टाइगर श्रॉफ पर अटैक के बाद से सोशल मीडिया पर उनके नाम से कई फेक पोस्ट वायरल हो रही है। इनमें एक पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई को लेकर दावा किया जा रहा है कि अगर वो मुस्लिम या ईसाई होता तो लोग उसे आतंकवादी कहते और उसके एनकाउंटर या फांसी की मांग करते।
लेकिन हिंदू होने की वजह से उसका महिमामंडन किया जा रहा है। इसी बीच 20 अक्टूबर की शाम टाइगर श्रॉफ की ऑफिशियल टीम ने एक स्टेटमेंट जारी कर इन फर्जी पोस्ट और मनगढ़ंत कहानियों को लेकर चेतावनी दी।
टीम ने साफ कहा कि टाइगर ने हालिया फायरिंग की घटना या उससे जुड़े किसी भी मामले पर कोई बयान वीडियो या आधिकारिक कम्युनिकेशन जारी नहीं किया है। टीम के मुताबिक सोशल मीडिया पर टाइगर के नाम से फैब्रिकेटेड स्टोरीज एआई से बनाए गए वीडियोस और स्क्रिप्टेड नैरेटिव्स फैलाए जा रहे हैं।
टीम ने मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया पेजों से अपील की है कि किसी भी जानकारी को पोस्ट करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। सिर्फ व्यूज और पैसे कमाने के लिए गलत सूचना ना फैलाएं। टीम ने चेतावनी दी है कि टाइगर के नाम से फर्जी कंटेंट बनाने, प्रमोट करने या फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कारवाई की जा सकती है। साथ ही लोगों से अपील की है कि टाइगर और उनकी ऑफिशियल टीम की तरफ से आने वाली वेरीिफाइड जानकारी पर ही भरोसा करें।
दरअसल 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जूहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई थी। पुलिस के मुताबिक करीब 7:00 बजे तीन हमलावरों ने उनकी गाड़ी को निशाना बनाया। टाइगर इस घटना से सुरक्षित रहे लेकिन उनके ड्राइवर को गोली लगी। इसके बाद मुंबई पुलिस ने कई टीमें बनाकर आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने तीन कथित शूटरों को राजस्थान के कोटा से पकड़ा। पुलिस के मुताबिक आरोपी मुंबई से भागकर नेपाल जाने की कोशिश कर रहे थे। अब जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि हथियार कहां से आया? हमले की साजिश में किसने मदद की और इसके पीछे कौन लोग थे? इसी मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मंगलवार 20 अक्टूबर को चार लोगों को गिरफ्तार किया।
इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। आरोपियों की पहचान कुणाल, सुमित, राधा और बबीता के तौर पर हुई है। पुलिस के मुताबिक राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से जबकि कुणाल और सुमित को सोनीपत से पकड़ा गया। महाराष्ट्र पुलिस की सीआईडी ने इनकी कस्टडी में पूछताछ और औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति भी मांगी है। पुलिस की जांच के मुताबिक कुणाल की पहचान कथित तौर पर अनिल पंडित नाम के शख्स से हुई थी। आरोप है कि अनिल के कहने पर कुणाल अमृतसर से एक पिस्तल और 20 कारतूस लेकर आया था।
इसके बाद कुणाल राधा और बबीता के साथ मुंबई पहुंचा। पुलिस का दावा है कि पिस्तल राधा के बैग में थी और 17 अक्टूबर को दादर के एक होटल में रुकने के दौरान एक नाबालिक लड़का उससे वह बैग लेकर चला गया। अगले दिन टाइगर की कार पर फायरिंग हुई। पुलिस के मुताबिक घटना के बाद कथित तौर पर अनिल पंडित ने कुणाल से संपर्क कर शूटर्स के मुंबई में फंसने की बात कही और उनके भागने का इंतजाम करने को कहा। इसके बाद राधा और बबीता ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
जांच में यह दावा भी सामने आया कि टाइगर श्रॉफ कथित तौर पर हमलावरों का पहला टारगेट नहीं थे। इससे पहले एक बड़े बॉलीवुड स्टार को निशाना बनाने की योजना थी। लेकिन कड़ी सुरक्षा के चलते प्लान बदल दिया गया। पुलिस के मुताबिक 11 अक्टूबर को भी टाइगर को निशाना बनाने की कथित कोशिश हुई थी। लेकिन उस दिन वह फुटबॉल ग्राउंड नहीं पहुंचे थे। इन सभी पहलुओं की जांच जारी है। किसी के नाम से कुछ भी लिखकर सोशल मीडिया पर डाल देना आसान है लेकिन उसका नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है।
खासकर तब जब मामला फायरिंग, अपराध और लोगों की सुरक्षा से जुड़ा हो। इसलिए ऐसे किसी के नाम से कोई बयान या वीडियो दिखे तो उसे सच मानने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें क्योंकि सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट का वायरल होना उसके सच होने का सबूत नहीं है। मेरा नाम आकांक्षा गोगोई है।