिले? इसके अलावा तुर्की को असली झटका तब लगा जब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतिन्याहू संयुक्त राष्ट्र में स्पीच दे रहे थे और सभी मुस्लिम देश वहां से वॉक आउट कर रहे थे। मगर अज़रान का डिप्लोमेट वहीं बैठा रहा। यह मामला शांत होता उससे पहले ही तुर्की और अज़र-बैजान के बीच अब हिजाब को लेकर बड़ी जंग शुरू हो गई है। दरअसल अज़र-बैजान की सरकार ने सरकारी स्कूलों में एक नया यूनिफार्म नियम लागू किया है। इस नियम के तहत स्कूलों में लड़कियों के हिजाब पहनने पर रोक लगा दी गई है। हैरानी की बात देखिए कि इस फैसले का विरोध अज़र-बैजान में नहीं हो रहा बल्कि तुर्की में हो रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दवान समेत तुर्की के हजारों कट्टरपंथी अब अज़र बैजान को गालियां दे रहे हैं। बोल रहे हैं कि तुमने स्कूलों में हिजाब बंद कैसे किया। अज़र बैजान को तुर्की का यह रूप पसंद नहीं आया। शायद पहली बार अज़र बैजान को भी समझ आ गया है कि तुर्की गद्दारी कैसे करता है।
गुस्से में आकर अज़रान ने तुर्की के 31 लोगों की अपने देश में एंट्री बैन कर दी। लेकिन यहीं पर एंट्री हुई विदेश मंत्री एस जयशंकर की। एस जयशंकर ने अज़र भाईजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीव से मुलाकात की। भगवान गणेश भगवान शिव और इस पवित्र ज्वाला के दर्शन किए। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि इस ज्वाला ने ही अज़रान को तुर्की की दादागिरी के सामने लड़ने का मौका दे दिया है। क्योंकि अचानक दुनिया में युद्धों के कारण अज़र-बैजान के पास मौजूद नेचुरल गैस की मांग और कीमतें दोनों बढ़ गई हैं। अब अज़र-बजान का कहना है कि हम तुर्की के ऊपर निर्भर नहीं हैं। यहीं पर अब भारत अपना कूटनीतिक दांव खेलेगा।