निर्भया कांड में चार दोषियों को मौत देने वाले पवन जल्लाद। अब तैयार हैं नीला ड्रम वाली मुस्कान रस्तौगी और साहिल को मौत देने के लिए। नीला ड्रम हत्याकांड यानी सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी पत्नी मुस्कान रस्तौगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को 14 अक्टूबर को कोर्ट ने सजा-ए मौत का ऐलान किया।
सजा के ऐलान के बाद एक तरफ जहां मुस्कान और साहिल की भूख प्यास मिट गई है, नींद उड़ गई है, बेचैन मुस्कान और साहिल को कैदी नंबर भी अलॉट हो गए हैं। कैदियों की ड्रेस दे दी गई है। वहीं दूसरी तरफ उठ रहे हैं बड़े सवाल। सवाल यह कि फांसी की सजा के ऐलान के बाद आखिर क्या प्रोसेस होता है? क्या प्रक्रिया होती है? क्या मुस्कान और साहिल को एक साथ मौत दी जाएगी? अलग-अलग मौत दी जाएगी। वह एक दिन, वह तारीख, वह समय निश्चित होने से पहले क्या कुछ प्रक्रिया है?
कैसे ट्रायल किया जाएगा? यह तमाम बड़े सवाल जिनका जवाब खुद पवन जल्लाद ने दिया। क्या कुछ बताया गया? यह हम आपको जरूर बताएंगे। लेकिन सबसे पहले जानिए कि आखिर कौन है पवन जल्लाद? पवन जल्लाद जिनके दादा जिनके पिता भी जल्लाद थे। पवन जल्लाद खुद कहते हैं कि उनके दादा के नाम एक साथ दो रिकॉर्ड थे। लेकिन पवन जल्लाद के नाम हुए एक साथ चार रिकॉर्ड। जब निर्भया कांड में पवन जल्लाद ने एक साथ चार दोषियों को मौत दी। सौरभ की पत्नी ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर सौरभ की हत्या की।
उसके शव को काटा और उसको नीले ड्रम में भर दिया और ऊपर से सीमेंट से पैक कर दिया। इसमें अदालत ने फैसला दिया है। मृत्यु दंड दिया है दोनों को यानी कि सजाए मौत दी है। क्या कहना है इस पर और अदालत के फैसले पर आपका क्या कहना है? देखिए मेरा कहना तो यही है कि इनको पात्र तो थे फांसी के जिस टाइम ये केस आया था। बाकी न्यायालय ने जो फैसला दिया है जज ने फैसला दिया। मेरठ के भी मेरठ के जनता भी संतुष्टि हुई है कि ये तो फांसी के पात्र थे। उनके मां-बाप को भी तसल्ली मिली है। लेकिन तसल्ली तब मिलेगी जब इनको फांसी के तख्ते पर लटका दिया जाएगा। जब डेथ वारंट जारी रहेगा।
हम क्या प्रोसीजर होता है फांसी का? फांसी का प्रोसीजर जैसे डेथ वार जारी हो जाएगा दो-ती दिन पहले मैं भाई मेरठ जेल पहुंच जाऊंगा मैं उसके बाद जो रास्ता चेक करेंगे इसका वेट चेक करेंगे उसको ट्रायल किया जाएगा फांसी घर का भी ट्रायल किया जाएगा रस्तों का भी ट्रायल किया जाएगा तो उसके प्रतिक्रिया शुरू हो जाएगी समय रखा जाएगा तब इसको फांसी होनी चाहिए किस टाइम होएगी फांसी वो उसके लिए वो जेल वैल्यू बताएगा मुझे महिला को भी फांसी हुई है और पुरुष को भी फांसी हुई है यानी कि मुस्कान को भी फांसी हुई है और साहिल को पे फांसी हुई है।
तो क्या अलग-अलग जगहों पे दोनों को फांसी दी जाएगी या एक ही जेल में दी जा सकती है या एक ही फांसी के फंदे पे दी जा सकती है? देखो अभी तो कोई ऐसा कोई भाई न्याय का कोई फैसला नहीं आया कि इनको एक साथ दी जाएगी या अलग नहीं। लेकिन मेरे सुनने में जो आया था ये मथुरा में ही महिलाओं को दी जाती है। अभी ये तो भाई सुप्रीम कोर्ट जाना है। भाई या न्यायालय जाना है कि एक साथ दी जाएगी या इनको अलग-अलग दी जाएगी। अभी जो फैसला आया है वह निचली अदालत से है। जिला मेरठ जज का है। उसके बाद में इस मामले को हाई कोर्ट जाएगा, सुप्रीम कोर्ट जाएगा। उसके बाद में क्या-क्या जा सकता है? कहां तक ये मामला पहुंच सकता है?
देखिए जब तक जो डेथ वारंट जारी ना हो जब तक अधूरा समझो। अभी तो सात हो सकता है ये हाई कोर्ट जाए। हम हाई कोर्ट में मल्टीपेशन डले। कोई अपील डले। हो सकता है हम या फिर यह सुप्रीम कोर्ट जाएगा। फिर राष्ट्रपति चेक करेगा कि उसको क्या करना है इसको। राष्ट्रपति के ऊपर बात है। अगर सुप्रीम कोर्ट वहां से आदेश कर देता डेथ वारंट जारी है। टाइम उसका फिक्स कर देता तो फिर तो उनको फांसी होनी है। तो यानी कि आपके हिसाब से अभी टाइम लगेगा इसमें। बिल्कुल जी तो आप तैयार हैं और जो आपसे कहा जाता है कि और जो फांसी देनी है तो आप तैयार हैं? बिल्कुल रेडी है। क्या-क्या प्रक्रिया होती है फांसी की?
प्रतिक्रिया यही होती है भाई जो भाई ट्रायल किया जाएगा इनको। अगर एक साथ लगे तो दो रस्ते मंगाए जाएंगे इनको। हम्। अगर अलग-अलग तो एक ही रास्ता काम करेगा इसके लिए। अब वह महिला को कहां लगानी है या मेरठ में लगानी है? अब यह तो भाई जेल प्रशासन ही बताएगा मुझे या हाई कोर्ट बताएगा या सुप्रीम कोर्ट बताएगा जैसल। आपने अभी तक कहां-कहां किस-किस मामले में फांसी दी है? मैंने तो सन 2020 में मैंने चार को दी थी वहां पे दिल्ली तिहाड़ जेल में मैंने। कौन से कांड में?
ये मेरे निर्भया के कांड में। निर्भया के। जी जी। इससे पहले भी फांसी दी आपने? उससे पहले जो मैंने अपने दादा जी के पांच केस करे थे। उनसे ही मैंने यह प्रेरणा ली थी। उनसे ही सीखा था मैंने। आपके दादा जी का क्या नाम था? और आपके पापा का क्या नाम था? मेरे कालू राम जी के मेरे दादा जी और मेरे उसके बब्बू सिंह जी। तो तीनों ही दादा भी जल्लाद थे। आपके जो पिताजी है वो भी जल्लाद थे और आप भी जल्लाद थे। उसके बाद फिर मेरा बेटा आएगा। अच्छा। जी। तो ये पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहेगा। जल्लाद चलता रहेगा। हम तो पवन जल्लाद ने पूरी प्रक्रिया बताई। बताया कि कैसे एक तारीख निश्चित की जाती है। फिर एक समय निश्चित किया जाता है और अलग-अलग यह सजा दी जाएगी या फिर एक ही जेल में यह सजा दी जाएगी। यह न्यायालय का फैसला है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट लेगा। लेकिन देखिए अभी लोअर कोर्ट से फांसी की सजा का ऐलान हुआ है। लेकिन आगे कानूनी प्रक्रिया बेहद लंबी है। दावों की मानें तो सजा के ऐलान के बाद से ही मुस्कान ने जेलर से पूछा कि अब आगे क्या कर सकती हूं? आगे क्या दरवाजे खुले हैं? जिसके बाद सीनियर जेल सुपरिटेंडेंट ने मुस्कान को दो ऑप्शन दिए। पहला ऑप्शन प्राइवेट वकील के जरिए अपपर कोर्ट में अपील करना।
दूसरा ऑप्शन अगर मुस्कान प्राइवेट वकील के जरिए अपर कोर्ट में अपील नहीं करना चाहती तो उसे जेल प्रशासन की तरफ से ही इस मामले में मदद मिलेगी। दावों की मानें तो मुस्कान ने एक से 2 दिन का समय मांगा है। एक से 2 दिन के समय के बाद वो इस बात पर अपना निर्णय लेगी। वहीं दूसरी तरफ 14 अक्टूबर को जब सजा-ए-मौत का ऐलान किया गया तो मुस्कान के मुंह से सबसे पहले निकलने वाला शब्द था अरे। मानो मुस्कान को यह उम्मीद ही नहीं थी। मानो मुस्कान उम्र कैद की सजा की उम्मीद लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम से कोर्ट में जुड़ी हुई थी। लेकिन जैसे ही मृत्युदंड का ऐलान हुआ मुस्कान टूट गई। मुस्कान और साहिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में ही रोने लगे। बिलखने लगे। रात भर उनकी काउंसलिंग भी की गई। वहीं 24 घंटे कैमरों के जरिए दोनों की निगरानी की जा रही है। वहीं मुस्कान की ख्वाहिश है कि वह एक बार अपनी बड़ी बेटी से मुलाकात करना चाहती है। वो बेटी जो मुस्कान के माता-पिता यानी अपनी नाना-नानी के साथ ही रहती है। लेकिन दावों की मानें तो बेटी ने अपनी मां से मिलने से साफ इंकार कर दिया और अब मुस्कान को चिंता है अपनी छोटी बेटी की परवरिश की क्योंकि छोटी बेटी का जन्म जेल में ही हुआ। जिस वक्त मार्च 2025 को मुस्कान को गिरफ्तार किया गया था।
मुस्कान गर्भवती थी। अमृतक सौरभ का परिवार भी बच्ची को अपनाने के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि पहले डीएनए टेस्ट किया जाएगा। अगर यह बच्ची सौरभ की होगी तभी इसे अपनाया जाएगा। आपको बता दें कि 3 मार्च 2025 को मेरठ में सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या हुई। हत्या के बाद शव के लगभग 15 टुकड़ों को नीले ड्रम में भरकर सीमेंट के खोल से सील कर दिया गया। इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने के बाद दोनों दोषी यानी मुस्कान और साहिल हिमाचल की वादियों में घूमने चले गए। कोर्ट ने इसे रेस्ट ऑफ द रेयर केस माना और दोनों को फांसी की सजा का ऐलान किया है।
मेरठ से उस्मान चौधरी के साथ ब्यूरो रिपोर्ट यूपी तक। मैं आपको एक बात बताऊं मैं 2014 में जब मैं सांसद बना तो जिस दिन मंत्री पद की शपथ थी शाम को तो पहले दिन मैं दिल्ली था। पहले दिन एक आज तक का ही कार्यक्रम था। सभी नए सांसदों ने पश्चिम के साथ तो वहां कुछ लोगों से मुलाकात हुई और उसके बाद मेरे पास दिल्ली में कोई रुकने का ठिकाना नहीं था। हम कहीं लोग आए थे तो हम वापस चल दिए तो सब ने दोस्तों ने कहा यार अगले दिन तो शपथ है तो आना तो रास्ते में गांव की तरफ जाते हुए कुछ लोगों ने कहा कि भाई यार गंगा स्नान करते हैं हमारे यहां गंगा जी का महत्व है हरिद्वार तो रात को हम हरिद्वार चले गए हम हरिद्वार में डैम कोठी है कभी रुकना बड़ी गंगा नहर के किनारे अब सांसद बन गए थे तो इतनी हो गई थी कि डैम कोठी खुल गई रात को तो हम डैम कोठी में रुके और सुबह सुबह 6:00 बजे हम गंगा में स्नान कर रहे थे मुझे सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि मुझे मंत्री बनाया जा रहा है। अच्छा और मेरे फोन की घंटी बजी और मैं नहा रहा था। फोन बाहर था तो मैंने देखा दिल्ली से कोई फोन है। मैं गाड़ी में बैठा और चल दिया। तो जब मैं बाबा रामदेव के आश्रम के आसपास था तो फिर फोन आया। तो 0 डबल1 नंबर से फोन था।
तो मैंने फोन जब उठाया शुरू में एक डेढ़ घंटे बाद फोन उठाया तो आदरणीय प्रधानमंत्री जी का फोन। उन्होंने कहा कि आप दिल्ली आओ और नाश्ते पे मिलते हैं। मैंने कहा जी मैं नाश्ते पे नहीं मिल सकता। मैं तो हरिद्वार में गंगा जी नहा के आया हूं। तो कहने लगे नहीं दोपहर तक आ जाओ। हम तो मेरे पास कोई कपड़े नहीं थे। मैं भागा वहां से और मैंने अपने एक दो मित्रों को कहा भाई मेरे लिए कुर्ता पजामा ले आओ। मैं दिल्ली आके गुजरात भवन के नीचे बैठ के गाड़ी में तो कुर्ता पजामा बदला। गुजरात भवन से मिला तो जिस पार्टी में ऐसा कल्चर हो वहां पहले से पहले ही उम्मीद लगाओ। सोच लगाओ। भाजपा से एक चीज तो मैंने सीख ली क्या यहां ना तो कोई ऐसा सोचो कि मैं बन जाऊंगा ना किसी की लोबिंग में जाओ ना किसी के पास जाओ जो आपको बनाना है पार्टी घर बैठे बना देगी