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नाना पाटेकर की आखिरी वसीयत ने सबको रुला दिया! 80 करोड़ की संपत्ति का असली मालिक कौन?

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क्या 80 करोड़ की नेटवर्थ का मालिक अपनी वसीयत में सिर्फ 12 मन सूखी लकड़ियां छोड़ गया? 35 साल तक जिस पत्नी नीलकाती से नाना पाटेकर अलग रहे, क्या कानून के हिसाब से वही बनेंगी उनके करोड़ों के अंपायर की असली मालकिन? या फिर आखिरी वक्त में वसीयत का पूरा खेल बदल चुका है। गोवा के आलीशान घर में आधी रात को 2:30 बजे नाना पाटेकर ने अपने दोस्त को जो आखिरी टेक्स्ट मैसेज भेजा था उसके बाद ऐसा क्या हुआ कि उनके अंतिम संस्कार के अगले ही दिन पुलिस को केस दर्ज करना पड़ गया। और पिता की चिता को मुखाग्नि देने के तुरंत बाद बेटे मल्हार पाटेकर ने मीडिया के कैमरों के सामने आकर नाना की प्रॉपर्टी और उनके करोड़ों के फाउंडेशंस के हैंडओवर को लेकर कौन से तीन सबसे बड़े राज खोल दिए हैं? दोस्तों बॉलीवुड और मराठी सिनेमा का वो सबसे बेबाक, सबसे खरा और सबसे रहस्यमई सुल्तान अब इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह चुका है। 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा के मणिपाल हॉस्पिटल से एक ऐसी खबर बाहर आई, जिसने पूरे देश को सन्न कर दिया। 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर की सांसों की डोर अचानक टूट चुकी थी। लेकिन नाना पाटेकर की कहानी किसी आम फिल्मी सितारे की कहानी नहीं है क्योंकि यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जो करोड़ों कमाकर भी एक छोटे से एक बीएचके फ्लैट में सोता था और जिसने अपनी मौत से ठीक पहले अपनी विरासत का एक ऐसा बंटवारा कर दिया था जिसकी भनक फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े दिग्गजों को भी नहीं लगी। यह खौफनाक सिलसिला शुरू होता है 7 और 8 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात से। जब गोवा के में बने अपने शांत घर में नाना पाटेकर बिल्कुल अकेले मौजूद थे। नाना अपनी उम्र के 75वें पड़ाव पर भी इतने फिट थे कि कुछ ही वक्त पहले उनके वर्कआउट करने के वीडियो ने सोशल मीडिया पर नौजवानों को भी हैरान कर दिया था।

लेकिन घड़ी की सुइयों ने जैसे ही रात के 2:30 बजाए अचानक नाना पाटेकर को अपने सीने के बाएं हिस्से में एक अजीब तेज दर्द महसूस हुआ। ठीक 2:30 बजे नाना ने अपना मोबाइल फोन उठाया और अपने एक बेहद करीबी दोस्त को टेक्स्ट मैसेज भेजा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं लग रही है और सीने में तकलीफ हो रही है। लेकिन रात के 2:30 बजे भेजे गए इस आखिरी मैसेज के बाद सुबह के 4:00 बजे तक उस घर के अंदर क्या हुआ? यही वो डेढ़ घंटा है जिसने सबसे ज्यादा सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने यह सवाल उठाया कि आखिर रात 2:30 बजे के मैसेज के बाद सुबह 4 बजे तक मदद पहुंचने में इतना वक्त कैसे लग गया? जब सुबह 4:00 ना का वो दोस्त घबराता हुआ उनके घर पर पहुंचा, तो अंदर का मंजर देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। क्योंकि नाना पाटेकर अपने घर में बेहोश पड़े थे और आखिरी सांसों के लिए लड़ रहे थे। तुरंत एंबुलेंस को मौके पर बुलाया गया। अस्पताल के डॉक्टर शेखर सालकर के मुताबिक जब उनकी टीम सुबह 4:00 बजे के बाद वहां पहुंची तो नाना के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। अस्पताल के इमरजेंसी रूम के अंदर डॉक्टरों की टीम ने पूरे 45 मिनट से लेकर 1 घंटे तक लगातार सीपीआर दिया और उनके दिल की धड़कनों को वापस लाने की हर मुमकिन कोशिश की। लेकिन सुबह 5:20 बजे डॉक्टरों की टीम ने ऐलान कर दिया कि नाना पाटेकर को बचाया नहीं जा सका। सबको लगा कि यह भी कोई अफवाह है। लेकिन जब नाना के बेटे मल्हार ने खुद कांपती आवाज में कंफर्म किया कि यह खबर सच है और वह गोवा पहुंच रहे हैं तब जाकर पूरे देश को यकीन हुआ। मौत की खबर तो सच साबित हो गई। लेकिन इस दुखद घटना में असली सस्पेंस और कानूनी ट्विस्ट तब सामने आया जब नाना के अंतिम संस्कार के ठीक अगले दिन इस मामले में अचानक गोवा पुलिस की एंट्री हो गई। नाना पाटेकर के जाने के एक दिन बाद अचानक पणजी पुलिस स्टेशन में अननेचुरल डेथ का केस दर्ज कर लिया गया। दरअसल पुलिस और मेडिकल रिकॉर्ड्स की पड़ताल से पता चला कि जब नाना को उनके घर से अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में लाया गया था, तब फाइल में उन्हें अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत दर्ज किया गया था। साल 1978 में फिल्म गमन से अपने सफर की शुरुआत करने वाले परिंदा और क्रांतिवीर जैसी फिल्मों के लिए तीन नेशनल अवार्ड्स, चार फिल्मफेयर अवार्ड्स और साल 2013 में पद्मश्री जीतने वाले नाना पाटेकर अपने पीछे करीब 50 करोड़ से लेकर 80 करोड़ तक की कुल नेटवर्थ छोड़ गए हैं। उनकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया उनका 50 साल लंबा फिल्मी करियर रहा।

जहां अपने आखिरी सालों में भी वो एक फिल्म के लिए 2 से ₹ करोड़ की भारी-भरकम फीस चार्ज करते थे। आखिरी दिनों में भी वह गदर फेम डायरेक्टर अनिल शर्मा की फिल्म जर्नी में काम कर रहे थे। और 12 अक्टूबर से सोनी मराठी पर माधुरी दीक्षित के शो कोण होणार करोड़पति में भी आने वाले थे। लेकिन उनके अचानक चले जाने से शो का फिनाले तक कैंसिल करना पड़ा। पैसों को लेकर नाना का उसूल बड़ा गजब था। जहां वो निर्माताओं से करोड़ों की फीस लेते थे। वहीं जब डायरेक्टर रोहित शेट्टी ने उन्हें अपनी सुपरहिट फिल्म गोलमाल अगेन में एक वॉइस ओवर और कैमियो के लिए बुलाया तो नाना ने दोस्ती के खातिर ₹1 भी लेने से साफ मना कर दिया। लेकिन करोड़ों की इस फीस से भी ज्यादा चौंकाने वाली कहानी उनके बैंक बैलेंस की नहीं बल्कि उनके रियलस्टेट और प्रॉपर्टीज की है। माया नगरी मुंबई में जहां आज के नए सितारे पहली हिट फिल्म के बाद ही बैंड्रा या जूहू में 50 करोड़ का पेंट हाउस खरीद लेते हैं। वहीं 80 करोड़ की नेटवर्थ वाले नाना पाटेकर ने अपनी पूरी जिंदगी मुंबई के अंधेरी इलाके में सिर्फ 750 स्क्वायर फीट के एक बेहद साधारण 1 बीएचके फ्लैट में गुजार दी। यह छोटा सा फ्लैट नाना ने कई दशक पहले अपने स्ट्रगल के दिनों में सिर्फ 1.1 लाख में खरीदा था। जिसकी आज की मार्केट वैल्यू बढ़कर करीब ₹3 करोड़ हो चुकी है। नाना इस छोटे से घर में अपनी मां निर्मला पाटेकर के साथ रहते थे और मां के गुजर जाने के बाद भी उन्होंने अपनी यादों की वजह से इस फ्लैट को कभी नहीं छोड़ा। मुंबई के इस 3 करोड़ के फ्लैट के अलावा उनकी सबसे बड़ी और बेशकीमती प्रॉपर्टी पुणे के खड़कवासला के पास डोंजे गांव में मौजूद है। जहां पहाड़ियों के बीच 27 एकड़ में उनका विशाल फार्म हाउस फैला हुआ है। जिसे पूरा महाराष्ट्र नानाची वाड़ी के नाम से जानता है। पुणे के इस 27 एकड़ के फार्म हाउस में बने सादगी भरे घर में सात कमरे और एक बड़ा सा हॉल है और आज इसकी कीमत करोड़ों में है। लेकिन नाना ने इसे पार्टियों का अड्डा बनाने के बजाय यहां गेहूं और धान की खेती करवाई और इस खेती से जितनी भी कमाई होती थी, उसका ₹1 भी अपने पास रखने के बजाय वह वहां काम करने वाले मजदूरों और स्थानीय गरीब किसानों में बांट देते थे। इसके अलावा पुणे के पौश लॉ कॉलेज रोड पर भी उनका एक मकान है। और चौथी बड़ी प्रॉपर्टी गोवा के डोनापावला के ओशन पार्क का वो आधुनिक घर है जहां उन्होंने आखिरी सांस ली। गाड़ियों के मामले में भी उनके कार कलेक्शन में सिर्फ तीन गाड़ियां थी। उनकी पसंदीदा विंटेज Mahindra जीप सी 4, एक Mahindra Scorpio और एक लग्जरी Audi Q7। अब यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस एक्टर ने 50 साल तक हर फिल्म के करोड़ों रुपए लिए और खुद एक छोटे से फ्लैट में रहा, उसका सारा कैश आखिर गया कहां? इस सवाल का जवाब छिपा है साल 2015 की एक ऐसी घटना में जब 1 5 करोड़ की एक लग्जरी कार ने नाना पाटेकर की जिंदगी का मकसद ही बदल दिया। साल 2015 में नाना ने एक नई लग्जरी कार खरीदने के लिए बैंक से 1.5 करोड़ अलग निकाल कर रखे थे। लेकिन तभी एक रात टीवी पर उन्होंने कर्ज से तंग आकर खुदकुशी करने वाले किसानों की विधवाओं और उनके रोते-बिलखते बच्चों की खबर देखी। उस खबर ने उन्हें इतना झकझोर दिया कि उन्होंने तुरंत अपनी 1.5 करोड़ की कार का प्लान कैंसिल कर दिया और अपने दोस्त व मराठी [संगीत] एक्टर मकरंद अनासपुर के साथ मिलकर उन पैसों से 15-15000 के चेक बनाए और खुद लातूर व बीड़ के गांव में जाकर सैकड़ों किसान विधवाओं के हाथों में सौंपे। लातूर के एक हॉल में चेक बांटते वक्त जब अचानक 5 मिनट के लिए बिजली चली गई तो गांव वालों ने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर रोशनी की और उसी रोशनी में नाना ने भावुक होकर कहा था कि आज मुझे मरते दम तक जीने का मकसद मिल गया है। उसी दौरान बीड़ के एक प्रोग्राम में 250 विधवा महिलाओं के बीच से एक औरत खड़ी हुई और उसने कांपती आवाज में कहा कि आपकी यह 15,000 की मदद हमारे 4 से 6 महीने का राशन तो चला देगी। लेकिन हमें भीख नहीं बल्कि इज्जत के साथ अपने पैरों पर खड़े होने का सहारा दीजिए और यह कहते-कहते वो महिला चक्कर खाकर वहीं गिर पड़ी। उस घटना के बाद सितंबर 2015 में नाना और मकरंद ने मिलकर नाम फाउंडेशन की शुरुआत की। नाना की ईमानदारी का जादू ऐसा था कि पहले ही दिन आम जनता ने ₹80 लाख दान कर दिए। और देखते ही देखते इस फाउंडेशन में मिडिल क्लास और आम लोगों के सहयोग से ₹22 करोड़ से ज्यादा जमा हो गए। नाम फाउंडेशन ने नागपुर, लातूर, हिंोली, परभणी, नांदेड़ और छत्रपति संभाजी नगर के 700 से ज्यादा किसान परिवारों को गोद लिया। सूखी नदियों और तालाबों में पानी भरने के लिए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ मुहिम चलाई। छत्रपति संभाजीनगर की गर्भवती विधवा विमल गायकवाड़ को आटा चक्की लगवा कर दी और लातूर के गरीब किसान के बेटे वैभव कल्याण को पढ़ा लिखाकर इंजीनियर बनाया। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बिना किसी पब्लिसिटी के किसानों की जान बचाने के लिए नाना की तारीफ की थी। जिस पर नाना ने जॉनी लीवर का जिक्र करते हुए कहा था कि यह एहसान नहीं बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। किसानों के अलावा नाना ने अपने माता-पिता की याद में निर्मला गजानन फाउंडेशन नाम का दूसरा बड़ा ट्रस्ट भी खड़ा किया था जो सीधे भारतीय सेना से जुड़ा है। 1991 की फिल्म प्रहार से लेकर खड़कवासला की एनडीए, मराठा लाइट इनफेंट्री और कारगिल युद्ध तक फौज से उनका गहरा नाता रहा।

अपनी मौत से ठीक 1 साल पहले सितंबर 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब पाकिस्तान की गोलाबारी में जम्मू कश्मीर के राजौरी और पुछ के सीमावर्ती गांवों के घर तबाह हो गए थे। तब 74 साल की उम्र में नाना खुद राजौरी पहुंचे थे। वहां उनके निर्मला गजानन फाउंडेशन ने इंडियन आर्मी की वाइट नाइट कोर के साथ मिलकर 117 पीड़ित परिवारों को ₹42 लाख का रिलीफ पैकेज बांटा। जम्मू कश्मीर और लद्दाख के 45 आर्मी गुडविल स्कूल्स को गोद लिया और गुरुद्वारे के लंगर में बैठकर आम सेवादार की तरह झूठे बर्तन तक मांझे। किसानों और फौजियों पर करोड़ों लुटाने वाले नाना बाहर से जितने दरियादिल थे, उनकी अपनी शादीशुदा जिंदगी और रिश्तों की कहानी उतनी ही तूफानी रही। और यही कहानी आज उनकी वसीयत के बंटवारे की सबसे बड़ी वजह बन गई है। मुरुड जंजीरा में जन्मे और मुंबई के सर जे जे इंस्टट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट से पढ़ाई करने वाले नाना के पिता दिनकर गजानन पाटेकर एक पेंटर थे। बहुत कम लोग जानते हैं कि नाना के मामा और ननिहाल के कई लोग मुंबई अंडरवर से जुड़े थे और डॉन मान्या सुर्वे के साथ भी उनके रिश्ते की चर्चा होती थी। इसलिए उनकी मां निर्मला उन्हें अपराध की दुनिया से बचाने के लिए गांव ले गई थी। बाद में थिएटर के दिनों में नाना की मुलाकात नीलकांत से हुई। जो एक नेशनल अवार्ड विजेता एक्ट्रेस होने के साथ-साथ बैंक में ऑफिसर भी थी। उस जमाने में नीलकात्त को बैंक से ₹2500 महीना सैलरी मिलती थी। और उन्होंने नाना के स्ट्रगल के दिनों में घर का पूरा खर्च उठाया। जिसके बाद 1978 में सिर्फ ₹750 के खर्च में दोनों ने शादी कर ली। लेकिन शादी के बाद उन पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब उनके बड़े बेटे दुर्वासा का जन्म हुआ। जिसके होंठ और तालू कटे हुए थे और एक आंख में गंभीर बीमारी थी। नाना ने खुद एक इंटरव्यू में कबूल किया था कि बीमार बेटे को देखकर उनके मन में यह स्वार्थी ख्याल आया था कि दुनिया क्या सोचेगी कि नाना का बेटा कैसा दिखता है। और अपनी इसी घटिया सोच की वजह से उन्हें खुद से घिन आने लगी थी। महज ढाई साल की उम्र में नन्हे दुर्वासा की मौत हो गई और इस गम को भुलाने के लिए नाना दिन में 60-60 सिगरेट पीने लगे। यहां तक कि नहाते वक्त शावर के नीचे भी उनके मुंह में सिगरेट रहती थी। जिसे बाद में उन्होंने अपनी बहन के टोकने पर हमेशा के लिए छोड़ दिया। छोटे बेटे मल्हार के जन्म के बाद 90 के दशक में नाना और नीलकात्त के रिश्ते में दरार आ गई। क्योंकि 1996 में फिल्म अग्निसाक्षी और फिर खामोशी की शूटिंग के दौरान शादीशुदा नाना अपने से 20 साल छोटी एक्ट्रेस मनीषा कोयराला के बेहद करीब आ गए जो उस वक्त विवेक मुशरान से अपने ब्रेकअप के दर्द से गुजर रही थी। मनीषा चाहती थी कि नाना अपनी पत्नी नीलकाती को डिवोर्स देकर उनसे शादी कर लें। लेकिन नाना ने किसी भी कीमत पर नीलकाती को तलाक देने से साफ इंकार कर दिया। इसी बात और नाना के ओवरपजेसिव स्वभाव की वजह से दोनों में झगड़े होने लगे और जब एक दिन मनीषा ने नाना पाटेकर और एक्ट्रेस आयशा जुल्का को एक बंद कमरे में साथ देख लिया तो भारी हंगामे के बाद मनीषा ने हमेशा के लिए नाना से रिश्ता तोड़ लिया। हालांकि 8 अक्टूबर को नाना के निधन पर मनीषा ने भी भावुक श्रद्धांजलि दी। इन तमाम अफेयर्स और 35 साल तक अलग रहने के बावजूद नीलकाती ने कभी तलाक के कागज पर साइन नहीं किए और उनका यही फैसला आज नाना की 50 से 80 करोड़ की संपत्ति के बंटवारे में सबसे बड़ा कानूनी मोड़ ले आया है। भारतीय कानून के मुताबिक नाना पाटेकर ने अपने 50 साल के करियर में जो कुछ भी कमाया, चाहे वह अंधेरी का 3 करोड़ का फ्लैट हो, पुणे का 27 एकड़ का फार्म हाउस हो, लॉ कॉलेज रोड का मकान हो, गोवा का बंगला हो या फिर बैंक खातों में जमा करोड़ों की रकम। वह सब उनकी सेल्फ एक्वायर्ड प्रॉपर्टी यानी खुद की कमाई हुई संपत्ति है। कानून कहता है कि अगर किसी इंसान ने कोई अलग से लिखित वसीयत यानी रिटन विल सार्वजनिक नहीं की है तो हिंदू सक्सेशन एक्ट के तहत उसकी सारी निजी संपत्ति क्लास एक कानूनी वारिसों में बराबर बट जाती है। क्योंकि 35 साल अलग रहने के बाद भी नाना और नीलकांत का कभी कानूनी तलाक नहीं हुआ। इसलिए कानून की नजर में पत्नी नीलकांती पाटेकर और इकलौते बेटे मल्हार पाटेकर ही नाना के पूरे निजी साम्राज्य के असली और बराबर के मालिक हैं।

वैसे खुद नाना अपनी निजी वसीयत के बारे में क्या सोचते थे, इसका खुलासा उन्होंने साल 2023 में आज तक के एक इंटरव्यू में करते हुए कहा था [संगीत] कि मरने के बाद इंसान को सिर्फ 12 म लकड़ी लगती है और वही 12 मन लकड़ी मेरी फाइनल प्रॉपर्टी है। उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के लिए वो 12 मन सूखी लकड़ियां पहले से ही कटवा कर अपने फार्म हाउस पर रख ली थी और घरवालों से साफ कहा था कि मुझे जलाते वक्त गीली लकड़ी मत लगाना वरना धुएं से लोगों की आंखों में पानी आएगा और मरते वक्त मुझे यह गलतफहमी हो जाएगी कि लोग मेरे लिए रो रहे हैं। 8 अक्टूबर 2026 की रात को नाना की वही आखिरी ख्वाहिश पूरी हुई। जब गोवा के मुर्दा घर में 20 से 30 मिनट के अंतिम दर्शन के बाद उनके पार्थिव शरीर को पुणे लाया गया और पूरे स्टेट ऑनर्स के साथ अंतिम संस्कार की घोषणा की। रात के ठीक 11:28 बजे पुलिस की बंदूकों की सलामी के बीच बेटे मल्हार ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी और फूट-फूट कर रो पड़े। जबकि पास खड़ी नीलकाती पाटेकर की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। बेटे मल्हार पाटेकर ने मीडिया के कैमरों के सामने आकर आधी रात के अंतिम संस्कार और करोड़ों के फाउंडेशंस के हैंडओवर को लेकर तीन सबसे बड़े राज खोल दिए। मल्हार ने सबसे पहले साफ किया कि दुर्घटना सुबह जल्दी हुई थी और गोवा से पुणे आने में पूरा दिन निकल गया। इसलिए परिवार ने पार्थिव शरीर को और ज्यादा रखने के बजाय रात को ही अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। इसके बाद मल्हार ने पहली बड़ी बात यह कही कि शारीरिक रूप से सबको एक दिन जाना है। लेकिन मेरे लिए नाना साहेब हमेशा अमर रहेंगे। क्योंकि अगर मैंने मान लिया कि वह चले गए हैं तो मैं खुद खत्म हो जाऊंगा। दूसरी बात उन्होंने बताई कि नाना का विज़न हमेशा ग्लोबल था कि इंसानियत के नाम पर पूरी दुनिया के लोगों को साथ आकर समाज की भलाई के लिए काम करना चाहिए। और तीसरी बात कहते हुए मल्हार ने करोड़ों के ट्रस्टों की वसीयत का सबसे बड़ा राज खोल दिया कि नाना पाटेकर ने अपनी मौत से पहले ही नाम फाउंडेशन और निर्मला गजानन फाउंडेशन दोनों ट्रस्टों की पूरी जिम्मेदारी और अधिकार आधिकारिक तौर पर अगली पीढ़ी यानी मल्हार और उनकी युवा टीम को हैंडओवर कर दिए थे। इतना ही नहीं 75 साल की उम्र में दोनों फाउंडेशंस नई पीढ़ी को सौंपने के बाद नाना किसी नई जगह जाकर फिर से बिल्कुल जीरो से एक नया सोशल प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में थे और अब मल्हार ने कसम खाई है कि वो तीन अलग-अलग वर्टिकल्स में अपने पिता के इस अधूरे काम को बिना किसी शोरशराबे के आगे बढ़ाएंगे। लेकिन जहां एक तरफ बेटे ने पिता की विरासत संभालने का ऐलान किया, वहीं दूसरी तरफ चिता की आग ठंडी होने से पहले ही नाना की मौत पर दो बड़े विवाद भी भड़क उठे। पहला विवाद बॉलीवुड की बेरुखी को लेकर भड़का। क्योंकि अंतिम संस्कार में एकनाथ शिंद, सुनेत्रा पवार, मुरलीधर मोहल, रामदास आठवले, चंद्रकांत पाटिल, उदय सामंत और एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे जैसे लोग तो आधी रात तक खड़े रहे। और सलमान खान ने भी मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल में अपना बड़ा इवेंट कैंसिल करके पुणे की उड़ान भरी। जबकि शाहरुख खान और रजनीकांत ने सोशल मीडिया पर भावुक श्रद्धांजलि दी। लेकिन पुणे के फार्म हाउस पर बॉलीवुड से सिर्फ जैकी श्रॉफ, अनिल शर्मा, अनीस बजमी, फिरोज़ और साजिद नाडियाडवाला, मेहुल कुमार और सुरेश वाडकर ही नजर आए।

जिस पर मराठी एक्टर और डायरेक्टर प्रवीण तरडे ने गुस्से में बॉलीवुड को लदाड़ते हुए कहा कि बॉलीवुड नाना पाटेकर से बड़ा नहीं है और आज सितारों के ना आने की कमी हजारों गरीब किसानों ने खुद आकर पूरी कर दी है। वहीं दूसरा कड़वा विवाद तब भड़का जब साल 2018 में नाना पर मीटू का आरोप लगाने वाली एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने उनकी मौत पर ईविल डेड यानी बुराई का अंत जैसा शब्द लिख दिया। और भले ही कोर्ट में नाना के खिलाफ कभी कोई सबूत नहीं मिला और वाराणसी में फिल्म के सेट पर फैन को थप्पड़ मारने के विवाद पर भी नाना ने खुद माफी मांग ली थी। फिर भी तनुश्री ने 9 अक्टूबर को नया वीडियो जारी कर सवाल उठाया कि क्या किसी इंसान के मर जाने से उसके कर्म साफ हो जाते हैं? इन विवादों के बीच सोशल मीडिया पर नाना का वो पुराना वीडियो भी लोगों के रोंगटे खड़े कर रहा है जिसमें उन्होंने मराठी के ऐतिहासिक नाटक नटस सम्राट से जुड़े एक खौफनाक संयोग का जिक्र करते हुए बताया था कि डॉक्टर श्रीराम लागू दत्ता भट्ट और चंद्रकांत गोखले समेत जिस भी कलाकार ने मंच पर वो नाटक किया उन सब की मौत हार्ट अटैक से ही हुई थी। नाना ने इसी डर से मंच पर वो नाटक करने से मना कर दिया था और सिर्फ फिल्म की थी। लेकिन किस्मत का खेल देखिए कि नटस सम्राट के किरदार को पर्दे पर अमर करने वाले नाना की जान भी आखिरकार हार्ट अटैक ने ही ली। नाना अक्सर कहते थे कि हम जिंदगी भर दौलत बटोरते रहते हैं और फिर अचानक एक सुबह खबर आती है कि कल रात तो साथ खाना खाया था और सुबह उठे ही नहीं। 8 अक्टूबर की सुबह नाना ने अपने ही कहे उन शब्दों को सच कर दिखाया। और आज भले ही उनकी 50 से 80 करोड़ की निजी संपत्ति कानूनन पत्नी नीलकातं और बेटे मल्हार के नाम हो जाएगी लेकिन 12 मन सूखी लकड़ियों की राख में तब्दील होने से पहले वो अपने दोनों फाउंडेशंस के रूप में इंसानियत की जो असली वसीयत इस देश के किसानों और जवानों के नाम लिख गए हैं। उसकी कीमत दुनिया की कोई भी दौलत कभी नहीं चुका पाएगी।

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