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दिशा सालियान केस में नया द्विस्ट नीलेश ओझा ने किया चौंकाने वाला खुलासा..

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सर परमवीर सिंह के मामले में आपने याचिका दायर की थी। उनकी गिरफ्तारी को लेकर क्या कहना चाहेंगे उसके बारे में? क्या दहली रखी गई? क्या चर्चा हुई? देखिए हमारे जो क्लाइंट है जो असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस थे भीमराज घाडगे जी इन्होंने एनआई कोर्ट में अर्जी लगाया था क्योंकि उनके उनके पास में बाकी तो सबूत थे ही। सचिन वाजे ने खुद कोर्ट में उनके पास में एक्स्ट्रा जुडिशियल कन्फेशन दिया है कि परमवीर सिंह के कहने पे ही उन्होंने मनसुख हिरन का मर्डर किया है और यह पूरी वारदात को अंजाम दिया है।

तो इस बारे में उन्होंने एफिडेविट भी दिया और ये बात हमने सीबीआई को दे दी है। और एक दूसरे ईशान सिन्हा करके अह अह यह जो साइबर एक्सपर्ट थे उनके स्टेटमेंट में भी एनआई के चार्जशीट में आया है कि परमवीर सिंह ने उनके थ्रू एक ईमेल करवा के लिया और यह दिखाने के लिए कि यह जो एंटीले का जो किया है सबकांड वो जयश मोहम्मद ने खुद ने जिम्मेदारी ली है .

और उसके ऊपर में फिर वो ईमेल के लिए उसको ₹5 लाख दिए और यह सब चीजें उसमें आ चुकी है एनआई के स्टेटमेंट में तो उस स्टेटमेंट के आधार पे और अन्य चीजों के आधार पे घाडगे साहब ने एक अर्जी लगाया कि इसमें उसको कोऑक्यूज़्ड बनाइए एनआई के चार्जशीट में एनआई केस में तो ये जैसा अर्जी लगाया उन्होंने उसके जवाब में परमवीर सिंह ने एक रिप्लाई एफिडेविट दिया। अब जो रिप्लाई एफिडेविट दिया रिप्लाई एफिडेविट में ये है उसके रिप्लाई एफिडेविट की साइन और उसके साथ में जो ऑफिशियल डॉक्यूमेंट जोड़ा है उसकी है ये ओरिजिनल साइन। तो एक्चुअल में हुआ क्या था जो रिप्लाई एफिडेट नोटरी के पास जब किया तब उसमें परमवीर सिंह प्रेजेंट नहीं था। दूसरे पर्सन ने उनकी साइन की है। यह बात घाडगे साहब ने खुद जाके वेरीफाई की।

उस नोटरी का भी इनके पास में वीडियो रिकॉर्डिंग स्टिंग ऑपरेशन है कि वो क्या बोल रहा है कि ये एक आदमी की साइन है ही नहीं। दूसरा उस आजू-बाजू के जो सीसीटीवी कैमरे के पूरे फुटेज भी लिए हैं। उसमें भी परमवीर सिंह वहां आता हुआ नहीं दिख रहा है। जो टाइम पे ये नोटरी किया हुआ बता रहे हैं। तो यह सब चीजें लेकर अर्जी लगाया कि इसका झूठा एफिडेविट है। ये इमपर्सोनेशन का केस है। परमवीर के सिग्नेचर दूसरे ने मारा है। एक और उसने रिप्लाई एफिडेविट में और एक झूठ बात बोला था कि घाडगे साहब जो है यह अनिल देशमुख के स्टूज है। उसकी कठपुतली है। उसके एजेंट हैं और अनिल देशमुख के कहने पे इन्होंने एक फ़ाइल किया। अनिल देशमुख जो अह फ़ॉर्मर होम मिनिस्टर थे। ये बात भी झूठी इससे साबित होती है।

पहली चीज तो उसने कोई सबूत दिया ही नहीं है। लेकिन इसके अलावा घाडगे साहब ये खुद अनिल देशमुख के ऊपर सतीश साल्यान जी ने आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे इन सबके खिलाफ में 2000 करोड़ का जो डिफॉमेशन सूट फाइल किया है। उसमें विटनेस घाट के साहब है। एक और जो दिशा सालयान का एफआईआर रजिस्टर हुआ है सतीश सारा की तरफ से गैंगरेप मर्डर का उसमें अनिल देशमुख का आरोपी है। उसमें भी हमारे वन ऑफ द विटनेस गार्ड के साहब है। तो ये पूरा झूठा स्टेटमेंट है। तो झूठा स्टेटमेंट दिया करके उसके ऊपर प्रोसीक्यूशन करने के लिए एक परजुरी का प्रोविजन होता है। जिसमें एक एप्लीकेशन लगता है 340 सीआरपीसी था पहले। अभी 379 ऑफ़ बीएएसएस है। तो उसके तहत अरजी लगाया। अब वो अरजी में क्या होता है? कोर्ट और हमारा होता है तो कोर्ट ने उसमें पहले दिन इंक्वायरी स्टार्ट कर दिया और नोटरी को नोटिस इशू कर दिया तो वो जैसा वो केस का हियरिंग आज आया आज डेट था पिछले डेट पे नोटिस इशू किया था नोटरी को तो आज परमवीर का वकील आया उसने और फिर एक एफिडेविट दे दिया कि ये कोर्ट की इंक्वायरी में जवाब बोल के अब 340 के इंक्वायरी में आरोपी को जवाब देने का अधिकार नहीं है। तो हमने इसके ऊपर फिर

आज हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट और एक जसबीर सिंह का 2022 का लेटेस्ट जजमेंट आया है कि आरोपी इसमें इंटरफेयर नहीं कर सकता वो पूरा पॉइंट आउट करके आज पूरा एक घंटा कोर्ट को अच्छे से समझा के बताया और आज कोर्ट में सब एनआई के वकील भी थे। सचिन वाजे भी था। सभी लोग थे और इसका परमवीर का वकील भी सुबह था। सेकंड हाफ में नहीं आया वो। तो हमने कोर्ट को पॉइंट आउट किया कि इनको अधिकार नहीं है इसमें जवाब देने का और इन्होंने जो जवाब दिया है यह इंटरफेरेंस इन द कोर्ट प्रोसीडिंग है और वो आप बॉम्बे हाई कोर्ट के खिलाफ जाकर ओवरऑल प्लीडिंग इन्होंने लिया है। तो इनके खिलाफ में नया प्रोसक्यूशन करो आप और इनके खिलाफ में बॉम्बे हाई कोर्ट के लॉ के खिलाफ जाके जो सबमिशन दिया है कंटेंप्ट का रेफरेंस फॉरवर्ड करो और उसका जो पहला वाला जो हमारा कंप्लेंट है परजुरी का उसमें राधेश्याम गर्ग का 2009 का जजमेंट है.

ऐसा सिग्नेचर मिसमैच होती है तो कोर्ट के रजिस्ट्रार के थ्रू इंक्वायरी रिपोर्ट बुलाना है और उसके बेस पे फिर उसका 341 डी सीआरपीसी में अरेस्ट वारंट निकाल के 37 379 वन डी ऑफ़ बीएनएसएस में और फिर कोर्ट रजिस्ट्रार को आर्डर करेगा कि इनके खिलाफ में केस रजिस्टर करो। मतलब केस क्या चलेगा बाद में? कोर्ट कोर्ट के साथ में धोखा करने वाला आरोपी परमवीर सिंह तो कोर्ट का रजिस्टर वर्सेस परमवीर सिंह ऐसा केस चलेगा। तो इस बारे में आज आर्गुममेंट हुआ। तो इस मामले को लेकर जब जैसा कि आप कह रहे हैं कि जो हलफनामा था या जो उस पर गलत सिग्नेचर किए गए तो क्या कोर्ट इस पर कुछ एक्शन लेने वाला है या आगे की क्या प्रोसीडिंग्स होगी? कोर्ट ने प्रीिलिमिनरी इंक्वायरी तो स्टार्ट कर दिया है। नोटिस निकाल दिया है नोटरी को लेकिन हमने उसके आगे उनको आज केस ला दिया कि नोटरी को नोटिस निकालने की जरूरत नहीं है। प्रोसीजर है कि आप रजिस्ट्रार के थ्रू जुडिशियल इंक्वायरी बुलाइए और हमारे पास में सीसीटीवी है।

हम दे देंगे। अभी ये ओपन एंड शर्ट केस है। उसके बाद में आप इनका अरेस्ट वारंट निकालना, इनको कस्टडी में लेना और फिर बाद में रजिस्ट्रार के थ्रू कंप्लेंट फाइल करना। और इसमें सुप्रीम कोर्ट का नया जजमेंट आया नवीन सिंह का कि इनको जमानत नहीं देना है। जेल में रखकर ही केस चलाना है। सर अभी सुनवाई कब होगी? कब अदालत अपना फैसला सुनाएगी? कोर्ट ने अपने रोजनामा में आज लिख दिया है कि 5 नवंबर को कोर्ट इसमें फैसला सुनाएगी। ओके। साथ ही दिशा साल्यान के केस के बारे में थोड़ा स्टेटस क्या अपडेट्स है? क्या करंट उसके बारे में थोड़ा सा बताइए। देखिए दिशा साल्यान के केस में देखिए अगर आप कंपैरेटिव अगर इसको देखें कि अनिल देशमुख के खिलाफ में एफआईआर हुआ था 2021 में तब वो होम मिनिस्टर था। उस समय पिटिशनर वन ऑफ द पिटिशनर घनश्याम उपाध्याय जी थे। उनका वन ऑफ द काउंसिल में था। तो एफआईआर का आर्डर हुआ। फिर उसमें उसको रिजाइन करना पड़ा होम मिनिस्टर की पोस्ट से। फिर एफआईआर रजिस्टर हुआ लेकिन एफआईआर होने के 350 दिन मतलब एक साल के बाद में उसको अरेस्ट किया था। सीबीआई तब तक अपने पूरा एविडेंस है सब सब जमा कर रही थी। तो नॉर्मली बड़े मैटर में सीबीआई थोड़ा अपना ग्राउंड वर्क ज्यादा करती है। लेकिन हमारा क्या कहना है इस केस में कि ऑलरेडी इतने सारे मटेरियल है। आप ठीक है वो मेन आरोपी को थोड़ा 10 दिन लेट पाथ अरेस्ट करो।

बाकी का तो आप जो है बाकी का कर रही है सीबीआई उनके लेवल पे हम उस दिन आईओ ने बताया था कि मतलब काम तो हमारा चल रहा है लेकिन थोड़ा ज्यादा स्पीड में होना चाहिए हाई कोर्ट ने ऑलरेडी मिनी चार्जशीट बना के दिया है हाई कोर्ट के आर्डर के हिसाब से जो मटेरियल अवेलेबल ऑन रिकॉर्ड है सीसीटीवी फुटेजेस है इसके बेस पे तो अभी कम से कम 30 पुलिस अधिकारी जेल में जाना चाहिए तो इतना होते हुए थोड़ा सीबीआई हमारे हिसाब से स्लो चल रही है और यह सेक्सुअल असल्ट का गैंग रेप मर्डर का केस है। हमने हाई विटनेस वगैरह सब दे दिए हैं। तो हमारे क्रूशियल विटनेस को इन्होंने बुलाना चाहिए था। तो अभी तक बुलाया नहीं। इनका होमवर्क थोड़ा ज्यादा ही चल रहा है। तो इसके लिए अभी हम सीबीआई कोर्ट में मॉनिटरिंग ऑफ इन्वेस्टिगेशन और डायरेक्शन टू इन्वेस्टिगेट एस पर एसओपी और सुप्रीम कोर्ट डायरेक्शन। उसका एक अर्जी लगा रहे हैं और फिर उसमें सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट देना पड़ेगा। सर परमवीर सिंह के मामले में आपने याचिका दायर की थी। उनकी गिरफ्तारी को लेकर क्या कहना चाहेंगे उसके बारे में? क्या दलीलें रखी गई? क्या चर्चा हुई?

देखिए हमारे जो क्लाइंट है जो असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस थे भीमराज घाडगे जी इन्होंने एनआई कोर्ट में अर्जी लगाया था क्योंकि उनके उनके पास में बाकी तो सबूत थे ही। सचिन वाजे ने खुद कोर्ट में उनके पास में एक्स्ट्रा जुडिशियल कन्फेशन दिया है कि परमवीर सिंह के कहने पर ही उन्होंने मनसुख हिरन का मर्डर किया है और यह पूरी वारदात को अंजाम दिया है। तो इस बारे में उन्होंने एफिडेविट भी दिया और यह बात हमने सीबीआई को दे दी है। और एक दूसरे ईशान सिन्हा करके अह अह यह जो साइबर एक्सपर्ट थे उनके स्टेटमेंट में भी एनआई के चार्जशीट में आया है कि परमवीर सिंह ने उनके थ्रू एक ईमेल करवा के लिया और यह दिखाने के लिए कि यह जो एंटीले का जो किया है सबकांड वो जयश मोहम्मद ने खुद ने जिम्मेदारी ली है और उसके ऊपर में फिर वो ईमेल के लिए उसको ₹5 लाख दिए और यह सब चीजें उसमें आ चुकी है एनआई के स्टेटमेंट में तो उस स्टेटमेंट के आधार पे और अन्य चीजों के आधार पे घाडगे साहब ने एक अर्जी लगाया कि इसमें उसको कोऑक्यूज़्ड बनाइए एनआई के चार्जशीट में एनआई केस में तो ये जैसा अर्जी लगाया उन्होंने उसके जवाब में परमवीर सिंह ने एक रिप्लाई एफिडेविट दिया। अब जो रिप्लाई एफिडेविट दिया.

रिप्लाई एफिडेविट में ये है उसके रिप्लाई एफिडेविट की साइन और उसके साथ में जो ऑफिशियल डॉक्यूमेंट जोड़ा है उसकी है ये ओरिजिनल साइन। तो एक्चुअल में हुआ क्या था जो रिप्लाई एफिडेट नोटरी के पास जब किया तब उसमें परमवीर सिंह प्रेजेंट नहीं था। दूसरे पर्सन ने उनकी साइन की है। यह बात घाडगे साहब ने खुद जाके वेरीफाई की। उस नोटरी का भी इनके पास में वीडियो रिकॉर्डिंग स्टिंग ऑपरेशन है कि वो क्या बोल रहा है कि ये एक आदमी की साइन है ही नहीं। दूसरा उस आजू-बाजू के जो सीसीटीवी कैमरे के पूरे फुटेज भी लिए हैं। उसमें भी परमवीर सिंह वहां आता हुआ नहीं दिख रहा है। जो टाइम पे ये नोटरी किया हुआ बता रहे हैं। तो यह सब चीजें लेकर अर्जी लगाया कि इसका झूठा एफिडेविट है। ये इमपर्सोनेशन का केस है। परमवीर के सिग्नेचर दूसरे ने मारा है। एक और उसने रिप्लाई एफिडेविट में और एक झूठ बात बोला था कि घाडगे साहब जो है यह अनिल देशमुख के स्टूज है। उसकी कठपुतली है। उसके एजेंट हैं और अनिल देशमुख के कहने पे इन्होंने एक फ़ाइल किया। अनिल देशमुख जो अह फ़ॉर्मर होम मिनिस्टर थे। ये बात भी झूठी इससे साबित होती है। पहली चीज तो उसने कोई सबूत दिया ही नहीं है। लेकिन इसके अलावा घाडगे साहब ये खुद अनिल देशमुख के ऊपर सतीश साल्यान जी ने आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे इन सबके खिलाफ में 2000 करोड़ का जो डिफॉमेशन सूट फाइल किया है। उसमें विटनेस घाट के साहब है। एक और जो दिशा सालयान का एफआईआर रजिस्टर हुआ है सतीश सारा की तरफ से गैंगरेप मर्डर का उसमें अनिल देशमुख का आरोपी है। उसमें भी हमारे वन ऑफ द विटनेस गार्ड के साहब है। तो ये पूरा झूठा स्टेटमेंट है। तो झूठा स्टेटमेंट दिया करके उसके ऊपर प्रोसीक्यूशन करने के लिए एक परजुरी का प्रोविजन होता है जिसमें एक एप्लीकेशन लगता है। 340 सीआरपीसी था पहले। अभी 379 ऑफ़ बीएएसएस है। तो उसके तहत अरजी लगाया। अब वो अरजी में क्या होता है?

कोर्ट और हमारा होता है तो कोर्ट ने उसमें पहले दिन इंक्वायरी स्टार्ट कर दिया और नोटरी को नोटिस इशू कर दिया तो वो जैसा वो केस का हियरिंग आज आया आज डेट था पिछले डेट पे नोटिस इशू किया था नोटरी को तो आज परमवीर का वकील आया उसने और फिर एक एफिडेविट दे दिया कि ये कोर्ट की इंक्वायरी में जवाब बोल के अब 340 के इंक्वायरी में आरोपी को जवाब देने का अधिकार नहीं है। तो हमने इसके ऊपर फिर आज हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट और एक जसबीर सिंह का 2022 का लेटेस्ट जजमेंट आया है कि आरोपी इसमें इंटरफेयर नहीं कर सकता वो पूरा पॉइंट आउट करके आज पूरा एक घंटा कोर्ट को अच्छे से समझा के बताया और आज कोर्ट में सब एनआई के वकील भी थे। सचिन वाजे भी था। सभी लोग थे और इसका परमवीर का वकील भी सुबह था। सेकंड हाफ में नहीं आया वो। तो हमने कोर्ट को पॉइंट आउट किया कि इनको अधिकार नहीं है इसमें जवाब देने का और इन्होंने जो जवाब दिया है यह इंटरफेरेंस इन द कोर्ट प्रोसीडिंग है और वो आप बॉम्बे हाई कोर्ट के खिलाफ जाकर ओवरऑल प्लीडिंग इन्होंने लिया है। तो इनके खिलाफ में नया प्रोसक्यूशन करो आप और इनके खिलाफ में बॉम्बे हाई कोर्ट के लॉ के खिलाफ जाके जो सबमिशन दिया है कंटेंप्ट का रेफरेंस फॉरवर्ड करो और उसका जो पहला वाला जो हमारा कंप्लेंट है परजुरी का उसमें राधेश्याम गर्ग का 2009 का जजमेंट है ऐसा सिग्नेचर मिसमैच होती है तो कोर्ट के रजिस्ट्रार के थ्रू इंक्वायरी रिपोर्ट बुलाना है और उसके बेस पे फिर उसका 341 डी सीआरपीसी में अरेस्ट वारंट निकाल के 37 379 वन डी ऑफ़ बीएनएसएस में और फिर कोर्ट रजिस्ट्रार को ऑर्डर करेगा कि इनके खिलाफ में केस रजिस्टर करो। मतलब केस क्या चलेगा बाद में? कोर्ट कोर्ट के साथ में धोखा करने वाला आरोपी परमवीर सिंह तो कोर्ट का रजिस्टर वर्सेस परमवीर सिंह ऐसा केस चलेगा।

तो इस बारे में आज आर्गुममेंट हुआ। तो इस मामले को लेकर जब जैसा कि आप कह रहे हैं कि जो हलफनामा था या जो उस पर गलत सिग्नेचर किए गए तो क्या कोर्ट इस पर कुछ एक्शन लेने वाला है या आगे की क्या प्रोसीडिंग्स होगी? कोर्ट ने प्रीिलिमिनरी इंक्वायरी तो स्टार्ट कर दिया है। नोटिस निकाल दिया है नोटरी को लेकिन हमने उसके आगे उनको आज केस ला दिया कि नोटरी को नोटिस निकालने की जरूरत नहीं है। प्रोसीजर है कि आप रजिस्ट्रार के थ्रू जुडिशियल इंक्वायरी बुलाइए और हमारे पास में सीसीटीवी है। हम दे देंगे। अभी ये ओपन एंड शर्ट केस है। उसके बाद में आप इनका अरेस्ट वारंट निकालना, इनको कस्टडी में लेना और फिर बाद में रजिस्ट्रार के थ्रू कंप्लेंट फाइल करना। और इसमें सुप्रीम कोर्ट का नया जजमेंट आया नवीन सिंह का कि इनको जमानत नहीं देना है। जेल में रखकर ही केस चलाना है। सर अभी सुनवाई कब होगी? कब अदालत अपना फैसला सुनाएगी? कोर्ट ने अपने रोजनामा में आज लिख दिया है कि 5 नवंबर को कोर्ट इसमें फैसला सुनाएगी। ओके। साथ ही दिशा साल्यान के केस के बारे में थोड़ा स्टेटस क्या अपडेट्स है? क्या करंट उसके बारे में थोड़ा सा बताइए। देखिए दिशा साल्यान के केस में देखिए अगर आप कंपैरेटिव अगर इसको देखें कि अनिल देशमुख के खिलाफ में एफआईआर हुआ था 2021 में तब वो होम मिनिस्टर था। उस समय पिटिशनर वन ऑफ द पिटिशनर घनश्याम उपाध्याय जी थे। उनका वन ऑफ द काउंसिल में था।

तो एफआईआर का आर्डर हुआ। फिर उसमें उसको रिजाइन करना पड़ा होम मिनिस्टर की पोस्ट से। फिर एफआईआर रजिस्टर हुआ लेकिन एफआईआर होने के 350 दिन मतलब एक साल के बाद में उसको अरेस्ट किया था। सीबीआई तब तक अपने पूरा एविडेंस है सब सब जमा कर रही थी। तो नॉर्मली बड़े मैटर में सीबीआई थोड़ा अपना ग्राउंड वर्क ज्यादा करती है। लेकिन हमारा क्या कहना है इस केस में कि ऑलरेडी इतने सारे मटेरियल है। आप ठीक है वो मेन आरोपी को थोड़ा 10 दिन लेट पाथ अरेस्ट करो। बाकी का तो आप जो है बाकी का कर रही है सीबीआई उनके लेवल पे हम उस दिन आईओ ने बताया था कि मतलब काम तो हमारा चल रहा है लेकिन थोड़ा ज्यादा स्पीड में होना चाहिए।

हाई कोर्ट ने ऑलरेडी मिनी चार्जशीट बना के दिया है। हाई कोर्ट के आर्डर के हिसाब से जो मटेरियल अवेलेबल ऑन रिकॉर्ड है, सीसीटीवी फुटेजेस है। इसके बेस पे तो अभी कम से कम 30 पुलिस अधिकारी जेल में जाना चाहिए। तो इतना होते हुए थोड़ा सीबीआई हमारे हिसाब से स्लो चल रही है और यह सेक्सुअल असॉल्ट का गैंगरेप मर्डर का केस है। हमने हाई विटनेस वगैरह सब दे दिए हैं। तो हमारे क्रूशियल विटनेस को इन्होंने बुलाना चाहिए था। तो अभी तक बुलाया नहीं। इनका होमवर्क थोड़ा ज्यादा ही चल रहा है। तो इसके लिए अभी हम सीबीआई कोर्ट में मॉनिटरिंग ऑफ इन्वेस्टिगेशन और डायरेक्शन टू इन्वेस्टिगेट एस पर एसओपी और सुप्रीम कोर्ट डायरेक्शन। उसका एक अर्जी लगा रहे हैं और फिर उसमें सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट देना पड़ेगा।

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