टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले के दो आरोपी रिहान सिंह और फूल सिंह यह दोनों मुंबई आते हैं और मुंबई के एक होटल में 5 दिन तक ठहर के इन्हें इस पूरी वारदात को अंजाम कैसे देना है इसकी बारीकी से प्लानिंग की जाती है। ये पूरी प्लानिंग की जाती है इसी कमरा नंबर 200 में जिसमें ये दोनों आरोपी रुके हुए थे और ये होटल का नाम है आरआर रेजिडेंसी जहां 19 तारीख को पुलिस पहुंचती है और इन दोनों आरोपियों ने आखिर इस रूम के भीतर क्या कुछ प्लानिंग की क्या-क्या वारदात को किस प्रकार अंजाम देना है किन-किन से बात की इसकी तमाम जानकारी लेती है।
आपको बता दें कि ये दोनों आरोपी इसी कमरा नंबर 200 में जब उन्हें हथियार मुहैया कराए गए थे तो उनके द्वारा गन मिसफायर हो गई जिसकी आवाज को उन्होंने बाद में कोई बहाना देकर जैसे भी बहाना देकर इस पूरे मामले को वहीं पर बर्खास्त कर दिया था। लेकिन जब पुलिस यहां पर पहुंचती है तो गोली के निशान देखकर उनके द्वारा शक किया जाता है और जब होटल में पूछताछ की जाती है तो पता लगता है कि ये दोनों आरोपी अपना नाम बदलकर यहां पर रह रहे थे। आरआर रेजिडेंसी की इस होटल को आप देखिए और हम नीचे चलते हैं और देखते हैं कि जो यहां के मैनेजर है इनसे और क्या कुछ जानकारी निकल पाती है क्योंकि मुंबई पुलिस बताती है कि इस पूरे घटना में एक या दो नहीं बल्कि कुल चार ऐसे लोग थे जो मुंबई आए थे जिनमें से तीन शूटर्स थे। दो शूटर्स थे। एक जन बाइक चला रहा था जो उस पीली कलर की Pulsar बाइक पे था और चौथा जो आरोपी है वह इनके साथ यहां पर रहकर इन्हें इस पूरे एरिया की जो रेकी करने में मदद है वो दे रहा था। हमारे साथ इसी होटल के कर्मचारी है।
आपका नाम क्या है? धीरज यादव। धीरज जी बताइए कि ये जो दो आरोपी है यह यहां पर कब आए थे और इन्होंने अपना नाम क्या बताया था? इन लोग आए थे 14 तारीख को। 14 तारीख को आए थे। 11:00 बजे एंट्री किया था। हम वही एक का नाम है अंकित कुमार एक रामदेव ठीक है एक का अंकित और एक का नादीप हां तो इन्होंने जब यहां पर आए तो ये कितने दिन के लिए रहने आए हैं क्या बताए थे उन लोग तो पांच दिन रहा था वैसे डेली हम लोग का पेमेंट लेते थे ठीक है तो जब आए थे तो एक दिन का बोल कर आए थे कि बोले थे लंबे रुकेंगे नहीं उन लोग बोलता था कि रुकेंगे दो-ती दिन दो-ती दिन रुकेंगे और इनकी जो बुकिंग थी वो ऑनलाइन की गई थी कि कैश में आकर इन्होंने इंक्वायरी की फिर बुकिंग बुकिंग नहीं था। डायरेक्ट आया था। डायरेक्ट आए। और क्या बोली कि रूम चाहिए? रूम चाहिए। हां। इनकी क्योंकि चारप दिन रुके हैं तो जाहिर सी बात है कि आते जाते होंगे अपने रूम से। कितने बजे निकलते थे? आपने क्या देखा? कितने बजे वापस आते थे? कोई 10 11 बजे निकलता था। फिर दो-ती घंटा में लौट जाता था। अच्छा। मतलब तीन-चार बजे आ जाते थे। हां। ओके। और कभी-कभी निकलता था। कभी-कभी रूम में फिर रह जाता था। हम दो जन था। दो दिन अच्छा एक बार यह भी देखा गया कि यह जो आरोपी हैं इनके द्वारा जब गन मिसफायर हुई तो आप लोग यहां पर हैं आप लोग को आवाज आई होगी जब गन मिसफायर हुई होगी। इधर तो आवाज वाज कुछ नहीं आया था। रूम से नीचे आवाज नहीं आई। नहीं ओके रूम में कुछ आवाज नहीं आया था।
हां ओके और आपने कभी इन्हें फोन पर बात करते हुए सुना कुछ इनकी बातचीत सुनी जिससे या फिर इनके स्वभाव से ये कैसे ये झगड़ा मतलब इनका एटीट्यूड कैसा होता था इसका एटीट्यूड तो ये हो सकता था पूरा सीधा सा था कुछ उधर तो इधर कुछ करता था ना हम हो उनसे इधर तो बात नहीं करता था रूम में होता था रूम में होता था कभी उनसे मिलने के लिए कोई आया हो बाहर से जिसकी एंट्री नहीं हो पोशन है नहीं बाहर मिलता था बाहर बाहर मिलता था। किससे मिलता था? मालूम है किससे मिलता था? नहीं। एक लड़का आता था। एक लड़का आता है। हां। तो ये दो लड़के बाहर किसी एक लड़के से मिलते थे। हां। ओके। और ये निकले कब यहां से? रोज आ जा रहे थे और 18 तारीख को ये घटना है।
ये लोग 18 तारीख को थे इस होटल में। हां। कल कितने बजे? 4:10 यहां निकले थे। शाम को। हां। ठीक। अब वापस आए ये लोग? वो वापस नहीं आए। फिर कॉल कर रहे थे तो कॉल ने फिर फोन सोचो बता रहा था। बस को आपने कॉल किया था। हां। वो नंबर स्विच ऑफ आ रहा है। हां। 19 तारीख को हम लोग कॉल किए थे। 19 तारीख को। क्यों? कि रूम रहेगा कि चेक आउट करेगा से। अच्छा उस उस दिन का पेमेंट कर दिए थे। हां पेमेंट कर दिया था। अपना पूरा सामान लेके निकले थे ये लोग। नहीं सब कुछ बेवकूफ यहीं पर है। अभी भी यहां पर है। हां। कहां है
? 2001 में लोग करके चला गया है पुलिस को। अच्छा तो अपना सामान वो लोग यहीं पे रखे थे। हां। क्या-क्या सामान लेकर आए थे वो लोग? वो बैग में था कपड़ापड़ा वगैरह है। चप्पल, जूता वता ये सब। ये सब हां मतलब कितने दो तीन बैग होंगे? दो बैग है। दो बैग। हां। ठीक है। भैया आप बताइए क्योंकि आप इन्हें अवेलेबल सारी जो चीजें कभी पानी चाहिए होगा, कभी कुछ चाहिए होगा तो आपसे मांगी होगी। क्या बात हुई थी? कैसे थे? ऐसा कुछ मांगा नहीं हम लोगों से। खाली एक दिन रूम क्लीन करवाए थे। उसके बाद रूम क्लीन नहीं करवाए। फिर ठीक है। आप आपने रूम क्लीन किया था? हां। क्या देखे थे रूम में? रूम में कुछ नहीं देखे थे। खाली उसका बैग वगैरह पड़ा था। बस वही लड़का था और कुछ नहीं था उसका। हम कुछ नशे वगैरह भी कर रहे थे क्या? सिगरेट पिया सिगरेट तो नॉर्मली होती कोई भी पीता है वही चीज़ है।
उसके बाद कोई कुछ नहीं देखने। ठीक है। सिगरेट पीते हुए उनके रूम में आपने देखा था और उनका रूम क्लीन किया था। क्लीन किया। तो जब देखिए पुलिस बता रही है कि गन मिसफायर हुई है। तो कहीं पे गन मिसफायर हुई तो लगी होगी। कहीं पे निशान होगा। वो निशान ऐसा कुछ तो हम दिखा नहीं। उसमें हम लोग जब बेडशीट चेंज किए तो हम लोग को वैसा कुछ दिखा नहीं। ठीक है। नहीं चेंज। बेडशीट चेंज किया। हां उसमें कुछ दिखा नहीं। तो आपने उनको कुछ बात करते हुए सुना होगा। क्या बात कर रहे हैं?
नहीं हम लोग के सामने कभी बात ही नहीं किए। हम लोग जब से आए वो लोग क्लीन क्लीन भी किए तो हमारे सामने कभी बात नहीं किया। कुछ टिपिप दिए थे आपको? नहीं हम लोग नहीं। ठीक है। कुछ और जब आप उनको बाहर जाते हुए देखते थे। कहां जाते थे? क्या करते थे? कितने? आप कहां जाते थे या नहीं जाते थे? हम लोग कितने बजे निकलते थे? 10 11:00 बजे निकलते थे। लोग नहा धो के खाना खाने के लिए निकलता था। वो खाना खा कहां जाते? नहीं जाते। ये हम लोग को पता नहीं। वो खाना कहां से मतलब बनाते थे? लेकर आते थे। आप लोग प्रोवाइड करते नहीं नहीं वो लोग बाहर से बाहर से जाते थे बाहर से ही खाते थे चाहे आते बाहर से आ जाते थे अच्छा बाहर से सारा चीज बाहर से होता था उनका हर चीज बाहर से होता था यहां पे सिर्फ रह रहे थे रह रहे थे तो जब पुलिस आई तो क्या देख रही थी.
पुलिस जब आप भी पुलिस के साथ अंदर गए रहोगे तो क्या देखा आपने अंदर हम क्या देखा बैग वगैरह जो जो पड़ा था बैग वगैरह वही चीज देख क्या पड़ा उसमें कपड़े वगैरह थे और चप्पल जूता थे ठीक है इसके अलावा और कुछ नहीं था कुछ नहीं थे और ये लड़के ने अपना नाम वाम भी बदला बदल के बताया था हां जो आईडी पे लिखा हुआ था वही नाम है उसका अंकित और मयंक जो था वही नाम है उसके अलावा कोई नाम नहीं है जो हम लोग को आईडी दिया है अच्छा जो आईडी दिया आप लोगों ने लिया और रूम दे दिया रूम दे दिया हां ज्यादा इंक्वायरी वगैरह कोई करता भी नहीं है आजकल हां और क्या काम किससे आए हैं कहां से आए हैं कुछ बताए नहीं वो लोग बोला खाली घूमने के लिए हम लोग आए हैं ऐसा बोला है हम लोगों ने रूम सो घूमने के लिए आए तो रूम दे देते हैं तो ऐसा कुछ हम लोग को पता नहीं था .
तो हम लोग नहीं पूछे इतना पूछे भी नहीं हम लोगों ने उसके बाद फिर वो लोग रूम उन लोग रूम दिए चेकिंग कर लिए तो दो लोग फोड़ दिए रूम दो लोग हां कौन दोनों जो जो आईडी दिया ना वही दो लोग थे वही दो लोग थे चार पांच दिन थे 16 तारीख को आए 18 को चले गए और उसके बाद आए नहीं आप लोग फोन कर रहे थे तो जवाब मोबाइल स्विच ऑफ बताया स्विच ऑफ बताया हां कुछ रिस्पस नहीं कोई रिसोंस नहीं आया हां पेमेंट क्लियर करके गए कि नहीं पेमेंट सारा हम लोग का रोज के रोज 11 बजे हम लोग पेमेंट ले लेते थे अच्छा वो लोग 4:00 बजे निकला है
वो लोग तो शाम को निकला है तो फिर हम लोग पेमेंट पहले ही ले लेते तो पेमेंट कितना था और कैश में लेते थे ऑनलाइन कैश में भी देते थे वो कितना 1500 देते रोज का 1500 प्रति दिन कैश में जी तो देखिए एक बड़ी बात इन्होंने जो बताई कि ये जो दोनों आरोपी है ये जब यहां पर आते थे तो बाहर कोई तीसरा शख्स खड़ा रहता था जिससे ये मिलते थे इसके अलावा क्योंकि यहां का रेंट ज्यादा नहीं है ₹1500 प्रतिदिन है जिसे ये लोग कैश के द्वारा इसका पेमेंट किया करते थे दोनों ही आरोपियों ने अपना नाम गलत बताया था और साथ ही जो फर्जी आधार कार्ड है वो इस होटल में देकर वे यहां पर रह रहे थे। इस प्रकार ये होटल है और देखिए कि यह जो पूरा रूम स्ट्रक्चर है ये क्योंकि ज्यादा बड़ा नहीं लेकिन एक कॉस्ट एफिशिएंट होटल है जिसके चलते आप देखेंगे कि 102 और इसी के ऊपर जो 2011 कमरा नंबर है वहां पर ये रहा करते थे और किस प्रकार ये जो पूरी वारदात है उसे यहां पर अंजाम दिया गया
जिसके चलते अब मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच द्वारा इस होटल में जो रूम में वह रहते थे उसके भीतर जो कपड़े, बैग और चप्पल बरामद हुई है वो अभी भी उसी के भीतर है। 18 तारीख को जब इस घटना को अंजाम दिया गया तब इन आरोपियों ने यहां से चेक आउट नहीं किया था। अपना सामान अभी भी उसी कमरे में रखा हुआ है जिसे फॉरेंसिक एविडेंस के तौर पर पुलिस ने अपने कब्जे में लिया है। देखना होगा कि इसके जरिए और कौन-कौन से बड़े खुलासे इस पूरी घटना में निकल कर सामने आते हैं।